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45 दिनों के प्रशिक्षण और अनुसाशन से जन्म लेते हैं, रामनगर की रामलीला के पात्र

45 दिनों के प्रशिक्षण और अनुसाशन से जन्म लेते हैं, रामनगर की रामलीला के पात्र
Jul 20, 2026, 10:02 AM
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Posted By gagan arora

वाराणसी: विश्व प्रसिद्ध रामनगर की रामलीला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, अध्यात्म, गुरु-शिष्य परंपरा और लोकनाट्य की ऐसी जीवंत विरासत है, जिसकी मिसाल दुनियाभर में दी जाती है। लगभग दो सौ वर्षों से अधिक पुरानी इस रामलीला की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां अभिनय को केवल कला नहीं, बल्कि साधना माना जाता है। राम, सीता, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न जैसे प्रमुख पात्रों का चयन होने के बाद उनका 45 दिनों तक कठोर अनुशासन और आध्यात्मिक वातावरण में प्रशिक्षण कराया जाता है। गंगा जी के किनारे रामनगर किले के पास बलुआ घाट पर स्थित धर्मशाला के अंदर शिवदत्त शर्मा के नेतृत्व मे पात्रों को 45 दिन तक प्रशिक्षण दिया जाता है।


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पोथी पूजन से होती है प्रशिक्षण की शुभारंभ

रामनगर रामलीला की प्रशिक्षण की शुभारंभ सावन माह के चतुर्थी के दिन शुरुआत धार्मिक अनुष्ठान से होती है। सबसे पहले रामचरितमानस और अन्य पूजनीय ग्रंथों का विधिवत पोथी पूजन किया जाता है। वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के बीच गुरुजन एवं काशी राज परिवार की उपस्थिति में यह अनुष्ठान संपन्न होता है। मान्यता है कि बिना पोथी पूजन के प्रशिक्षण प्रारंभ नहीं किया जाता। यह केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि ज्ञान, मर्यादा और भक्ति के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है। इसी समय से चयनित पात्रों को एक नई साधना में प्रवेश कराया जाता है।


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उपकरण पूजन: औजार भी हैं पूजनीय

रामनगर रामलीला की एक अनूठी परंपरा उपकरण पूजन भी है। मंच निर्माण और सजावट में उपयोग होने वाले औजार—बसूली, हथौड़ी, आरी, ब्रश, रंग, रस्सियां, लकड़ी, मुकुट, धनुष-बाण, सिंहासन और अन्य सामग्री—सभी की विधिवत पूजा की जाती है। कलाकारों से लेकर कारीगरों तक सभी इस परंपरा में भाग लेते हैं।


45 दिनों की साधना, अनुशासन और तपस्या

पात्रों के चयन के बाद प्रशिक्षण का सबसे महत्वपूर्ण चरण शुरू होता है। 45 दिनों तक चयनित पात्र गंगा तट स्थित बलुआ घाट धर्मशाला में रहकर नियमित अभ्यास करते हैं। इस दौरान उनका दैनिक जीवन पूरी तरह अनुशासित होता है। दिन की शुरुआत पूजा-पाठ से होती है और फिर संवाद, उच्चारण, अभिनय तथा मंच संचालन का अभ्यास कराया जाता है। यही कारण है कि रामनगर की रामलीला के पात्र मंच पर अभिनय नहीं करते, बल्कि पात्रों के चरित्र को आत्मसात कर लेते हैं।


संवाद और संस्कार सिखाता है प्रशिक्षण

रामनगर की रामलीला का प्रशिक्षण केवल संवाद याद कराने का अभ्यास नहीं है। यहां कलाकारों को रामचरितमानस की चौपाइयों, दोहों और संस्कृत श्लोकों का शुद्ध एवं स्पष्ट उच्चारण सिखाया जाता है। गुरुजन बार-बार अभ्यास कराते हैं ताकि प्रत्येक शब्द का उच्चारण मर्यादित और प्रभावशाली हो।

इसके साथ ही कलाकारों को संवाद बोलने की गति, स्वर की कोमलता, ठहराव, लय, आरोह-अवरोह और भावनाओ का भी प्रशिक्षण दिया जाता है। किस प्रसंग में आवाज ऊंची होगी, कहां धीमी होगी, किस चौपाई के साथ कौन-सा भाव प्रदर्शित करना है। इन सभी पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाता है।


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गुरु-शिष्य परंपरा

रामनगर की रामलीला का प्रशिक्षण पूरी तरह गुरु-शिष्य परंपरा पर आधारित है। अनुभवी व्यास और प्रशिक्षक वर्षों से इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। वे केवल अभिनय नहीं सिखाते, बल्कि रामायण के आदर्शों और जीवन मूल्यों को भी पात्रों के मन में स्थापित करते हैं।


इन्ही परंपराओ के कारण रामनगर की रामलीला केवल नाट्य प्रस्तुति नहीं बल्कि अपनी प्रस्तुति से पूरे वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाया है।


नशामुक्त भारत के संदेश के साथ BHU में निकली ‘संडे ऑन साइकिल’ रैली.
नशामुक्त भारत के संदेश के साथ BHU में निकली ‘संडे ऑन साइकिल’ रैली.
वाराणसी: नशामुक्त भारत अभियान के तहत रविवार को काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के तत्वावधान में ‘संडे ऑन साइकिल’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के जरिए युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने और नशामुक्त भारत का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।मालवीय भवन प्रांगण से कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने हरी झंडी दिखाकर साइकिल रैली को रवाना किया। इस दौरान विश्वविद्यालय के कुलसचिव राजन श्रीवास्तव, वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षक, NSS स्वयंसेवक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।कार्यक्रम के दौरान कुलपति ने युवाओं से नशे से दूर रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवा न केवल स्वयं नशे से बचें, बल्कि अपने आसपास के लोगों और समाज को भी इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करें। उन्होंने नशामुक्त समाज के निर्माण में युवाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।also read: विश्व आदिवासी दिवस पर बरेका में निकली भव्य शोभायात्रा, पारंपरिक वेशभूषा में दिखी संस्कृति की झलकसाइकिल रैली में शामिल प्रतिभागियों ने नशामुक्त भारत का संदेश लोगों तक पहुंचाया और युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया। रैली के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और समाज में नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया गया।कार्यक्रम का समन्वयन काशी हिंदू विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना की कार्यक्रम समन्वयक डॉ. स्वप्ना मीना ने किया। आयोजन में विश्वविद्यालय परिवार के साथ बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की भागीदारी रही।
विश्व आदिवासी दिवस पर बरेका में निकली भव्य शोभायात्रा, पारंपरिक वेशभूषा में दिखी संस्कृति की झलक
विश्व आदिवासी दिवस पर बरेका में निकली भव्य शोभायात्रा, पारंपरिक वेशभूषा में दिखी संस्कृति की झलक
वाराणसी: विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार को बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) में आदिवासी परिवार, बरेका के तत्वावधान में भव्य शोभायात्रा और सांस्कृतिक समारोह का आयोजन किया गया। आयोजन में आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, लोक परंपराओं और सामाजिक एकता की आकर्षक झलक देखने को मिली।शाम चार बजे बरेका सेंट जॉन स्कूल, गेट संख्या-2 से शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा कुंदन तिराहा और सूर्य सरोवर मार्ग होते हुए इंटर कॉलेज चौराहे पहुंची। यहां भगवान गौतम बुद्ध, जननायक बिरसा मुंडा और भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके बाद शोभायात्रा पश्चिमी संस्थान, जलालीपट्टी पहुंचकर संपन्न हुई।शोभायात्रा में बड़ी संख्या में महिला, पुरुष, युवा और बच्चे पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में शामिल हुए। रंग-बिरंगे परिधानों के साथ पारंपरिक गीत-संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने माहौल को उत्साह और उल्लास से भर दिया। रास्ते में स्थानीय लोगों ने भी शोभायात्रा का उत्साहपूर्वक स्वागत किया।पश्चिमी संस्थान, जलालीपट्टी में आयोजित सांस्कृतिक समारोह में आदिवासी समाज की विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं। वक्ताओं ने आदिवासी समुदाय की समृद्ध परंपराओं और प्रकृति के साथ उनके गहरे जुड़ाव को रेखांकित किया। उन्होंने सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत पर भी जोर दिया।also read: श्रावण में भास्करा पोखरा पर पुलिस अलर्ट, गहरे पानी में जाने से बचने की अपीलकार्यक्रम के दौरान सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का संदेश दिया गया। आयोजन में बरेका के अधिकारी, कर्मचारी, उनके परिजन, आदिवासी महिला समिति के सदस्य और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।इस अवसर पर सहायक कार्मिक अधिकारी (कर्मशाला) पीयूष मिंज, जनसंपर्क अधिकारी राजेश कुमार, आरपीएफ इंस्पेक्टर प्रमोद लकड़ा, पूर्व संयुक्त सचिव बरेका अमर सिंह, कालू मांझी सहित आदिवासी परिवार बरेका के सुदर्शन उरांव, दिलीप तिर्की, सुचित कुजूर, अजय कुमार तिर्की, संजीवन तिर्की और अजय तिग्गा मौजूद रहे। वहीं आदिवासी महिला समिति की सपना टोप्पो, तारा मैरी मिंज, प्रेमा लिली टोप्पो, अनुपमा और बंदना बारला सहित बड़ी संख्या में महिलाओं ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।
श्रावण में भास्करा पोखरा पर पुलिस अलर्ट, गहरे पानी में जाने से बचने की अपील
श्रावण में भास्करा पोखरा पर पुलिस अलर्ट, गहरे पानी में जाने से बचने की अपील
वाराणसी: श्रावण माह में रोहनिया क्षेत्र स्थित भास्करा पोखरा में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की अनहोनी से बचाने के लिए पुलिस की ओर से लगातार जागरूक किया जा रहा है।एसीपी रोहनिया अवधेश विश्वकर्मा ने भास्करा पोखरा पहुंचने वाले श्रद्धालुओं से अपील की कि वे निर्धारित और सुरक्षित स्थान पर ही स्नान करें। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु किसी भी स्थिति में गहरे पानी में न जाएं और सुरक्षा मानकों की अनदेखी न करें।also read: आँसुओं, आक्रोश के बाद खुले आसमान के नीचे दालमंडीएसीपी ने खासतौर पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों से सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि बच्चों को अकेले पानी के पास न जाने दें और स्नान के दौरान उन पर लगातार नजर बनाए रखें। थोड़ी सी लापरवाही गंभीर हादसे का कारण बन सकती है।पुलिस प्रशासन की ओर से श्रावण माह के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक सतर्कता बरती जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे पुलिस के निर्देशों का पालन करें और धार्मिक आस्था के साथ अपनी सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखें। अधिकारियों का कहना है कि सामूहिक सहयोग और सतर्कता से ही श्रावण माह के आयोजनों को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जा सकता है।