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सारनाथ को मिली वैश्विक पहचान, धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस पर गूंजा बुद्ध का संदेश...

सारनाथ को मिली वैश्विक पहचान, धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस पर गूंजा बुद्ध का संदेश...
Jul 29, 2026, 09:01 AM
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Posted By Diksha Mishra

वाराणसी : सारनाथ स्थित मूलगंध कुटी विहार में बुधवार को आषाढ़ पूर्णिमा एवं धर्मचक्र प्रवर्तन दिवस के पावन अवसर पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ भव्य रूप से किया गया. "धम्मचक्क पवत्तन दिवस का महत्व" विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी में देश-विदेश से आए बौद्ध भिक्षुओं, विद्वानों और श्रद्धालुओं ने सहभागिता की. उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कार्यक्रम में उपस्थित बौद्ध भिक्षुओं का सम्मान करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार सारनाथ को वैश्विक बौद्ध पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है.


धर्मचक्र प्रवर्तन दिवस पर जुटे देश-विदेश के बौद्ध विद्वान


अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, लखनऊ (संस्कृति विभाग) तथा महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया, सारनाथ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस दो दिवसीय संगोष्ठी में धर्मचक्र प्रवर्तन दिवस के ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई. कार्यक्रम में महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया, सारनाथ के अध्यक्ष वेन. आर. सुमित्थानंद थेरो सहित अनेक बौद्ध भिक्षु और विद्वान उपस्थित रहे. संगोष्ठी का उद्देश्य भगवान बुद्ध के प्रथम उपदेश और उनके धम्म संदेश को व्यापक स्तर पर जन-जन तक पहुंचाना है.


सारनाथ को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर होगा स्थापित


पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार सारनाथ के पर्यटन विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है. उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्म से जुड़े इस पवित्र स्थल की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने के लिए विभिन्न स्तरों पर कार्य किए जा रहे हैं. प्रदेश सरकार का प्रयास है कि सारनाथ आने वाले देशी और विदेशी पर्यटकों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, जिससे यहां पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिल सके.


यूनेस्को की सूची में शामिल होने से बढ़ी सारनाथ की वैश्विक पहचान


पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने कहा कि सारनाथ अब भारत का 45वां और उत्तर प्रदेश का चौथा विश्व धरोहर स्थल बन गया है. लगभग 28 वर्षों बाद मिली इस महत्वपूर्ण मान्यता ने उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और बौद्ध विरासत को नई पहचान दी है. अब तक प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध धरोहर स्थलों में ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी जैसे स्थल शामिल थे, जो आगरा क्षेत्र तक सीमित थे. सारनाथ के शामिल होने से उत्तर प्रदेश की विश्व धरोहर पहचान अब पूर्वांचल तक विस्तृत हो गई है, जो प्रदेश के लिए गर्व का विषय है.


बौद्ध विरासत को मिलेगी वैश्विक पहचान


पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने कहा कि सारनाथ की वैश्विक पहचान मजबूत होने से उत्तर प्रदेश के पर्यटन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई ख्याति मिलेगी. यह उपलब्धि न केवल प्रदेश की समृद्ध बौद्ध विरासत को विश्व स्तर पर स्थापित करेगी, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के नए अवसर भी सृजित करेगी. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सारनाथ आने वाले समय में दुनिया भर के बौद्ध श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र बनेगा तथा भगवान बुद्ध के शांति और करुणा के संदेश को वैश्विक स्तर पर प्रसारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.


महापंडित राहुल सांकृत्यायन के धम्मपद अनुवाद का हुआ लोकार्पण


कार्यक्रम में महापंडित राहुल सांकृत्यायन द्वारा मूल पाली से संस्कृत में अनूदित धम्मपद तथा प्रो. सिद्धार्थ सिंह द्वारा लिखित पुस्तक "युगपुरुष कोसेत्सु नोसु को स्मरण करते हुए" का लोकार्पण किया गया. संगोष्ठी की रूपरेखा प्रो. विमलेंद्र कुमार ने प्रस्तुत की. इस दौरान अन्तर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, लखनऊ के निदेशक डॉ. राकेश सिंह, संस्थान के सदस्य वेन. के. सिरी सुमेधा थेरो, महाबोधि विद्या परिषद, सारनाथ के अध्यक्ष एवं दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा के पूर्व कुलपति प्रो. आर. एम. पाठक, एबीएसएस लखनऊ के सदस्य तरुणेश बौद्ध, कोलकाता विश्वविद्यालय के बौद्ध अध्ययन विभाग के प्रो. उज्ज्वल कुमार तथा नवनालंदा महाविहार, नालंदा के कुलपति प्रो. सिद्धार्थ सिंह ने अपने विचार व्यक्त किए.


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संगोष्ठी के दूसरे दिन (30 जुलाई) आयोजित तीन तकनीकी सत्रों में देश-विदेश के विद्वान, शोधकर्ता और बौद्ध भिक्षु धम्मचक्क पवत्तन दिवस के महत्व तथा बौद्ध दर्शन के विभिन्न आयामों पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे. प्रथम सत्र की अध्यक्षता प्रो. अवधेश कुमार चौबे, द्वितीय सत्र की अध्यक्षता प्रो. उज्ज्वल कुमार तथा तृतीय सत्र की अध्यक्षता प्रो. ज्योति रोहिल्ला राणा करेंगी. इन सत्रों में काशी हिंदू विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, नवनालंदा महाविहार, केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान (सीआईएचटीएस), महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया, सारनाथ सहित विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के विद्वान अपने विचार प्रस्तुत करेंगे.

नशामुक्त भारत के संदेश के साथ BHU में निकली ‘संडे ऑन साइकिल’ रैली.
नशामुक्त भारत के संदेश के साथ BHU में निकली ‘संडे ऑन साइकिल’ रैली.
वाराणसी: नशामुक्त भारत अभियान के तहत रविवार को काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के तत्वावधान में ‘संडे ऑन साइकिल’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के जरिए युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने और नशामुक्त भारत का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।मालवीय भवन प्रांगण से कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने हरी झंडी दिखाकर साइकिल रैली को रवाना किया। इस दौरान विश्वविद्यालय के कुलसचिव राजन श्रीवास्तव, वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षक, NSS स्वयंसेवक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।कार्यक्रम के दौरान कुलपति ने युवाओं से नशे से दूर रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवा न केवल स्वयं नशे से बचें, बल्कि अपने आसपास के लोगों और समाज को भी इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करें। उन्होंने नशामुक्त समाज के निर्माण में युवाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।also read: विश्व आदिवासी दिवस पर बरेका में निकली भव्य शोभायात्रा, पारंपरिक वेशभूषा में दिखी संस्कृति की झलकसाइकिल रैली में शामिल प्रतिभागियों ने नशामुक्त भारत का संदेश लोगों तक पहुंचाया और युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया। रैली के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और समाज में नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया गया।कार्यक्रम का समन्वयन काशी हिंदू विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना की कार्यक्रम समन्वयक डॉ. स्वप्ना मीना ने किया। आयोजन में विश्वविद्यालय परिवार के साथ बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की भागीदारी रही।
विश्व आदिवासी दिवस पर बरेका में निकली भव्य शोभायात्रा, पारंपरिक वेशभूषा में दिखी संस्कृति की झलक
विश्व आदिवासी दिवस पर बरेका में निकली भव्य शोभायात्रा, पारंपरिक वेशभूषा में दिखी संस्कृति की झलक
वाराणसी: विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार को बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) में आदिवासी परिवार, बरेका के तत्वावधान में भव्य शोभायात्रा और सांस्कृतिक समारोह का आयोजन किया गया। आयोजन में आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, लोक परंपराओं और सामाजिक एकता की आकर्षक झलक देखने को मिली।शाम चार बजे बरेका सेंट जॉन स्कूल, गेट संख्या-2 से शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा कुंदन तिराहा और सूर्य सरोवर मार्ग होते हुए इंटर कॉलेज चौराहे पहुंची। यहां भगवान गौतम बुद्ध, जननायक बिरसा मुंडा और भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके बाद शोभायात्रा पश्चिमी संस्थान, जलालीपट्टी पहुंचकर संपन्न हुई।शोभायात्रा में बड़ी संख्या में महिला, पुरुष, युवा और बच्चे पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में शामिल हुए। रंग-बिरंगे परिधानों के साथ पारंपरिक गीत-संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने माहौल को उत्साह और उल्लास से भर दिया। रास्ते में स्थानीय लोगों ने भी शोभायात्रा का उत्साहपूर्वक स्वागत किया।पश्चिमी संस्थान, जलालीपट्टी में आयोजित सांस्कृतिक समारोह में आदिवासी समाज की विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं। वक्ताओं ने आदिवासी समुदाय की समृद्ध परंपराओं और प्रकृति के साथ उनके गहरे जुड़ाव को रेखांकित किया। उन्होंने सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत पर भी जोर दिया।also read: श्रावण में भास्करा पोखरा पर पुलिस अलर्ट, गहरे पानी में जाने से बचने की अपीलकार्यक्रम के दौरान सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का संदेश दिया गया। आयोजन में बरेका के अधिकारी, कर्मचारी, उनके परिजन, आदिवासी महिला समिति के सदस्य और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।इस अवसर पर सहायक कार्मिक अधिकारी (कर्मशाला) पीयूष मिंज, जनसंपर्क अधिकारी राजेश कुमार, आरपीएफ इंस्पेक्टर प्रमोद लकड़ा, पूर्व संयुक्त सचिव बरेका अमर सिंह, कालू मांझी सहित आदिवासी परिवार बरेका के सुदर्शन उरांव, दिलीप तिर्की, सुचित कुजूर, अजय कुमार तिर्की, संजीवन तिर्की और अजय तिग्गा मौजूद रहे। वहीं आदिवासी महिला समिति की सपना टोप्पो, तारा मैरी मिंज, प्रेमा लिली टोप्पो, अनुपमा और बंदना बारला सहित बड़ी संख्या में महिलाओं ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।
श्रावण में भास्करा पोखरा पर पुलिस अलर्ट, गहरे पानी में जाने से बचने की अपील
श्रावण में भास्करा पोखरा पर पुलिस अलर्ट, गहरे पानी में जाने से बचने की अपील
वाराणसी: श्रावण माह में रोहनिया क्षेत्र स्थित भास्करा पोखरा में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की अनहोनी से बचाने के लिए पुलिस की ओर से लगातार जागरूक किया जा रहा है।एसीपी रोहनिया अवधेश विश्वकर्मा ने भास्करा पोखरा पहुंचने वाले श्रद्धालुओं से अपील की कि वे निर्धारित और सुरक्षित स्थान पर ही स्नान करें। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु किसी भी स्थिति में गहरे पानी में न जाएं और सुरक्षा मानकों की अनदेखी न करें।also read: आँसुओं, आक्रोश के बाद खुले आसमान के नीचे दालमंडीएसीपी ने खासतौर पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों से सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि बच्चों को अकेले पानी के पास न जाने दें और स्नान के दौरान उन पर लगातार नजर बनाए रखें। थोड़ी सी लापरवाही गंभीर हादसे का कारण बन सकती है।पुलिस प्रशासन की ओर से श्रावण माह के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक सतर्कता बरती जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे पुलिस के निर्देशों का पालन करें और धार्मिक आस्था के साथ अपनी सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखें। अधिकारियों का कहना है कि सामूहिक सहयोग और सतर्कता से ही श्रावण माह के आयोजनों को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जा सकता है।