काशी में नदियों का रौद्र रूप: घरों में घुसा पानी, छतों पर हुई गंगा आरती

वाराणसी: काशी में गंगा और वरुणा नदी के बढ़ते जलस्तर ने अब लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. गंगा का पानी लगातार बढ़ने से घाटों की सीढ़ियां जलमग्न हो गई हैं, वहीं वरुणा नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद सालारपुर इलाके में भी बाढ़ का पानी घरों तक पहुंच गया है. करीब आधा दर्जन घरों में पानी घुसने से लोग परेशान हैं.
घाटों पर बढ़ा पानी, बदली गंगा आरती की व्यवस्था
गंगा के बढ़ते जलस्तर का सबसे ज्यादा असर घाटों पर दिखाई दे रहा है. कई घाटों का बड़ा हिस्सा पानी में डूब चुका है, घाटों पर होने वाली धार्मिक गतिविधियां भी प्रभावित हुई हैं. पानी बढ़ने के कारण गंगा आरती को घाटों से हटाकर छतों पर कराने की व्यवस्था करनी पड़ रही है. श्रद्धालुओं को भी अब ऊंचे स्थानों से आरती के दर्शन करने पड़ रहे हैं.
नदी में बढ़ते जलस्तर को देखते हुए नावों के संचालन पर भी रोक लगाई गई है. घाटों के आसपास लोगों की आवाजाही पर निगरानी बढ़ाई गई है और लोगों से नदी के किनारे जाने में सावधानी बरतने की अपील की जा रही है.
अंतिम संस्कार की व्यवस्था पर भी असर
गंगा का पानी बढ़ने से काशी के प्रमुख श्मशान घाटों पर भी स्थिति प्रभावित हुई है. मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर पानी बढ़ने के कारण अंतिम संस्कार की व्यवस्था में दिक्कतें आने लगी हैं. ऐसे में घाटों से जुड़ी संकरी गलियों और ऊंचे स्थानों पर अंतिम संस्कार की वैकल्पिक व्यवस्था की तैयारी की जा रही है.
वरुणा नदी का पानी सालारपुर के घरों तक पहुंचा
गंगा के साथ अब वरुणा नदी का बढ़ता जलस्तर भी चिंता का कारण बन गया है. सालारपुर क्षेत्र में नदी का पानी बढ़ने के बाद करीब आधा दर्जन घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है. घरों में पानी पहुंचने से स्थानीय लोगों को रोजमर्रा के कामों में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
निचले इलाकों में रहने वाले लोग लगातार जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं. लोगों को आशंका है कि यदि जलस्तर में और बढ़ोतरी हुई तो आसपास के दूसरे इलाकों में भी पानी पहुंच सकता है.
प्रशासन अलर्ट, निचले इलाकों पर नजर
गंगा और वरुणा दोनों नदियों का जलस्तर बढ़ने के बाद प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है. नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है.
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काशी में बाढ़ का असर अब केवल घाटों तक सीमित नहीं रह गया है. धार्मिक गतिविधियों, नाव संचालन और अंतिम संस्कार की व्यवस्था के साथ-साथ नदी किनारे बसे घरों तक पानी पहुंचने से आम जनजीवन भी प्रभावित होने लगा है.



