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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का योगी सरकार पर हमला, गौ-सेवा विज्ञापन के दावों पर उठाए सवाल...

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का योगी सरकार पर हमला, गौ-सेवा विज्ञापन के दावों पर उठाए सवाल...
Jul 26, 2026, 11:53 AM
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Posted By gagan arora

वाराणसी : ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने रविवार को वाराणसी में आयोजित प्रेसवार्ता में उत्तर प्रदेश सरकार के गौ-संरक्षण, संवर्धन और सेवा संबंधी विज्ञापन को भ्रामक और वास्तविक स्थिति से परे बताया। उन्होंने कहा कि सरकार का 'नीति, नीयत और नतीजे' का दावा धरातल पर दिखाई नहीं देता। यदि प्रदेश में गौ-संरक्षण की स्थिति इतनी बेहतर होती तो गौवंश सड़कों और खेतों में भटकने को मजबूर नहीं होता।


शंकराचार्य ने कहा कि सरकार के विज्ञापन में प्रदेश की आदर्श सरकारी गौशाला के बजाय निजी गौशाला की तस्वीर प्रकाशित की गई है। साथ ही उत्तर प्रदेश की पहचान गंगातीरी नस्ल के स्थान पर गीर गाय की तस्वीर का उपयोग किया गया है।


उन्होंने कहा कि 7,500 से अधिक गौ-आश्रय स्थलों, 12 लाख से अधिक गौवंश के संरक्षण, नंदनी कृषक समृद्धि योजना, नंद बाबा योजना, गोबर से ग्रीन एनर्जी और गौ-उत्पाद आधारित उद्योगों के दावे जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं देते।


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उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई गौ-आश्रय केंद्रों में देशी गायों के साथ जर्सी सांड रखे जा रहे हैं, जिससे देशी नस्लों पर संकट खड़ा हो रहा है। साथ ही उन्होंने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की कि दुग्ध उत्पादन में देशी गायों का वास्तविक योगदान कितना है और सरकार गाय को केवल पशु मानती है या माता।


शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने घोषणा की कि उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में स्थित सरकारी गौशालाओं की जमीनी स्थिति का वीडियो तैयार कर जनता के सामने रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि स्थानीय सांसदों और विधायकों से भी इस संबंध में जवाब मांगा जाएगा। सरकार को अहंकार छोड़कर शंकराचार्यों और संतों के सुझावों को स्वीकार करना चाहिए तथा गाय को 'पशु' की सूची से हटाकर 'राष्ट्रमाता' का दर्जा देना चाहिए।


उन्होंने बताया कि 81 दिवसीय गविष्ठि यात्रा के दौरान प्रदेश की सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों का भ्रमण किया गया। इस यात्रा में 14 हजार किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की गई, लगभग 1,500 जनसभाओं को संबोधित किया गया और करीब 18 लाख लोगों से संवाद स्थापित हुआ।


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प्रेसवार्ता में उन्होंने आगामी कार्यक्रमों की भी घोषणा की। इसके तहत प्रदेश की सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में 'एक नोट अभियान' चलाकर अभिनव आशीर्वाद गोधाम की स्थापना की जाएगी। शारदीय नवरात्रि में काशी में विशाल गो-प्रतिष्ठा यज्ञ का आयोजन होगा। वहीं दीपावली के बाद प्रदेश के लाखों गांवों से लाखों गौवंश के साथ लखनऊ कूच किया जाएगा।


अंत में शंकराचार्य ने गविष्ठि यात्रा में सहयोग करने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें आशीर्वाद दिया।

शास्त्रीघाट पर भूख हड़ताल के तीसरे दिन बृजेश मिश्रा की बिगड़ी तबीयत, प्रदर्शनकारियों में बढ़ी चिंता
शास्त्रीघाट पर भूख हड़ताल के तीसरे दिन बृजेश मिश्रा की बिगड़ी तबीयत, प्रदर्शनकारियों में बढ़ी चिंता
वाराणसी। यूजीसी के खिलाफ शास्त्रीघाट पर चल रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बीच भूख हड़ताल के तीसरे दिन प्रदर्शनकारी बृजेश मिश्रा की तबीयत बिगड़ने की सूचना है। लगातार भूख हड़ताल के कारण उन्हें कमजोरी महसूस होने लगी है। इसके साथ ही शरीर में दर्द की शिकायत भी बताई जा रही है। बृजेश मिश्रा की तबीयत बिगड़ने की खबर के बाद प्रदर्शन स्थल पर मौजूद प्रदर्शनकारियों में चिंता का माहौल है।बताया जा रहा है कि यूजीसी से जुड़ी मांगों को लेकर प्रदर्शनकारी शास्त्रीघाट पर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं। इसी क्रम में बृजेश मिश्रा ने भूख हड़ताल शुरू की है। मंगलवार को भूख हड़ताल का तीसरा दिन है। लगातार तीन दिनों से अन्न ग्रहण नहीं करने के कारण उनकी तबीयत प्रभावित होने लगी है।प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, शुरुआत में बृजेश मिश्रा सामान्य स्थिति में थे, लेकिन भूख हड़ताल के तीसरे दिन उन्हें कमजोरी और शरीर में दर्द की शिकायत होने लगी। उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद साथी प्रदर्शनकारी उनकी स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं।ALSO READ : आईएम बीएचयू में सेंट्रल बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए सेवानिवृत्ति पूर्व प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू.प्रदर्शन स्थल पर मौजूद लोगों का कहना है कि आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रखा जाएगा। प्रदर्शनकारियों की ओर से यूजीसी के समक्ष अपनी मांगें रखी गई हैं और उनका कहना है कि जब तक इन मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।वहीं, बृजेश मिश्रा की तबीयत बिगड़ने के बाद प्रदर्शनकारियों के बीच स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। प्रदर्शन स्थल पर मौजूद साथी उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रहे हैं। भूख हड़ताल लंबी खिंचने की स्थिति में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां और बढ़ने की आशंका को लेकर भी प्रदर्शनकारी चिंतित हैं।फिलहाल प्रदर्शन स्थल पर आंदोलन जारी है और बृजेश मिश्रा की तबीयत पर सभी की नजर बनी हुई है।
आईएम बीएचयू में सेंट्रल बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए सेवानिवृत्ति पूर्व प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू.
आईएम बीएचयू में सेंट्रल बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए सेवानिवृत्ति पूर्व प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू.
वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईएम) में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए पांच दिवसीय सेवानिवृत्ति पूर्व प्रशिक्षण कार्यक्रम सोमवार से शुरू हुआ। कार्यक्रम 21 से 25 सितंबर 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। इसमें देशभर से बैंक के जनरल मैनेजर, चीफ जनरल मैनेजर, डिप्टी जनरल मैनेजर, असिस्टेंट जनरल मैनेजर और चीफ इंटरनल ऑडिटर स्तर के अधिकारी शामिल हो रहे हैं।उद्घाटन सत्र की शुरुआत माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। आईएम बीएचयू के निदेशक प्रो. आशीष बाजपेई ने कहा कि सेवानिवृत्ति जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक नई राह की शुरुआत है, जिसके लिए नई दृष्टि और बेहतर योजना की आवश्यकता होती है। उन्होंने काशी के आध्यात्मिक महत्व का उल्लेख करते हुए सोमवार को कार्यक्रम की शुरुआत को भी विशेष बताया।प्रो. बाजपेई ने सेवानिवृत्ति के बाद के जीवन की योजना, उद्देश्यपूर्ण सहभागिता, वित्तीय तैयारी, स्वास्थ्य एवं कल्याण तथा व्यक्तिगत संतुष्टि जैसे पहलुओं पर जोर दिया।संकाय प्रमुख प्रो. सुजीत कुमार दुबे ने कहा कि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की ओर से सेवानिवृत्ति पूर्व प्रशिक्षण कार्यक्रम के आयोजन के लिए आईएम बीएचयू पर विश्वास जताना संस्थान के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि यह संस्थान की अकादमिक क्षमता और प्रशिक्षण विशेषज्ञता में बैंक के भरोसे को दर्शाता है।ALSO READ : सत्यम मिश्र ने काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी का संभाला पदभारकार्यक्रम में प्रो. प्रेम शंकर त्रिपाठी ने प्रतिभागियों को जीवन के विभिन्न चरणों से लेकर सेवानिवृत्ति तक की यात्रा को समझाया। उन्होंने सेवानिवृत्ति को जीवन का अंतिम पड़ाव मानने के बजाय नई संभावनाओं और सुनियोजित भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण संक्रमण के रूप में देखने के लिए प्रेरित किया।वहीं, प्रो. सुजीत कुमार दुबे ने 'जॉय ऑडिट' अभ्यास के माध्यम से प्रतिभागियों को पेशेवर जीवन से इतर खुशी और संतुष्टि के वास्तविक स्रोतों को पहचानने के लिए प्रेरित किया।समापन सत्र में प्रो. आशुतोष मोहन ने सेवानिवृत्ति के बाद अनुभव और ज्ञान के माध्यम से समाज एवं संस्थानों में योगदान जारी रखने की संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने प्रतिभागियों से अगली पीढ़ी के नेतृत्व को तैयार करने में मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत की भूमिका निभाने का आह्वान किया।
सत्यम मिश्र ने काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी का संभाला पदभार
सत्यम मिश्र ने काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी का संभाला पदभार
वाराणसी। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास एवं श्री काशी विश्वनाथ विशिष्ट क्षेत्र विकास परिषद के नव नियुक्त मुख्य कार्यपालक अधिकारी सत्यम मिश्र ने सोमवार को विधिवत अपना पदभार ग्रहण किया। पदभार ग्रहण करने से पहले उन्होंने सपरिवार बाबा कालभैरव मंदिर में दर्शन-पूजन किया। इसके बाद श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुंचकर बाबा विश्वनाथ का दर्शन कर विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया और आशीर्वाद प्राप्त किया।पदभार ग्रहण के दौरान मंदिर न्यास एवं विशिष्ट क्षेत्र विकास परिषद के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। पदभार संभालने के बाद सत्यम मिश्र ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों से परिचय प्राप्त किया और उनका अभिवादन स्वीकार किया।ALSO READ : 33 पेड़ों की कटाई और 2.65 करोड़ के NGT जुर्माने को लेकर छात्रों ने EC को सौंपा ज्ञापनइस दौरान उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर कार्य करने पर जोर दिया। उन्होंने श्रद्धालुओं की सुविधा, सुगम दर्शन, व्यवस्थाओं की गुणवत्ता और श्री काशी विश्वनाथ धाम की गरिमा के अनुरूप कार्यों को प्राथमिकता देने की बात कही।उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और मंदिर की व्यवस्थाओं को और प्रभावी बनाने के लिए सभी विभागों के बीच समन्वय के साथ कार्य किया जाएगा।