काशी विद्यापीठ में विशेष व्याख्यान, बोले मुख्य वक्ता - संविधान केवल किताब नहीं, जनता की आकांक्षाओं का दस्तावेज है

वाराणसी : महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी के राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा आज एक महत्वपूर्ण विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया. व्याख्यान का विषय भारतीय संविधान के निर्माण में जनभागीदारी को समझना रहा, जिसमें संविधान निर्माण की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और उसमें आम जनता की भूमिका पर गहन चर्चा हुई. कार्यक्रम का आयोजन सामाजिक विज्ञान संकाय स्मार्ट क्लास में आज सुबह 11:30 बजे किया गया. इस विशेष व्याख्यान के संरक्षक के रूप में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ.
कार्यक्रम के संयोजक राजनीति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. मोहम्मद आरिफ रहे. कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. अरविंद कुमार रहे, जो वर्तमान में यूनिवर्सिटी ऑफ हर्टफोर्डशायर, यूके में लेक्चरर हैं तथा यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के इंस्टीट्यूट ऑफ कॉमनवेल्थ स्टडीज में पोस्ट-डॉक्टोरल फेलो एवं एसोसिएट फेलो के रूप में कार्यरत हैं. डॉ. अरविंद कुमार ने कहा कि भारतीय संविधान केवल कुछ विद्वानों द्वारा लिखी गई किताब नहीं है, बल्कि यह भारत की जनता की आकांक्षाओं, संघर्षों और सपनों का जीवंत दस्तावेज है. उन्होंने बताया कि संविधान सभा में 2 साल 11 महीने 18 दिन तक चली लंबी बहसों के दौरान देश के कोने-कोने से आए सुझावों, पत्रों और जन-आंदोलनों ने संविधान को समावेशी बनाया. उन्होंने कहा कि आम नागरिकों द्वारा भेजे गए हजारों ज्ञापनों ने मौलिक अधिकारों और नीति-निर्देशक तत्वों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
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उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे संविधान को केवल पढ़े नहीं, बल्कि उसके मूल्यों स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व और न्याय को अपने जीवन में आत्मसात करें. इस अवसर पर राजनीति विज्ञान विभाग के शिक्षकों, शोधार्थियों और सैकड़ों विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया. अंत में प्रश्नोत्तर सत्र में छात्रों ने संविधान से जुड़े विभिन्न समसामयिक मुद्दों पर जिज्ञासा जाहिर की, जिसका डॉ. कुमार ने सारगर्भित उत्तर दिया. साथ ही विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ रेशम लाल , डॉ विजय कुमार , डॉ प्रदीप कुमार, डॉ ज्योति त्रिपाठी , डॉ शिके मणि पांडेय, डॉ ज्ञान प्रकाश पांडेय, डॉ विजय कुमार सिंह की उपस्थिति रही.



