गंगा चली चेतावनी बिंदु की ओर, गलियों में नाव, वरुणा नदी का तटवर्ती इलाका डूबा...

वाराणसी : पहाड़ों और मैदानी इलाकों में लगातार हो रही बारिश के बीच गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है. वाराणसी में मां गंगा का पानी अब चेतावनी बिंदु के करीब पहुंच गया है. केंद्रीय जल आयोग के राजघाट, वाराणसी गेज स्थल से 31 अगस्त 2026 को सुबह 10 बजे जारी आंकड़ों के मुताबिक गंगा का जलस्तर 69.94 मीटर दर्ज किया गया. नदी का जलस्तर फिलहाल 2 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है. केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, राजघाट पर गंगा का चेतावनी स्तर 70.262 मीटर और खतरे का स्तर 71.262 मीटर निर्धारित है. ऐसे में मौजूदा जलस्तर चेतावनी स्तर से करीब 32 सेंटीमीटर नीचे है, जबकि खतरे के निशान से करीब 1.32 मीटर नीचे पानी बह रहा है.
गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर काशी के प्रसिद्ध घाटों पर साफ दिखाई दे रहा है. जलस्तर बढ़ने से वाराणसी के 84 घाट पानी में डूब गए हैं. घाटों की सीढ़ियां और कई हिस्से पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं. गंगा का पानी लगातार ऊपर आने से घाट किनारे रहने वाले लोगों और श्रद्धालुओं की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं. मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट की गलियों में पानी घुस गया है. जल पुलिस के थाने में भी बाढ़ का पानी पहुंच गया. सभी घाटों का आपसी संपर्क टूटा है. पानी बढ़ने का सिलसिला जारी रहा तो जल्द ही अस्सी घाट घाट की सड़कों पर पहुंच जाएगा. सिंधिया घाट के रत्नेश्वर महादेव मंदिर के शिखर तक पानी पहुंचने वाला है.
गंगा के बढ़ते पानी का असर नमो घाट पर भी देखने को मिल रहा है. यहां स्थापित प्रसिद्ध ‘नमस्ते’ प्रतिमा का बड़ा हिस्सा पानी में डूब चुका है. प्रतिमा के आसपास भी गंगा का पानी पहुंच गया है, जिससे घाट का नजारा पूरी तरह बदल गया है.
गंगा की सहायक नदी वरुणा भी उफान पर है. पलट प्रवाह का प्रभाव दिखने लगा है. तटवर्ती क्षेत्र में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. नक्खी घाट इलाके में बाढ़ का पानी घुस गया है. 3 दर्जन से अधिक घर बाढ़ से प्रभावित हैं. लाेग घरों को छोडकर सुरक्षित स्थान पर चले गए हैं.
प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी
जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए जिला प्रशासन अलर्ट मोड में है. सुरक्षा के मद्देनजर नौका संचालन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है. इसके साथ ही गंगा के तटवर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है. सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एनडीआरएफ और जल पुलिस की टीमें तैनात की गई हैं. प्रशासन की ओर से लोगों से गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए सावधानी बरतने और नदी के आसपास जाने से बचने की अपील की जा रही है. गंगा के जलस्तर पर प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है. यदि पानी इसी रफ्तार से बढ़ता रहा तो आने वाले समय में तटवर्ती इलाकों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है.
61 बाढ़ राहत शिविर, 21 बाढ़ चौकियां
गंगा और वरुणा नदियों के जलस्तर में वृद्धि और बाढ़ की स्थिति को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने तैयारियां की हैं. बाढ़ से निपटने के लिए 61 बाढ़ राहत शिविर, 21 बाढ़ चौकियां और 198 नावों का प्रबंध किया गया है. जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने बताया कि आमजन की सुरक्षा, त्वरित राहत एवं बचाव कार्यों के लिए व्यापक एवं बहुस्तरीय तैयारियां की गई हैं. बाढ़ की स्थिति में प्रभावित परिवारों को तत्काल आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने के लिए बाढ़ राहत किट का पर्याप्त प्रबंध किया गया है.
उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित एवं संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए विभिन्न विभागों एवं बचाव एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित किया है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाकर उन्हें सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें. राहत शिविरों में प्रभावित लोगों के ठहरने के साथ-साथ भोजन, पेयजल, प्रकाश, स्वच्छता एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है. बाढ़ राहत शिविरों में कम्युनिटी किचन के माध्यम से प्रतिदिन तीन समय पौष्टिक एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है.
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