दूर होगी सिग्नल की बाधा, वाराणसी-अयोध्या रेलमार्ग के बीच 'नॉन-स्टॉप' दौडेंगी ट्रेनें

वाराणसी: प्रयागराज से महादेव की नगरी वाराणसी और प्रभु श्री राम के धाम अयोध्या जाने वाले रेल यात्रियों के लिए भारतीय रेलवे एक महत्वपूर्ण बदलाव करने जा रहा है. अब इन रूटों पर ट्रेनों की रफ्तार केवल इंजन की ताकत पर नहीं, बल्कि अत्याधुनिक तकनीक पर निर्भर करेगी. रेलवे प्रशासन ने प्रयागराज-वाराणसी और प्रयागराज-अयोध्या रेल मार्गों को पूरी तरह 'आटोमैटिक सिग्नलिंग' (स्वचालित सिग्नल प्रणाली) से लैस करने का मास्टर प्लान तैयार कर लिया है.

हजारों यात्रियों को मिलेगा नई व्यवस्था का फायदा
इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा उन हजारों यात्रियों को मिलेगा, जो अक्सर जंक्शन के ठीक बाहर सिग्नल मिलने के इंतजार में घंटों फंसे रहते थे. वर्तमान में प्रयागराज जंक्शन के पास का कुछ महत्वपूर्ण हिस्सा अब भी पुराने सिस्टम पर निर्भर है, जिसे पूरी तरह डिजिटल और ऑटोमैटिक बनाने की तैयारी है. उत्तर और पूर्वोत्तर रेलवे ने इस तकनीकी बाधा को दूर करने के लिए अपना प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेज दिया है, जिससे आने वाले समय में ट्रेनों की लेटलतीफी बीते दौर की बात हो जाएगी.

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रेलवे की इस योजना के तहत रामबाग से झूंसी और प्रयागराज जंक्शन से प्रयाग के बीच के महत्वपूर्ण खंडों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. यहां या तो 'इंटरमीडिएट ब्लॉक सिग्नलिंग' लगाई जाएगी या फिर पूरे खंड को ही ऑटोमैटिक सिस्टम में तब्दील कर दिया जाएगा.इस तकनीक के लागू होते ही एक के पीछे दूसरी ट्रेन बहुत कम दूरी पर सुरक्षित रूप से चल सकेंगी. इसका सीधा मतलब यह है कि अब 'लाइन क्लियर' न मिलने के कारण ट्रेनों को आउटर पर खड़ा नहीं होना पड़ेगा और यात्रियों के समय की भारी बचत होगी.
रेल सुरक्षा के लिहाज से बड़ा कदम
यह बदलाव केवल रफ्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि रेल सुरक्षा के लिहाज से भी एक बड़ा कदम है. आटोमैटिक सिग्नलिंग सिस्टम लगने से मानवीय चूक की गुंजाइश लगभग खत्म हो जाएगी, जिससे सफर और भी सुरक्षित होगा.इसके अलावा, ट्रैक की क्षमता बढ़ने से भविष्य में इन व्यस्त रूटों पर और भी नई ट्रेनें चलाई जा सकेंगी, जिससे यात्रियों को ज्यादा विकल्प मिल सकेंगे. प्रयागराज के मुख्य मार्गों पर यह व्यवस्था पहले से ही सफल रही है और अब इसे विस्तार दिया जा रहा है.

रेलवे के लिए 'गेम चेंजर बना प्रोजेक्ट
आगामी महाकुंभ जैसे विशाल आयोजनों को देखते हुए यह प्रोजेक्ट रेलवे के लिए 'गेम चेंजर' माना जा रहा है. सीपीआरओ शशिकांत त्रिपाठी के अनुसार, यह आधुनिक तकनीक कुंभ के दौरान आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के आवागमन को सुगम और तेज बनाएगी. जब स्टेशनों पर भारी भीड़ होगी, तब यह आटोमैटिक सिस्टम बिना किसी मानवीय देरी के ट्रेनों का त्वरित आगमन और प्रस्थान सुनिश्चित करेगा, जिससे यात्रियों को एक विश्वस्तरीय और निर्बाध सफर का अनुभव मिलेगा.



