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श्रीलंकाई युवाओं की 6000 किमी साइकिल यात्रा सारनाथ पहुंची, दो महीने से अधिक लगा समय

श्रीलंकाई युवाओं की 6000 किमी साइकिल यात्रा सारनाथ पहुंची, दो महीने से अधिक लगा समय
Jan 13, 2026, 12:22 PM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी : श्रीलंका के दो युवा अपनी साइकिल यात्रा पूरी कर मंगलवार को वाराणसी के सारनाथ पहुंचे. भारत और श्रीलंका के बीच सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को मजबूत करने के लिए साइकिल से छह हजार किलोमीटर की यात्रा की. यह यात्रा मंगलवार को भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ में समाप्त हुई, जहां बौद्ध भिक्षुओं ने उनका स्वागत किया. श्रीलंका के नोवन कुमार और सुगत पतिरन ने 25 अक्टूबर 2025 को श्रीलंका के कोलंबो से अपनी यात्रा शुरू की.


उन्होंने जाफना पहुंचने के बाद पानी के जहाज से तमिलनाडु (नागपट्टनम) का सफर किया. इसके बाद, उन्होंने साइकिल से आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, झारखंड, बिहार और नेपाल के लुम्बिनी होते हुए उत्तर प्रदेश में सारनाथ पहुंचे. यहां जम्बूद्वीप श्रीलंका बौद्ध विहार में प्रभारी भिक्षु के सिरी सुमेध थेरो ने उन्हें खाता पहनाकर स्वागत किया. इसके बाद, उन्होंने बौद्ध मंदिर में भगवान बुद्ध से उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना की.


नोवन कुमार, जो एक कंपनी में सेल्समैन हैं, उन्‍होंने बताया कि श्रीराम का जन्म अयोध्या में हुआ, लेकिन श्रीलंका में भी उनके पवित्र स्थल हैं. इसी प्रकार, भारत में भी कई महत्वपूर्ण बुद्धिस्ट स्थल हैं. उनका उद्देश्य इन धार्मिक स्थलों का भ्रमण कर लोगों को जागरूक करना है. अब तक, वे छह हजार किलोमीटर की यात्रा कर चुके हैं.

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बुधवार को, सारनाथ से यात्रा शुरू कर वे प्रयागराज, अयोध्या, चित्रकूट, सतना, नासिक, रामटेक, पंचवटी, रामदुर्ग, हम्पी, तिरुपति, रामेश्वर, रामसेतु होते हुए चेन्नई जाएंगे. वहां से वापस श्रीलंका जाकर वे श्रीराम से जुड़े स्थलों का भ्रमण करेंगे और 20 मार्च को हनुमान घाट पर अपनी यात्रा का समापन करेंगे. उन्होंने बताया कि वे एक दिन में लगभग सौ किलोमीटर की यात्रा करते हैं और किसी सुरक्षित स्थान पर शरण लेते हैं. यात्रा के दौरान, वे दोनों देशों के बीच आध्यात्मिक संबंधों के बारे में जानकारी साझा करते हैं.

काशी विश्‍वनाथ मंदिर में एप आधारित नई व्‍यवस्‍था, श्रद्धालुओं को होगा बेहतर अनुभव
काशी विश्‍वनाथ मंदिर में एप आधारित नई व्‍यवस्‍था, श्रद्धालुओं को होगा बेहतर अनुभव
वाराणसी: काशी विश्वनाथ मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अब दर्शन व्यवस्था और अधिक सुव्यवस्थित और आधुनिक बनाया जा रहा है. मंदिर न्यास ने श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और बेहतर अनुभव देने के उद्देश्य से एप-आधारित नई व्‍यवस्‍था लागू करने का निर्णय लिया है. श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास एक मई से ऐप आधारित व्यवस्था शुरू करने जा रहा है. इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. काशी विश्वनाथ न्यास परिषद के सीईओ डॉ. विश्वभूषण ने बताया कि इसमें श्रद्धालुओं के मूल विवरण अनिवार्य रूप से प्राप्त किए जाएंगे. कई भाषाओं में प्रशिक्षित कर्मचारियों की नियुक्ति इस आधार पर उनका सामान्य, क्षेत्रीय और भाषाई वर्गीकरण किया जाएगा. इससे कई भाषाओं में प्रशिक्षित कर्मचारियों की नियुक्ति कर बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा. सुरक्षा की दृष्टि से नई व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी. आगंतुकों की मूल पहचान संबंधी जानकारी सीमित अवधि तक सुरक्षित रखी जाएगी. काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के अनुसार, धाम में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को भाषा और क्षेत्रीय भिन्नताओं के कारण कई बार असुविधा का सामना करना पड़ता है. इसी समस्या को दूर करने के लिए यह नई व्यवस्था शुरू की जा रही है.ई प्रणाली के तहत सुगम दर्शन, अभिषेक और अन्य विशेष सेवाओं के लिए आने वाले श्रद्धालुओं का पंजीकरण एप के माध्यम से किया जाएगा. इसमें आधार संख्या सहित कुछ जरूरी विवरण दर्ज करना अनिवार्य होगा. इस डेटा के आधार पर श्रद्धालुओं का भाषाई और क्षेत्रीय वर्गीकरण किया जाएगा, जिससे संबंधित भाषाओं में प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती की जा सकेगी. इससे श्रद्धालुओं को अधिक सहज और संतोषजनक अनुभव मिलेगा.Also Read: बुद्ध पूर्णिमा: सारनाथ बौद्ध अनुयायियों से गुलजार, भगवान बुद्ध के अस्थि अवशेष के किए दर्शननई व्यवस्था आगामी दिनों में शुरू की जाएगी यह नई व्यवस्था आगामी दिनों में शुरू की जाएगी और 1 मई 2026 के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. न्यास ने स्पष्ट किया है कि सामान्य श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क दर्शन व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है. काशीवासियों के लिए भी विशेष द्वार से सुबह और शाम के समय मुफ्त दर्शन की सुविधा पहले की तरह जारी रहेगी. मंदिर न्यास ने श्रद्धालुओं से इस नई व्यवस्था के सफल संचालन के लिए सहयोग की अपील की है. साथ ही, सुझाव देने के लिए आधिकारिक वेबसाइट और ईमेल के माध्यम से अपनी राय साझा करने का आग्रह किया गया है.https://www.youtube.com/watch?v=OxmuubD2ofQ
बुद्ध पूर्णिमा: सारनाथ बौद्ध अनुयायियों से गुलजार, भगवान बुद्ध के अस्थि अवशेष के किए दर्शन
बुद्ध पूर्णिमा: सारनाथ बौद्ध अनुयायियों से गुलजार, भगवान बुद्ध के अस्थि अवशेष के किए दर्शन
Buddha Purnima: Sarnath buzzes with Buddhist followers, offering prayers to the relics of Lord Buddhaवाराणसी: वैशाख बुद्ध पूर्णिमा के मौके पर शुक्रवार को सारनाथ गुलजार है. इस अवसर पर सुबह मूलगंध कुटी बौद्ध मंदिर में हजारों बौद्ध अनुयायी भगवान बुद्ध के अस्थि अवशेष का दर्शन पूजन कर निहाल हुए. दिन भर बौद्ध भिक्षुओं की चहल पहल बनी रही. मंदिर और मठों में विशेष सजावट की गई. बौद्ध मंदिर के विहाराधिपति भिक्षु आर सुमित्ता नन्द थेरो के नेतृत्व में हीरा मोती से जड़ित फ्लास्क में रखा बुद्ध अस्थि अवशेष मन्दिर के हाल में दर्शन को रखा गया.जापानी बौद्ध मंदिर में किए दर्शन पूजन थाईलैंड, वियतनाम, श्रीलंका के साथ महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, बिहार के बोध गया, के अलावा यूपी के श्रावस्ती, कुशीनगर, गाजीपुर, जौनपुर, चंदौली,अन्य जिलों से बौद्ध अनुयायी एंव स्थानीय बौद्ध मठ के बौद्ध भिक्षुओं ने बुद्ध अस्थि अवशेष के दर्शन किये. इस दौरान भिक्षु चंदिमा, भिक्षु शीलवश, भिक्षु धम्म रत्न, भिक्षु रत्नाकर, सहित थाई, तिब्बती,जापानी, वियतनाम, कम्बोडिया बौद्ध मंदिर के बौद्ध भिक्षु शामिल रहे. इसके पूर्व मन्दिर में सुबह 6 बजे विश्व शांति के लिए बौद्ध भिक्षुओं ने पूजा की. इसके साथ यहां आए बौद्ध अनुयायियों ने सारनाथ के कम्बोडिया, थाईलैंड, वियतनाम, तिब्बती, जापानी बौद्ध मंदिर में दर्शन पूजन किए.Also Read: कमर्शियल LPG सिलेंडर के संग महंगा हुआ 5 किलो वाला 'छोटू', जानें दामों में कितनी बढ़ोतरीबुद्ध पूर्णिमा पर सारनाथ आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भोजन दान किया गया. इसके पहले पहला भोजन भिक्षु चण्डपदुम लेकर भगवान बुद्ध के चढ़ाया गया. धम्म शिक्षण केंद्र के प्रभारी भिक्षु चंदिमा ने बताया कि मूलगंध कुटी बौद्ध मंदिर परिसर में सुबह 10 बजे से रात 10 बजे तक भोजन की व्यवस्था की गई. इस दौरान सारनाथ में दुकानों पर भी भीड देखी गई. अवकाश होने और मौसम के तकाजे के कारण आम लोग भी बडी संख्‍या में लोगा पहुंचे.https://www.youtube.com/watch?v=OxmuubD2ofQ
मजदूर दिवस पर बड़ा सवाल—क्या सिर्फ भाषणों तक सीमित हैं अधिकार...
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वाराणसी: आज पूरे देश में अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवसयानी मजदूर दिवस उत्साह और सम्मान के साथ मनाया जा रहा है. यह दिन श्रमिकों के संघर्ष, उनके अधिकारों और समाज के निर्माण में उनके अहम योगदान को याद करने के लिए समर्पित है.मजदूर दिवस की शुरुआत 19वीं सदी में श्रमिकों के काम के घंटे तय करने की मांग को लेकर हुए आंदोलनों से जुड़ी है.भारत में पहली बार 1 मई 1923 को चेन्नई में इस दिवस को मनाया गया था, जिसकी पहल हिंदुस्तान लेबर किसान पार्टी ने की थी.आज के दिन विभिन्न श्रमिक संगठनों और सामाजिक संस्थाओं द्वारा रैलियां, संगोष्ठियां और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं.वाराणसी सहित प्रदेश के कई जिलों में मजदूरों को उनके अधिकारों, न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा और सुरक्षित कार्यस्थल को लेकर जागरूक किया जा रहा है.विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते समय के साथ मजदूरों की भूमिका और चुनौतियां भी बदल रही हैं.खासकर असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों को आज भी रोजगार की अस्थिरता, कम वेतन और सामाजिक सुरक्षा की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है.also read:कमर्शियल LPG सिलेंडर के संग महंगा हुआ 5 किलो वाला 'छोटू', जानें दामों में कितनी बढ़ोतरीसरकार द्वारा श्रमिकों के हित में कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन उनके प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता जमीनी स्तर पर अब भी महसूस की जा रही है.मजदूर दिवस के अवसर पर लोगों ने श्रमिकों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उनके बेहतर भविष्य और अधिकारों की सुरक्षा का संकल्प लिया.