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वाराणसी में वायु गुणवत्ता सुधार पर ठोस रणनीति तैयार करने का सुझाव, नगर निगम में मंथन

वाराणसी में वायु गुणवत्ता सुधार पर ठोस रणनीति तैयार करने का सुझाव, नगर निगम में मंथन
Dec 27, 2025, 07:56 AM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी - शहर में बढ़ती वायु प्रदूषण की चुनौतियों और प्रभावी वायु गुणवत्ता प्रबंधन को लेकर ठोस रणनीति तैयार करने का सुझाव दिया गया. नगर आयुक्‍त हिमांशु नागपाल की अध्‍यक्षता में International Forum for Environment, Sustainability and Technology (iFOREST) तथा विभिन्न विभागों और बहु-हितधारकों की बैठक में इस समस्‍या पर मंथन किया गया. इसमें iFOREST द्वारा वाराणसी शहर की वर्तमान वायु गुणवत्ता स्थिति, प्रमुख प्रदूषण स्रोतों, डेटा आधारित चुनौतियों और सुधार हेतु चल रहे प्रयासों पर विस्तृत प्रजेंटेशन दिया गया. चर्चा का मुख्य उद्देश्य शहर के वायु गुणवत्ता प्रबंधन तंत्र को और अधिक मजबूत करना तथा दीर्घकालिक समाधान की दिशा में ठोस रणनीति तैयार करना रहा.


इस बात पर दिया गया जोर


iFOREST उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) एवं उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यावरण निदेशालय के सहयोग से प्रदेशभर में वायु गुणवत्ता प्रबंधन को सुदृढ़ करने की दिशा में कार्य कर रहा है. वाराणसी को लेकर भी वैज्ञानिक डेटा, निगरानी तंत्र और समन्वित कार्ययोजना पर विशेष जोर दिया गया.

बैठक में नगर निगम वाराणसी के अधिकारियों के साथ क्षेत्रीय प्रबंधक उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, क्षेत्रीय पीसीबी, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण वाराणसी, विद्युत सुरक्षा विभाग, जिला आपूर्ति विभाग, वाराणसी विकास प्राधिकरण, जल निगम (नगरीय), राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण सहित अन्य संबंधित विभागों के प्रतिनिधि मौजूद रहे.


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ग्राउंड लेवल पर क्रियान्‍वयन


नगर आयुक्त ने सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय, डेटा साझा करने और जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि स्वच्छ वायु नागरिकों के स्वास्थ्य से सीधे जुड़ा विषय है, जिस पर नगर निगम निरंतर प्राथमिकता के साथ कार्य कर रहा है. अगली बैठक को लेकर बिंदु तय किए गए.

वाराणसी में दृष्टि बाधित फुटबॉल प्रतियोगिता, गेंद में बंधे घुंघरू की आवाज से अंदाजा लगा गोल करेंगे
वाराणसी में दृष्टि बाधित फुटबॉल प्रतियोगिता, गेंद में बंधे घुंघरू की आवाज से अंदाजा लगा गोल करेंगे
वाराणसी : दिव्यांग खेलों को बढ़ावा देने के लिए अखिल भारतीय दृष्टि बाधित फुटबॉल प्रतियोगिता वाराणसी के सिगरा स्थित डॉ. संपूर्णानंद स्पोर्ट्स स्टेडियम में होगी. ऑल इंडिया दिव्यांग एसोसिएशन के डॉ उत्तम ओझा ने बताया कि इसमें खास तरह के फुटबॉल का प्रयोग होगा. गेंद के अंदर विशेष घुंघरू लुढ़कने पर आवाज करती है. खिलाड़ी गेंद की आवाज के आधार पर गेंद का अंदाजा लगाकर गोल करने का प्रयास करते हैं.नवंबर में प्रस्तावित इस प्रतियोगिता में देश के सात राज्यों के 56 फुटबॉलर खेलेंगे. उन्होंने आगे बताया कि गेंद सामान्य फुटबॉल से भारी होती है. इसमें उछाल कम होता है. इसे ही दृष्टि बाधित फुटबॉल (ब्लाइंड फुटबॉल) या 5-ए-साइड फुटबॉल भी कहा जाता है. यह फुटबॉल पूरी तरह से या आंशिक रूप से भी देखने में अक्षम खिलाड़ी के लिए डिजाइन की गई है. इसकी प्रतियोगिता इंटरनेशनल ब्लाइंड स्पोर्ट्स फेडरेशन (आईबीएसए) के नियमों के तहत खेली जाती है. एक समय में प्रत्येक टीम के पांच-पांच खिलाड़ी मैदान पर होते हैं. चार खिलाड़ी पूरी तरह दृष्टि बाधित होते हैं. खेलने के दौरान चार खिलाड़ियों को अपनी आंखों पर आई-पैच (आई-ब्लाइंडफोल्ड) पहनना अनिवार्य है. गोलकीपर पूरी तरह से देखने में सक्षम होता है. वह डी-एरिया से बाहर नहीं निकल सकता और न ही गोल पोस्ट छोड़कर बाहर खेल सकता है.खिलाड़ियों को गाइड करते हैं तीन कोच मैदान पर खिलाड़ियों की मदद के लिए तीन गाइड होते हैं जो आवाज देकर खिलाड़ियों को बताते हैं कि उन्हें कहां जाना है और कब बॉल किक करनी है. दृष्टि बाधित फुटबॉल में 30 मिनट के मैच में 15-15 मिनट के दो हाफ होते हैं. कोच मिडफील्ड मैदान से खिलाड़ियों को निर्देश देते हैं.ALSO READ : गंगा की लहरों पर तिरंगा, राफेल-सुखोई और तेजस की गर्जना से गूंजा आसमानबिना बोले गेंद पर अटैक करने पर होता है फाउलजब भी कोई डिफेंडर (रक्षा करने वाला खिलाड़ी) गेंद छीनने के लिए आगे बढ़ता है, तो उसे स्पष्ट आवाज में वोई या गो अनिवार्य रूप से बोलना होता है. स्पेनिश शब्द वोई का अर्थ है मैं आ रहा हूं. ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि गेंद लेकर जा रहे खिलाड़ी को पता चल सके कि कोई सामने से आ रहा है. वोई नहीं बोलने पर फाउल दिया जाता है.दर्शकों के लिए भी होती है गाइडलाइनदृष्टि बाधित फुटबॉल में दर्शकों के लिए भी गाइडलाइन होती है. इसमें दर्शक ज्यादातर शांत रहते हैं. इसमें दर्शक तभी शोर या जश्न मना सकते हैं जब कोई टीम गोल करती है. ऐसा इसलिए कि खिलाड़ी गेंद की आवाज और अपने गाइड के निर्देशों को साफ-साफ सुन सकें और कमांड के आधार पर खेल को किक कर सके.प्रदेश में पहला आयोजनआयोजन सचिव डॉ. संजय चौरसिया ने बताया कि प्रदेश में पहली बार दिव्यांग खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए फुटबॉल प्रतियोगिता वाराणसी के सिगरा स्टेडियम में कराई जाएगी. इसमें स्थानीय फुटबॉल संघ से मदद ली जाएगी. इससे दिव्यांग खिलाड़ियों में भी लोगों में खेल के प्रति जुनून बढ़ेगा और वे प्रेरित होंगे.
गंगा की लहरों पर तिरंगा, राफेल-सुखोई और तेजस की गर्जना से गूंजा आसमान
गंगा की लहरों पर तिरंगा, राफेल-सुखोई और तेजस की गर्जना से गूंजा आसमान
वाराणसी : नमो घाट पर शनिवार को एयर शो के दूसरे दिन आसमान में भारतीय वायुसेना के विमानों की गर्जना गूंज उठी. गंगा की लहरों के ऊपर हेलिकॉप्टर से तिरंगा प्रदर्शन और राफेल, सुखोई व तेजस लड़ाकू विमानों के हैरतअंगेज कलाबाजियों ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया. नमो घाट से लेकर अस्सी घाट तक एयर शो देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ी. विमानों के करतब देखकर कहीं तालियां गूंजती रहीं, तो कहीं लोग मोबाइल से इन यादगार पलों को कैमरे में कैद करते नजर आए.म‍िड एयर रिफ्यूलिंग का प्रदर्शनआयोजन जब अपने समाप्‍त‍ि की ओर पहुंचा तो बीच हवा में भारी भरकम टैंकर व‍िमान के पीछे राफेल व‍िमान उड़ते नजर आए. दो पाइपों के सहारे बीच हवा में पर्याप्‍त दूरी बनाकर व‍िमान एक समान गत‍ि से उड़े और म‍िड एयर रिफ्यूलिंग का प्रदर्शन क‍िया गया. इस प्रकार के फार्मेशन के माध्‍यम से भारतीय वायु सेना ने प्रदर्श‍ित कि‍या क‍ि लंबी दूरी में जंग के दौरान व‍िमानों को उतरने की जरूरत नहीं होगी और बीच हवा में ईंधन भरा जा सकता है. इससे लंबी दूरी की मारक क्षमता का भी भारतीय वायु सेना की दक्षता साब‍ित होती है.ALSO READ : रामनगर रामलीला में हाथी के हमले में घायल महावत की मौत, 18 अक्टूबर को हुई थी घटनादर्शक हुए रोमांचितएयर शो शुरू होते ही नमो घाट पर उत्साह का माहौल बन गया. आसमान में तेज गर्जना के साथ लड़ाकू विमानों ने अपनी रफ्तार और कौशल का प्रदर्शन किया. राफेल के हवा में अचानक मुड़ने, नीचे की ओर आने और फिर तेजी से ऊंचाई पकड़ने जैसे करतबों ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया. वहीं, सुखोई के हवाई करतबों ने भी लोगों का ध्यान खींचा. तेजस की दमदार गर्जना से गंगा के घाट गूंज उठे.इस दौरान भारतीय सेना का हेलिकॉप्टर तिरंगा लेकर गंगा के ऊपर से गुजरा. आसमान में लहराते तिरंगे को देखकर घाटों पर मौजूद लोगों में खासा उत्साह दिखाई दिया. लोगों ने तालियां बजाकर इस दृश्य का स्वागत किया. एयर शो के दौरान नमो घाट पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया, जिससे आयोजन का उत्साह और बढ़ गया. एयर शो को लेकर शहर के गंगा घाटों पर सुबह से ही लोगों की भीड़ जुटने लगी. नमो घाट, अस्सी घाट समेत विभिन्न घाटों पर लोग विमानों के करतब देखने पहुंचे. कई लोगों ने अपने घरों की छतों से भी एयर शो का आनंद लिया. शहर के 84 गंगा घाटों पर सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के मद्देनजर बैरिकेडिंग की गई है. नमो घाट पर भारतीय रेलवे के अधिकारियों और उनके परिजनों के लिए अलग से बैठने की व्यवस्था की गई है. वहीं, मीडियाकर्मियों और अन्य दर्शकों के लिए भी अलग-अलग इंतजाम किए गए हैं. एयर शो देखने के लिए एनसीसी कैडेट्स भी पहुंचे. पूरे आयोजन के दौरान काशीवासियों में देशभक्ति और रोमांच का माहौल देखने को मिला.हर पल को बनाया यादगारगंगा के ऊपर भारतीय तिरंगे का प्रदर्शन, लड़ाकू विमानों की गर्जना और आसमान में उनके हैरतअंगेज करतबों ने एयर शो के दूसरे दिन को यादगार बना दिया. घाटों पर उमड़ी भीड़ और दर्शकों का उत्साह इस आयोजन के प्रति लोगों के आकर्षण को दर्शाता रहा. मणिकर्णिका घाट पर जलती चिता के सामने भी लोग एयर शो का लुत्फ उठाते हुए काशी में नजर आए. वहीं दशाश्वमेध घाट पर नाव पर बैठकर देखने में जो आनंद पब्लिक को आ रहा है वह नमो घाट पर नहीं आ रहा है. कुछ इसी तरह के भाव से पर्यटक भी अन्‍य घाटों पर भरे नजर आए. जबक‍ि गंगा में नमो घाट की ओर नौका संचालन पर प्रत‍िबंध होने से नाव‍िक कुछ उदास भी दिखे.
रामनगर रामलीला में हाथी के हमले में घायल महावत की मौत, 18 अक्टूबर को हुई थी घटना
रामनगर रामलीला में हाथी के हमले में घायल महावत की मौत, 18 अक्टूबर को हुई थी घटना
वाराणसी : रामनगर की रामलीला में हाथी के हमले में घायल महावत घपलू नट उर्फ छपलू की आजमगढ़ के निजी अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई. 18 अक्टूबर को हाथी को नहलाने ले जाते समय हाथी अचानक बेकाबू हो गया था और उसने महावत को सूंड से उठाकर जमीन पर पटक दिया था. गंभीर रूप से घायल होने के बाद संक्रमण फैलने से डॉक्टरों को उसका बायां पैर काटना पड़ा, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका.घपलू चार भाइयों में तीसरे नंबर पर था. उसको चार साल का बेटा है. उसकी मौत से पत्नी सरीकुन और मां कलावती का रो-रोकर बुरा हाल है. परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है और घटना से गांव में शोक का माहौल है.ALSO READ : वाराणसी एयर शो: दूसरे दिन चरमराई यातायात व्यवस्था, शहर में लगा भीषण जाम, रहगीर परेशानगत 18 अक्‍टूबर को रामनगर में उस समय हड़कंप मच गया था, जब रामलीला में आया हाथी अचानक बेकाबू होकर इधर-उधर भागने लगा. हाथी का उत्‍पात देख लोगों में भगदड़ मच गई. महावत ने उसे काबू करने की कोशिश की, लेकिन हाथी ने उसे पटक दिया, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया. उसका इलाज अस्पताल में चल रहा था. हाथी को आजमगढ़ से रामलीला में लाया गया था, जहां वह पंचवटी मैदान से निकलकर सड़क पर भागने लगा. 12 घंटे बाद थककर एक जगह हाथी रुक गया. मौके पर वन विभाग के कर्मी व पुलिस फोर्स मौजूद रहे. इसके साथ ही गोरखपुर से भी वन विभाग की स्पेशल टीम पहुंची. हाथी पर मशक्‍कत के बाद काबू पाया जा सका. हाथी के हमले में घायल महावत को 50 टांके लगे थे. हाथी के बेकाबू होने की वजह से रविवार को लीला भी प्रभावित हुई. लीला का मंचन नहीं हुआ, बल्कि भगवान की आरती हुई थी.