मणिकर्णिका कुंड में स्नान के साथ शुरू होती है काशी में पंचकोशी परिक्रमा, स्कंद महापुराण में उल्लेख
वाराणसी: काशी के पौराणिक महत्व वाले मणिकर्णिका घाट पर स्थित मणिकर्णिका कुंड श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है. महाशिवरात्रि से एक दिन पहले यहीं से पंचकोशी यात्रा की शुरुआत होती है. धार्मिक मान्यता है कि इस कुंड में स्नान मात्र से मोक्ष की प्राप्ति होती है. इस पवित्र स्थल का उल्लेख ग्रंथ स्कन्द पुराण के काशी खंड में भी मिलता है, जहां इसे अत्यंत पवित्र तीर्थ बताया गया है.
शिवरात्रि के पूर्व देश-विदेश से आए श्रद्धालु भोर से ही मणिकर्णिका कुंड में आस्था की डुबकी लगाते नजर आए. मान्यता है कि इस दिन यही से स्नान कर पंचकोशी यात्रा प्रारंभ करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.
मणिकर्णिका तीर्थ के पुरोहितों के अनुसार यह परंपरा लगभग 1600 वर्षों से चली आ रही है. पुरोहितों ने बताया कि श्रद्धालु पहले कुंड में स्नान करते हैं, विधिवत पूजन-अर्चन के बाद पंचकोशी मार्ग पर प्रस्थान करते हैं. करीब 80 किलोमीटर की यह यात्रा काशी की धार्मिक परिक्रमा मार्ग मानी जाती है, जिसे एक ही दिन में पूर्ण करना होता हैं.
घाटों पर सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन भी सतर्क नजर आया. शिवरात्रि को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और साफ-सफाई की विशेष व्यवस्था की गई है.
ALSO READ:वाराणसी में मिनी फारेस्ट से सुधरेगी आबोहवा, 39 हेक्टेयर में हरियाली की तैयारी
आस्था, परंपरा और श्रद्धा का अद्भुत संगम मणिकर्णिका कुंड पर देखने को मिल रहा है, जहां हर हर महादेव के जयघोष के साथ पंचकोशी यात्रा की शुरुआत हो रही है. काशी एक बार फिर अपनी धार्मिक विरासत और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर दिखाई दे रही है.



