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माध्यमिक शिक्षक संघ ने घोषित किए दोनों प्रत्याशी

माध्यमिक शिक्षक संघ ने घोषित किए दोनों प्रत्याशी
Aug 18, 2025, 09:15 AM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ने वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन और वाराणसी स्नातक क्षेत्र के लिए प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है.प्रदेश अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र सिंह पटेल को वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन से उम्मीदवार बनाया गया है, जबकि सुशील कुमार सिंह को वाराणसी स्नातक क्षेत्र से प्रत्याशी घोषित किया गया है.


यह निर्णय रविवार को सरदार वल्लभभाई पटेल स्मारक, तेलियाबाग में हुई परिक्षेत्रीय संसदीय बोर्ड की बैठक में लिया गया.बैठक में बलिया, गाजीपुर, वाराणसी, जौनपुर, भदोही, मीरजापुर, चंदौली और सोनभद्र के जिला अध्यक्षों और मंत्रियों ने हिस्सा लिया.



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क्या कहा विजय कुमार ने


बैठक में पूर्व प्रांतीय उपाध्यक्ष व संरक्षक विजय कुमार सिंह ने कहा कि डॉ. जितेंद्र सिंह संगठन के उपयुक्त प्रत्याशी हैं और उन्होंने परिक्षेत्र में संगठन को मजबूत किया है. प्रदेश मंत्री दिनेश कुमार सिंह ने सभी से अपील की कि स्नातक मतदाता परिपत्र 18 और शिक्षक निर्वाचक परिपत्र 19 भरकर समय से जिला निर्वाचन कार्यालय में जमा करें.


प्रदेश महामंत्री आशीष कुमार सिंह ने सुझाव दिया कि पिछले चुनाव की तरह मतदान केंद्रों पर दो-दो बूथ प्रभारी और एजेंट बनाए जाएं, ताकि हर विद्यालय के शिक्षक सतर्कता से अपने मतदाता फार्म भरें और समय पर जमा कर सकें। बैठक में पूर्व प्रांतीय उपाध्यक्ष डॉ. श्यामनारायण तिवारी और आय-व्यय निरीक्षक त्रिभुवन लाल ने भी विचार व्यक्त किए.

वाराणसी में आज बूथ पर मतदाता सूची पढ़ेंगे बीएलओ
वाराणसी में आज बूथ पर मतदाता सूची पढ़ेंगे बीएलओ
वाराणसी : भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार 18 जनवरी रविवार को बूथ पर मतदाता सूची पढ़े जाने की तिथि नियत की गयी है. इस तिथि पर सभी बूथ लेवल अधिकारी अपने-अपने नियत मतदेय स्थलों पर प्रातः 10.30 बजे से सायं 4.30 बजे तक ए०एस०डी०/अन कलेक्टेबल सूची के साथ उपस्थित रहकर आलेख्य मतदाता सूची पढ़ेंगे तथा फार्म-6, 6ए 7 एवं 8 प्राप्त करेंगें.अपर जिलाधिकारी (प्रशासन)/उप जिला निर्वाचन अधिकारी बिपिन कुमार ने बताया कि उक्त तिथि पर जिला निर्वाचन अधिकारी, उप जिला निर्वाचन अधिकारी, समस्त निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी एवं सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों तथा पर्यवेक्षकीय अधिकारियों द्वारा बूथों का भ्रमण किया जायेगा. भ्रमण के दौरान यदि कोई बूथ लेविल आफिसर अनुपस्थित पाया जाता है तो उसके विरूद्ध लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की सुसंगत धाराओं के अन्तर्गत विधिक कार्यवाही की जायेगी. उक्त अभियान दिवसों के दिन जनपद के समस्त शिक्षण संस्थान/कार्यालय एवं अन्य संस्थान जहाँ पर मतदेय स्थल स्थापित है, खुले रहेंगे.ALSO READ : जनसंचार बनाम सोशल मीडिया : पत्रकारिता व्यक्ति-केंद्रित होती जा रही है - प्रो. केजी सुरेशउन्होंने जनसामान्य से अपील की है कि 18 जनवरी को अपने निर्दिष्ट बूथ पर जाकर आलेख्य प्रकाशित मतदाता सूची में अपना नाम देख सकते हैं तथा 01 जनवरी, 2026 को जिनकी आयु 18 वर्ष पूर्ण हो गयी हो अथवा पूर्ण हो रही हो और उनका नाम अभी तक मतदाता सूची में दर्ज नही हो पाया है, वे उक्त तिथि को अपने मतदान केन्द्र पर उपस्थित होकर निर्वाचक नामावली में अपना नाम सम्मिलित कराने हेतु फार्म-6 मय घोषणा पत्र (अनुलग्नक-4) के साथ निर्धारित प्रपत्र (नए मतदाताओं के लिए), फार्म-7 (मतदाता सूची से नाम अपमार्जन हेतु) एवं फार्म-8 (मतदाता सूची में प्रविष्टि में संशोधन अथवा स्थानान्तरण किये जाने हेतु) में पूर्ण विवरण भरकर एवं आवश्यक दस्तावेज संलग्न कर बी.एल.ओ. को उपलब्ध करा दें. मतदाताओं द्वारा ऑनलाइन के माध्यम से आयोग के ऐप ECINET mobile app एवं वेबसाइट https://voters.eci.gov.in के माध्यम से भी फार्म-6 (घोषणा-पत्र के साथ निर्धारित प्रपत्र) फार्म-7 एवं फार्म-8 भरकर सबमिट कर सकते हैं.
BMC हार से तिलमिलाए राज ठाकरे, सामने आया रिएक्शन
BMC हार से तिलमिलाए राज ठाकरे, सामने आया रिएक्शन
बृहन्मुंबई नगर निगम यानि (BMC) के सामने आए चुनावी नतीजों ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत कर दी है. ठाकरे परिवार के हाथों से मुंबई महानगरपालिका की सत्ता जो छिन्न गई है. जी हां, चुनाव में मिली करारी हार के बावजूद उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे दोनों ने ही 'मराठी मानुस' और 'क्षेत्रीय अस्मिता' के मुद्दे पर पीछे न हटने का संकल्प ले बैठे है. जहां राज ठाकरे ने चेतावनी देते हुए कहा कि, अगर मराठी लोगों के खिलाफ कुछ भी हुआ तो हम सत्ता में बैठे लोगों का ऐसा हाल करेंगे कि उन्हें घुटने टेकने पर मजबूर होना ही पड़ेगा. क्योंकि, हमारा संघर्ष मराठी लोगों के लिए, मराठी भाषा के लिए, मराठी पहचान के लिए और एक समृद्ध महाराष्ट्र के लिए है और हमेशा रहेगा.यही संघर्ष हमारा अस्तित्व है. इसलिए इन मराठियों के हक के लिए हम हमेशा ही लड़ेगा, जरूरी नहीं कि ये हक की लड़ाई सत्ता में रहकर ही लड़ी जाए, बिना सत्ता के भी इस संघर्ष को जीता जा सकता है. इन बातों का मतलब साफ है, अक्सर सत्ताधारी ताकतें और उनके संरक्षण में रहने वाले लोग मराठियों का शोषण करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ेंगे. इसलिए, हमें अपने मराठी लोगों के साथ मजबूती से खड़ा रहना चाहिए, चुनाव तो आते-जाते रहेंगे, लेकिन हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि हमारी सांसों में मराठी बसी है. वहीं, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने एक पोस्ट में दिवंगत बालासाहेब ठाकरे की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, 'यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है', यह तब तक जारी रहेगी जब तक मराठी लोगों को वह सम्मान नहीं मिल जाता जिसके वे हकदार हैं.मराठियों के लिए संघर्ष का संकल्प जानकारी के मुताबिक, उद्धव ठाकरे की पार्टी ने 227 वार्डों में से 65 में जीत हासिल की है, अपने चाचा बाल ठाकरे के नक्शेकदम पर चलने वाले राज ठाकरे ने कहा कि इस हार का मतलब यह नहीं है कि हिम्मत हार जाएंगे और हार मान लेंगे. उन्होंने अपने राज्य और मराठियों के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया है.मराठी लोगों के साथ मजबूती से खड़ावहीं, राज ठाकरे ने आगे कहा कि चाहे एमएमआर क्षेत्र हो या पूरा राज्य, सत्ताधारी ताकतें मराठी लोगों को परेशान करने और उनका शोषण करने का कोई मौका नहीं छोड़ेंगे. इसलिए, हमें अपने मराठी लोगों के साथ मजबूती से खड़ा रहना चाहिए. मुंबई चुनाव में मिली हार के बाद राज ठाकरे ने कहा कि हम उन सभी चीजों का विश्लेषण करेंगी और जो गलती हुई है, उसमें सुधार करेंगे। उन्होंने पार्टी को बिल्कुल नए सिरे से खड़ा करने का संकल्प लिया.
जनसंचार बनाम सोशल मीडिया : पत्रकारिता व्यक्ति-केंद्रित होती जा रही है - प्रो. केजी सुरेश
जनसंचार बनाम सोशल मीडिया : पत्रकारिता व्यक्ति-केंद्रित होती जा रही है - प्रो. केजी सुरेश
वाराणसी : बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा आयोजित “सोशल मीडिया के युग में पत्रकारिता और जनसंचार में बदलते रुझान” विषयक तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन शनिवार को “जनसंचार बनाम सोशल मीडिया” विषय पर एक विचारोत्तेजक पैनल चर्चा का आयोजन किया गया. इस सत्र के मुख्य वक्ता इंडिया हैबिटेट सेंटर, नई दिल्ली के निदेशक प्रो. के. जी. सुरेश ने स्वयं को सोशल मीडिया का समर्थक बताते हुए कहा कि सोशल मीडिया ने जनसंचार को नई दिशा दी है और मीडिया के लोकतंत्रीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के कारण ऐसे कई मुद्दे सामने आए हैं जो अब तक मुख्यधारा मीडिया की दृष्टि से ओझल थे. इससे पत्रकारिता में नए आयाम स्थापित हुए हैं.हालांकि, प्रो. सुरेश ने सोशल मीडिया से जुड़ी चुनौतियों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया. उन्होंने कहा कि रील्स संस्कृति के कारण कंटेंट में सतहीपन बढ़ा है. एक मिनट में सब कुछ देखने की लालसा ने गुणवत्ता से समझौता कराया है. आज कंटेंट क्रिएशन का उद्देश्य केवल यूज़र को कुछ सेकंड के लिए स्क्रीन पर रोकना बन गया है. उन्होंने चिंता जताई कि आज का युवा वर्ग गंभीर समाचार पत्रों से कटकर रील्स संस्कृति में उलझ गया है, जिससे ट्रिवियलाइजेशन बढ़ रहा है.उन्होंने कहा कि आज पॉडकास्ट और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कंटेंट की गुणवत्ता से अधिक व्यूज़ और मोनेटाइजेशन पर ध्यान दिया जा रहा है, जिससे पत्रकारिता व्यक्ति-केंद्रित होती जा रही है. विषयों के बजाय व्यक्तियों को महत्व देना लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है. पत्रकारिता को बचाने के लिए व्यक्तित्व-प्रधान दृष्टिकोण से हटकर मुद्दा-प्रधान पत्रकारिता को पुनः स्थापित करना आवश्यक है.यूट्यूब पत्रकारिता में जिम्मेदारी और जवाबदेही का अभावसत्र के विशिष्ट वक्ता देश के प्रख्यात वरिष्ठ शिक्षाविद पूर्व कुलपति प्रो. के. वी. नागराज ने अपने वक्तव्य में कहा कि सोशल मीडिया आज मोबोक्रेसी का रूप लेता जा रहा है. उन्होंने कहा कि बड़े कारोबारी और कॉरपोरेट घराने विज्ञापनों के माध्यम से मीडिया को नियंत्रित कर रहे हैं. यूट्यूब पत्रकारिता पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें जिम्मेदारी और जवाबदेही का अभाव है.प्रो. नागराज ने कहा कि विकास के नाम पर समाज को पुनर्परिभाषित किया जा रहा है. तकनीक आज एक राक्षस बनती जा रही है, जिसे नियंत्रित करने के बजाय हम उसे स्वयं पर शासन करने दे रहे हैं. उन्होंने महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए कहा- “समाज से जो श्रेष्ठ है, उसे निकालिए; विचारधारा अत्यंत आवश्यक है.” उनके अनुसार, बिना विचारधारा के संचार का कोई अर्थ नहीं है.उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया हमें एक प्रकार के कोकून में बंद कर रहा है, जहां सक्रिय सामाजिक हस्तक्षेप कम होता जा रहा है. शक्ति और असमानता के संबंध पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि जहां शक्ति है, वहां समानता नहीं हो सकती. उन्होंने माना कि मीडिया में सकारात्मक और नकारात्मक- दोनों पहलू मौजूद हैं, लेकिन सामाजिक उत्तरदायित्व और जवाबदेही के बिना पत्रकारिता अपने उद्देश्य से भटक जाती है.विशेषज्ञों के वक्तव्य, कुल 180 शोध पत्रों का वाचनविभिन्न देशों से आए विषय विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। संगोष्ठी के विभिन्न सत्रों में कुल 180 शोध पत्रों का वाचन किया गया, जिनमें डिजिटल मीडिया, सोशल मीडिया और समकालीन पत्रकारिता से जुड़े विविध पहलुओं पर गंभीर विमर्श हुआ. अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं के सत्र में बॉयसी यूनिवर्सिटी, अमेरिका की डॉ. इरीना बाबिक ने कहा कि डिजिटल मीडिया ने संचार को अधिक सहभागी और त्वरित बनाया है, किंतु विश्वसनीयता और तथ्यात्मकता बनाए रखना आज की सबसे बड़ी चुनौती बन गई है. उन्होंने मीडिया साक्षरता को समय की अनिवार्य आवश्यकता बताया.लोमोनोसोव मॉस्को स्टेट यूनिवर्सिटी, रूस की डॉ. अन्ना ग्लैडकोवा ने कहा कि सोशल मीडिया ने वैश्विक संवाद को नई गति प्रदान की है, लेकिन एल्गोरिद्म आधारित कंटेंट के कारण समाज में ध्रुवीकरण भी बढ़ रहा है. उन्होंने संतुलित और जिम्मेदार पत्रकारिता की आवश्यकता पर बल दिया.ALSO READ : मणिकर्णिका विवाद - कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन, राघवेंद्र चौबे समेत कई हिरासत मेंत्रिभुवन विश्वविद्यालय, काठमांडू (नेपाल) के डॉ. कुंदन आर्याल ने कहा कि विकासशील देशों में सोशल मीडिया ने जनभागीदारी को बढ़ावा दिया है, परंतु नैतिक पत्रकारिता और सामाजिक उत्तरदायित्व के अभाव में यह माध्यम भ्रामक सूचनाओं का कारण भी बन सकता है. यूनिवर्सिटी ऑफ लिबरल आर्ट्स, बांग्लादेश के प्रो-वाइस चांसलर डॉ. जूड विलियम जेनिलो ने कहा कि संचार का उद्देश्य केवल सूचना देना नहीं, बल्कि समाज में संवेदनशीलता और समावेशिता का विकास करना भी है.इस दौरान प्रमुख रूप से प्रोफेसर ओपी सिंह, प्रोफेसर अंबरीश सक्सेना, प्रोफेसर अनिल उपाध्याय, डॉ रउमाशंकर पांडेय, डॉ शोभना नेरलीकर, डॉ नेहा पांडेय, डॉ धीरेंद्र राय, डॉ संतोष शाह, डॉ स्मिति पाढ़ी सहित सभी प्रतिभागी उपस्थित रहे.