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काशी में धरोहरों का हाल: वर्षों पुरानी सूर्य घड़ी सड़क किनारे फांक रही धूल, बेफिक्र सरकारी मशीनरी

काशी में धरोहरों का हाल: वर्षों पुरानी सूर्य घड़ी सड़क किनारे फांक रही धूल, बेफिक्र सरकारी मशीनरी
Mar 29, 2026, 09:14 AM
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Posted By Preeti Kumari

वाराणसी: आयकर भवन के परिसर में 237 साल पुरानी सूर्य घड़ी धूल फांक रही है. बाउंड्री के अंदर सड़क किनारे बनी इस घड़ी के आसपास गंदगी के साथ ही सामने कई गुमटियां लगी हैं. जिससे इस पर किसी का ध्यान ही नहीं जाता है.


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धरोहर को संरक्षित के लिए प्रदेश सरकार ने किए कई जतन


काशी में धरोहर को संरक्षित करने के लिए केंद्र से लेकर प्रदेश सरकार की ओर से तमाम जतन किए जा रहे हैं. पुरानी काशी को हेरिटेज लुक दिया जा रहा है. वहीं, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय और मान मंदिर घाट पर मान महल में बनी वेध शाला और सूर्य घड़ी को संरक्षित किया गया, लेकिन चौकाघाट से मकबूल आलम रोड पर आयकर भवन के परिसर में 237 साल पुरानी सूर्य घड़ी धूल फांक रही है.


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गंदगी मेंं बसी गुमटियों पर नहीं जा रहा किसी का ध्यान


बाउंड्री के अंदर सड़क किनारे बनी इस घड़ी के आसपास गंदगी के साथ ही सामने कई गुमटियां लगी हैं. जिससे इस पर किसी का ध्यान ही नहीं जाता है. घड़ी का निर्माण तत्कालीन गवर्नर जनरल ऑफ इंडिया लार्ड वारेन हेस्टिंग के आदेश पर 1784 में लेफ्टिनेंट फेम्स एल इनवर्ट ने कराया था.


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करीब दो सौ साल बाद 1976 में इसका जीर्णोद्धार नगर महा पालिका के तत्कालीन प्रशासक रामदास सोनकर ने कराया था. इसके बाद किसी सरकारी मशीनरी की नजर इस घड़ी पर नहीं पड़ी. नगर निगम प्रशासन इसकी देखभाल भी नहीं कर पाता है. घड़ी के आसपास की सफाई मंदिर का देखभाल करने वाले शारदा प्रसाद करते हैं. उनका कहना है कि नगर निगम की ओर कभी भी सफाई नहीं कराई जाती है.

एक हाथ नहीं, फिर भी आस्था-जुनून बरकरार; 9 साल से कांवड़ लेकर बाबा के दरबार में हाजिरी...
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वाराणसी:काशी विश्वनाथ धाम में सावन के अंतिम सोमवार को आस्था और जज्बे की ऐसी तस्वीर देखने को मिली, जिसने हर किसी का ध्यान खींच लिया.बहराइच से आए श्रादुल वर्मा एक हाथ से कांवड़ उठाकर बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक करने पहुंचे.वर्ष 1995 में एक दुर्घटना में उनका एक हाथ चला गया, लेकिन बाबा के प्रति उनकी आस्था और श्रद्धा आज भी उतनी ही मजबूत है.श्रादुल वर्मा बताते हैं कि करीब नौ साल पहले उन्होंने बाबा विश्वनाथ से एक मन्नत मांगी थी.उनकी इच्छा थी कि उन्हें पुत्री रत्न की प्राप्ति हो. मन्नत पूरी होने के बाद उन्होंने सावन में देवघर से कांवड़ लेकर काशी पहुंचकर बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक किया. इसके बाद से हर सावन बाबा के दरबार में जल चढ़ाना उनके जीवन का संकल्प बन गया. पिछले नौ वर्षों से वह लगातार काशी आकर बाबा का जलाभिषेक कर रहे हैं.एक हाथ से कांवड़ उठाकर बाबा के दरबार तक पहुंचना उनके लिए भले ही चुनौती हो, लेकिन उनका विश्वास है,कि यह सब बाबा की कृपा से संभव हो रहा है. श्रादुल कहते हैं कि बाबा शक्ति देते हैं, इसलिए कांवड़ उठाने और जलाभिषेक करने में किसी तरह की परेशानी महसूस नहीं होती. उनके लिए यह सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि बाबा के प्रति कृतज्ञता और अटूट विश्वास का प्रतीक है.श्रादुल का कहना है,कि नौ साल में काशी काफी बदल गई है.पहले की तुलना में श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं बेहतर हुई हैं, और प्रशासन की व्यवस्थाएं भी अच्छी हुई हैं.अब बाबा विश्वनाथ के दर्शन भी पहले के मुकाबले जल्दी हो जाते हैं.ALSO READ : आरोग्य मेले की व्यवस्था का टीम ने किया निरीक्षणएक हाथ का सहारा कम हुआ तो क्या, बाबा पर विश्वास का सहारा कभी कम नहीं हुआ. यही विश्वास और जज्बा श्रादुल वर्मा को हर सावन काशी खींच लाता है और वह पूरी श्रद्धा के साथ बाबा विश्वनाथ को जल अर्पित कर अपना संकल्प निभाते हैं.
आरोग्य मेले की व्यवस्था का टीम ने किया निरीक्षण
आरोग्य मेले की व्यवस्था का टीम ने किया निरीक्षण
वाराणसी : जिले में आयोजित होने वाले आरोग्य मेले की तैयारियों को लेकर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सोमवार को मेला स्थल का निरीक्षण किया, टीम ने मेले में आने वाले लोगों की सुविधा के लिए की गई व्यवस्थाओं का जायजा लिया. इस दौरान पंजीकरण काउंटर, चिकित्सकीय जांच, दवा वितरण, पेयजल, साफ-सफाई, बैठने की व्यवस्था और बिजली सहित अन्य तैयारियों को देखा गया.अधिकारियों ने संबंधित कर्मचारियों को निर्देश दिया कि मेले में आने वाले मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न हो. जांच और पंजीकरण की प्रक्रिया व्यवस्थित रखने के साथ ही आवश्यक दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया, भीड़ को देखते हुए अलग-अलग काउंटर बनाने और मरीजों को सही जानकारी उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया.टीम ने साफ-सफाई व्यवस्था को विशेष रूप से परखा और मेला परिसर में नियमित सफाई कराने के निर्देश दिए, स्वास्थ्य कर्मियों को समय से ड्यूटी स्थल पर पहुंचने तथा मरीजों के साथ बेहतर व्यवहार करने के लिए कहा गया. अधिकारियों ने कहा कि आरोग्य मेले का उद्देश्य लोगों को एक ही स्थान पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है.ALSO READ : वाराणसी में ‘झीलवाली हिमपुरी’ का अद्भुत नजारा, जलविहार झांकी में राधा-कृष्ण ने मोहा मननिरीक्षण के दौरान टीम ने तैयारियों में मिली कमियों को तत्काल दूर करने के निर्देश दिए. संबंधित विभागों से आपसी समन्वय बनाकर सभी व्यवस्थाएं समय से पूरी करने को कहा गया. अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि आरोग्य मेले में बड़ी संख्या में लोगों को स्वास्थ्य जांच, परामर्श और उपचार की सुविधा मिलेगी.
वाराणसी में ‘झीलवाली हिमपुरी’ का अद्भुत नजारा, जलविहार झांकी में राधा-कृष्ण ने मोहा मन
वाराणसी में ‘झीलवाली हिमपुरी’ का अद्भुत नजारा, जलविहार झांकी में राधा-कृष्ण ने मोहा मन
वाराणसी : त्रिदेव मंदिर में रविवार को श्रद्धालुओं को भक्ति, आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य का अनोखा संगम देखने को मिला, मंदिर परिसर में सजी ‘झीलवाली हिमपुरी’ ने भक्तों का मन मोह लिया. यहां 60 फीट चौड़ी झील के बीच कमल के फूलों और तैरते बतखों के बीच फूलों से सजे झूले पर श्रीराधा-कृष्ण की मनमोहक जलविहार झांकी सजाई गई.झांकी में ऐसा दृश्य बनाया गया, मानो श्रद्धालु वृंदावन की फूलों से सजी गलियों में पहुंच गए हों ,कोलकाता से आए कुशल मालियों ने चमेली, जूही, सफेद और गुलाबी कमल, रजनीगंधा, ऑर्किड और गुलाब की पंखुड़ियों से फूल बंगला तैयार किया, कामिनी और अशोक की पत्तियों से की गई सजावट ने इसकी खूबसूरती और बढ़ा दी.मंदिर परिसर में 300 से अधिक बर्फ की सिल्लियां बिछाई गईं, जिनके बीच से गुजरकर श्रद्धालुओं ने देवी-देवताओं के दर्शन किए, मुख्य मंडप में द्वादश ज्योतिर्लिंगों के दर्शन भी कराए गए.इसके अलावा राणी सती, सालासर हनुमान, प्रथमेश गणेश, खाटूश्याम, शिव परिवार, राम दरबार, मां लक्ष्मी और मां दुर्गा के विग्रह भी फूलों से सजे नजर आए.ALSO READ: गोपीराधा बालिका इंटर काॅलेज की बस पर हमला, छात्राओं से दुर्व्‍यवहाररंग-बिरंगी रोशनी और फूलों की खुशबू से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय नजर आया. जलविहार झांकी को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी, इस भव्य आयोजन ने वाराणसी में वृंदावन की झांकी जैसा आध्यात्मिक और मनमोहक वातावरण बना दिया.