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शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति की अपूर्णताओं को दूर कर उसे प्रज्ञावान और लोकमंगल के लिए सक्षम बनाना : प्रो. हरिकेश सिंह

शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति की अपूर्णताओं को दूर कर उसे प्रज्ञावान और लोकमंगल के लिए सक्षम बनाना : प्रो. हरिकेश सिंह
Sep 01, 2026, 03:02 AM
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Posted By gagan arora

वाराणसी : शिक्षा का उद्देश्य केवल सूचना और ज्ञान अर्जित करना नहीं, बल्कि व्यक्ति की अपूर्णताओं को पहचानकर उन्हें दूर करना और उसे समाज के कल्याण के लिए सक्षम बनाना है। ज्ञान तभी सार्थक है, जब वह व्यक्ति के जीवन में सुधार और समाज के दुःख-कष्ट दूर करने का माध्यम बने। यह विचार जय प्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा के पूर्व कुलपति प्रो. हरिकेश सिंह ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के भारत अध्ययन केन्द्र एवं इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 15 दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला ‘भारत अध्ययन की परम्परा : व्यक्ति, विचार और संस्थाएँ’ के समापन सत्र में व्यक्त किए।


31 अगस्त को आयोजित समापन सत्र में कला संकाय, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की संकाय प्रमुख प्रो. सुषमा घिल्ड्याल मुख्य अतिथि रहीं। कार्यशाला का आयोजन 10 से 31 अगस्त तक किया गया। इसका उद्देश्य भारतीय ज्ञान-परम्परा, दर्शन, साहित्य, कला, लोकपरम्परा, संस्कृति तथा विभिन्न संस्थाओं और व्यक्तित्वों के माध्यम से भारत को समझने की समग्र दृष्टि विकसित करना था।



प्रो. हरिकेश सिंह ने कहा कि शिक्षा मनुष्य को केवल रोजगार या व्यक्तिगत उन्नति के लिए तैयार करने की प्रक्रिया नहीं है। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य व्यक्ति के भीतर की अपूर्णताओं को पहचानना और उन्हें दूर करने की क्षमता विकसित करना है। यदि ज्ञान के बावजूद संवेदना, विवेक और लोकमंगल की चेतना विकसित नहीं होती तो शिक्षा अधूरी है।


उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान-परम्परा में ज्ञान और प्रज्ञा का संबंध महत्वपूर्ण है। ज्ञान को जीवन में उतारने की क्षमता ही प्रज्ञा है। इसलिए भारत अध्ययन से प्राप्त ज्ञान को केवल पाठ्यक्रम या बौद्धिक जानकारी तक सीमित न रखकर जीवन के अनुभवों और सामाजिक समस्याओं से जोड़ना चाहिए।


काशी और बीएचयू की ज्ञान परंपरा का किया उल्लेख


प्रो. सिंह ने काशी की प्राचीन ज्ञान परम्परा और काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना की ऐतिहासिक दृष्टि का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि काशी सदियों से ज्ञान, साधना और विद्या की भूमि रही है। महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने इसी व्यापक भारतीय ज्ञान-दृष्टि को आधुनिक विश्वविद्यालयीय स्वरूप देने का प्रयास किया। बीएचयू में भारतीयता, आधुनिक शिक्षा और सांस्कृतिक चेतना के समन्वय की दृष्टि दिखाई देती है।


उन्होंने भारतीय ज्ञान-परम्परा की व्यापकता और उदारता को रेखांकित करते हुए कहा कि ज्ञान को किसी एक मत, सम्प्रदाय या सीमित क्षेत्र तक नहीं बांधा जा सकता। जहां से व्यक्ति और समाज के सुधार के लिए श्रेष्ठ ज्ञान मिले, वहां से सीखने की प्रवृत्ति होनी चाहिए। उन्होंने वेदों को विश्व की प्राचीन ज्ञान-विरासत के महत्वपूर्ण स्रोतों में शामिल बताते हुए गुरु-शिष्य, मौखिक और शास्त्रीय परम्पराओं के जरिए ज्ञान के संरक्षण और हस्तांतरण की परंपरा पर भी प्रकाश डाला।


भारत अध्ययन सामूहिक ज्ञान-यात्रा : प्रो. सुषमा


मुख्य अतिथि प्रो. सुषमा घिल्ड्याल ने भारत अध्ययन की व्यापकता और सामूहिकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत अध्ययन किसी एक व्यक्ति या संस्था का कार्य नहीं, बल्कि सभी को साथ लेकर चलने वाली ज्ञान-यात्रा है। भारतीय संस्कृति और ज्ञान-परम्परा को उसके मूल स्रोतों, परम्पराओं और व्यापक सांस्कृतिक संदर्भों में समझने की आवश्यकता है।


भारत अध्ययन केन्द्र के समन्वयक प्रो. शरदिन्दु कुमार तिवारी ने कार्यशाला के आयोजन और उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि केन्द्र भारतीय प्राचीन विद्याओं, ज्ञान-परम्पराओं और सांस्कृतिक विरासत के अध्ययन एवं शोध को आगे बढ़ाने के लिए लगातार कार्य कर रहा है।


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वहीं, इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, वाराणसी के निदेशक डॉ. अभिजित दीक्षित ने आयोजन में सहयोग के लिए प्रतिभागियों और वक्ताओं के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि भारत को समझने के लिए लोक और शास्त्र, परम्परा और आधुनिकता तथा व्यक्ति और संस्थाओं के बीच संवाद को समझना आवश्यक है।


15 दिवसीय कार्यशाला में विभिन्न विषयों के विद्वानों ने भारतीय ज्ञान-परम्परा, साहित्य, दर्शन, संस्कृति, कला, लोकपरम्परा, व्यक्तित्वों और संस्थाओं के विविध पक्षों पर विमर्श किया। समापन पर इस बात पर जोर दिया गया कि भारतीय ज्ञान-परम्परा को केवल अतीत के अध्ययन तक सीमित न रखते हुए वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं से जोड़ा जाए। ज्ञान से प्रज्ञा, प्रज्ञा से आत्म-सुधार और आत्म-सुधार से लोकमंगल को शिक्षा और भारत अध्ययन की सार्थक दिशा बताया गया।

काशी में अमित शाह का दौरा, 7 अक्टूबर को सेवा संकल्प यात्रा का स्वागत
काशी में अमित शाह का दौरा, 7 अक्टूबर को सेवा संकल्प यात्रा का स्वागत
वाराणसी :केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 7 अक्टूबर को काशी आ सकते हैं। इस दौरान वह गुजरात के वडनगर से काशी पहुंचने वाली सेवा संकल्प यात्रा का स्वागत करेंगे। यात्रा में शामिल लोग गुजरात की नदियों का जल लेकर आएंगे, जिससे बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक किया जाएगा।यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन, 17 सितंबर से शुरू हुए सेवा संकल्प अभियान का हिस्सा है। यह अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा। इसके तहत देशभर में सेवा, स्वच्छता, पौधरोपण और जनकल्याण से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।सेवा संकल्प यात्रा वडनगर से काशी तक पहुंच रही है। वडनगर प्रधानमंत्री मोदी का जन्मस्थान है, जबकि काशी उनका संसदीय क्षेत्र है। यात्रा के दौरान कई राज्यों और जिलों से गुजरते हुए लोगों को सेवा और जनभागीदारी का संदेश दिया जा रहा है।काशी पहुंचने पर यात्रा का स्वागत किया जाएगा और बाबा विश्वनाथ के दरबार में विशेष पूजा-अर्चना व जलाभिषेक का कार्यक्रम होगा। इस मौके पर कई जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं के शामिल होने की संभावना है।ALSO READ :पूर्व मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने संस्कृत विश्वविद्यालय के विकास कार्यों का किया निरीक्षण
पूर्व मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने संस्कृत विश्वविद्यालय के विकास कार्यों का किया निरीक्षण
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वाराणसी: उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्र ने रविवार को सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी पहुंचकर परिसर में चल रहे विकास एवं निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने संग्रहालय, लालभवन, पाणिनी भवन, शताब्दी भवन अतिथि गृह, श्रमण विद्या संकाय, श्री श्री आनंदमयी महिला छात्रावास और ऑनलाइन संस्कृत प्रशिक्षण केंद्र का जायजा लिया।निरीक्षण के दौरान दुर्गा शंकर मिश्र ने संबंधित अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं से निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने कार्यों को गुणवत्तापूर्ण तरीके से निर्धारित समय सीमा में पूरा करने और जरूरत के अनुसार कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।ऑनलाइन संस्कृत शिक्षा व्यवस्था का लिया जायजाऑनलाइन संस्कृत प्रशिक्षण केंद्र में उन्होंने संचालित ऑनलाइन डिप्लोमा कक्षाओं का भौतिक अवलोकन किया। उन्होंने तकनीकी और शिक्षण व्यवस्था की जानकारी लेते हुए इसे और प्रभावी एवं गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन दिया। साथ ही आधुनिक तकनीक के माध्यम से संस्कृत शिक्षा को देश-विदेश तक पहुंचाने की संभावनाओं पर जोर दिया।पांडुलिपियों को बताया भारतीय ज्ञान परंपरा की अमूल्य निधिदुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटलीकरण कार्यों का भी उन्होंने निरीक्षण किया। ‘उत्कृष्ट ज्ञान भारतम्’ द्वारा किए जा रहे वैज्ञानिक ट्रीटमेंट और डिजिटलीकरण की जानकारी लेते हुए उन्होंने कहा कि ये पांडुलिपियां भारतीय मनीषा की अमूल्य ज्ञान-संपदा हैं। इनका वैज्ञानिक संरक्षण और डिजिटलीकरण आने वाली पीढ़ियों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है।संग्रहालय के निरीक्षण के दौरान उन्होंने ऐतिहासिक एवं ज्ञानपरक सामग्री को देखा और इसके संरक्षण, संवर्धन तथा प्रभावी प्रस्तुतीकरण पर जोर दिया।सीएसआर से हो रहे विकास कार्यों की सराहनादुर्गा शंकर मिश्र ने विश्वविद्यालय में चल रहे विकास कार्यों पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सीएसआर फंड के माध्यम से परिसर में विकास कार्य कराए जा रहे हैं और विद्यार्थियों को शुद्ध पेयजल सहित बेहतर संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में काम हुआ है। उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा के प्रयासों की सराहना की।इस अवसर पर कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने दुर्गा शंकर मिश्र का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक और ज्ञानपरक विरासत को सुरक्षित रखते हुए उसे आधुनिक तकनीक से जोड़ना समय की आवश्यकता है। पांडुलिपियों का संरक्षण, संग्रहालय का संवर्धन और ऑनलाइन संस्कृत शिक्षा का विस्तार इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।ALSO READ: जम्मू-कटरा के लिए 29 सितंबर को रवाना होंगी यूपी और पूर्वांचल की टीमें...निरीक्षण के दौरान कुलानुशासक, वैज्ञानिक प्रो. जितेन्द्र कुमार अधिकारी, प्रो. दिनेश कुमार गर्ग, डॉ. विशाखा शुक्ला, डॉ. विजेन्द्र आर्य, डॉ. विमल कुमार त्रिपाठी सहित संबंधित कार्यदायी संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
जम्मू-कटरा के लिए 29 सितंबर को रवाना होंगी यूपी और पूर्वांचल की टीमें...
जम्मू-कटरा के लिए 29 सितंबर को रवाना होंगी यूपी और पूर्वांचल की टीमें...
वाराणसी:T10 टेनिस बॉल क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ इंडिया के तत्वावधान में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने के लिए उत्तर प्रदेश और पूर्वांचल की टीमें 29 सितंबर को जम्मू-कटरा के लिए रवाना होंगी। प्रतियोगिता को लेकर खिलाड़ियों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। राष्ट्रीय स्तर के इस आयोजन में प्रदेश और पूर्वांचल का प्रतिनिधित्व करने जा रहे खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाने के लिए *रमना ग्राम प्रधान अमित कुमार पटेल* और *BHU चौकी इंचार्ज सौरभ तिवारी* बिरला ग्राउंड पहुंचे।इस दौरान दोनों ने खिलाड़ियों से मुलाकात कर उनका हौसला बढ़ाया और आगामी प्रतियोगिता के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने खिलाड़ियों से कहा कि राष्ट्रीय स्तर के मंच पर खेलते समय जीत हासिल करना महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ अनुशासन, टीम भावना और खेल भावना का पालन करना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने खिलाड़ियों से मैदान पर एकजुट होकर पूरी मेहनत, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच के साथ खेलने का आह्वान किया।उन्होंने कहा कि खिलाड़ी जब राष्ट्रीय प्रतियोगिता में उत्तर प्रदेश और पूर्वांचल का प्रतिनिधित्व करते हैं तो उनके प्रदर्शन के साथ-साथ उनका व्यवहार और अनुशासन भी क्षेत्र की पहचान बनता है। ऐसे में सभी खिलाड़ी आपसी तालमेल बनाए रखते हुए बेहतर प्रदर्शन करें और खेल के नियमों का सम्मान करें।उत्तर प्रदेश की टीम में कप्तान कार्तिक गुप्ता के साथ विनायक जायसवाल, हर्षित विश्वकर्मा, सूरज यादव, उज्जवल, अंकित, रोहित, सिद्धार्थ, मिलित, ऋषभ, हिमांशु, रौनक और हर्ष शामिल हैं।वहीं पूर्वांचल की टीम की कमान कृष्णा जायसवाल संभालेंगे। टीम में प्रथम जायसवाल, आर्यन चौबे, बादल, आयुष चौबे, प्रीतम, सौरभ, वैभव, अनवर, सार्थक, यश सिंह, मयंक और पृथ्वी शामिल हैं।खिलाड़ियों ने भी आगामी राष्ट्रीय प्रतियोगिता को लेकर उत्साह व्यक्त किया। खिलाड़ियों ने कहा कि वे पूरी तैयारी और आत्मविश्वास के साथ जम्मू-कटरा पहुंचेंगे तथा मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने का प्रयास करेंगे। खिलाड़ियों ने उत्तर प्रदेश और पूर्वांचल की टीम की गरिमा बनाए रखने तथा खेल भावना के साथ प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का संकल्प लिया।ALSO READ: देह व्यापार की सूचना पर पुलिस ने गेस्ट हाउस में मारा छापादेह व्यापार की सूचना पर पुलिस ने गेस्ट हाउस में मारा छापा29 सितंबर को दोनों टीमें जम्मू-कटरा के लिए रवाना होंगी, जहां राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचने वाली टीमों के साथ मुकाबला होगा।