सारनाथ की वैश्विक पहचान और अधिक सशक्त होगी, केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने किया भ्रमण

वाराणसी : केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत अपने एकदिवसीय दौरे पर वाराणसी पहुंचे. उन्होंने यूनेस्को द्वारा भगवान बुद्ध के प्रथम उपदेश स्थल सारनाथ को धरोहर सूची में शामिल किए जाने के पश्चात ऐतिहासिक सारनाथ में धार्मिक स्तूप सहित पुरातात्विक खंडहरों का भ्रमण किया. भ्रमण के दौरान पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह हम सभी के लिए, विशेषकर वाराणसी और पूरे देश के लिए अत्यंत सौभाग्य का विषय है कि माननीय प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन और नेतृत्व में सारनाथ की ऐतिहासिक, पुरातात्विक और आध्यात्मिक महत्व की धरोहर को यूनेस्को की विश्व धरोहर (World Heritage) सूची में शामिल किया गया है. इसके साथ ही सारनाथ भारत का 45वां यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल बन गया है. उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि से भगवान महादेव की नगरी काशी और भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ की वैश्विक पहचान और अधिक सशक्त होगी.

विश्व धरोहर का दर्जा मिलने के बाद देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और बौद्ध श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है, जिससे वाराणसी के पर्यटन, संस्कृति और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नया आयाम मिलेगा. उन्होंने कहा कि सारनाथ वह पावन भूमि है, जहाँ भगवान बुद्ध ने धर्मचक्र प्रवर्तन कर मानवता को शांति, करुणा और अहिंसा का संदेश दिया था. यहीं से निकला यह संदेश विश्व के विशाल भूभाग और करोड़ों लोगों के जीवन का आधार बना. ऐसे ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व वाले स्थल का यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल होना न केवल भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का सम्मान है, बल्कि पूरी मानवता के साझा इतिहास को भी वैश्विक मान्यता मिलने का प्रतीक है. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह उपलब्धि सारनाथ के संरक्षण, संवर्धन और वैश्विक स्तर पर उसके प्रचार-प्रसार को नई गति देगी तथा भारत की सांस्कृतिक विरासत को विश्व पटल पर और अधिक प्रतिष्ठा दिलाएगी.
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एक दिन पूर्व राजदूत ने किया था निरीक्षण
यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होने के बाद सारनाथ की व्यवस्थाओं का आकलन करने यूनेस्को में भारत के स्थायी प्रतिनिधि/राजदूत विशाल वी. शर्मा सोमवार को सारनाथ पहुंचे. उन्होंने पुरातत्व संग्रहालय और पुरातात्विक खंडहर परिसर का निरीक्षण कर स्मारकों की सुरक्षा, संरक्षण और पर्यटक सुविधाओं की समीक्षा की. उन्होंने कहा कि सारनाथ को विश्वस्तरीय पर्यटन और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित करने के साथ इसकी ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पहचान को बनाए रखना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है. विशाल वी. शर्मा ने पुरातत्व संग्रहालय, धमेख स्तूप, धर्मराजिका स्तूप, अशोक लाट, प्राचीन मूलगंध कुटी विहार और फोटो गैलरी का अवलोकन किया. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी के बाद सारनाथ का विश्व धरोहर सूची में शामिल होना गौरव की बात है. उन्होंने पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए स्मारकों की सुरक्षा और सुविधाओं को और बेहतर बनाने की जरूरत बताई.



