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मासूमों के साथ दरिंदगी का अंजाम अंदाज से भी खौफनाक...

मासूमों के साथ दरिंदगी का अंजाम अंदाज से भी खौफनाक...
Aug 28, 2026, 08:51 AM
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Posted By gagan arora

वाराणसी : इंस्टाग्राम के माध्यम से नाबालिग बच्ची का अश्लील वीडियो प्रसारित करने के आरोप में पुलिस ने जैतपुरा थाना क्षेत्र के हिस्तल्ले निवासी मो. नईम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. इस मामले में कार्रवाई गृह मंत्रालय के साइबर क्राइम पोर्टल के माध्यम से साइबर सेल वाराणसी को सूचना मिलने पर की गई. मुकदमा जैतपुरा थाना के साइबर प्रभारी सब इंस्पेक्टर हृदय लाल ने दर्ज कराया. उनके मुताबिक मासूम के साथ दुष्कर्म का 29 सेकेंड का वीडियो इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया गया था. यह कोई पहली घटना नहीं जिसमें मासूमों के साथ दरिंदगी करने वाले को उसके अंजाम तक पहुंचाया गया हो. ऐसे ही एक दरिंदे को कुछ दिनों पहले सीबीआई ने आजीवन कारावास की सजा दिलाई.


मासूम को बनाया था हवस का शिकार


लमही के रहने वाले रवि पटेल ने तीन साल तक एक मासूम को अपनी हवस का शिकार बनाया. उसे लगा कि उसका कुकर्म दुनिया से छुप गया लेकिन सीबीआई के स्पेशल ब्रांच को इसकी खबर लग गई. 11 साल की मासूम की जिंदगी बर्बाद करने वाले इस दरिंदे को सीबीआई की दिल्ली की टीम ने बनारस में दबोच लिया. उसके खिलाफ मजबूत साक्ष्य अदालत के समक्ष रखकर उसे आजीवन कारावास की सजा करा दी. यह सिर्फ घटना नहीं बल्कि उनके लिए चेतावनी है जो मासूम को पर अपनी गंदी नजर रखते हैं. उन्हें समझना होगा कि कोई भी गलत हरकत की तो सीबीआई की नजर से बच नहीं सकेंगे और जिंदगी जेल की सलाखों के पीछे गुजरेगी.


बालिका के साथ घिनौनी हरकत की वीडियो किया था पोस्ट


सीबीआई के जरिए गांडीव डिजिटल को मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2019 में 11 साल की बालिका सामान लेने के लिए पड़ोसी रवि कुमार पटेल की दुकान पर जाती थी. वहां रवि उसे अपने मोबाइल पर पोर्न वीडियो दिखाता था. एक दिन रवि ने बालिका के कपड़े हटाकर अपने मोबाइल से उसकी आपत्तिजनक फोटो लिया और वीडियो बनाया. इसे घरवालों को दिखाने की धमकी देकर बालिका के साथ दुष्कर्म किया. इसके बाद मासूम के साथ दरिंगी का सिलसिला तीन साल तक चलता रहा. रवि अपनी घिनौनी हरकतों की वीडियो भी अपने मोबाइल से बनाता था. उसने वीडियो को इंटरनेट पर भी पोस्ट कर दिया.


सीबीआई ने शुरू की मामले की जांच


बालिका का वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो गया. वर्ष 2022 में गुगल के जरिए इसकी जानकारी सीबीआई को मिली. सीबीआई की स्पेशल ब्रांच आनलाइन चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज एंड एक्सप्लाटेशन प्रिवेंशन यूनिट ने 27 जून 2022 को अज्ञात के खिलाफ नई दिल्ली मे मुकदमा दर्ज किया. जांच अधिकारी ब्रांच के तत्कालीन इंस्पेक्टर राबिन कुमार अत्याधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल करते हुए रवि कुमार पटेल तक पहुंच गए. 13 जुलाई 2022 को पकड़कर पूछताछ की तो उसने मासूम के साथ गलत हरकत को स्वीकार किया उसके बारे में जानकारी दी. सीबीआई टीम ने बालिका के मां से संपर्क करके उसके साथ हुई घिनौनी हरकत की जानकारी दी तो वह हतप्रभ रह गई. उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसकी बेटी के साथ रवि ऐसा कर सकता है. पीड़िता ने भी रवि की हरकतों की पूरी जानकारी सीबीआई को दी.

जांच अधिकारी राबिन कुमार ने छह सितंबर 2022 को अदालत में रवि कुमार पटेल के खिलाफ आरोपपत्र अदालत में दाखिल कर दिया. ठोस सबूतों को आधार पर अदालत ने 30 जुलाई 2026 को रवि पटेल को उम्रकैद की सजा सुनाई. गिरफ्तारी के बाद से ही वह जेल में बंद है.

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बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराध को रोकने के लिए बनी विशेष यूनिट

सीबीआई अधिकारियों ने गांडीव डिजिटल को बताया कि बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराध को रोकन के लिए सीबीआई की विशेष यूनिट आनलाइन चाइल्ड सेक्सुअल अब्यूज एंड एक्सप्लाटेशन प्रिवेंशन यूनिट की स्थापना नवंबर 2019 में नई दिल्ली में हुई. यह यूनिट इंटरनेट पर बाल यौन शोषण सामग्री के निर्माण, प्रसार, शेयरिंग, डाउनलोडिंग और इसे बढ़ावा देने वाली गतिविधियों पर पैनी नजर रखती है. यह देश के किसी भी कोने में फैले नेटवर्क पर कार्रवाई कर सकती है. बाल यौन शोषण से जुड़े साइबर अपराध अक्सर अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार तक फैले होते हैं, इसलिए यह यूनिट इंटरपोल और अन्य वैश्विक एजेंसियों से मिलने वाली सूचनाओं पर त्वरित कार्रवाई करती है.


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देश में कई दरिदों को पहुंचाया सलाखों के पीछे

सीबीआई की विशेष यूनिट ने देश और विदेश में फैले चाइल्ड पोर्नोग्राफी रैकेट को ध्वस्त करने के लिए कई अभियान चलाए. इनमें प्रमुख रूप से आपरेशन कार्बन', 'आपरेशन मेघ चक्र' और 'आपरेशन हॉक' रहे. आपरेशन कार्बन में नवंबर 2021 में सीबीआई ने देश के 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 76 से अधिक स्थानों पर एक साथ छापेमारी की थी. इसमें कई व्हाट्सएप, टेलीग्राम ग्रुप एडमिन गिरफ्तार किया गया. आपरेशन मेघ चक्र में सितंबर 2022 में सिंगापुर की इंटरपोल यूनिट और न्यूजीलैंड से मिले इनपुट के आधार पर 20 राज्यों के 59 ठिकानों पर छापेमारी की गई थी. क्लाउड-आधारित स्टोरेज का उपयोग करके 50 से अधिक संदिग्धों को पकड़ा गया था.


33 नाबालिगों के साथ दरिंदगी करने वाले जेई को दिलाई फांसी की सजा


20 फरवरी, 2026 को उत्तर प्रदेश के बांदा ज़िले की एक विशेष पॉक्सो अदालत ने करीब एक दशक तक 33 नाबालिगों से यौन हिंसा करने के आरोप में सिंचाई विभाग के जेई राम भवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को फांसी की सज़ा सुनाई. अदालत ने इसे 'रेयरेस्ट आफ द रेयर' श्रेणी का अपराध माना.

साथ ही कोर्ट ने राज्य और केंद्र सरकार को सर्वाइवर्स के परिजनों को 10-10 लाख रुपए मुआवज़ा देने का निर्देश भी दिया. इस मामले की जांच सीबीआई ने की थी. सीबीआई ने वर्ष 2020 में इस मामले में मुक़दमा दर्ज किया था.

अन्विति में ‘रंगों की उड़ान’ ने भरी कल्पनाओं में उड़ान, हिंदी दिवस कार्यक्रम के अतिथि होंगे संजय मिश्रा...
अन्विति में ‘रंगों की उड़ान’ ने भरी कल्पनाओं में उड़ान, हिंदी दिवस कार्यक्रम के अतिथि होंगे संजय मिश्रा...
वाराणसी : काशी हिंदू विश्वविद्यालय में आयोजित ‘अन्विति हिंदी सप्ताह’ के पांचवें दिन शनिवार को ‘रंगों की उड़ान’ चित्रकला प्रतियोगिता के साथ कार्यक्रमों की श्रृंखला आगे बढ़ी. जंतु विज्ञान विभाग के एसपीआरसी हाल में आयोजित प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने शब्दों के बजाय रंगों और रेखाओं के माध्यम से विज्ञान, तकनीक, पर्यावरण और भविष्य की अपनी कल्पनाओं को कैनवास पर उकेरा.हिंदी प्रकाशन समिति की ओर से आयोजित ‘अन्विति’ के तहत यह पांचवां और अंतिम कार्यक्रम रहा. प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों की कलाकृतियों में वर्ष 2200 का मंगल, ऑक्सीजन सिलेंडरों वाले शहर, हरित गुंबदनुमा आवास, भारतीय ध्वज फहराते अंतरिक्ष यात्री, रोबोट, उड़न तश्तरी, डीएनए की सर्पिल संरचना, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और पौधों से भरे बल्ब जैसे विषय देखने को मिले.विद्यार्थियों ने वैज्ञानिक अवधारणाओं को कला के माध्यम से सहज और रचनात्मक रूप में प्रस्तुत किया. स्वीकृति कुमारी, श्रुति पाठक, अंकिता बिंद, प्राची तिवारी, सत्य राव और वैष्णवी बजाज सहित अनेक विद्यार्थियों की कृतियों में विज्ञान और कल्पना का अनूठा मेल दिखाई दिया.कुछ चित्रों में मंगल ग्रह पर कृषि और मानव बस्तियों की कल्पना की गई तो कुछ में पृथ्वी से दूर भविष्य की काल्पनिक नगरी दिखाई दी. कई चित्रों में तकनीक और प्रकृति के बीच संतुलन का संदेश दिया गया, जबकि कुछ विद्यार्थियों ने भविष्य की प्रयोगशालाओं और अंतरिक्ष अभियानों को अपनी कला का विषय बनाया.प्रतियोगिता में एक ओर धुएं से घिरे शहर और ऑक्सीजन सिलेंडर नजर आए तो दूसरी ओर हरित आवास और अंतरिक्ष में तैरते यान दिखाई दिए. प्रदूषण और पर्यावरण संकट के बीच हरित भविष्य की कल्पना का यह विरोधाभास प्रतियोगिता की प्रमुख विशेषता रहा.7 सितंबर से शुरू हुआ था ‘अन्विति’ का सफर‘अन्विति हिंदी सप्ताह’ की शुरुआत 7 सितंबर को ‘काव्य सरिता’ से हुई थी। इसके बाद 8 सितंबर को ‘कथा सृजन’, 9 सितंबर को वाद-विवाद प्रतियोगिता और 10 सितंबर को ‘ज्ञान प्रभा’ प्रश्नोत्तरी का आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को हिंदी में कविता, कहानी, तर्क-वितर्क और वैज्ञानिक विषयों को अभिव्यक्त करने का मंच मिला।ALSO READ : बनारस की हवा फिर बिगड़ी, 11वें से खिसककर 34वें पायदान पर पहुंची रैंकिंग, विशेषज्ञ ने गिनाए प्रदूषण के कारण...15 सितंबर को संजय मिश्रा के साथ हिंदी दिवस समारोह‘अन्विति’ हिंदी सप्ताह का समापन अब 15 सितंबर को हिंदी दिवस समारोह के साथ होगा। समारोह का आयोजन महामना हॉल, सेमिनार कॉम्प्लेक्स, विज्ञान संकाय में दोपहर 2:45 बजे किया जाएगा। कार्यक्रम में प्रख्यात अभिनेता संजय मिश्रा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।इस अवसर पर ‘अचिंत्य’ पत्रिका की नई कड़ी ‘क्षितिज से परे’ का विमोचन भी प्रस्तावित है। समारोह के साथ ही ‘अन्विति’ के तहत आयोजित विभिन्न साहित्यिक, बौद्धिक और रचनात्मक गतिविधियों का समापन होगा।
बनारस की हवा फिर बिगड़ी, 11वें से खिसककर 34वें पायदान पर पहुंची रैंकिंग, विशेषज्ञ ने गिनाए प्रदूषण के कारण...
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वाराणसी : देश के कई शहरों के साथ वाराणसी की हवा की गुणवत्ता को लेकर भी चिंता बढ़ने लगी है। ताजा रैंकिंग में वाराणसी की स्थिति पिछले साल की तुलना में नीचे खिसकी है. शहर के 11वें पायदान से 34वें स्थान पर पहुंचने को पर्यावरण विशेषज्ञ गंभीर संकेत मान रहे हैं. बढ़ती आबादी, वाहनों की संख्या, ट्रैफिक जाम, निर्माण गतिविधियां और कचरे का उचित प्रबंधन नहीं होना वायु प्रदूषण बढ़ने के प्रमुख कारणों में शामिल हैं.इस संबंध में आईआईटी बीएचयू के केमिकल वैज्ञानिक प्रो. आर.एस. सिंह ने बताया कि किसी भी एयर क्वालिटी रैंकिंग को समझने के लिए यह देखना जरूरी है कि उसका आकलन किस अवधि और किन मानकों के आधार पर किया गया है. रैंकिंग में सार्वजनिक धारणा के साथ-साथ केंद्रीय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सेंसर से मिलने वाले आंकड़ों की भी भूमिका होती है. यह भी महत्वपूर्ण है कि आंकड़े वर्ष के किस मौसम के लिए लिए गए हैं.उन्होंने कहा कि सामान्य तौर पर सर्दियों में गंगा के किनारे बसे शहरों में प्रदूषण की स्थिति ज्यादा खराब हो जाती है. वहीं बारिश के दौरान वातावरण में मौजूद धूल और कई तरह के कण बारिश के साथ नीचे बैठ जाते हैं, जिससे हवा अपेक्षाकृत साफ रहती है. ऐसे में वाराणसी की मौजूदा रैंकिंग को समझने के लिए यह देखना जरूरी होगा कि इसमें किन महीनों के आंकड़ों को आधार बनाया गया है.बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या बनी चुनौतीप्रो. सिंह के मुताबिक वाराणसी में पर्यटन गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं. काशी विश्वनाथ धाम और अयोध्या समेत धार्मिक पर्यटन के चलते शहर में आने वाले लोगों की संख्या बढ़ी है. पहले से अधिक जनसंख्या घनत्व वाले शहर में लोगों और वाहनों का दबाव बढ़ने से प्रदूषण पर भी असर पड़ता है.उन्होंने कहा कि वाहनों से होने वाला उत्सर्जन वायु प्रदूषण का बड़ा कारण है. वाराणसी में लगातार बढ़ता ट्रैफिक और जाम स्थिति को और गंभीर बनाता है. जाम में वाहन लंबे समय तक धीमी गति से चलते या खड़े रहते हैं, जिससे ईंधन की खपत और प्रदूषक उत्सर्जन दोनों बढ़ते हैं. वाहनों से निकलने वाले विभिन्न प्रदूषक हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं.निर्माण कार्यों से बढ़ता पार्टिकुलेट प्रदूषणशहर में लगातार चल रहे निर्माण कार्य भी हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं. विशेषज्ञ के अनुसार निर्माण स्थलों पर सीमेंट, बालू और अन्य सामग्री का इस्तेमाल होता है. यदि इनका उचित तरीके से भंडारण और प्रबंधन नहीं किया जाता तो धूल के महीन कण हवा में फैल जाते है. यही पार्टिकुलेट मैटर वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी AQI को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण घटकों में शामिल है.प्लास्टिक प्रदूषण भी बन रहा गंभीर खतराप्रो. आर.एस. सिंह ने प्लास्टिक प्रदूषण को भी गंभीर समस्या बताया. उन्होंने कहा कि प्लास्टिक प्रदूषण केवल पानी या मिट्टी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव हवा पर भी पड़ रहा है. वाहनों के टायर सड़क पर घिसते हैं, जिससे प्लास्टिक आधारित सूक्ष्म कण पर्यावरण में पहुंच सकते हैं.उन्होंने शहर के कचरा डंपिंग यार्ड का उदाहरण देते हुए बताया कि लंबे समय तक खुले में पड़े प्लास्टिक के टुकड़े धीरे-धीरे छोटे होते जाते हैं और माइक्रोप्लास्टिक में बदल सकते हैं. ये सूक्ष्म कण पर्यावरण के लिए हानिकारक हैं और इनके प्रभाव को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है.घरों में इस्तेमाल होने वाली चीजें भी प्रदूषण का कारणप्रो. सिंह के अनुसार घरों में इस्तेमाल होने वाले कई उत्पाद भी ऐसे रसायन छोड़ सकते हैं जो प्रदूषण में योगदान करते हैं. पेंट और उसमें इस्तेमाल होने वाले सॉल्वेंट से निकलने वाले वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (VOCs) इसका उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि आम लोगों को प्रदूषण के कई ऐसे स्रोतों की जानकारी नहीं होती, जिनका सामना वे रोजाना करते हैं.उन्होंने जल प्रदूषण के संदर्भ में दवाओं के अवशेषों का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक कई दवाएं शरीर में पूरी तरह मेटाबोलाइज नहीं होतीं और सीवेज के माध्यम से जल स्रोतों तक पहुंच सकती हैं। यानी प्रदूषण केवल हवा की समस्या नहीं है, बल्कि हवा, पानी और मिट्टी—तीनों स्तरों पर इसके प्रभाव को समझने की जरूरत है.15-25 साल बाद स्थिति और भयावह होने की आशंकाप्रो. सिंह ने चेतावनी दी कि यदि प्रदूषण को लेकर समाज में जागरूकता नहीं बढ़ाई गई और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले 15 से 25 वर्षों में स्थिति और भयावह हो सकती है. उन्होंने कहा कि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी है.ALSO READ : बीएचयू में स्वरचित हिंदी कविता पाठ प्रतियोगिता, 20 प्रतिभागियों ने रचनाओं से हिंदी और काशी का किया गुणगानपहली कक्षा से बच्चों को दी जाए प्रदूषण की जानकारीप्रदूषण की रोकथाम के उपायों पर उन्होंने सबसे पहले जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया. उनका कहना है कि बच्चों को कम उम्र से ही प्रदूषण के दुष्प्रभावों के बारे में बताया जाना चाहिए. कक्षा एक से ही पर्यावरण और प्रदूषण से जुड़े विषयों को व्यवहारिक तरीके से समझाया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ी प्रदूषण को केवल सरकारी जिम्मेदारी न मानकर अपनी भी जिम्मेदारी समझे.विशेषज्ञ का संदेश साफ है—शहर की हवा केवल मौसम से नहीं, बल्कि हमारी जीवनशैली, ट्रैफिक, निर्माण, कचरा प्रबंधन और जागरूकता से भी तय होती है. ऐसे में वाराणसी की गिरती रैंकिंग को महज आंकड़ा मानने के बजाय प्रदूषण के स्रोतों पर तत्काल काम करने की जरूरत है.
बीएचयू में स्वरचित हिंदी कविता पाठ प्रतियोगिता, 20 प्रतिभागियों ने रचनाओं से हिंदी और काशी का किया गुणगान
बीएचयू में स्वरचित हिंदी कविता पाठ प्रतियोगिता, 20 प्रतिभागियों ने रचनाओं से हिंदी और काशी का किया गुणगान
वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में चल रहे हिंदी माह-2026 के तहत शनिवार को विश्वविद्यालय के गैर-शिक्षण कार्मिकों के लिए स्वरचित हिंदी कविता पाठ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। समिति कक्ष में आयोजित प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने अपनी मौलिक कविताओं के माध्यम से हिंदी, भारतवर्ष, महामना पंडित मदन मोहन मालवीय, काशी और काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की विशेषताओं का भावपूर्ण वर्णन किया।प्रतियोगिता में कुल 20 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों ने अपनी स्वरचित कविताओं का पाठ करते हुए हिंदी भाषा के प्रति समर्पण और गौरव की भावना व्यक्त की। कविताओं में भारत की विविधता, काशी की सांस्कृतिक विरासत और महामना के योगदान को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। प्रतिभागियों ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय को महामना के अभूतपूर्व प्रयासों का परिणाम बताते हुए इसे ज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र में विशिष्ट स्थान रखने वाला संस्थान बताया।प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में प्रो. वशिष्ठ अनूप, डॉ. संजीव सराफ और प्रो. उर्वशी गहलौत शामिल रहे। निर्णायक मंडल ने प्रतिभागियों की कविताओं, प्रस्तुति और विषयवस्तु के आधार पर मूल्यांकन किया।कार्यक्रम के दौरान हिंदी अधिकारी डॉ. शिव कुमार त्रिपाठी ने निर्णायक मंडल के सदस्यों को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रमेश सिंह ने किया, जबकि अंशुमान पटेल ने धन्यवाद ज्ञापित किया।ALSO READ : सुब्रतो कप में यूपी का दम दिखाएगी वाराणसी की टीमकार्यक्रम को सफल बनाने में सहायक कुलसचिव विकास कुमार, रामजी त्रिपाठी, कीर्ति शंकर दुबे, रागिब हुसैन और रोहित आनंद का सहयोग रहा।