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बीएचयू कर्मचारियों के नियमितीकरण का मामला पहुंचा हाईकोर्ट, केंद्र सरकार और यूजीसी से मांगा जवाब...

बीएचयू कर्मचारियों के नियमितीकरण का मामला पहुंचा हाईकोर्ट, केंद्र सरकार और यूजीसी से मांगा जवाब...
May 08, 2026, 04:29 AM
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Posted By Diksha Mishra

वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय में वर्षों से कार्यरत संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण का मामला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है. हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए केंद्र सरकार, यूजीसी और बीएचयू प्रशासन से जवाब तलब किया है. अदालत के इस आदेश के बाद विश्वविद्यालय में लंबे समय से कार्यरत हजारों कर्मचारियों में नई उम्मीद जगी है.


दरअसल, बीते दिनों बीएचयू में नियमितीकरण की मांग को लेकर कर्मचारियों का आंदोलन तेज हो गया था. विभिन्न विभागों के कर्मचारी मधुबन पार्क में बड़ी संख्या में जुटे और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हुए स्थायी नियुक्ति की मांग उठाई. कर्मचारियों का कहना था कि वे वर्षों से विश्वविद्यालय की सेवा कर रहे हैं, लेकिन आज तक उन्हें स्थायी कर्मचारी का दर्जा नहीं मिल सका. बाद में विश्वविद्यालय प्रशासन और जिला प्रशासन के आश्वासन पर आंदोलन को फिलहाल स्थगित कर दिया गया था.


इसी बीच टेलीफोन लाइनमैन के रूप में कार्यरत राम सिंह उर्फ शमशेर सिंह समेत अन्य कर्मचारियों द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकलपीठ ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया. याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि वे वर्ष 1998 से लगातार बीएचयू में कार्यरत हैं और उनका सेवा रिकॉर्ड पूरी तरह साफ-सुथरा रहा है.


अदालत में यह भी बताया गया कि वर्ष 2004 में बीएचयू की टेलीकम्युनिकेशन सर्विसेज कमेटी ने इन कर्मचारियों के नियमितीकरण का प्रस्ताव पारित किया था. उस समय के कुलपति ने प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए वर्ष 2005 में इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी थी, लेकिन आज तक इस फैसले को लागू नहीं किया गया.


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कर्मचारियों का आरोप है कि उनसे लगातार स्थायी प्रकृति का कार्य लिया जा रहा है, बावजूद इसके उन्हें संविदा और दैनिक वेतनभोगी के रूप में रखा गया है. याची पक्ष ने अदालत में इसे श्रम शोषण बताते हुए कहा कि स्वीकृत पदों पर वर्षों तक अस्थायी रूप से काम कराना संविधान की भावना के विपरीत है.

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि बीएचयू रजिस्ट्रार ने 18 सितंबर 2025 को नियमितीकरण की मांग खारिज कर दी थी, जबकि सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों में लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा पर जोर दिया गया है.


हाईकोर्ट द्वारा केंद्र सरकार, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और बीएचयू प्रशासन से जवाब मांगे जाने के बाद अब इस मामले पर सभी की नजरें अगली सुनवाई पर टिक गई हैं. कर्मचारियों का मानना है कि यदि अदालत से राहत मिलती है तो विश्वविद्यालय में वर्षों से लंबित नियमितीकरण की प्रक्रिया को बड़ा रास्ता मिल सकता है.

अजय राय ने बोरी वाले सीवर लाइन का किया निरीक्षण, सत्‍ता पक्ष पर किए तीखे सवाल
अजय राय ने बोरी वाले सीवर लाइन का किया निरीक्षण, सत्‍ता पक्ष पर किए तीखे सवाल
वाराणसी : शहर के वार्ड नंबर 75 (अग्रवाल रेडियो चौराहा, शिवाला) में चोक हुई सीवर लाइन की जमीनी हकीकत उजागर करने के लिए आज यानी सोमवार को उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने खुद मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया. उनके साथ बडी संख्‍या में कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे.वहां पहुंचकर अजय राय ने स्वयं रंभा लेकर कार्यकर्ताओं के साथ मेनहोल का ढक्कन खुलवाया और सीवर लाइन की विस्तृत जांच की.भाजपा द्वारा सीवर से बालू भरी बोरी निकालने के दावे पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि जब पूरे क्षेत्र में 'त्रिनेत्र कमांड सेंटर' के सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं, तो प्रशासन आखिर उनकी फुटेज बाहर क्यों नहीं ला रहा है. सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक होने से यह बात तुरंत साफ हो जाएगी कि वहां बोरी किसने और कब डाली थी. अजय राय ने आरोप लगाया कि यह सब भाजपा सरकार और स्थानीय प्रशासन द्वारा अपनी प्रशासनिक नाकामी को छुपाने के लिए किया गया एक रचा हुआ कृत्य है. काशी की जनता बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रही है और भाजपा सरकार झूठी कहानियां गढ़कर अपनी विफलताओं पर पर्दा डालने का काम कर रही है, जिसका कांग्रेस पार्टी सड़क से लेकर सदन तक पुरजोर विरोध करेगी.यदि सच्चाई सामने नहीं आई, तो हम प्रधानमंत्री के संसदीय कार्यालय का घेराव करेंगे और जवाब मांगेंगे." उन्होंने कहा कि जलकल विभाग की ओर से तहरीर दिए जाने के बावजूद अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. न तो दोषियों की पहचान हुई है और न ही इस मामले की सच्चाई जनता के सामने आई है. सवाल उठाया कि "सरकार किस बात का इंतजार कर रही है. यदि वास्तव में जीरो टॉलरेंस की नीति है, तो नौ दिन बाद भी दोषियों को क्यों नहीं पकड़ा गया." उन्होंने यह भी कहा कि घटना स्थल पर स्मार्ट सिटी के सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं, जिनकी फुटेज चेक कर यह पता लगाया जा सकता है कि बोरा कौन लेकर आया और सीवर में किसने डाला.उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह काशी की जनता को भ्रमित कर रही है. "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब भी काशी आते हैं, तो विकास कार्यों की घोषणाएं होती हैं, लेकिन काशी की जनता आज भी सीवर, जलभराव और गंदगी जैसी समस्याओं से जूझ रही है." उन्होंने कहा कि "इतने वर्षों में हजारों करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद आम काशीवासी अपनी बुनियादी समस्याओं से कब मुक्त होगा."ALSO READ : BHU के ऑर्थोपेडिक डॉक्टरों ने पोस्टग्रेजुएट क्विज में जीता सिल्वर मेडलइस दौरान सतनाम सिंह, अरुण सोनी, वकील अंसारी, चंचल शर्मा, प्रवीण प्रकाश, सुनील श्रीवास्तव, संतोष चौरसिया, मिथुन सरदार, प्रमोद वर्मा, गोपाल चौबे, सदानंद तिवारी, अफसर खान, आकाश त्रिपाठी, सैय्यद महफूज अली, श्याम विश्वकर्मा, राजेंद्र गुप्ता, इमाम रजा, प्रेमदत्त तिवारी, गुरु प्रसाद यादव, इम्तियाज अहमद और शशि सोनकर समेत अन्य कांग्रेसजन मौजूद रहे.
BHU के ऑर्थोपेडिक डॉक्टरों ने पोस्टग्रेजुएट क्विज में जीता सिल्वर मेडल
BHU के ऑर्थोपेडिक डॉक्टरों ने पोस्टग्रेजुएट क्विज में जीता सिल्वर मेडल
वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (IMS) के ऑर्थोपेडिक्स विभाग के दो पोस्टग्रेजुएट डॉक्टरों ने पोस्टग्रेजुएट ऑर्थोपेडिक क्विज प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल हासिल किया है। डॉ. सुजीत और डॉ. शुभम की इस उपलब्धि पर विभाग के फैकल्टी सदस्यों, चिकित्सकों और छात्रों ने खुशी जताई।प्रतियोगिता में दोनों डॉक्टरों ने अपने मजबूत एकेडमिक ज्ञान, त्वरित सोच और टीमवर्क का प्रदर्शन करते हुए दूसरा स्थान हासिल किया। उनकी इस सफलता को विभाग के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया गया है।विभाग के फैकल्टी सदस्यों और साथियों ने दोनों डॉक्टरों को उनकी सफलता पर बधाई दी। विभाग की ओर से कहा गया कि इस तरह की उपलब्धियां पोस्टग्रेजुएट छात्रों को शैक्षणिक प्रतियोगिताओं में सक्रिय रूप से भाग लेने और ऑर्थोपेडिक्स के क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए प्रेरित करती हैं।ALSO READ : बरेका में राजभाषा लिखित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता, कर्मचारियों ने दिखाया उत्साहडॉ. सुजीत और डॉ. शुभम की उपलब्धि से विभाग के अन्य छात्रों में भी उत्साह है। इसे उनकी शैक्षणिक मेहनत और विषय पर मजबूत पकड़ का परिणाम माना जा रहा है।
बरेका में राजभाषा लिखित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता, कर्मचारियों ने दिखाया उत्साह
बरेका में राजभाषा लिखित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता, कर्मचारियों ने दिखाया उत्साह
वाराणसी: बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) में राजभाषा पखवाड़ा-2026 के अंतर्गत सोमवार को राजभाषा लिखित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का उद्देश्य कर्मचारियों में हिंदी के प्रति रुचि, जागरूकता और ज्ञान को बढ़ावा देना रहा।प्रतियोगिता का आयोजन बरेका महाप्रबंधक आशुतोष पंत के मार्गदर्शन तथा मुख्य राजभाषा अधिकारी एवं मुख्य यांत्रिक इंजीनियर (उत्पादन एवं विपणन) राम जन्म चौबे के नेतृत्व में किया गया। इसमें अधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।प्रतियोगिता में प्रतिभागियों से राजभाषा हिंदी, हिंदी भाषा एवं साहित्य तथा सामान्य ज्ञान से जुड़े प्रश्न पूछे गए। प्रतिभागियों ने प्रश्नों के उत्तर देकर अपने ज्ञान और प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रतियोगिता स्थल पर उत्साह और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का माहौल देखने को मिला।बरेका के राजभाषा विभाग के तत्वावधान में आयोजित इस प्रतियोगिता को कार्यालयीन कार्यों में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया गया। प्रतियोगिता के माध्यम से कर्मचारियों को राजभाषा हिंदी के प्रति जागरूक करने और कार्यालय में हिंदी के प्रयोग के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार करने का प्रयास किया गया।ALSO READ : मालवीय चौराहे पर अवैध पार्किंग पर कार्रवाई, 20 से अधिक टोटो सीजराजभाषा पखवाड़ा-2026 के तहत बरेका में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न कार्यक्रमों और प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है।