काशी में धरोहरों का हाल: वर्षों पुरानी सूर्य घड़ी सड़क किनारे फांक रही धूल, बेफिक्र सरकारी मशीनरी

वाराणसी: आयकर भवन के परिसर में 237 साल पुरानी सूर्य घड़ी धूल फांक रही है. बाउंड्री के अंदर सड़क किनारे बनी इस घड़ी के आसपास गंदगी के साथ ही सामने कई गुमटियां लगी हैं. जिससे इस पर किसी का ध्यान ही नहीं जाता है.

धरोहर को संरक्षित के लिए प्रदेश सरकार ने किए कई जतन
काशी में धरोहर को संरक्षित करने के लिए केंद्र से लेकर प्रदेश सरकार की ओर से तमाम जतन किए जा रहे हैं. पुरानी काशी को हेरिटेज लुक दिया जा रहा है. वहीं, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय और मान मंदिर घाट पर मान महल में बनी वेध शाला और सूर्य घड़ी को संरक्षित किया गया, लेकिन चौकाघाट से मकबूल आलम रोड पर आयकर भवन के परिसर में 237 साल पुरानी सूर्य घड़ी धूल फांक रही है.

गंदगी मेंं बसी गुमटियों पर नहीं जा रहा किसी का ध्यान
बाउंड्री के अंदर सड़क किनारे बनी इस घड़ी के आसपास गंदगी के साथ ही सामने कई गुमटियां लगी हैं. जिससे इस पर किसी का ध्यान ही नहीं जाता है. घड़ी का निर्माण तत्कालीन गवर्नर जनरल ऑफ इंडिया लार्ड वारेन हेस्टिंग के आदेश पर 1784 में लेफ्टिनेंट फेम्स एल इनवर्ट ने कराया था.
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करीब दो सौ साल बाद 1976 में इसका जीर्णोद्धार नगर महा पालिका के तत्कालीन प्रशासक रामदास सोनकर ने कराया था. इसके बाद किसी सरकारी मशीनरी की नजर इस घड़ी पर नहीं पड़ी. नगर निगम प्रशासन इसकी देखभाल भी नहीं कर पाता है. घड़ी के आसपास की सफाई मंदिर का देखभाल करने वाले शारदा प्रसाद करते हैं. उनका कहना है कि नगर निगम की ओर कभी भी सफाई नहीं कराई जाती है.



