सरस मेले में दिखा ग्रामीण हुनर का जादू, 'लखपति दीदी' पहल को मिल रही नई उड़ान
वाराणसी : धर्म और संस्कृति की नगरी काशी में इन दिनों हस्तशिल्प और ग्रामीण हुनर का महाकुंभ सजा है. संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के खेल मैदान में 20 फरवरी से 2 मार्च तक आयोजित सरस मेला यह मेला खास इसलिए है, क्योंकि यहाँ देश के अलग-अलग राज्यों से आई स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की महिलाओं ने गाडीव डीजिटल टीम से मंगलवार को बातचीत कर बताया की हाथों से बनाए गए उत्पादों को प्रदर्शन कर रही हैं.

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय और उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (SRLM) के तत्वावधान में आयोजित इस मेले में देश के विभिन्न राज्यों की स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी महिलाएं अपने उत्पादों का प्रदर्शन कर रही हैं. 'लखपति दीदी' योजना के तहत महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से यह मंच प्रदान किया गया है.

इस मेले में भारत के विभिन्न राज्यों (जैसे केरल, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और तेलंगाना) की ग्रामीण कला एक ही स्थान पर देखने को मिली. यहाँ की विविधता इसे 'मिनी इंडिया' जैसा अहसास कराती है.
मेले क्या है खास

हस्तशिल्प का खजाना: मेले में काली मिट्टी के बर्तन (ब्लैक पॉटरी), सहारनपुर का वुडन वर्क, और असम के बांस से बने आकर्षक सजावटी सामान उपलब्ध हैं.
परिधानों की विविधता: बनारसी सिल्क के साथ-साथ बिहार का टसर सिल्क, मध्य प्रदेश की चंदेरी और राजस्थान की राजपूती कढ़ाई वाले कपड़े ग्राहकों को लुभा रहे हैं.
शुद्ध स्वाद का संगम: यहाँ के फूड कोर्ट में आप राजस्थान की कचोरी, बिहार के लिट्टी-चोखा और केरल के मसालों का असली स्वाद ले सकते हैं. बिना मिलावट के अचार, मुरब्बा और शुद्ध शहद की भारी मांग है.
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खरीददारी के साथ-साथ यहाँ हर शाम सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर रहे हैं.



