काशी विद्यापीठ में पर्यावरण संरक्षण पर विशेष व्याख्यान, भारतीय समाज की भूमिका पर हुआ मंथन

वाराणसी : महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के समाजशास्त्र विभाग में मंगलवार को ‘पर्यावरण संरक्षण में भारतीय समाज की भूमिका’ विषय पर एक दिवसीय विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. अनिल कुमार, अखिल भारतीय शिक्षण संस्थान में कार्य प्रमुख (पर्यावरण संरक्षण) रहे.

अपने संबोधन में डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि प्रकृति का असंतुलन लगभग 400 वर्ष पहले शुरू हुआ, जब मानव ने प्रकृति के साथ सामंजस्य के स्थान पर उसका दोहन करना प्रारंभ किया. उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में प्रकृति को मां का दर्जा दिया गया है, लेकिन आधुनिक समय में समाज की सोच और जीवनशैली में बड़ा बदलाव आया है. भौतिकता और आधुनिकता की होड़ में नगरों का विकास तेजी से हो रहा है, जिसके साथ ही प्रदूषण भी चिंताजनक स्तर तक बढ़ता जा रहा है.

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अजय कन्नौजिया, क्षेत्र पर्यावरण प्रमुख, पूर्वी उत्तर प्रदेश रहे। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता आवश्यक है।
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भारतीय संस्कृति में प्रकृति और मनुष्य का सहअस्तित्व
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए समाजशास्त्र विभाग की अध्यक्ष प्रो. अमिता सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण में भारतीय समाज की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। भारतीय संस्कृति की विशेषता यह है कि इसमें मनुष्य और प्रकृति को एक-दूसरे का पूरक माना गया है और दोनों का सहअस्तित्व स्वीकार किया गया है।
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