लता मंगेशकर के करियर के पीछे छिपी दुख भरी कहानी, जान आप भी हो जाएंगे भावुक

लता मंगेशकर भारतीय संगीत की दुनिया का वो नाम जो किसी परिचय का मोहताज नहीं है. 'सुरों की रानी' लता मंगेशकर जी की सुरीली आवाज सुन हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाता, उनकी आवाज में वो खनक थी जिसके चलते लोग उनकी सुर के दिवाने हो बैठे. सिर्फ लोग ही नहीं उनके गीतो को बॉलीवुड स्टार भी काफी पसंद करते थे. उनका हर गीत सुनने को लोग बड़े ही बेताब रहने लगे, जैसे कि अजीब दास्तां है ये, गीत "आएगा आनेवाला" , आपकी नजरों ने समझा, प्यार किया तो डरना क्या, मेरा साया साथ होगा, पिया तोसे, आज फिर जीने की तमन्ना ऐसे कई गानों में लता ने जान डाल दी.

इन गीतों ने कभी खुशी, कभी गम की भावनाओं को व्यक्त किया तो इनके गीतों की धुन पर लोग खुद को नाचने पर मजबूर हो बैठते. लता में वो खूबी थी कि वो अपने गीतों के जरिए मनुष्य की हर भावना को संगीत प्रेमियों के दिलों तक पहुंचाने का हुनर रखती थी. अपने सुरों से लोगों का ध्यान आकर्षित करने वाली लता मंगेशकर भारत की स्वर कोकिला के नाम से मशहूर हो बैठी. हिंदी, मराठी लोकप्रिय गीतों से लेकर कई गीतों को अपनी आवाज दी. लेकिन 6 फरवरी साल 2022 में ये आवाज हमेशा-हमेशा के लिए शांत हो गई. जी हां, 92 (बानबे) साल की उम्र में लता कोरोना और निमोनिया की शिकार हो गई, जिससे उनकी मौत हो गई थी.

प्रेमियों के दिलों में लता के जिंदा गीत
भले ही आज वो हमारे बीच नहीं हैं, पर उनकी विरासत, खूबसूरत आवाज और गाने हमेशा प्रेमियों के दिलों में जिंदा और अमर रहेंगे. लता मंगेशकर की आवाज को देश ने तब पहचाना जब 1949 (उनचास) में फिल्म 'महल' का लोकप्रिय गीत "आएगा आनेवाला" सुना. जिसके बाद उन्होंने 1943 (तैंतालीस) में मराठी फिल्मों में गाना शुरू किया, इस गीत ने उन्हें रातों-रात हिंदी सिनेमा की शीर्ष गायिका बना दिया. सुरों की ताल मिलाने वाली लता के लिए उनके सुर किसी खजाने से कम नहीं थे, जिसके चलते उन्हें ‘भारत रत्न’ से सम्मानित भी किया गया था. बात करें लता मंगेशकर के जिंदगी की तो, उनके करियर ने कितनी भी ऊंचाइयां छुई, पर निजी जिंदगी में उन्होंने बड़े ही दुख झेले. जिससे आज हम आपको रूबरे कराएंगे.

जाने लता को जहर देने वाला कौन आरोपी
मध्यप्रदेश के इंदौर में जन्मी लता के पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर एक मराठी संगीतकार, शास्त्रीय गायक और थिएटर एक्टर थे. लती की मां गुजराती थी. पिता से मिली संगीत की इस विरासत को लता ने अपने ऑचल से संभाले रखा, जिसने देश को एक सुरीली, मन को भां जाने वाली सुर दिया. बड़ी बात तो यह है कि, लता मंगेशकर जब पैदा हुई थीं तब पिता दीनानाथ ने उनका नाम हेमा रखा था जिसे बदल कर लता कर दिया. इसके पीछे भी एक दिलचस्प कहानी छिपी है. दरअसल, एक्टर दीनानाथ एक नाटक कर रहे थे, जिसका नाम था ‘भावबंधन’ था, कहते हैं कि इस नाटक में एक महिला कैरेक्टर के लतिका नाम पर दीनानाथ इतने प्रभावित हुए कि अपनी बेटी हेमा का नाम लता रख दिया.

तभी से छोटी सी गुड़िया को लता मंगेशकर के नाम से बुलाया जाने लगा. इस छोटी सी गुड़िया के साथ 33 साल की उम्र में एक बड़ी घटना घटी, जी हां, लता मंगेशकर को जहर देकर मारने की साजिश रची गई थी, इसके पीछे की वजह ये थी कि उनकी सुरीली आवाज कुछ लोगों को रास नहीं आ रहा था, जिसके चलते उनके जीवन पर एक बुरा असर पड़ा था, जिसे लेकर लता मंगेशकर ने एक इंटरव्यू में बताया था कि, साल 1963 (तिरेसठ) में वो सबसे भयानक दौर था, जब उनकी हालत इतनी खराब हो गई थी कि चलना तो दूर वह बिस्तर से उठ तक नहीं पाती थीं, तभी भनक लगी कि उन्हें जान से मारने के लिए कोई धीरे-धीरे उन्हें जहर दिया जा रहा था.
खराब स्थिति का लता ने किया डट कर सामना
हालत खराब होने पर उनका इलाज फैमिली डॉक्टर आर पी कपूर ने किया था. लेकिन मौत के मुंह से बाहर निकलना लता के लिए इतना आसान नहीं था, उन्होंने तीन महीने तक बिस्तर पर लेटे रहने के बाद भी अपना हौसला खोया नहीं बल्कि, अपने पैरों पर खड़ी होकर अपना गाना भी शुरू किया. लता के करीबी पद्मा सचदेव ने अपनी किताब 'ऐसा कहां से लाऊं' में सिंगर को धीमा जहर दिए जाने वाले वाकये के बारे में बताया था, जिसका जिक्र कर लता ने बताया कि, लेखक मजरुह सुल्तानपुरी कई दिनों तक लता मंगेशकर के खाने से पहले वो खुद उनका खाना चखते थे और फिर लता को खिलाते थे. बड़ी बात तो यह है कि लता ने उस इंसान के खिला कोई कार्रवाई नहीं कि जो हर रोज उन्हें जहर देता रहा, इसकी वजह पूछे जाने पर उन्होंने कहा था कि उस शख्स के खिलाफ उनके पास कोई सबूत नहीं था. उनकी इसी निर्मलता और उनकी आवाज पर देश फिदा था. जिसके चलते आज भी लोग उन्हें बड़े ही सम्मान के साथ याद करते हैं.

लता मंगेशकर का भरा-पूरा परिवार एक खुशहाल परिवार था, लेकिन उन्होंने अपना खुद का घर बसाने के बजाय कुंवारा ही रहना मंजूर किया. हालांकि, पिता की मौत के बाद घर के सभी सदस्यों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी, फिर भी वो डगमगाई नहीं बल्कि इस स्थिति का डर कर सामना किया और कम उम्र में काम करने लगी, ऐसे में उनके मन में एक पल के लिए शादी का ख्याल आता तो था, पर उसे सपना सोचकर मन से निकाल फेंकती थीं.
ऐसी थी हम सब की लता ताई, अपनी शादी की वजह उन्होंने एक इंटरव्यू में बताते हुए कहा, लोग मानते हैं कि एक महिला जब तक शादी और बच्चे नहीं करती, वो अधूरी रहती है, पर ऐसा बिलकुल नहीं है, इसलिए 'लोगों तरह-तरह की इन बातों को नजरअंदाज करना सीखें, नहीं तो, सुखी जीवन जीना कठिन हो जाएगा. नेगेटिव और डिप्रेशन वाली एनर्जी से दूर रहना चाहिए, मैंने हमेशा ऐसा किया है.' बुरी चीजों से खुद को जितना दूर रखेंगे आप उतना ही खुश रहेंगे और अपने करियर को ऊंचाईयों के सिखर तक पहुंचा सकेंगे.



