वाराणसी के काशी विश्वनाथ धाम में वायु गुणवत्ता के सुधार में शुरू की गई 'संजीवन'
वाराणसी: श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के बेहद निकट स्थित मणिकर्णिका घाट पर पारंपरिक अंतिम संस्कार की प्रक्रिया लगातार चलती रहती है. इससे निकलने वाला धुआँ, राख और सूक्ष्म कण (PM 2.5, PM 10) आसपास के क्षेत्र की वायु गुणवत्ता को प्रभावित करते रहे हैं. तीर्थयात्रियों की बढ़ती संख्या और संकरी गलियों की संरचना के कारण धाम परिसर में वायु का प्राकृतिक प्रवाह सीमित हो जाता है, जिससे प्रदूषण का असर और बढ़ जाता है.
इसी प्रदूषण को रोकने और कम करने के लिए योजना 'संजीवन' के तहत वायु शोधक को लगाया जा रहा है .
ACE+ तकनीक से होगी हवा शुद्ध: जिंदल स्टेनलेस और अमिदा क्लीनटेक की बड़ी पहल
इस परियोजना को जिंदल स्टेनलेस और अमिदा क्लीनटेक के साझेदारी में बनाया जा रहा है .
इस परियोजना में अमीदा की स्वामित्व वाली ACE + तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा जो तीन चरणों में काम करता है ,
1. आकर्षित करना (Attract)
2. पकड़ना (Capture)
3. समाप्त करना (Elimination)
ये तकनीक पहले चरण में प्रदूषित हवा को सक्तिशाली इंटेक सिस्टम से अंदर खींचता है , उच्च दक्षता वाले फिल्टर और इलेक्ट्रोस्टैटिक सिस्टम से सूक्ष्म कणों को पकड़ता है , फिर हानिकारक कणों और सूक्ष्म जीवों को निष्क्रिय या नष्ट कर देता है .
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लगाई जाएंगी 58 वायु शोधक इकाइयां
मंदिर परिसर में करीब 58 वायु शोधक इकाइयां लगाई जाएंगी जो प्रति घंटे 3 लाख घन मीटर से अधिक हवा को शुद्ध करेंगे , इकाइयां परिसर के रैंप भवन और प्रमुख आवागमन क्षेत्रों में स्थापित किया जाएगा . उपकरण मौसम, आर्द्रता और राख के प्रभाव से लंबे समय तक सुरक्षित रहें इसीलिए इन उपकरणों को स्टेनलेस स्टील का बनवाया जा रहा है .
परियोजना का उद्देश्य
इस परियोजना का उद्देश्य PM 2.5 और PM 10 जैसे सूक्ष्म प्रदूषक कणों में उल्लेखनीय कमी लाना है, ताकि तीर्थयात्रियों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण मिल सके. मंदिर प्रशासन चरणबद्ध तरीके से पूरे धाम क्षेत्र को “कार्बन-मुक्त ज़ोन” बनाने की दिशा में काम कर रहा है. यह पहल धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास मानी जा रही है.



