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लता मंगेशकर के करियर के पीछे छिपी दुख भरी कहानी, जान आप भी हो जाएंगे भावुक

लता मंगेशकर के करियर के पीछे छिपी दुख भरी कहानी, जान आप भी हो जाएंगे भावुक
Feb 10, 2026, 11:56 AM
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Posted By Preeti Kumari

लता मंगेशकर भारतीय संगीत की दुनिया का वो नाम जो किसी परिचय का मोहताज नहीं है. 'सुरों की रानी' लता मंगेशकर जी की सुरीली आवाज सुन हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाता, उनकी आवाज में वो खनक थी जिसके चलते लोग उनकी सुर के दिवाने हो बैठे. सिर्फ लोग ही नहीं उनके गीतो को बॉलीवुड स्टार भी काफी पसंद करते थे. उनका हर गीत सुनने को लोग बड़े ही बेताब रहने लगे, जैसे कि अजीब दास्तां है ये, गीत "आएगा आनेवाला" , आपकी नजरों ने समझा, प्यार किया तो डरना क्या, मेरा साया साथ होगा, पिया तोसे, आज फिर जीने की तमन्ना ऐसे कई गानों में लता ने जान डाल दी.


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इन गीतों ने कभी खुशी, कभी गम की भावनाओं को व्यक्त किया तो इनके गीतों की धुन पर लोग खुद को नाचने पर मजबूर हो बैठते. लता में वो खूबी थी कि वो अपने गीतों के जरिए मनुष्य की हर भावना को संगीत प्रेमियों के दिलों तक पहुंचाने का हुनर रखती थी. अपने सुरों से लोगों का ध्यान आकर्षित करने वाली लता मंगेशकर भारत की स्वर कोकिला के नाम से मशहूर हो बैठी. हिंदी, मराठी लोकप्रिय गीतों से लेकर कई गीतों को अपनी आवाज दी. लेकिन 6 फरवरी साल 2022 में ये आवाज हमेशा-हमेशा के लिए शांत हो गई. जी हां, 92 (बानबे) साल की उम्र में लता कोरोना और निमोनिया की शिकार हो गई, जिससे उनकी मौत हो गई थी.


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प्रेमियों के दिलों में लता के जिंदा गीत


भले ही आज वो हमारे बीच नहीं हैं, पर उनकी विरासत, खूबसूरत आवाज और गाने हमेशा प्रेमियों के दिलों में जिंदा और अमर रहेंगे. लता मंगेशकर की आवाज को देश ने तब पहचाना जब 1949 (उनचास) में फिल्म 'महल' का लोकप्रिय गीत "आएगा आनेवाला" सुना. जिसके बाद उन्होंने 1943 (तैंतालीस) में मराठी फिल्मों में गाना शुरू किया, इस गीत ने उन्हें रातों-रात हिंदी सिनेमा की शीर्ष गायिका बना दिया. सुरों की ताल मिलाने वाली लता के लिए उनके सुर किसी खजाने से कम नहीं थे, जिसके चलते उन्हें ‘भारत रत्न’ से सम्मानित भी किया गया था. बात करें लता मंगेशकर के जिंदगी की तो, उनके करियर ने कितनी भी ऊंचाइयां छुई, पर निजी जिंदगी में उन्होंने बड़े ही दुख झेले. जिससे आज हम आपको रूबरे कराएंगे.


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जाने लता को जहर देने वाला कौन आरोपी


मध्यप्रदेश के इंदौर में जन्मी लता के पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर एक मराठी संगीतकार, शास्त्रीय गायक और थिएटर एक्टर थे. लती की मां गुजराती थी. पिता से मिली संगीत की इस विरासत को लता ने अपने ऑचल से संभाले रखा, जिसने देश को एक सुरीली, मन को भां जाने वाली सुर दिया. बड़ी बात तो यह है कि, लता मंगेशकर जब पैदा हुई थीं तब पिता दीनानाथ ने उनका नाम हेमा रखा था जिसे बदल कर लता कर दिया. इसके पीछे भी एक दिलचस्प कहानी छिपी है. दरअसल, एक्टर दीनानाथ एक नाटक कर रहे थे, जिसका नाम था ‘भावबंधन’ था, कहते हैं कि इस नाटक में एक महिला कैरेक्टर के लतिका नाम पर दीनानाथ इतने प्रभावित हुए कि अपनी बेटी हेमा का नाम लता रख दिया.


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तभी से छोटी सी गुड़िया को लता मंगेशकर के नाम से बुलाया जाने लगा. इस छोटी सी गुड़िया के साथ 33 साल की उम्र में एक बड़ी घटना घटी, जी हां, लता मंगेशकर को जहर देकर मारने की साजिश रची गई थी, इसके पीछे की वजह ये थी कि उनकी सुरीली आवाज कुछ लोगों को रास नहीं आ रहा था, जिसके चलते उनके जीवन पर एक बुरा असर पड़ा था, जिसे लेकर लता मंगेशकर ने एक इंटरव्यू में बताया था कि, साल 1963 (तिरेसठ) में वो सबसे भयानक दौर था, जब उनकी हालत इतनी खराब हो गई थी कि चलना तो दूर वह बिस्तर से उठ तक नहीं पाती थीं, तभी भनक लगी कि उन्हें जान से मारने के लिए कोई धीरे-धीरे उन्हें जहर दिया जा रहा था.


खराब स्थिति का लता ने किया डट कर सामना


हालत खराब होने पर उनका इलाज फैमिली डॉक्टर आर पी कपूर ने किया था. लेकिन मौत के मुंह से बाहर निकलना लता के लिए इतना आसान नहीं था, उन्होंने तीन महीने तक बिस्तर पर लेटे रहने के बाद भी अपना हौसला खोया नहीं बल्कि, अपने पैरों पर खड़ी होकर अपना गाना भी शुरू किया. लता के करीबी पद्मा सचदेव ने अपनी किताब 'ऐसा कहां से लाऊं' में सिंगर को धीमा जहर दिए जाने वाले वाकये के बारे में बताया था, जिसका जिक्र कर लता ने बताया कि, लेखक मजरुह सुल्तानपुरी कई दिनों तक लता मंगेशकर के खाने से पहले वो खुद उनका खाना चखते थे और फिर लता को खिलाते थे. बड़ी बात तो यह है कि लता ने उस इंसान के खिला कोई कार्रवाई नहीं कि जो हर रोज उन्हें जहर देता रहा, इसकी वजह पूछे जाने पर उन्होंने कहा था कि उस शख्स के खिलाफ उनके पास कोई सबूत नहीं था. उनकी इसी निर्मलता और उनकी आवाज पर देश फिदा था. जिसके चलते आज भी लोग उन्हें बड़े ही सम्मान के साथ याद करते हैं.


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लता मंगेशकर का भरा-पूरा परिवार एक खुशहाल परिवार था, लेकिन उन्होंने अपना खुद का घर बसाने के बजाय कुंवारा ही रहना मंजूर किया. हालांकि, पिता की मौत के बाद घर के सभी सदस्यों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी, फिर भी वो डगमगाई नहीं बल्कि इस स्थिति का डर कर सामना किया और कम उम्र में काम करने लगी, ऐसे में उनके मन में एक पल के लिए शादी का ख्याल आता तो था, पर उसे सपना सोचकर मन से निकाल फेंकती थीं.


ऐसी थी हम सब की लता ताई, अपनी शादी की वजह उन्होंने एक इंटरव्यू में बताते हुए कहा, लोग मानते हैं कि एक महिला जब तक शादी और बच्चे नहीं करती, वो अधूरी रहती है, पर ऐसा बिलकुल नहीं है, इसलिए 'लोगों तरह-तरह की इन बातों को नजरअंदाज करना सीखें, नहीं तो, सुखी जीवन जीना कठिन हो जाएगा. नेगेटिव और डिप्रेशन वाली एनर्जी से दूर रहना चाहिए, मैंने हमेशा ऐसा किया है.' बुरी चीजों से खुद को जितना दूर रखेंगे आप उतना ही खुश रहेंगे और अपने करियर को ऊंचाईयों के सिखर तक पहुंचा सकेंगे.

व्‍यापारी छोटी से छोटी समस्‍याएं पुलिस से करें साझा, डीसीपी गोमती जोन ने की बैठक...
व्‍यापारी छोटी से छोटी समस्‍याएं पुलिस से करें साझा, डीसीपी गोमती जोन ने की बैठक...
वाराणसी : पुलिस उपायुक्त गोमती जोन नीतू कादयान ने शनिवार को जोन के अंतर्गत समस्त थाना क्षेत्रों के व्यापारी बंधुओं के साथ एक गोष्ठी की, जिसमें विभिन्न व्यापारी संघों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे. गोष्ठी के दौरान व्यापारी बंधुओं द्वारा स्थानीय व्यापारिक गतिविधियों से जुड़ी विभिन्न समस्याएं एवं सुझाव साझा किए गए. उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए उनके समाधान के लिए आवश्यक निर्देश दिए गए. डीसीपी ने स्पष्ट किया कि पुलिस को प्राप्त होने वाली सभी शिकायतों का निष्पक्ष एवं प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाएगा.इस दौरान अधिकांश व्यापारियों द्वारा सार्वजनिक स्थलों एवं हाईवे पर लगी स्ट्रीट लाइटों के खराब होने की समस्या उठाई गई. उनका कहना था कि कस्बों में स्ट्रीट लाइट खराब रहने से चोरी की घटनाओं तथा हाईवे पर सड़क दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है. इस संबंध में डीसीपी ने बताया कि यद्यपि यह विषय सीधे पुलिस विभाग से संबंधित नहीं है, तथापि व्यापारियों द्वारा बताई गई ऐसी सभी समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित विभागीय अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर पृथक बैठक आयोजित की जाएगी, जिससे समस्याओं का प्रभावी निराकरण कराया जा सके.एक व्यापारी द्वारा सीसीटीवी कैमरा खराब होने की समस्या भी बताई गई, जिस पर उन्‍होंने संबंधित थाना प्रभारी से वार्ता कर तत्काल समाधान सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए. इसके अतिरिक्त कुछ व्यापारियों द्वारा बढ़ते साइबर अपराधों को लेकर चिंता व्यक्त की गई. इस पर डीसीपी ने अवगत कराया कि साइबर अपराधों से बचाव हेतु जन-जागरूकता अत्यंत आवश्यक है तथा पुलिस द्वारा समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं.Also Read: वाराणसी रिंग रोड पर भीषण सड़क हादसा: तीन ट्रेलरों की टक्कर में दो की मौत...डीसीपी ने सभी व्यापारी बंधुओं से अपील की कि वे अपनी छोटी से छोटी समस्याओं को भी पुलिस के साथ साझा करें, ताकि समय रहते उनका प्रभावी निस्तारण किया जा सके. साथ ही यह भी निर्देशित किया गया कि सभी व्यापारी अपने प्रतिष्ठानों पर सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य रूप से लगवाएं तथा उनका रुख सार्वजनिक मार्ग की ओर रखें, जिससे सार्वजनिक गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जा सके.गोष्ठी के समापन पर व्यापारियों द्वारा पुलिस उपायुक्त नीतू कादयान को स्मृति चिन्ह भेंट कर एवं पारंपरिक साफा पहनाकर सम्मानित किया गया. व्यापारी प्रतिनिधियों ने पुलिस प्रशासन द्वारा उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनने एवं समाधान हेतु तत्परता दिखाने पर आभार व्यक्त किया. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पुलिस एवं व्यापारियों के आपसी सहयोग से न केवल व्यापारिक वातावरण सुदृढ़ होगा, बल्कि क्षेत्र में शांति एवं सुरक्षा व्यवस्था भी और अधिक मजबूत होगी.
वाराणसी रिंग रोड पर भीषण  सड़क हादसा: तीन ट्रेलरों की टक्कर में दो की मौत...
वाराणसी रिंग रोड पर भीषण सड़क हादसा: तीन ट्रेलरों की टक्कर में दो की मौत...
वाराणसी : चोलापुर थाना क्षेत्र के हरिबल्‍लमपुर रिंग रोड पर शनिवार को भीषण सड़क हादसे में दो लोगों की मौत हो गई जबकि एक अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल बताया जा रहा है जिसका इलाज ट्रामसेंटर मे चल रहा है. स्थानीय लोगो के अनुसार एक ट्रेलर संदहा की ओर जा रहा था. तकनीकी खराबी के कारण ट्रेलर को सड़क पर रोकना पड़ा. इस बीच पीछे से आ रहे तेज रफ़्तार ट्रेलर ने पहले से खड़े टेलर मे टक्कर मार दी. उसके बाद पीछे चल रहे एक और ट्रेलर ने टक्कर मार दी. एक के बाद एक कर के कुल तीन ट्रेलर आपस मे भीड़ गए जिससे स्थिति और भयावह हो गई.इस दुर्घटना में सबसे पीछे चल रहे ट्रेलर के चालक श्याम सुंदर यादव (21) निवासी बटौआ, नौगढ़ (जनपद चंदौली) की मौके पर ही मौत हो गई. वह अपने परिवार में तीन भाइयों में सबसे छोटे थे. हादसे की सूचना मिलते ही चोलापुर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) चोलापुर भेजा. वहीं, अन्य दो घायल चालकों को गंभीर अवस्था में ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनमें से एक अन्य चालक की भी मौत हो गई. तीसरे घायल की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है.Also Read :नारी शक्ति वंदन : जन-जन तक पहुँचा अधिकारों का संदेश, स्कूटी रैली बनी प्रेरणा...पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है. प्रारंभिक जांच में तकनीकी खराबी और तेज रफ्तार को हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है. प्रशासन ने इस घटना के बाद रिंग रोड पर खड़े भारी वाहनों की निगरानी और उनकी तकनीकी जांच को और सख्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया.
नारी शक्ति वंदन : जन-जन तक पहुँचा अधिकारों का संदेश, स्कूटी रैली बनी प्रेरणा...
नारी शक्ति वंदन : जन-जन तक पहुँचा अधिकारों का संदेश, स्कूटी रैली बनी प्रेरणा...
वाराणसी : सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में “नारी शक्ति वंदन अधिनियम–प्रचार अभियान” के अंतर्गत आयोजित स्कूटी रैली को कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. इस अवसर पर कुलपति प्रो. शर्मा ने कहा कि “नारी शक्ति वंदन अधिनियम केवल एक कानूनी प्रावधान नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के उस शाश्वत आदर्श का पुनर्स्थापन है, जिसमें नारी को ‘शक्ति’, ‘सृजन’ और ‘संस्कार’ का मूल स्रोत माना गया है.” उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में यह अधिनियम महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में सहभागी बनाकर लोकतंत्र को अधिक समावेशी, सुदृढ़ और संवेदनशील बना रहा है.रैली के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि “इस स्कूटी रैली का प्रमुख उद्देश्य नारी सम्मान और अधिकारों के प्रति व्यापक जन-जागरण करना है, ताकि समाज के प्रत्येक वर्ग में महिलाओं के प्रति समानता, सुरक्षा और सम्मान की भावना विकसित हो. यह अभियान केवल जागरूकता तक सीमित नहीं, बल्कि महिलाओं में आत्मविश्वास, स्वावलंबन और नेतृत्व क्षमता के विकास का भी सशक्त माध्यम है.भाजपा की जिला महिला मोर्चा की कार्यालय प्रभारी सोनिया जैन बतौर मुख्य अतिथि ने कहा कि “इस प्रकार की रैलियाँ समाज में सकारात्मक सोच का संचार करती हैं, रूढ़ियों को तोड़ती हैं और युवतियों एवं महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति सजग होकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करती हैं. जब नारी शिक्षित, सशक्त और आत्मनिर्भर बनती है, तभी सशक्त समाज और समृद्ध राष्ट्र का निर्माण संभव होता है.Also Read :दवा कारोबार के नाम पर 60.54 लाख की धोखाधड़ी, दंपती समेत तीन पर मुकदमा...रैली विश्वविद्यालय के मुख्य भवन से प्रारंभ होकर राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, चौकाघाट होते हुए पुनः मुख्य परिसर में सम्पन्न हुई. इस अवसर पर प्रो जितेन्द्र कुमार,आयुर्वेद महाविद्यालय की प्रचार्या डॉ. नीलम गुप्ता,प्रो विधु द्विवेदी, प्रो दिनेश कुमार गर्ग,नोडल अधिकारी प्रो. विद्या कुमारी चंद्रा सहित अनेक महिलाओं एवं छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर कार्यक्रम को सफल बनाया. यह आयोजन नारी सशक्तिकरण, सामाजिक जागरूकता और समानता के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने का प्रेरणादायी प्रयास रहा.