भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक प्रौद्योगिकी के सामंजस्य से प्राप्त होगा विकसित भारत का लक्ष्य : प्रो. आनन्द कुमार त्यागी

वाराणसी: महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में हिन्दी और अन्य भारतीय भाषा विभाग के अंतर्गत सावित्रीबाई फुले व्याख्यानमाला में ‘भारतीय ज्ञान परम्परा और कृत्रिम मेधा’ विषय पर गुरुवार को व्याख्यान का आयोजन किया गया. कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी ने भारतीय ज्ञान परम्परा और आधुनिक तकनीक के सामंजस्य पर विशेष जोर दिया.

प्रो. आनन्द कुमार त्यागी बताया कि कृत्रिम मेधा ने वर्तमान समय में हमारे कार्यों को काफी आसान बनाया है, लेकिन इसके साथ ही साथ अनेक चुनौतियों को भी उत्पन्न किया है. इसमें नैतिकता के मुद्दे को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है, उन्होंने बताया कि हमारे यहां के साहित्यकार भारतीय ज्ञान परम्परा के बहुत निकट रहे हैं, जिन्होंने अपने साहित्य के माध्यम से भारतीय ज्ञान परम्परा के विविध आयामों पर गंभीर लेखन किया है. नई शिक्षा नीति 2020 पर विशेष बल देते हुए भारतीय ज्ञान परम्परा और आधुनिक प्रौद्योगिकी को केन्द्र में रखकर ही नई शिक्षा नीति का मसौदा तैयार किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य भारतीय ज्ञान परम्परा और आधुनिक प्रौद्योगिकी के आपसी सामंजस्य और सहयोग से विकसित भारत का निर्माण करना है.
मुख्य वक्ता रांची विश्वविद्यालय के पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष एवं थावे विद्यापीठ के पूर्व कुलपति प्रो. जंगबहादुर पाण्डेय ने भारतीय ज्ञान परम्परा पर चर्चा करते हुए काशी की समृद्ध ज्ञान परम्परा का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि काशी भारतीय ज्ञान परम्परा की समृद्ध भूमि रही है। यह भारतीय ज्ञान परम्परा हमें मानवीयता से जोड़कर मोक्ष तक ले जाने की बात करती है। काशी इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। काशी अपने समृद्ध भारतीय ज्ञान परंपरा के साथ-साथ मुक्ति की भूमि के रूप में भी जाना जाता रहा है। कृत्रिम मेधा से भारतीय ज्ञान परंपरा के की अल्पज्ञात पक्षों को सामने लाने में सहूलियत भी हुई है।
प्रो.अनुराग कुमार ने संस्कृत, पाली, प्राकृत और हिन्दी साहित्य की समृद्ध विरासत पर व्याख्यान दिया .उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा मनुष्य और मनुष्यता को आत्मसात कर मानवीय जीवन को नैतिक उन्नयन की ओर ले जाने की बात करता रहा है जिसे आज के कृत्रिम मेधा युग में विशेष रूप से ध्यान रखने की आवश्यकता है.
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संचालन प्रो. प्रीति एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रभारी विभागाध्यक्ष प्रो. अनुकूल चंद राय ने किया. इस अवसर पर मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. राजेश कुमार मिश्र, कुलानुशासक प्रो. के.के. सिंह, दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. नंदिनी सिंह, प्रो. निरंजन सहाय, डॉ. अमरीश राय, डॉ. विजय रंजन आदि उपस्थित रहे.



