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शुरू हो गया छठ का महापर्व, जाने क्यों रखा जाता है

शुरू हो गया छठ का महापर्व, जाने क्यों रखा जाता है
Oct 24, 2025, 12:35 PM
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Posted By Gaandiv

Chhath Puja 2025: आस्था से परिपूर्ण छठ पर्व हिंदुओं के लिए बड़ा ही महत्वपूर्ण होता है, जिसे बिहार से लेकर देशभर में बड़े ही धूम-धाम के साथ मनाया जाता है. चार दिनों तक चलने वाले इस पावन पर्व की शुरूआत कल शनिवार 25 अक्टूबर को नहाय-खाय के साथ शुरू होगा, जो 28 अक्टूबर मंगलवार की शाम को समाप्त हो जाएगा. छठ पूजा का उपवास सबसे कठिन व्रतों में से एक माना गया है.


इस पर्व को मनाने वाली सभी व्रतियां छठी मईया के लिए 36 घंटे तक निर्जला उपवास करती हैं. भगवान सूर्य और छठ मैया की पूजा करने का विधि-विधान है. इस व्रत में दो बार सूर्य भगवान को अर्घ्य दिया जाता है. इसमें पहले ढलते हुए सूर्य को और दूसरे में उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है. इस अद्भुत और अनोखी परंपराओं के बाद से व्रतियों का उपवास पूरा होता है.


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जाने क्यों रखा जाता है छठ व्रत


छठ पर्व का ये चार दिन बहुत ही खास माना जाता हैं. जहां पहले दिन नहाय-खाय, दूसरा खरना, तीसरा संध्या अघ्य और चौधा ऊषा अर्घ्य-पारण. इसे मनाने के लिए कई पवित्र अनुष्ठान किए जाते हैं, जिसमें व्रती पूरी श्रद्धा और रश्मों-रिवाजों के साथ सूर्य देव और छठी मइया की पूजा-अर्चना करती हैं. छठी मईया का व्रत महिलाएं अपने परिवार और पुत्र की दीर्घायु के लिए करती हैं. ऐसी भी मान्यता है कि जिसे संतान की प्राप्ति नहीं होती है तो छठी मईया का व्रत रखने से उस महिला की जल्द ही गोद भर जाती है. इन्हीं मान्यताओं के चलते इस पर्व का महत्व धीरे-धीरे और भी बढ़ता चला गया. मान्यता है कि छठ व्रत करने से घर में सुख-शांति, सौभाग्य और समृद्धि आती है, और छठी मईया अपने भक्तों पर अपनी कृपा बरसाती हैं.


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छठ पर्व का नाम षष्ठी के अपभ्रंश से पड़ा है. यह कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है. दिवाली के छह दिन बाद आने वाले इस महापर्व को छठ कहा जाता है. यह चार दिवसीय पर्व है जिसमें व्रती पूरी शुद्धता और पवित्रता का पालन करते हैं. पारंपरिक नियमों के अनुसार, छठ व्रत बहुत कठोर होता है, इसलिए इसे महापर्व और महाव्रत भी कहा जाता है.


छठी मैया कौन हैं.


छठी मैया जिन्हें षष्ठी माता भी कहा जाता है, बच्चों की रक्षक देवी मानी जाती हैं. मान्यता है कि ये सूर्य देव की बहन हैं और इन्हें प्रसन्न करने के लिए व्रती सूर्य देव की पूजा करती हैं. छठी मैया की पूजा नदी, तालाब या किसी पवित्र जल स्रोत के किनारे की जाती है. इनकी आराधना से संतान को लंबी आयु, स्वास्थ्य और सफलता की प्राप्ति होती है. छठवें अंश को सर्वश्रेष्ठ मातृ देवी माना गया है. इन्हें ब्रह्मा की मानस पुत्री के रूप में भी जाना जाता है.



पहला दिन- नहाय खाय, जो 25 अक्टूबर 2025 शनिवार को है.

दूसरा दिन- खरना, जो 26 अक्टूबर रविवार को है.

तीसरा दिन- संध्या अर्घ्य, जो 27 अक्टूबर सोमवार को किया जाएगा.

चौथा दिन- ऊषा अर्घ्य, 28 अक्टूबर मंगलवार को किया जाएगा.



पहला दिन – नहाय-खाय


छठ पूजा की शुरुआत नहाय-खाय से होती है. इस दिन घर की अच्छी तरह साफ-सफाई कर उसे खूब सजाया जाता है. सभी व्रतियां स्नान करके व्रत का संकल्प लेते हुए सात्विक भोजन करती हैं. इस दिन चना दाल, कद्दू की सब्जी और चावल का प्रसाद बनाया जाता है. इसी नहाय-खाय के साथ ही छठ पर्व की पवित्र शुरुआत होती है.


दूसरा दिन – खरना


छठ के दूसरे दिन खरना होता है. इस दिन व्रती पूरा दिन निर्जला उपवास रखते हैं. बता दें, छठ व्रत को महिला या पुरूष कोई भी रख सकता हैं. शाम को मिट्टी के चूल्हे पर गुड़ की खीर, रोटी और केले का प्रसाद बनता है. इस प्रसाद को सूर्य देव की पूजा के बाद से ग्रहण करना होता हैं. इसके बाद से 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत शुरू होता है जो उषा अर्घ्य के बाद ही तोड़ा जाता हैं.



तीसरा दिन – संध्या अर्घ्य


छठ पर्व के तीसरे दिन डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है. इसके लिए सभी व्रती छठ घाटों पर जल, दूध और प्रसाद के साथ सूर्य देव की आराधना करती हैं. सबसे अद्भुत बात तो यह है कि सभी व्रतियां घंटों भर पानी में खड़ी होकर सूर्य देव का ध्यान करती है और अपने परिवार की सुख शांति के लिए उनसे प्रार्थना करती हैं. इस पर्व पर कई तरह के फल, ठेकुआ और गुड़ की मिठाइयां प्रसाद के रूप में चढ़ाई जाती हैं. इस त्योहार के बीच छठी मईया का गाना बड़ा ही आनंद मय होता है जिससे माहौल पूरा भक्ति-भाव से गूंज उठता हैं.


चौथा दिन – उषा अर्घ्य


छठ पूजा का आखिरी दिन उषा अर्घ्य का होता है. इस दिन सुबह उगते हुए सूर्य भगवान जी को को अर्घ्य दिया जाता है. छठी मइया से सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना की जाती है. इसके बाद सभी व्रतीया छठ मईया का प्रसाद ग्रहण कर व्रत का समापन करती हैं.

काशी विश्वनाथ धाम में नवरात्रि के पहले दिन सजी भव्य सांस्कृतिक संध्या, भजनों और नृत्य से भक्तिमय हुआ माहौल
काशी विश्वनाथ धाम में नवरात्रि के पहले दिन सजी भव्य सांस्कृतिक संध्या, भजनों और नृत्य से भक्तिमय हुआ माहौल
वाराणसी। शारदीय नवरात्रि के पहले दिन रविवार को श्री काशी विश्वनाथ धाम स्थित मंदिर चौक में भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। मां भगवती की आराधना और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं को समर्पित इस कार्यक्रम में भजन गायन और नृत्य की प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को भक्तिरस से सराबोर कर दिया।कार्यक्रम का शुभारंभ श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी और अन्य गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम का संचालन उद्घोषिका मीनाक्षी दीक्षित ने किया।सांस्कृतिक संध्या में भजन गायक प्रवीण कुमार सिंह ने अपनी प्रस्तुतियों से भक्तिमय वातावरण बनाया। इसके बाद भजन गायक शेर सिंह ने भजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति और आध्यात्मिक भाव से जोड़ा। वहीं, सोनी सेठ के नृत्य समूह की आकर्षक प्रस्तुति ने कार्यक्रम में सांस्कृतिक रंग भर दिए।ALSO READ : बीएचयू के श्री विश्वनाथ मंदिर में कलश स्थापना के साथ नौ दिवसीय पूजा कार्यक्रम का शुभारंभ.नवरात्रि के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य श्रद्धालुओं को दर्शन-पूजन के साथ भारतीय कला, संगीत और आध्यात्मिक परंपराओं से जोड़ना है। मंदिर न्यास की ओर से नवरात्रि के प्रत्येक दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जिससे धाम आने वाले श्रद्धालुओं को धार्मिक आस्था के साथ सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिल सके।श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास धार्मिक परंपराओं के निर्वहन के साथ भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है।
सगरा तालाब के आसपास से हटेगा अतिक्रमण, नगर आयुक्त ने दिए सीमांकन के निर्देश.
सगरा तालाब के आसपास से हटेगा अतिक्रमण, नगर आयुक्त ने दिए सीमांकन के निर्देश.
वाराणसी। शहर में तालाबों के संरक्षण और स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से नगर निगम ने कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। इसी क्रम में रविवार को नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने माधोपुर स्थित सगरा तालाब का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान तालाब के आसपास फैली गंदगी और अतिक्रमण की स्थिति देखकर उन्होंने नाराजगी जताई। नगर आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों को तालाब की पैमाइश कराकर उसका सीमांकन कराने और अवैध अतिक्रमण को जल्द हटाने के निर्देश दिए।निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त ने तालाब के आसपास की स्थिति का जायजा लिया और अधिकारियों से वहां की व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि तालाबों का संरक्षण और उनके आसपास स्वच्छ वातावरण बनाए रखना आवश्यक है। इसके लिए तालाब की वास्तविक सीमा निर्धारित करना जरूरी है, ताकि उसके क्षेत्र में किए गए अवैध कब्जों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई की जा सके।नगर आयुक्त ने अधिकारियों को सगरा तालाब की तत्काल पैमाइश कराने और सीमांकन की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि तालाब के आसपास यदि अवैध अतिक्रमण पाया जाता है तो उसे हटाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए। साथ ही तालाब और उसके आसपास के परिसर में व्यापक सफाई अभियान चलाकर गंदगी को दूर करने के निर्देश भी दिए।ALSO READ : केंद्रीय कारागार वाराणसी में बंदियों की रामलीला का शुभारंभ, मुकुट पूजन के साथ नारद मोह की लीला का मंचनसोमवार से शुरू होगी सफाई और आगे की कार्रवाईनगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने संबंधित अधिकारियों के साथ चर्चा करते हुए सोमवार से ही सफाई अभियान और आगे की कार्रवाई की योजना पर काम शुरू करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि तालाब के आसपास साफ-सफाई सुनिश्चित करने के साथ ही सीमांकन और अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया में भी तेजी लाई जाए, ताकि तालाब की स्थिति में सुधार हो सके।नगर आयुक्त ने साफ किया कि तालाब के संरक्षण और सुंदरीकरण से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों को निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।नगर निगम की इस पहल से माधोपुर स्थित सगरा तालाब के आसपास स्वच्छता व्यवस्था बेहतर बनाने, उसकी सीमा स्पष्ट करने और अतिक्रमण की समस्या दूर करने की दिशा में कार्रवाई की उम्मीद है। अब संबंधित विभागों की ओर से की जाने वाली पैमाइश, सफाई और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
केंद्रीय कारागार वाराणसी में बंदियों की रामलीला का शुभारंभ, मुकुट पूजन के साथ नारद मोह की लीला का मंचन
केंद्रीय कारागार वाराणसी में बंदियों की रामलीला का शुभारंभ, मुकुट पूजन के साथ नारद मोह की लीला का मंचन
वाराणसी: केंद्रीय कारागार वाराणसी में नवरात्रि के प्रथम दिन रविवार को बंदियों द्वारा मंचित दस दिवसीय रामलीला का शुभारंभ विधि-विधान से मुकुट पूजन के साथ हुआ। रामलीला के पहले दिन नारद मोह की लीला का मंचन किया गया। बंदियों ने अपनी अभिनय कला के माध्यम से नारद मोह की कथा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। इस दौरान जेल के अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे।रामलीला का शुभारंभ मुकुट पूजन के साथ हुआ। इसके बाद नारद मोह की लीला का मंचन शुरू किया गया। कथा के अनुसार, कामदेव द्वारा नारद की समाधि भंग करने का प्रयास किया जाता है, लेकिन वह इसमें असफल रहता है। इसके बाद नारद को अपनी तपस्या पर अभिमान हो जाता है और वह स्वयं को कामदेव पर विजय प्राप्त करने वाला मानने लगते हैं। नारद इस घटना का समाचार भगवान शिव को सुनाते हैं। भगवान शिव उन्हें भगवान विष्णु से इस प्रसंग का उल्लेख नहीं करने की सलाह देते हैं।अभिमान के वशीभूत नारद भगवान विष्णु के सामने भी अपनी विजय का वर्णन करते हैं। इसके बाद भगवान विष्णु अपने भक्त के अहंकार को दूर करने के लिए माया रचते हैं। माया के प्रभाव में नारद राजा शीलनिधि की कन्या पर मोहित हो जाते हैं और उससे विवाह करने की इच्छा व्यक्त करते हैं। वह भगवान विष्णु से अपने लिए सुंदर रूप प्रदान करने की प्रार्थना करते हैं।भगवान विष्णु नारद को वानर का रूप देकर भेजते हैं। स्वयंवर में अपने रूप को लेकर नारद को अपमान का सामना करना पड़ता है। इससे क्रोधित होकर नारद भगवान विष्णु को मनुष्य रूप धारण करने और नारी वियोग में दर-दर भटकने का श्राप दे देते हैं। इसी श्राप को भगवान राम के अवतार और उनके वनवास के प्रसंग से जोड़कर दिखाया गया। इसके बाद भगवान राम अपने अंशों सहित अयोध्या में महाराज दशरथ के यहां प्रकट होते हैं। इसी प्रसंग के साथ रामलीला के पहले दिन का मंचन संपन्न हुआ।ALSO READ : सपा कार्यालय में मनाई गई लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती, संपूर्ण क्रांति के विचारों पर हुई चर्चा.केंद्रीय कारागार में बंदियों द्वारा आयोजित इस रामलीला का उद्देश्य धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ाव बनाए रखना है। दस दिनों तक चलने वाली इस रामलीला में विभिन्न प्रसंगों का मंचन किया जाएगा। बंदियों की सहभागिता से आयोजित यह कार्यक्रम जेल परिसर में धार्मिक वातावरण और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का माध्यम बना।इस अवसर पर वरिष्ठ चिकित्साधिकारी लक्ष्मीकांत त्रिपाठी, चिकित्साधिकारी अभिषेक सिंह, जेलर अखिलेश कुमार, डिप्टी जेलर अखिलेश कुमार मिश्र, अमित कुमार वर्मा, अशोक कुमार राय, अयोध्या प्रसाद, भोजराज, श्रीमती अमिता श्रीवास्तव और फार्मासिस्ट संदीप खरे सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।