भविष्य का शिक्षा की पर चर्चा करने को बीएचयू मंक जुटे दुनिया के विद्वान...

वाराणसी : राष्ट्रीय शिक्षा नीति एवं यूनेस्को की फ्यूचर्स आफ एजुकेशन पहल के संदर्भ में उनकी समकालीन प्रासंगिकता का विश्लेषण करने के लिए दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की शुरुआत सोमवार को हुई. राष्ट्रनिर्माताओं की शिक्षा, लोकतंत्र, नैतिक नेतृत्व तथा राष्ट्र निर्माण संबंधी दृष्टि पुनर्पाठ करने के उद्देश्य से बीएचयू के मूल्य अनुशीलन केंद्र में आयोजित सम्मेलन का उद्घाटन बिहार के राज्यपाल रिटायर्ड लेफ्टीनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने किया.
यूनेस्को के 2026–2027 स्मृति चक्र के अंतर्गत सम्मेलन का आयोजन यूनेस्को शांति एवं अंतरसांस्कृतिक समझ पीठ (UNESCO Chair for Peace and Intercultural Understanding), मालवीय शांति अनुसंधान केंद्र (MCPR), काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, भारतीय राष्ट्रीय यूनेस्को सहयोग आयोग (INCCU), शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से किया गया है. उसका विषय “21वीं सदी के लिए शैक्षिक सुधार: डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी एवं लोकनायक जयप्रकाश नारायण की विरासत के आलोक में शिक्षा का पुनर्परिकल्पन” है.
यह डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी एवं लोकनायक जयप्रकाश नारायण की 125वीं जयंती को समर्पित है. आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल प्रौद्योगिकी, जलवायु परिवर्तन, वैश्वीकरण तथा बदलती सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के कारण शिक्षा के समक्ष नई चुनौतियाँ और अवसर उपस्थित हैं. सम्मेलन इन परिवर्तनों के बीच समावेशी, न्यायसंगत, मानवीय तथा भविष्य उन्मुख शिक्षा प्रणाली के निर्माण पर व्यापक विमर्श का मंच प्रदान करेगा.
इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत एवं विदेशों से शिक्षाविद्, नीति-निर्माता, विश्वविद्यालय प्रशासक, विधि विशेषज्ञ, शोधार्थी, शिक्षक तथा युवा विद्वान भाग लेंगे. सम्मेलन में यूनेस्को के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के प्रतिनिधि तथा देश-विदेश के प्रतिष्ठित विद्वान सहभागिता करेंगे. पश्चिम बंगाल, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु (कोयम्बटूर), महाराष्ट्र (मुंबई एवं पुणे), गोवा, पंजाब तथा स्वीडन सहित विभिन्न राज्यों एवं देशों से प्रतिष्ठित वक्ताओं आए है. सम्मेलन में पांच विषयगत पूर्ण अधिवेशन आयोजित किए जाएंगे. इनमें शैक्षिक सुधार, उच्च शिक्षा प्रशासन, संस्थागत नवाचार, नैतिक नेतृत्व, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल शिक्षण, शांति शिक्षा, विधि शिक्षा, लोकतांत्रिक नागरिकता, सार्वजनिक नीति तथा अंतःविषय ज्ञान प्रणालियों जैसे विषयों पर विचार-विमर्श होगा.
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इसके अतिरिक्त एक विशेष “राउंड टेबल पालिसी डायलाग” का आयोजन भी किया जाएगा. इसमें नीति-निर्माता, कुलपति, शिक्षाविद् एवं विशेषज्ञ शिक्षा सुधारों के व्यावहारिक आयामों एवं नीतिगत दिशा पर चर्चा करेंगे. सम्मेलन के उद्घाटन के दौरान विशिष्ट अतिथि के तौर पर प्रो. यूनेस्को एमजीआईईपी, नई दिल्ली के निदेशक ओबीजीओफोर एजिनम, बीएचयू के कुलपित प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी, प्रो. प्रियंकर उपाध्याय रहे.



