सोयाबीन के तेल और टायर के टुकड़ों से बनेगी सड़क, आइआइटी बीएचयू ने तलाशी तकनीक...

वाराणसी : दुनिया में हो रहे युद्ध की वजह से सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाले बिटुमेन की सप्लाई पर भी काफी प्रभाव पड़ा है. इससे भारत भी अछूता नहीं है, इसलिए विकास की राह पर तेज रफ्तार से बढ़ रहे देश में बिटुमेन की खपत को कम करने पर लगातार प्रयास हो रहे हैं. इसी क्रम में आइआइटी बीएचयू के सिविल इंजीनियर विभाग ने नई तकनीक विकसित की है. इसके तहत बिटुमेन में सोयाबीन का तेल और टायर के टुकड़े मिलाकर बिटुमेन की खपत को कम किया गया है. इस तकनीक को पेटेंट करने के लिए आवेदन किया गया है.
कच्चे तेल का अंतिम उत्पाद बिटुमेन
क्रूड आयल की सप्लाई युद्ध की वजह से काफी ज्यादा प्रभावित हुई है. क्रूड आयल पृथ्वी के भीतर मृत जीवों और पौधों के अवशेषों के अपघटन से लाखों वर्षों में बनता है. इसे फैक्ट्रियों में 'प्रभाजी आसवन' (Fractional Distillation) प्रक्रिया से गुजार कर अलग-अलग तापमान पर पेट्रोल, डीजल, और एलपीजी गैस में तोड़ा जाता है. इसका अंतिम उत्पाद होता है बिटुमेन, यह चिपचिपा, काला और गाढ़ा तरल या अर्ध-ठोस रूप है जिसे डामर भी कहा जाता है. इसका उपयोग सड़क निर्माण के लिए किया जाता है. भारत में शहर से लेकर गांव तक की सड़कों का विस्तार हो रहा है. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सामने बड़ी चुनौती सस्ती और मजबूत सड़कें बनाना है.
सस्ती और बेहतर सड़क
इसके लिए आइआइटी बीएचयू से भी मदद ली जा रही है. इसका सिविल इंजीनियरिंग विभाग लगातार इस पर काम कर रहा है. इसके तहत नया प्रयोग किया गया है. सड़क निर्माण के लिए बिटुमेन के साथ सोयाबीन का तेल और टायर के टुकड़े मिलाया गया. इस मिश्रण का इस्तेमाल सड़क के निर्माण में किया जाएगा. जिससे सड़क निर्माण की लागत कम हो जाएगी और सड़क बेहतर भी बनेगी. इस प्रयोग को लैब में सफलता प्राप्त हुई है. इस शोध को मंत्रालय के समक्ष प्रस्तुत करने की तैयारी की जा रही है.
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इतने प्रतिशम बिटुमेन का प्रयोग होगा कम
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के चेयर बीएचयू के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर अंकित गुप्ता के अनुसार देश की सड़कों के निर्माण में बिटुमेन का प्रयोग किया जाता है. कुछ कम दूरी की सड़कें प्लास्टिक की भी बनी हैं(. अभी तक सड़क निर्माण में बिटुमेन के साथ सोयाबीन का तेल व टायर के टुकड़े के मिश्रण का उपयोग नहीं किया गया है. जबकि इस तकनीक से सड़क निर्माण सस्ता हो जाएगा. इसे समझते हुए उनके दल ने शोध किया और पाया बिटुमेन के साथ 20 प्रतिशत तक सोयाबीन का तेल व टायर के टुकड़े मिलाकर सड़क का निर्माण किया जा सकता है. इस तरह 20 प्रतिशत बिटुमेन का उपयोग कम हो जाएगा. अभी तक यह माना जाता रहा है कि बिटुमेन में तीन प्रतिशत तक प्लास्टिक मिलाना बेहतर होता है. सोयाबीन का तेल व टायर के टुकड़े जितनी प्रतिशत बिटुमेन में मिलाई जाएगी बिटुमेन की लागत उतनी कम होगी, जिससे सड़क की लागत भी कम हो जाएगी.
आइआइटी बीएचयू और बिटुमेन फोरम के बीच एमओयू
वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में तो यह अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है. बिटुमेन (डामर) पेट्रोलियम का गाढ़ा और चिपचिपा रूप है. सड़क निर्माण में यह एक मजबूत बाइंडर (गोंद) की तरह काम करता है, जो पत्थर, बजरी और रेत को आपस में मजबूती से जोड़कर पानी-रोधी और टिकाऊ डामर कंक्रीट बनाता है. प्रो. अंकित गुप्ता ने बताया कि आइआइटी बीएचयू में परिवहन एवं राजमार्ग अनुसंधान के अंतर्गत एलाइन्मेंट आप्टिमाइजेशन, सतत निर्माण तकनीक, उन्नत पेवमेंट डिजाइन, पर्यावरणीय पहलू, इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम, सड़क सुरक्षा विश्लेषण तथा लाइफ-साइकिल परफार्मेंस जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कार्य किया जा रहा है. संस्थान का शोध कार्य देश में विकसित किए जा रहे ग्रीनफील्ड एवं हाई-स्पीड कारिडोर की योजना एवं क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है. इसके लिए आइआइटी बीएचयू और बिटुमेन फोरम के बीच एमओयू भी हुआ है.



