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भविष्य का शिक्षा की पर चर्चा करने को बीएचयू मंक जुटे दुनिया के विद्वान...

भविष्य का शिक्षा की पर चर्चा करने को बीएचयू मंक जुटे दुनिया के विद्वान...
Jul 06, 2026, 10:51 AM
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Posted By Shivangi Ojha

वाराणसी : राष्ट्रीय शिक्षा नीति एवं यूनेस्को की फ्यूचर्स आफ एजुकेशन पहल के संदर्भ में उनकी समकालीन प्रासंगिकता का विश्लेषण करने के लिए दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की शुरुआत सोमवार को हुई. राष्ट्रनिर्माताओं की शिक्षा, लोकतंत्र, नैतिक नेतृत्व तथा राष्ट्र निर्माण संबंधी दृष्टि पुनर्पाठ करने के उद्देश्य से बीएचयू के मूल्य अनुशीलन केंद्र में आयोजित सम्मेलन का उद्घाटन बिहार के राज्यपाल रिटायर्ड लेफ्टीनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने किया.


यूनेस्को के 2026–2027 स्मृति चक्र के अंतर्गत सम्मेलन का आयोजन यूनेस्को शांति एवं अंतरसांस्कृतिक समझ पीठ (UNESCO Chair for Peace and Intercultural Understanding), मालवीय शांति अनुसंधान केंद्र (MCPR), काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, भारतीय राष्ट्रीय यूनेस्को सहयोग आयोग (INCCU), शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से किया गया है. उसका विषय “21वीं सदी के लिए शैक्षिक सुधार: डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी एवं लोकनायक जयप्रकाश नारायण की विरासत के आलोक में शिक्षा का पुनर्परिकल्पन” है.


यह डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी एवं लोकनायक जयप्रकाश नारायण की 125वीं जयंती को समर्पित है. आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल प्रौद्योगिकी, जलवायु परिवर्तन, वैश्वीकरण तथा बदलती सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के कारण शिक्षा के समक्ष नई चुनौतियाँ और अवसर उपस्थित हैं. सम्मेलन इन परिवर्तनों के बीच समावेशी, न्यायसंगत, मानवीय तथा भविष्य उन्मुख शिक्षा प्रणाली के निर्माण पर व्यापक विमर्श का मंच प्रदान करेगा.


इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत एवं विदेशों से शिक्षाविद्, नीति-निर्माता, विश्वविद्यालय प्रशासक, विधि विशेषज्ञ, शोधार्थी, शिक्षक तथा युवा विद्वान भाग लेंगे. सम्मेलन में यूनेस्को के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के प्रतिनिधि तथा देश-विदेश के प्रतिष्ठित विद्वान सहभागिता करेंगे. पश्चिम बंगाल, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु (कोयम्बटूर), महाराष्ट्र (मुंबई एवं पुणे), गोवा, पंजाब तथा स्वीडन सहित विभिन्न राज्यों एवं देशों से प्रतिष्ठित वक्ताओं आए है. सम्मेलन में पांच विषयगत पूर्ण अधिवेशन आयोजित किए जाएंगे. इनमें शैक्षिक सुधार, उच्च शिक्षा प्रशासन, संस्थागत नवाचार, नैतिक नेतृत्व, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल शिक्षण, शांति शिक्षा, विधि शिक्षा, लोकतांत्रिक नागरिकता, सार्वजनिक नीति तथा अंतःविषय ज्ञान प्रणालियों जैसे विषयों पर विचार-विमर्श होगा.


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इसके अतिरिक्त एक विशेष “राउंड टेबल पालिसी डायलाग” का आयोजन भी किया जाएगा. इसमें नीति-निर्माता, कुलपति, शिक्षाविद् एवं विशेषज्ञ शिक्षा सुधारों के व्यावहारिक आयामों एवं नीतिगत दिशा पर चर्चा करेंगे. सम्मेलन के उद्घाटन के दौरान विशिष्ट अतिथि के तौर पर प्रो. यूनेस्को एमजीआईईपी, नई दिल्ली के निदेशक ओबीजीओफोर एजिनम, बीएचयू के कुलपित प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी, प्रो. प्रियंकर उपाध्याय रहे.

सारनाथ को वैश्विक सम्मान, बुद्ध की करुणा का संदेश अब और बुलंद: प्रो. वांगछुग दोर्जे नेगी
सारनाथ को वैश्विक सम्मान, बुद्ध की करुणा का संदेश अब और बुलंद: प्रो. वांगछुग दोर्जे नेगी
वाराणसी: केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान (सीआईएचटीएस), सारनाथ के कुलपति प्रो. वांगछुग दोर्जे नेगी ने सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने को भारत की आध्यात्मिक विरासत की वैश्विक स्वीकृति बताया है। उन्होंने कहा कि यह केवल किसी ऐतिहासिक स्थल को मिला सम्मान नहीं, बल्कि भगवान बुद्ध के शांति, करुणा और मानव कल्याण के संदेश को पूरी दुनिया द्वारा स्वीकार किए जाने का प्रतीक है।उन्होंने कहा कि धम्मचक्कप्पवत्तन दिवस के 2605वें आयोजन से ठीक पहले मिली यह उपलब्धि सारनाथ की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्ता को नई ऊंचाई प्रदान करती है। यही वह पावन स्थल है, जहां भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश देकर धर्मचक्र का प्रवर्तन किया था। आज भी यह स्थान विश्वभर के बौद्ध श्रद्धालुओं, शोधार्थियों और पर्यटकों के लिए प्रेरणा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।प्रो. नेगी ने कहा कि भारत की पहचान केवल अपनी प्राचीन सभ्यता से नहीं, बल्कि उन सार्वभौमिक मूल्यों से है जिन्हें भगवान बुद्ध ने मानवता के सामने रखा। सत्य, अहिंसा, करुणा और सह-अस्तित्व का उनका संदेश वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में पहले से अधिक प्रासंगिक हो गया है।ALSO READ : शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोपी गिरफ्तार, वाराणसी छोड़ने की फिराक में था.उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के संरक्षण और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को देते हुए केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत तथा संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि देश की सांस्कृतिक विरासत को विश्व मंच पर नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।कुलपति ने देशवासियों और विश्वभर के बौद्ध अनुयायियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सारनाथ अब केवल इतिहास का साक्षी नहीं, बल्कि विश्व शांति और मानवता के साझा भविष्य का भी प्रेरणा-स्थल बनकर उभरेगा। उन्होंने अंत में कामना की कि भगवान बुद्ध का करुणा और मैत्री का संदेश संपूर्ण विश्व में सद्भाव, शांति और मानव कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता रहे।
शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोपी गिरफ्तार, वाराणसी छोड़ने की फिराक में था.
शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोपी गिरफ्तार, वाराणसी छोड़ने की फिराक में था.
वाराणसी: मंडुआडीह थाना पुलिस ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म, मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने के आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को शनिवार तड़के बरेका (बीएलडब्ल्यू) आवासीय परिसर से गिरफ्तार किया गया।पुलिस के अनुसार, लहरतारा निवासी एक महिला की तहरीर पर 24 जुलाई को आरोपी किशन कुमार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 69, 115(2), 352 और 351(3) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। पीड़िता का आरोप है कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और विरोध करने पर मारपीट, गाली-गलौज के साथ जान से मारने की धमकी दी।मामले की विवेचना उपनिरीक्षक प्रवीण सचान कर रहे हैं। पुलिस टीम ने 25 जुलाई की रात करीब 12:25 बजे आरोपी किशन कुमार (30), निवासी लहरतारा, को बीएलडब्ल्यू आवासीय परिसर से गिरफ्तार कर लिया।ALSO READ : गुरु पूर्णिमा पर नहीं लगेगा जाम पड़ाव आश्रम में ट्रैफिक और पार्किंग व्यवस्था का एडीसीपी ने लिया जायजापूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि युवती से उसकी मित्रता थी और दोनों के बीच आपसी सहमति से संबंध बने थे। उसने यह भी स्वीकार किया कि मुकदमा दर्ज होने की जानकारी मिलने के बाद वह वाराणसी छोड़कर जाने की तैयारी में था, लेकिन उससे पहले ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।गिरफ्तारी करने वाली टीम में उपनिरीक्षक प्रवीण सचान, उपनिरीक्षक विवेक यादव, फैंटम-48 के कांस्टेबल अमित कुमार तिवारी तथा कांस्टेबल संदीप शाह शामिल रहे। पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध अग्रिम विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
गुरु पूर्णिमा पर नहीं लगेगा जाम  पड़ाव आश्रम में ट्रैफिक और पार्किंग व्यवस्था का एडीसीपी ने लिया जायजा
गुरु पूर्णिमा पर नहीं लगेगा जाम पड़ाव आश्रम में ट्रैफिक और पार्किंग व्यवस्था का एडीसीपी ने लिया जायजा
वाराणसी: गुरु पूर्णिमा पर्व पर पड़ाव स्थित श्री सर्वेश्वरी समूह के अवधूत भगवान राम आश्रम में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। 28 और 29 जुलाई को होने वाले आयोजन के दौरान यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए एडीसीपी ट्रैफिक अंशुमान मिश्र ने शनिवार को आश्रम परिसर और आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण किया।निरीक्षण के दौरान एडीसीपी ने यातायात प्रबंधन, पार्किंग व्यवस्था, बैरिकेडिंग, श्रद्धालुओं के प्रवेश एवं निकास मार्ग सहित अन्य व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सभी व्यवस्थाएं समय से पूरी कर ली जाएं, ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या जाम की स्थिति उत्पन्न न हो।ALSO READ : काशी विद्यापीठ में 'दहेज मुक्त भारत' विषयक भाषण प्रतियोगिता, विद्यार्थियों ने लिया दहेज न लेने-देने का संकल्प.पुलिस प्रशासन ने गुरु पूर्णिमा पर लाखों श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना को देखते हुए विशेष ट्रैफिक एवं पार्किंग प्लान तैयार किया है। इसके तहत प्रमुख मार्गों पर यातायात का सुचारु संचालन, पार्किंग स्थलों का निर्धारण तथा आवश्यक स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की जाएगी।प्रशासन का उद्देश्य श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित यातायात व्यवस्था उपलब्ध कराना है, जिससे गुरु पूर्णिमा का आयोजन शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।