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3 से 5 अप्रैल तक महानाट्य 'सम्राट विक्रमादित्य' का मंचन, बाबा विश्वनाथ को अर्पित होगा वैदिक घड़ी

3 से 5 अप्रैल तक महानाट्य 'सम्राट विक्रमादित्य' का मंचन, बाबा विश्वनाथ को अर्पित होगा वैदिक घड़ी
Apr 02, 2026, 07:44 AM
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Posted By Preeti Kumari

वाराणसी: भारतीय काल-गणना के प्रणेता और न्यायप्रियता के प्रतीक चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य के शौर्य की गाथा अब बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी की गलियों में प्रतिध्वनित होगी. धर्म और संस्कृति की नगरी वाराणसी के बीएलडब्ल्यू. मैदान में आगामी 3 से 5 अप्रैल तक भारत के स्वाभिमान और विकास की गाथा का भव्य उत्सव मनाया जाएगा. मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस त्रि-दिवसीय कार्यक्रम में महानाट्य 'सम्राट विक्रमादित्य' का ऐतिहासिक मंचन किया जाएगा.


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यह आयोजन भारतीय इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठों को जीवंत करेगा. इस गरिमामय समारोह का शुभारंभ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं केंद्रीय संस्कृति व पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की उपस्थिति में होगा. इस वृहद आयोजन का उद्देश्य देश के गौरवशाली इतिहास, विक्रम संवत् की वैज्ञानिकता और उस युग के अनुपम योगदान से जन-मानस को परिचित कराना है.


बाबा विश्वनाथ को विक्रमादित्य वैदिक घड़ी करेंगे अर्पित


प्राचीन भारतीय कालगणना के ऐतिहासिक केंद्र उज्जैन में पिछले वर्ष विश्व की पहली 'विक्रमादित्य वैदिक घड़ी' की सफल स्थापना के बाद, अब इसे देश के अन्य ज्योतिर्लिंगों तक पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है. भारतीय काल गणना की समृद्ध विरासत को पुनर्जीवित करने के इस प्रयास अन्तर्गत वाराणसी में सर्वप्रथम बाबा विश्वनाथ को यह वैदिक घड़ी समर्पित की जा रही है.


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इस घड़ी की विशेषता न केवल इसकी पारंपरिक गणना पद्धति है, बल्कि इसका डिजिटल विस्तार भी है. इसके लिए एक विशेष एप भी लॉन्च किया गया है जो विश्व की 180 से अधिक भाषाओं में समय और पंचांग की जानकारी उपलब्ध करा रहा है. उज्जैन से शुरू होकर काशी के गलियारों तक पहुँचने वाली यह पहल न केवल हमारी सांस्कृतिक पहचान को समृद्ध कर रही है, बल्कि भारतीय वैज्ञानिक धरोहर को वैश्विक स्तर पर पुनः स्थापित करने का कार्य भी कर रही है.


महानाट्य के सांस्कृतिक गौरव की निरंतर यात्रा


सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य की यात्रा वर्ष 2007 में प्रारंभ हुई थी. सफलता के सोपान चढ़ते हुए इस नाटक का मंचन अब तक उज्जैन, भोपाल, आगरा और हैदराबाद जैसे प्रमुख शहरों में किया जा चुका है, जहाँ हज़ारों दर्शकों ने इसे सराहा है. अप्रैल 2025 में दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले पर आयोजित इसके मंचन को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी विशेष रूप से सराहा था. उन्होंने इस प्रस्तुति को सम्राट विक्रमादित्य के वैभव और भारतीय गौरव को जन-जन तक पहुँचाने का एक अनुकरणीय प्रयास बताया.


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महानाट्य विक्रमादित्य: शौर्य और न्याय का संगम


सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य उज्जैनी के महान सम्राट के जीवन, उनके अदम्य साहस और न्यायप्रियता को जीवंत करता है. नाटक के माध्यम से 57 ईसा पूर्व प्रारंभ हुए 'विक्रम संवत्' के ऐतिहासिक और वैज्ञानिक महत्त्व को सशक्त संवादों द्वारा प्रस्तुत किया गया है. दर्शकों को इसमें जहाँ 'सिंहासन बत्तीसी' और 'बेताल पच्चीसी' के रोचक प्रसंग देखने को मिलेंगे, वहीं भविष्य पुराण के गंभीर संदर्भों से भी परिचय होगा. महानाट्य प्रस्तुति का एक मार्मिक पक्ष विदेशी आक्रांताओं द्वारा भारतीय ज्ञान, विज्ञान और सांस्कृतिक धरोहर को पहुँचाई गई क्षति को भी दर्शाना है. इसके साथ ही सम्राट विक्रमादित्य के दरबार के 'नवरत्नों'—महाकवि कालिदास और महान खगोलशास्त्री वराहमिहिर—की विद्वता को भी बड़े प्रभावशाली ढंग से मंच पर उतारा गया है.


अत्याधुनिक तकनीक और भव्यता का मेल


सम्राट विक्रमादित्य आधारित महानाट्य की लगभग 1 घंटे 45 मिनट की इस भव्य प्रस्तुति में कला और तकनीक का अद्भुत समन्वय देखने को मिलेगा. मंच पर 175 से अधिक कलाकार और सहयोगी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे. नाटक को सजीव बनाने के लिए मंच पर रथ, अश्व (घोड़े), पालकी और ऊँटों का प्रयोग किया जाएगा. तीन अलग-अलग मंचों और अत्याधुनिक ग्राफिक्स व स्पेशल इफेक्ट्स से अलौकिक दृश्य प्रस्तुत किये जाएंगे.


विविध प्रदर्शनियाँ और सामाजिक संकल्प


महानाट्य के साथ-साथ आयोजन स्थल पर विभिन्न ज्ञानवर्धक प्रदर्शनियाँ भी लगाई जा रही हैं. इनमें सम्राट विक्रमादित्य व अयोध्या, भारतीय ऋषि-वैज्ञानिक परंपरा पर केंद्रित 'आर्ष भारत', शिव पुराण, चौरासी महादेव, श्री हनुमान और मध्यप्रदेश के पवित्र स्थानों की विस्तृत जानकारी प्रदर्शित की जाएगी.

इस कालजयी कृति का लेखन पद्मश्री डॉ. भगवतीलाल राजपुरोहित ने किया है, जिनकी लेखनी ने इतिहास के पन्नों को सजीव कर दिया है.


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नाटक का कुशल निर्देशन संजीव मालवीय द्वारा किया गया है, जबकि प्रस्तुति संयोजक के रूप में राजेश सिंह कुशवाहा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. इस गौरवशाली कलाकृति की प्रस्तुति 'विशाला सांस्कृतिक एवं लोकहित समिति, उज्जैन' द्वारा की जा रही है. यह महानाट्य मनोरंजन के साथ नई पीढ़ी को सम्राट विक्रमादित्य के साहस, न्याय और सुशासन के आदर्शों से परिचित कराने का एक सशक्त माध्यम भी है.

वरुणा नदी के कायाकल्प का रोडमैप तैयार, रिवरफ्रंट संवारने को VDA-ONGC में समझौता...
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वाराणसी : काशी की सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरणीय पहचान से जुड़ी वरुणा नदी के कायाकल्प की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. वरुणा रिवरफ्रंट विकास परियोजना के लिए वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) और ओएनजीसी के बीच 260.61 करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुए. ओएनजीसी अपनी कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) निधि से इस महत्वाकांक्षी परियोजना का वित्तपोषण करेगी. इससे वरुणा नदी के तटों का सुनियोजित विकास होने के साथ काशी में पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और जनसुविधाओं को नया आयाम मिलेगा.वीडीए सभागार में पिछले दिनों आयोजित कार्यक्रम में वीडीए उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा और ओएनजीसी के सीएसआर प्रमुख नीरज कुमार बंसल ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए. इस दौरान अधिकारियों ने बताया कि परियोजना का उद्देश्य वरुणा नदी को केवल स्वच्छ और संरक्षित बनाना ही नहीं, बल्कि इसे आधुनिक रिवरफ्रंट के रूप में विकसित करना भी है. इसके तहत नदी तटों को हरित क्षेत्रों, पैदल पथ, आकर्षक प्रकाश व्यवस्था, बैठने की सुविधाओं, सार्वजनिक उपयोग के खुले स्थलों और अन्य आधुनिक शहरी सुविधाओं से विकसित किया जाएगा.परियोजना मंडलायुक्त एवं वीडीए अध्यक्ष एस. राजलिंगम के मार्गदर्शन में तैयार की गई है. वहीं, ओएनजीसी के महाप्रबंधक अटल श्रीवास्तव ने इसे अंतिम रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. यह परियोजना भारत सरकार के जल निकाय पुनर्जीवन मिशन की अवधारणा के अनुरूप है. इससे जल संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन और सतत शहरी विकास को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आधुनिक सुविधाओं से युक्त काशी की परिकल्पना और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नदी संरक्षण एवं शहरी विकास की प्राथमिकताओं को भी गति देगी.नदी तट का विकासपरियोजना के मुख्य उद्देश्य यह परियोजना काशी के शहरी सुंदरीकरण, पर्यावरण संरक्षण और नदी तट विकास पर केंद्रित है. इसका लक्ष्य पर्यटन संवर्धन और जनसुविधाओं का विस्तार करना भी है. ओएनजीसी सीएसआर से इस परियोजना को वित्तीय सहायता प्रदान करेगी. इसका उद्देश्य वाराणसी को एक आधुनिक, स्वच्छ और हरित नगर के रूप में स्थापित करना है.परियोजना के तहत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने से लेकर निर्माण कार्य तक सभी चरण तय समयबद्ध योजना के अनुसार पूरे किए जाएंगे.ALSO READ:काशी विद्यापीठ में छात्रों ने किया कुलपति का घेराव, हाॅस्‍टल से निकाले जाने पर जताया विरोध...वरुणा नदी काशी की सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है. लंबे समय से इसके संरक्षण और विकास की आवश्यकता महसूस की जा रही थी. यह परियोजना नदी के प्राकृतिक स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए उसके किनारों को व्यवस्थित और आकर्षक बनाएगी. - पुर्ण बोरा, वीडीए उपाध्यक्ष
काशी विद्यापीठ में छात्रों ने किया कुलपति का घेराव, हाॅस्‍टल से निकाले जाने पर जताया विरोध...
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वाराणसी : महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में हॉस्‍टल के कमरों पर अवैध कब्‍जा खाली कराने मामला गरम हो गया है. बुधवार को छात्रों ने हॉस्टल से निकाले जाने का विरोध करते हुए कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्‍यागी और अन्य अधिकारियों का घेराव किया. इस दौरान परिसर में काफी गहमागहमी का माहौल बना रहा. हंगामे की स्थिति को देखते हुए परिसर में पुलिस तैनात की गई है.छात्रों का आरोप है कि उन्हें हॉस्टल से जबरन बाहर निकाला गया है. वे इस कार्रवाई को गलत और अन्यायपूर्ण बता रहे हैं. विरोध प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई. मौके पर पुलिस प्रशासन भी पहुंच गया. पुलिस ने मामले को शांत कराने का प्रयास किया. कुलपति ने इस संबंध में अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि हॉस्टल में अवैध तरीके से रह रहे लोगों को हटाया जा रहा है. कुलपति ने यह भी स्वीकार किया कि कोई भी काम सौ फीसदी सही नहीं होता है. उन्होंने आश्वासन दिया कि जिन छात्रों को परेशानी आ रही है, उनकी जांच की जाएगी. उचित कार्रवाई करके समस्या का समाधान किया जाएगा.ALSO READ:पता पूछने के बहाने महिला से सोने का टप्स झपटने वाले दो आरोपी गिरफ्तार...छात्रों ने हॉस्टल से निकाले जाने पर गहरा असंतोष व्यक्त किया. उनका कहना है कि उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना के बाहर किया गया. छात्रों ने इसे मनमाना और अन्यायपूर्ण कदम बताया. उन्होंने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन जारी रखने की चेतावनी दी. छात्रों ने हॉस्टल में रहने के अपने अधिकार पर जोर दिया. फिलहाल छात्र अपनी मांगों पर अडे हुए हैं. कुलपति ने हॉस्टल खाली कराने की कार्रवाई को वैध ठहराया. उन्होंने बताया कि केवल उन लोगों को हटाया जा रहा है जो अवैध रूप से रह रहे हैं. कुलपति ने कहा कि यह व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक है. उन्होंने प्रभावित छात्रों की शिकायतों की जांच का भरोसा दिया. कुलपति ने कहा कि उचित समाधान सुनिश्चित किया जाएगा.
पता पूछने के बहाने महिला से सोने का टप्स झपटने वाले दो आरोपी गिरफ्तार...
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वाराणसी : लालपुर-पांडेयपुर थाना क्षेत्र में सत्यम नगर कॉलोनी में एक महिला से पता पूछने के बहाने सोने का टप्स झपटकर फरार हुए दो आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. आरोपियों ने 16 जून को महिला से घर के बाहर पता पूछने के बहाने बातचीत की और मौका पाकर कान से सोने का टप्स झपटकर फरार हो गए थे. घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी.फाइनेंस कंपनी में बेच दिया था टप्सपुलिस पूछताछ में सामने आया कि दोनों आराेपियों ने लूटा गया सोने का टप्स एक फाइनेंस कंपनी को बेच दिया था. बिक्री से मिले पैसों में से बचे हुए 8 हजार रुपये पुलिस ने बरामद किए हैं.पुलिस ने नकद के अलावा आरोपियों के कब्‍जे से दो मोबाइल फोन तथा घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल भी बरामद की है. लालपुर-पांडेयपुर पुलिस की कार्रवाई से झपटमारी की इस घटना का खुलासा करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है.ALSO READ : कांग्रेस ने एसआईटी पर उठाए सवाल, जिला मुख्‍यालय पर गेट बंद करने को लेकर हुआ हंगामा...लूट के मामले में वांछित हिस्ट्रीशीटर गिरफ्तार वाराणसी के मंडुवाडीह थाना क्षेत्र के महेशपुर निवासी हिस्ट्रीशीटर कुंदन गौड़ को पुलिस ने लूट के एक पुराने मामले में गिरफ्तार कर लिया. आरोपी मुकदमा अपराध संख्या 458/2019 में धारा 392, 411 व 414 आईपीसी के तहत वांछित चल रहा था. पुलिस के अनुसार बुधवार लहरतारा चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक प्रवीण सचान ने टीम के साथ कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया. आवश्यक विधिक कार्रवाई के बाद उसे न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया.