महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र ने 7वें स्थापना दिवस पर सेवा, शिक्षा, अनुसंधान की प्रतिबद्धता दोहराई

वाराणसी: महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र (एम.पी.एम.एम.सी.सी.) एवं होमी भाभा कैंसर अस्पताल (एच.बी.सी.एच.) ने अपने सातवें स्थापना दिवस पर ‘सेवा, शिक्षा और अनुसंधान’ के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः व्यक्त किया. 2019 में लोकार्पण के बाद से, इस संस्थान ने कैंसर के उपचार और जागरूकता के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है.

स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम की शुरुआत 21 फरवरी को सतत चिकित्सा शिक्षा (सी.एम.ई.) कार्यक्रम से हुई, जबकि रविवार को सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ समारोह सम्पन्न होगा. सीएमई का उद्घाटन काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने किया.
50 हजार आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को इलाज
उन्होंने महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र के पहले ‘महामना ओरेशन’ पर अपने विचार प्रस्तुत किए. इस सम्मेलन में देशभर से आए चिकित्सकों और विशेषज्ञों ने भाग लिया और ऑन्कोलॉजी के क्षेत्र में उभरती प्रगतियों पर चर्चा की. इसमें आईएमस बीएचयू के निदेशक प्रो. एस. एन. संखवार और प्रसिद्ध कैंसर सर्जन डॉ. हरित चतुर्वेदी जैसे विशेषज्ञ शामिल थे. प्रो. सत्यजीत प्रधान, निदेशक, एम.पी.एम.एम.सी.सी. एवं एच.बी.सी.एच. ने बताया कि संस्थान का प्रमुख उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण और सुलभ उपचार उपलब्ध कराना है. अब तक लगभग 50,000 आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को इलाज दिया गया है, जिनके लिए अस्पताल ने विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी योजनाओं के तहत लगभग 500 करोड़ रुपये की सहायता उपलब्ध कराई है.

1.5 लाख से अधिक नए मरीजों का पंजीकरण
आंकड़ों के अनुसार, 2018 में 6,307 नए मरीजों का पंजीकरण हुआ था, जो 2025 में बढ़कर 27,731 हो गया. स्थापना के बाद से कुल 1.5 लाख से अधिक नए मरीजों का पंजीकरण किया गया है. इस अवधि में अस्पताल ने 83,372 सर्जरी की हैं, जबकि 19,706 मरीजों को रेडियोथेरेपी और 5,53,377 साइकल कीमोथेरेपी दी गई है. कैंसर की रोकथाम और जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए सामुदायिक एवं अस्पताल आधारित स्क्रीनिंग सेवाओं को सशक्त किया गया है. 2025 में अस्पताल के कैंसर रोकथाम और स्क्रीनिंग विभाग ने विभिन्न अभियानों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया.
तकनीकी क्षेत्र में, संस्थान पूर्वी उत्तर प्रदेश का पहला अस्पताल बन गया है, जहां कैंसर सर्जरी हेतु रोबोटिक सर्जरी की सुविधा उपलब्ध है. 2025 में संस्थान को दो लिनियर एक्सेलेरेटर, एक रोबोटिक सर्जरी यूनिट और एक सीटी स्कैन मशीन प्राप्त हुई. शिक्षा के क्षेत्र में, संस्थान ने नए पाठ्यक्रम शुरू किए हैं, जिसमें रेडियोडायग्नोसिस में एमडी और पैलिएटिव मेडिसिन में डीएनबी पाठ्यक्रम शामिल हैं. अनुसंधान संस्थान की कार्यप्रणाली का अभिन्न अंग है, और यह साक्ष्य-आधारित उपचार पद्धतियों को बढ़ावा देता है. सात वर्षों की इस यात्रा के साथ, एम.पी.एम.एम.सी.सी. एवं एच.बी.सी.एच. वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित ऑन्कोलॉजी केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर है.



