गोरक्षा एवं सम्मान यात्रा निकालकर जिला मुख्यालय पहुंचे साधु-संत, सौंपा ज्ञापन...

वाराणसी : गोमाता की सेवा, सुरक्षा और सम्मान को लेकर चलाए जा रहे गो सम्मान आह्वान अभियान का दूसरा चरण सोमवार 27 जुलाई को देशभर में एक साथ आयोजित किया गया. काशी में इस अभियान के तहत साधु संताें एवं गोभक्तों की सहभागिता से बुलडोज़र के साथ गो-सम्मान एवं गोरक्षा पदयात्रा निकाली गई. यात्रा के समापन पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा गया. इस दौरान डीएम कार्यालय के पोर्टिको में प्रदर्शन किया और अपनी मांग उठाई.
काशी में अभियान की शुरुआत शिवपुर मिनी स्टेडियम से गो-संकीर्तन यात्रा के साथ हुई. यात्रा में साधु-संत, गोसेवक, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल रहे. कार्यक्रम का शुभारम्भ निर्धारित शुभ मुहूर्त में गोमाता के पूजन, शंखनाद एवं "श्री राम जय राम जय जय राम" विजय मंत्र के सामूहिक जप के साथ हुजा. इसके उपरांत गोभक्त झंडे, बैनर, अभियान संदेशों वाले प्लेकार्ड एवं भजन-कीर्तन के साथ शांतिपूर्ण एवं अनुशासित प्रार्थना-यात्रा निकालते हुए जिलाधिकारी कार्यालय तक पहुँचे.

प्रार्थना-यात्रा में भगवान श्रीकृष्ण-बलराम के स्वरूप, गोमाता की झांकी तथा अभियान के अंतर्गत संकलित हस्ताक्षरों का प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया गया. तत्पश्चात संत-महात्माओं, जिला कार्यकारिणी, विभित्र सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन एवं हस्ताक्षरयुक्त प्रार्थना-पत्र सौंपा.
इस अवसर पर अभियान के प्रतिनिधियों ने कहा कि गौमाता केवल धार्मिक आस्था का विषय ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति जनकल्याण का भी महत्वपूर्ण आधार है. कहा कि यह अभियान शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक एवं संधानिक तरीके से संचालित किया जा रहा है तथा तक चरणबद्ध रूप से आगे भी जारी होगा. इस अवसर पर जिले के संत-महात्मा दिभित्र सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि एवं गोभक्त उपस्थित रहे.
पीठाधीश्वर जगद्गुरु बालक देवाचार्य महाराज ने बताया कि यात्रा में साधु-संत, गोसेवक, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए. यात्रा गोमाता के सम्मान, संरक्षण और संवर्धन का संदेश देते हुए जिला मुख्यालय तक पहुंची. उन्होंने बताया कि अभियान के माध्यम से केंद्र सरकार से गोहत्या निषेध के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कानून बनाने की मांग की गई. साथ ही गोमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने, गोचर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने, केंद्रीय गो मंत्रालय की स्थापना, केंद्रीय गो-चारा नीति लागू करने सहित कुल 36 मांगों को पूरा करने का आग्रह किया गया.
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जगद्गुरु बालक देवाचार्य महाराज ने कहा कि इन मांगों के समर्थन में देशभर में जनजागरण और हस्ताक्षर अभियान भी चलाया जा रहा है. अभियान के तहत विभिन्न राज्यों में गो-संरक्षण को लेकर लोगों को जागरूक किया जाएगा और सरकार तक जनभावनाएं पहुंचाई जाएंगी. काशी में यात्रा के दौरान गोमाता के संरक्षण और संवर्धन का संकल्प भी दिलाया गया. उन्होंने कहा कि अभियान का अगला चरण अक्टूबर माह में आयोजित किया जाएगा, जिसमें देशभर में व्यापक स्तर पर जनसंपर्क और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे.
अभियान के प्रथम चरण में 27 अप्रैल को देशभर की 5000 तहसीलों में पांच करोड़ से अधिक लोगों ने गोमाता के संरक्षण के समर्थन में हस्ताक्षर कर केंद्र और प्रदेश सरकार को ज्ञापन भेजा था. बालक देवाचार्य ने बताया कि प्रथम चरण के दौरान उठाई गई मांगों पर अब तक सरकार की ओर से कोई निर्णय नहीं लिया गया, इसलिए अभियान का दूसरा चरण शुरू किया जा रहा है.



