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तीन दिन से बीएचयू में छात्र दे रहे धरना, नहीं निकल रहा समाधान

तीन दिन से बीएचयू में छात्र दे रहे धरना, नहीं निकल रहा समाधान
Dec 24, 2025, 10:09 AM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी - काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) एक बार फिर छात्र आंदोलनों और प्रशासनिक विवादों को लेकर सुर्खियों में है. विश्वविद्यालय परिसर में आए दिन धरना-प्रदर्शन और टकराव की सूचनाओं के बीच इस बार इतिहास विभाग के पीएचडी शोधार्थियों ने कथित अनियमितता, जातिगत भेदभाव और शैक्षणिक क्षति का आरोप लगाते हुए आंदोलन छेड़ दिया है. कड़ाके की ठंड के बावजूद 13 पीएचडी छात्र-छात्राएं पिछले तीन दिनों से केंद्रीय कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे हैं, लेकिन अब तक विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है.


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धरना दे रहे छात्रों का कहना है कि वे शैक्षणिक सत्र 2024-25 के इतिहास विभाग के शोधार्थी हैं, जिनका चयन RET (Research Entrance Test) श्रेणी के अंतर्गत हुआ था. सभी छात्रों ने 23 मार्च 2025 को मुख्य परिसर (DMC – Department of Main Campus) में प्रवेश के लिए निर्धारित शुल्क का भुगतान किया था. इसके बावजूद लगभग सात माह बाद विभाग द्वारा जारी की गई प्रवेश सूची में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं. छात्रों के अनुसार, इतिहास विभाग में कुल 43 सीटें थीं, जिनमें 15 RET Exempted और 28 RET सीटें शामिल थीं. RET श्रेणी की 28 सीटों में से 13 छात्रों को संबद्ध (एफिलिएटेड) कॉलेजों में आवंटित कर दिया गया, जबकि शेष 15 छात्रों को मुख्य परिसर (DMC) में रखा गया. जिन 13 छात्रों को एफिलिएटेड कॉलेजों में भेजा गया, वे सभी आरक्षित वर्ग से हैं—जिनमें 6 ओबीसी, 4 एससी, 2 एसटी और 1 दिव्यांग श्रेणी के छात्र शामिल हैं. वहीं, DMC में रखे गए 15 छात्रों में अधिकांश सामान्य वर्ग के हैं और केवल 2 ओबीसी छात्र शामिल हैं.


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छात्रों का आरोप है कि यह निर्णय स्पष्ट रूप से भेदभावपूर्ण है. मामले की गंभीरता को देखते हुए कुलपति द्वारा लोकपाल की नियुक्ति की गई, जिन्होंने समाधान के लिए छात्रों से कंसेंट फॉर्म भरवाने को कहा. छात्रों ने यह फॉर्म 17 नवंबर 2025 को विधिवत विभाग में जमा कर दिया. बावजूद इसके, विभाग द्वारा 20 दिसंबर 2025 को पुनः वही सूची जारी की गई, जिसमें फिर से उन्हीं 13 आरक्षित वर्ग के छात्रों को एफिलिएटेड कॉलेजों में ही आवंटित कर दिया गया.

छात्रों का कहना है कि सामाजिक विज्ञान संकाय के अन्य विभागों में कंसेंट के आधार पर छात्रों को DMC में रखा गया, लेकिन इतिहास विभाग द्वारा उनके मामले में कंसेंट को स्वीकार नहीं किया गया. इसके बाद उन्होंने पुनः छात्र कल्याण अधिष्ठाता और कुलपति को आवेदन दिया, परंतु वहां से भी कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला.

धरनारत छात्रों का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान वे पिछले 10 महीनों से मानसिक उत्पीड़न, जातिगत भेदभाव और गंभीर शैक्षणिक नुकसान झेल रहे हैं. विवश होकर उन्होंने 22 दिसंबर से धरना आंदोलन शुरू किया है.

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छात्रों की प्रमुख मांगें


जिन अभ्यर्थियों ने DMC में शुल्क जमा किया है, उन्हें मुख्य परिसर में ही रखा जाए.

10 माह बाद किया गया एफिलिएटेड कॉलेजों में स्थानांतरण तत्काल निरस्त किया जाए.

मांगों के समाधान तक प्रवेश प्रक्रिया पर अस्थायी रोक लगाई जाए.

फिलहाल छात्रों का धरना जारी है और विश्वविद्यालय प्रशासन की चुप्पी से आक्रोश बढ़ता जा रहा है. यदि शीघ्र समाधान नहीं निकला, तो आंदोलन के और तेज होने की आशंका जताई जा रही है.

मोदी के जन्मदिन पर 1076 बेटियों ने दी शुभकामना
मोदी के जन्मदिन पर 1076 बेटियों ने दी शुभकामना
वाराणसी: प्रधानमंत्री एवं वाराणसी के सांसद नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन पर बुधवार को परमानंदपुर मिनी स्टेडियम में खेल प्रतिभाओं का अनूठा संगम देखने को मिला. जन्मदिन समारोह में 1076राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की बालिका खिलाड़ियों के साथ विकास इंटर कॉलेज, परमानंदपुर की छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की. बड़ी संख्या में बेटियों की मौजूदगी से पूरा स्टेडियम उत्सव के रंग में रंगा नजर आया.कार्यक्रम के दौरान बालिका खिलाड़ियों और छात्राओं में खासा उत्साह रहा. खेल मैदान से लेकर समारोह स्थल तक बेटियों की सक्रिय भागीदारी ने आयोजन को विशेष बना दिया. कार्यक्रम के समापन पर बालिकाओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशाल कटआउट के साथ तस्वीरें खिंचवाईं और सेल्फी लेकर इस यादगार अवसर को कैमरे में कैद किया. इसके बाद एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर जन्मदिन की खुशियां साझा कीं.कार्यक्रम के संयोजक हॉकी वाराणसी के अध्यक्ष एवं विकास एजुकेशनल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. एके सिंह ने कहा कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद देश में खेलों को बढ़ावा देने की दिशा में कई प्रयास हुए हैं. इससे खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के लिए नए अवसर मिले हैं और खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन मिला है.उन्होंने कहा कि बेटियों की खेलों में बढ़ती भागीदारी देश के लिए सकारात्मक संकेत है. राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाली खिलाड़ियों के साथ छात्राओं की सहभागिता से नई पीढ़ी को खेलों के प्रति प्रेरणा मिलेगी.ALSO READ:रथयात्रा के बंद मकान में चल रहा था जुए का अड्डा, 47 लोग गिरफ्तारसमारोह में 1076 बालिका खिलाड़ियों की भागीदारी आयोजन का प्रमुख आकर्षण रही. खेल और युवा प्रतिभाओं को केंद्र में रखकर आयोजित इस कार्यक्रम ने बेटियों की प्रतिभा, उत्साह और खेलों के प्रति उनके बढ़ते रुझान को सामने रखा.
रथयात्रा के बंद मकान में चल रहा था जुए का अड्डा, 47 लोग गिरफ्तार
रथयात्रा के बंद मकान में चल रहा था जुए का अड्डा, 47 लोग गिरफ्तार
वाराणसी: सिगरा थाना क्षेत्र के रथयात्रा इलाके में पुलिस और SOG-2 की टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए बंद मकान में चल रहे जुए के अड्डे का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने मौके से 47 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से करीब 10 लाख रुपये नकद, कई वाहन, मोबाइल फोन और अन्य सामान बरामद किया गया है।डीसीपी क्राइम नीतू काद्यान की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, रथयात्रा के पास एक मकान में बाहर से ताला लगाकर अंदर जुआ खेले जाने की सूचना पुलिस को मिल रही थी। इसके बाद टीम ने करीब तीन से चार दिन तक मकान की गतिविधियों पर नजर रखी। जब अंदर बड़ी संख्या में लोग जुटे तो SOG-2 और सिगरा पुलिस की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से छापा मारा। कार्रवाई के दौरान 47 लोगों को जुआ खेलते हुए पकड़ा गया।पुलिस की जांच में सामने आया कि विशाल सिंह नाम के व्यक्ति ने मकान को लीज पर लिया था। पुलिस के अनुसार, इसी मकान से जुए का संचालन किया जा रहा था। पकड़े गए लोगों में वाराणसी के साथ आसपास के जनपदों के लोग भी शामिल हैं।पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों के आपराधिक इतिहास और पूरे नेटवर्क से जुड़े लोगों की जानकारी जुटा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, मामले में संगठित अपराध समेत अन्य धाराओं में सख्त कार्रवाई की जाएगी। आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की तैयारी भी की जा रही है।ALSO READ:आईएमएस के वार्षिक दिवस समारोह को लेकर बैठक, स्वास्थ्य मेले में एआई और आईआईटी की तकनीकी मदद लेने पर जोरडीसीपी क्राइम नीतू काद्यान ने बताया कि मामले में अभी जांच जारी है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और जल्द ही इस पूरे मामले की विस्तृत जानकारी मीडिया के सामने प्रस्तुत की जाएगी।
आईएमएस के वार्षिक दिवस समारोह को लेकर बैठक, स्वास्थ्य मेले में एआई और आईआईटी की तकनीकी मदद लेने पर जोर
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वाराणसी : काशी हिंदू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान (IMS-BHU) में आगामी वार्षिक दिवस समारोह को लेकर बुधवार को कमेटी की बैठक आयोजित की गई। आईएमएस कमेटी रूम में हुई बैठक की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक प्रो. एस.एन. शंखवार ने की। बैठक में पिछले वर्ष के कार्यक्रम की समीक्षा के साथ इस वर्ष आयोजित होने वाले स्वास्थ्य मेले को और अधिक उपयोगी एवं जनसुलभ बनाने को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।कार्यक्रम समन्वयक प्रो. टी.पी. चतुर्वेदी ने पिछले वर्ष आयोजित कार्यक्रम की गतिविधियों और अनुभवों की समीक्षा प्रस्तुत की। इसके बाद इस वर्ष के स्वास्थ्य मेले के समन्वयक प्रो. वी.एन. मिश्रा के साथ जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारियों पर चर्चा हुई।स्वास्थ्य मेले में एआई और आईआईटी की तकनीकी मददप्रो. वी.एन. मिश्रा ने बताया कि इस वर्ष महामना के उद्देश्यों के अनुरूप स्वास्थ्य मेले को और व्यापक बनाने के लिए चिकित्सा विज्ञान संस्थान के साथ आईआईटी-बीएचयू की तकनीकी विशेषज्ञता का सहयोग लिया जाएगा। इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अन्य तकनीकी संसाधनों का भी उपयोग किए जाने की योजना है।बैठक में निदेशक प्रो. एस.एन. शंखवार ने कहा कि स्वास्थ्य मेले के माध्यम से काशी की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। लोगों के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था के साथ आधुनिक चिकित्सा, आयुर्वेद और डेंटल चिकित्सा के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा स्वास्थ्य संबंधी उचित परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा।कमेटी सदस्यों ने दिए सुझावबैठक में मेडिसिन संकाय प्रमुख प्रो. संजय गुप्ता, आयुर्वेद संकाय प्रमुख प्रो. मूर्ति, डेंटल संकाय प्रमुख प्रो. अतुल भटनागर, प्रो. भुवाल राम और प्रो. एस.के. भारती समेत कमेटी के अन्य पदाधिकारियों ने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए अपने सुझाव दिए।ALSO READ :लोहता में बुनकरों के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर शुरू, विशेषज्ञ डॉक्टर देंगे परामर्श...इस अवसर पर प्रो. वी.एम. सिंह, वैद्य सुशील दुबे, डॉ. अखिलेश चन्द्र, डॉ. महेश, प्रो. संगीता, डॉ. नीरज त्रिपाठी, डॉ. संतोष सिंह और प्रो. अजय पांडे समेत अन्य कमेटी पदाधिकारी मौजूद रहे। बैठक में स्वास्थ्य मेले को अधिक प्रभावी, तकनीक आधारित और आम जनता के लिए उपयोगी बनाने पर विशेष जोर दिया गया।