श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में लगे एयर प्यूरीफायर श्मशान का धुआं बन रही शुद्ध हवा...

वाराणसी : सावन में श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर धाम में प्रदूषण का शुद्धीकरण हो रहा है. इसके तहत अब श्रद्धालुओं को शुद्ध हवा मिलने की कवायद की गई है. इसके लिए स्टेनलेस स्टील से निर्मित 20 से ज्यादा एयर प्यूरीफायर लगाए गए हैं. ये मशीनें मणिकर्णिका घाट की चिताओं से उठने वाले धुएं को भी साफ हवा में बदलती हैं. ये एयर प्यूरीफायर हर घंटे 3 लाख घनमीटर हवा को शुद्ध कर रहे हैं. मणिकर्णिका के पास में ही गंगा द्वार के पास बने रैंप भवन में इस अत्याधुनिक स्वदेशी वायु शुद्धिकरण सिस्टम को लगाया गया है.
यह स्वदेशी तकनीक वातावरण में मौजूद कई प्रकार के प्रदूषकों को अपनी ओर खींचकर उन्हें हवा से समाप्त करती है. यह 100 नैनोमीटर से 50 माइक्रोन आकार तक के सूक्ष्म कणों, जैसे नैनो ब्लैक कार्बन, परागकण (पोलन), जैविक कणों को हटाने में सक्षम है. यह बजड़ों से निकलते वाले धुएं के सल्फर ऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी जहरीली गैसों को भी निष्क्रिय करते हैं. साथ ही हवा में मौजूद वायरस और बैक्टीरिया जैसे सूक्ष्मजीवों को भी मारता है. मंदिर में कुल 58 एयर प्यूरीफायर स्थापित किए जाने हैं.
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शुद्ध पेयजल, बराबर होती है जांच
सावन से पहले मंदिर एसडीएम शंभू शरण ने यूनिट का निरीक्षण कर व्यवस्था की समीक्षा की और कर्मचारियों को निर्देश भी दिए. वहीं, पूरी व्यवस्था को परखकर गुणवत्ता की जांच भी की. भक्तों को हवा के साथ शुद्ध पानी भी मिलेगा. हर सप्ताह मंदिर में लगे वाटर कूलर के पानी की गुणवत्ता जांची जा रही है. रीजनल वाटर एनालिसिस लेबोरेटरी में इसका सैंपल भेजा जा रहा है और इसकी रिपोर्ट वाटर कूलर पर ही चिपका दिया जा रहा है. इसमें भक्तों को पानी के पीएच, टीडीएस, टर्बिडिटी, हार्डनेस, क्लोराइड, फ्लोराइड, नाइट्रेट, आयरन समेत कई मानकों का परीक्षण किया जा रहा है. रिपोर्ट के अनुसार सभी प्रमुख पैरामीटर निर्धारित मानकों के अनुरूप मिले हैं. मंदिर प्रशासन के अनुसार, बाबा विश्वनाथ के दर्शन के दौरान भक्तों को सुरक्षित पानी ही मिलेगा.



