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42 डिग्री पार तापमान ने रोकी काशी की रौनक, सूने पड़े घाट, पर्यटक मायूस

42 डिग्री पार तापमान ने रोकी काशी की रौनक, सूने पड़े घाट, पर्यटक मायूस
Apr 16, 2026, 10:02 AM
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Posted By Preeti Kumari

Temperatures exceeding 42 degrees have dampened the spirit of Kashi, leaving the ghats desolate and tourists disappointed.


वाराणसी: भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान ने इन दिनों काशी की रौनक पर असर डालना शुरू कर दिया है. वाराणसी का तापमान 42 डिग्री के पार पहुंच चुका है, जिसका सीधा असर यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों पर देखने को मिल रहा है. जो घाट आम दिनों में श्रद्धालुओं, पर्यटकों और नौकायन करने वालों से गुलजार रहते थे, वहां अब सन्नाटा पसरा नजर आ रहा है.


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तेज धूप और लू जैसे हालात योजनाओं पर फेर रहे पानी


काशी आने वाले लोग मां गंगा में स्नान, बाबा विश्वनाथ के दर्शन और गंगा में नौकायन की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, लेकिन तेज धूप और लू जैसे हालात ने उनकी योजनाओं पर पानी फेर दिया है. दिन चढ़ते ही घाटों पर लोगों की आवाजाही कम हो जा रही है और कई जगह दोपहर में वीरानी जैसे हालात दिखाई दे रहे हैं. गर्मी का असर सिर्फ इंसानों पर ही नहीं बल्कि पशु-पक्षियों और जलचरों पर भी पड़ रहा है. तपती धूप से जानवर भी छांव तलाशते नजर आ रहे हैं, जबकि गंगा किनारे भी सामान्य चहल-पहल कम दिख रही है.


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कुछ श्रद्धालुओं ने बताया कि सोशल मीडिया और तस्वीरों में जिस काशी को देखा था, यहां उस तरह की भीड़ और रौनक इस समय देखने को नहीं मिली. उनका कहना है कि मौसम सामान्य होता तो घाटों का नजारा कुछ और ही होता. दिन के समय भवनों और सड़कों से निकलती गर्मी ने हालात और मुश्किल बना दिए. लोगों को ऐसा महसूस हुआ मानो चारों ओर से गर्म हवा का थपेड़ा मिल रहा हो. पछुआ हवा के बंद रहने से राहत नहीं मिलती दिखाई पड रही है. हवा में नमी का स्तर भी सीमित रहा, जिससे गर्मी और अधिक तीखी महसूस हुई.


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वाराणसी में MSME की ‘गुड़िया एवं खिलौना’ कार्यशाला, 200 से अधिक लाभार्थियों को मिला पैकेजिंग प्रशिक्षण
वाराणसी में MSME की ‘गुड़िया एवं खिलौना’ कार्यशाला, 200 से अधिक लाभार्थियों को मिला पैकेजिंग प्रशिक्षण
वाराणसी : सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के अंतर्गत एमएसएमई विकास कार्यालय, वाराणसी द्वारा भारतीय पैकेजिंग संस्थान के सहयोग से ‘गुड़िया एवं खिलौना’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला एवं पैकेजिंग वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया.कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को आधुनिक पैकेजिंग तकनीकों से अवगत कराना और उनके उत्पादों की गुणवत्ता एवं बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बढ़ाना रहा.कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को बताया गया कि आकर्षक और गुणवत्तापूर्ण पैकेजिंग किसी भी उत्पाद की बिक्री बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. बेहतर पैकेजिंग से उत्पाद की प्रस्तुति मजबूत होती है और उपभोक्ताओं के बीच उसकी स्वीकार्यता भी बढ़ती है. इस अवसर पर सरकार द्वारा खिलौना उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी दी गई. विशेषज्ञों ने बताया कि प्रशिक्षण और तकनीकी ज्ञान के माध्यम से कारीगर अपने उत्पादों को बेहतर बना सकते हैं और बाजार में अपनी पहचानमजबूत कर सकते हैं.बीएचयू में प्राचीन भारतीय मुद्राओं पर कार्यशाला आरंभ, छात्र टकसाल तकनीक से होंगे रूबरूकार्यक्रम में सहायक निदेशक राजेश कुमार चौधरी एवं निदेशक, एमएसएमई विकास कार्यालय, प्रयागराज एल.बी.एस. यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही. तकनीकी सत्र के दौरान भारतीय पैकेजिंग संस्थान के विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को आधुनिक पैकेजिंग तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया.इस कार्यशाला में 200 से अधिक प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के लाभार्थियों ने भाग लिया. प्रतिभागियों ने सरकार की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से उन्हें नई तकनीकों की जानकारी मिलती है, जिससे वे अपने उत्पादों की गुणवत्ता और विपणन क्षमता में सुधार कर पा रहे हैं.विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से स्थानीय हस्तशिल्प और खिलौना उद्योग को नई दिशा मिलेगी और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.
बीएचयू में प्राचीन भारतीय मुद्राओं पर  कार्यशाला आरंभ, छात्र टकसाल तकनीक से होंगे रूबरू
बीएचयू में प्राचीन भारतीय मुद्राओं पर कार्यशाला आरंभ, छात्र टकसाल तकनीक से होंगे रूबरू
वाराणसी : बीएचयू के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग में गुरुवार को "भारतीय ज्ञान परम्परा (IKS) के परिप्रेक्ष्य में प्राचीन भारतीय मुद्राएँः स्रोत, लिपि एवं टकसाल तकनीक" विषय पर आयोजित सात दिवसीय राष्ट्रीय हैंड्स-ऑन कार्यशाला का शुभारंभ किया गया. कला संकाय के प्रेमचंद सभागार में यह कार्यशाला महान इतिहासकार एवं मुद्राविद् स्वर्गीय. ए. के. नारायण की जन्मशती के उपलक्ष्य में आयोजित की जा रही है.कार्यक्रम का शुभारंभ परंपरागत दीप प्रज्वलन एवं महामना पं. मदन मोहन मालवीय तथा प्रो. ए. के. नारायण की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुआ. प्रदर्शन कला संकाय के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत कुलगीत ने कार्यक्रम को गरिमामय वातावरण प्रदान किया.इस अवसर पर विभागाध्यक्ष प्रो. एम. पी. अहीरवार ने स्वागत भाषण देते हुए भारतीय इतिहास के आर्थिक एवं सांस्कृतिक पुनर्निर्माण में मुद्राशास्त्र के महत्व को रेखांकित किया. उन्होंने बताया कि यह कार्यशाला जन्मशती वर्ष के अंतर्गत आयोजित होने वाला सातवाँ शैक्षणिक आयोजन है. तत्पश्चात मंचासीन अतिथियों का विभागीय शिक्षकों द्वारा सम्मान किया गया. कार्यशाला की संयोजिका प्रो. मीनाक्षी सिंह ने कार्यशाला के उद्देश्यों एवं रूपरेखा पर प्रकाश डाला. अमितेश्वर झा, पूर्व निदेशक, आईआईआरएनएस, नासिक ने भारत में मुद्राशास्त्र के विकास एवं प्रगति पर प्रकाश डालते हुए वैज्ञानिक तकनीकों एवं अंतःविषयक दृष्टिकोण के बढ़ते उपयोग को रेखांकित किया.मनीष वर्मा, क्यूरेटर, हिंदुजा फाउंडेशन ने हिंदुजा फाउंडेशन द्वारा 34,000 से अधिक सिक्कों के संग्रह के संरक्षण एवं संकलन कार्य की जानकारी दी. भारतीय मुद्रा परिषद् के अध्यक्ष प्रो. पी. एन. सिंह ने विशिष्ट अतिथि के रूप में अपने संबोधन में विभाग सहित विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों को समाज द्वारा प्रदान किए जा रहे सहयोग, शोध गतिविधियों एवं शैक्षिक कार्यक्रमों की चर्चा की. मुख्य अतिथि प्रो. कमल शील, पूर्व रेक्टरकाशी हिन्दू विश्वविद्यालयने अपने उद्बोधन में अपने पिता के एक मुद्राविद् के रूप में विद्वतापूर्ण जीवन-यात्रा का उल्लेख करते हुए उनके योगदान को स्मरण किया तथा ऐसे आयोजनों की शैक्षणिक महत्ता पर बल दिया.कार्यक्रम की अध्यक्षता कला संकाय की अधिष्ठाता प्रो. सुषमा घिल्डियाल ने की. अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने वर्तमान समय में निम्न मूल्यवर्ग की मुद्रा के अवमूल्यन की समस्या पर विचार व्यक्त करते हुए छात्रों को मुद्रा इतिहास के प्रति गंभीर अध्ययन हेतु प्रेरित किया. कार्यक्रम का समापन डॉ. प्रियंका सिंह द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ. तत्पश्चात उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग के सहयोग से आयोजित प्रदर्शनी का उ‌द्घाटन किया गया, जिसमें पुरातात्विक एवं मुद्राशास्त्रीय धरोहर से संबंधित चित्रात्मक पैनलों का प्रदर्शन किया गया.also read:वाराणसी में अंतरराष्‍ट्रीय स्‍टेडियम के लिए चौड़ी होंगी सडकें, भूमि अधिग्रहण शुरूइस अवसर पर विभाग के शिक्षकगण- प्रो. पी. के. श्रीवास्तव, प्रो. अर्चना शर्मा, प्रो. सुजाता गौतम, प्रो. अर्पिता चटर्जी, डॉ. विकास कुमार सिंह, डॉ. अमित उपाध्याय, डॉ. उमेश कुमार सिंह, डॉ. सुजीत कुमार सिंह, डॉ. सर्वेश कुमार, डॉ. उपेंद्र कुमार एवं डॉ. विराग गोपाल सोंटक्के सहित अन्य उपस्थित रहे.दोपहर पश्चात कार्यशाला का द्वितीय सत्र आरंभ हुआ, जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठतम मुद्राविद् प्रो. ओ. एन. सिंह ने की. इस सत्र में श्री अमितेश्वर झा ने व्याख्यान प्रस्तुत कर प्रतिभागियों को मुद्राशास्त्र के विविध आयामों से अवगत कराया. यह कार्यशाला देश के विभिन्न भागों से आए प्रतिभागियों की सहभागिता के साथ 22 अप्रैल 2026 तक आयोजित की जाएगी, जिसमें व्याख्यान, व्यावहारिक सत्र एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्मिलित हैं.
वाराणसी में अंतरराष्‍ट्रीय स्‍टेडियम के लिए चौड़ी होंगी सडकें, भूमि अधिग्रहण शुरू
वाराणसी में अंतरराष्‍ट्रीय स्‍टेडियम के लिए चौड़ी होंगी सडकें, भूमि अधिग्रहण शुरू
Roads to be widened for international stadium in Varanasi, land acquisition beginsवाराणसी: गंजारी में रिंग रोड के किनारे अंतरराष्ट्रीय स्तर के क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण तेजी से चल रहा है. इस वर्ष के अंत तक स्टेडियम तैयार होने की उम्‍मीद है. उसके बाद अगले वर्ष के प्रारंभ में कोई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच भी हो सकता है. मैच के दौरान क्रिकेट प्रेमियों की भारी भीड़ आएगी तब यातायात का काफी दबाव होगा. इसे देखते हुए सरकार स्टेडियम की तरफ जाने वाली सड़कें चौड़ी कर रही है. इस क्रम में दो सड़कों के चौड़ीकरण के लिए भूमि अर्जन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.डीएम सत्येंद्र कुमार का बड़ा आदेशजिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार के आदेश पर भूमि अर्जन पुनर्वासन व पुनर्व्यस्थापन प्राधिकरण ने पारदर्शिता के साथ उचित प्रतिकर देने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है. इसका सामाजिक और आर्थिक प्रभाव पड़ेगा. इसका अध्ययन किया जाएगा. इसमें पहली सड़क हरसोस-सूईचक-गंगापुर मार्ग के चैनेज 3.030 का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण किया जाना है. इसके लिए राजातालाब तहसील के प्रस्तावित ग्रामसभा हरसोस, गंजारी, सूईचक व टेकीकहार से 3.0154 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जाएगी. दूसरी सड़क लहरतारा-कोटवा-कोरउत-परमपुर-अकेलवा मार्ग है.Also read: धुरंधर 2 का हमजा अली मजारी निकला "शिवभक्त", रणवीर सिंह का खुला सीक्रेटइसके लिए चैनेज 12.00 से 14.500 तक चौड़ीकरण होना है. इसके लिए .5232 हेक्टेयर भूमि का ग्राम रामरायपुर, दयापुर, चकदीहराम, टेकीकहार एवं सुईचक से भूमि अर्जन होगा. इसके लिए भूमि का चयन कर लिया गया है. सभी भूमि सहमति और समझौते के आधार पर अर्जित की जाएगी. इसके लिए रांची की संस्था एटलस मैनेजमेंट कंसल्टिंग सर्विस प्राइवेट लिमिटेड सामाजिक प्रभाव का अध्ययन करेगी. निश्चित रूप से इन सड़कों के भविष्य में बन जाने के साथ आवागमन सुविधाजनक होगा. शहर की आवास योजनाओं के विकास व विस्तार के नए द्वार खुलेंगे.https://www.youtube.com/watch?v=cM88diRYbDs