ग्रामीण विकास केंद्र की प्रशिक्षित महिलाओं से वीसी ने खरीदी राखी, बोले- यह मेरे लिए गौरव का पल

वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय के सामाजिक विज्ञान संकाय स्थित एकीकृत ग्रामीण विकास केंद्र (CIRD) में शनिवार को दो दिवसीय राखी निर्माण कार्यशाला का शुभारंभ हुआ. कार्यशाला के दौरान बीएचयू के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने केंद्र की ओर से प्रशिक्षित महिलाओं और प्रतिभागियों द्वारा तैयार की गई राखियां खरीदीं, उन्होंने राखी निर्माण से जुड़ी महिलाओं और केंद्र के प्रयासों की सराहना करते हुए इसे गौरव का पल बताया.
कुलपति ने कहा कि केंद्र में उनकी यह पहली विजिट थी, उन्हें पहले से इस बात का ज्यादा अंदाजा नहीं था कि केंद्र में किस तरह की गतिविधियां संचालित होती हैं. यहां पहुंचने के बाद इंटर्न, विद्यार्थियों और राखी निर्माण का प्रशिक्षण ले रहे प्रतिभागियों से बातचीत की तो उन्हें काफी अच्छा अनुभव हुआ.

उन्होंने कहा कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय केवल शिक्षा के क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा से आगे बढ़कर सामाजिक जरूरतों को पूरा करने की दिशा में भी प्रयास कर रहा है, ग्रामीण विकास केंद्र की गतिविधियां इसी सोच को दर्शाती हैं. उन्होंने कहा कि प्रयास होना चाहिए कि इस तरह की गतिविधियों से जुड़ने वाले लोगों की संख्या और बढ़ाई जाए, ताकि अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिल सके.
दो दिवसीय कार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागियों को राखी निर्माण की कला का व्यावहारिक प्रशिक्षण देना, पारंपरिक हस्तकला को प्रोत्साहित करना तथा स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है. कार्यशाला में विभिन्न प्रकार की राखियां तैयार करने की तकनीक, आवश्यक सामग्री और आकर्षक डिजाइन तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है.
केंद्र से प्रशिक्षित महिलाओं द्वारा तैयार की गई राखियों की बिक्री को प्रशिक्षण को आजीविका से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. इससे महिलाओं को अपने हुनर के जरिए आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है, कार्यशाला में प्रतिभागियों को रचनात्मक कौशल विकसित करने के साथ घरेलू स्तर पर राखी निर्माण को आय के साधन के रूप में अपनाने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है.
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केंद्र की गतिविधियों के माध्यम से महिला एवं युवा कौशल विकास, स्थानीय हस्तकला को बढ़ावा देने और आत्मनिर्भरता की दिशा में काम किया जा रहा है, कुलपति द्वारा प्रशिक्षित महिलाओं से राखी खरीदना उनके प्रयासों को प्रोत्साहन देने के साथ विश्वविद्यालय की सामाजिक सरोकारों के प्रति प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है.



