दंगाइयों ने फिर भड़काई हिंसा, स्वाहा हुआ अखबार ऑफिस

बांग्लादेश में एक बार फिर से हिंसा की आग भड़कती दिख रही है. बीती देर रात बांग्लादेश की राजधानी ढाका में कुछ उपद्रवियों ने जमकर बवाल काटा. जहां कई वाहनों, इमारतों और अखबार दफ्तर को आग के हवाले कर दिया गया है. बता दें, जिन दो अखबार के दफ्तरों को जलाया गया है. उनमें से एक का नाम 'द डेली स्टार' और दूसरा 'प्रथम आलो' है. जिसमें दर्जनों पत्रकार काम कर रहे थे, इस भड़कती हिंसा की वजह बांग्लादेश में कट्टरपंथी समूह इंकलाब मंच के प्रवक्ता और छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या है, जिसके चलते प्रदर्शनकारियों का ये दंगा जारी है.

जवानों ने संभाला मोर्चा
यह हमला बांग्लादेश में स्थित अखबार के कारवान बाजार ऑफिस में हुआ. जिसमें जमकर तोड़फोड़ की गई. बद से बत्तर हुई स्थित पर एक पत्रकार के मुताबिक, हिंसा के पहले एक अंजान कॉल आया, जिसने स्टाफ को चेतावनी देते हुए कहा कि भीड़ द डेली स्टार ऑफिस की तरफ बढ़ रही है. ये कहते देर नहीं की अखबार कार्यालय आग की लपटों से घिर गया है. इसी बीच आनन-फानन में एक कैंटीन वर्कर ने बिल्डिंग में फंसे पत्रकारों को बचाने की कोशिश की तो भीड़ ने जमकर उसकी पिटाई कर दी. तब तक स्थानीय लोगों की मदद से घटनास्थल पर पहुंचे फायर ब्रिगेड की गाड़ियाें ने आग पर काबू पाने में सफल रहे. वहीं बांग्लादेश सेना के जवानों को क्षेत्र की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया. जिनकी मदद से कुछ पत्रकारों को कड़ी मशक्कत के बाद बचाया जा सका.

जाने क्या है पूरा मामला
गौरतलब है कि, इन दंगाइयों द्वारा बीते 12 दिसंबर को निशाना बनाए गए नेता उस्मान हादी ने सिंगापुर के एक अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. इतना ही नहीं दंगाईयों ने 'बंगबंधु' शेख मुजीबुर रहमान के पैतृक घर को भी आग लगा दिया. आगजनी का यह किस्सा तब हुआ जब बांग्लादेश के अंतरिम सरकार मुहम्मद यूनुस ने नेता हादी की मौत की पुष्टि की. जहां देश को संबोधित करते हुए मुहम्मद यूनुस ने ये कहा था कि, मैं देश के सभी नागरिकों से दिल से अपील करता हूं कि धैर्य और संयम बनाए रखें. कानून लागू करने वाली एजेंसियों और संबंधित संस्थानों को अपनी जांच पेशेवर तरीके से करने दें.

राज्य कानून का राज स्थापित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. इस बात से गुस्साई भीड़ ने बांग्लादेश में दंगा फैलाना शुरू कर दिया. बात करें 'बंगबंधु' शेख मुजीबुर रहमान की तो वे बांग्लादेश के संस्थापक, पहले राष्ट्रपति और जनक भी रह चुके है, बांग्लादेश को मुक्ति दिलाने में भी रहमान की काफी अहम भूमिका रही है. जिसके बाद इनकी बेटी शेख हसीना प्रधानमंत्री बनते हुए ने बांग्लादेश की कमान संभाल बैठी. पर अफसोस की राज्य में भड़कती हिंसा के चलते हसीना को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा.



