रक्षाबंधन पर अस्पताल में दिखा रिश्तों का अपनापन, लावारिस मरीजों ने अमन कबीर को माना अपना भाई...

वाराणसी:रक्षाबंधन का पर्व आमतौर पर भाई-बहन के उस रिश्ते को समर्पित होता है, जिसमें अपनेपन, सुरक्षा और साथ का भरोसा होता है। लेकिन कबीरचौरा स्थित मंडलीय अस्पताल में इस पर्व का नजारा कुछ अलग रहा। यहां भर्ती उन लावारिस महिला मरीजों के लिए अमन कबीर भाई बनकर पहुंचे, जिनके पास इस खास दिन पर राखी बांधने के लिए अपना कोई नहीं था। महिलाओं ने अमन की कलाई पर राखी बांधी और मिठाई खिलाकर भाई-बहन के इस रिश्ते को अपनापन दिया।
अमन कबीर के अस्पताल पहुंचने के बाद महिला मरीजों के बीच कुछ देर के लिए ऐसा माहौल बना, मानो वे अपने परिवार के बीच हों। राखी बांधते समय महिलाओं के चेहरों पर खुशी दिखाई दी। अमन ने भी उन्हें यह भरोसा दिलाया कि मुश्किल समय में वे खुद को अकेला न समझें और उनकी देखभाल व मदद के लिए वह हमेशा खड़े रहेंगे।

जिनका कोई नहीं, उनके लिए बने सहारा
अमन कबीर लंबे समय से ऐसे मरीजों की मदद करते आ रहे हैं, जिन्हें बीमारी या किसी अन्य वजह से अस्पताल में अकेले छोड़ दिया गया है। वह लावारिस मरीजों की जरूरतों का ध्यान रखने के साथ उनके उपचार और देखभाल में भी सहयोग करते हैं। उनका सेवा कार्य केवल जीवित मरीजों तक सीमित नहीं है। लावारिस शव मिलने पर उनके अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी भी वह निभाते हैं।
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रक्षाबंधन के मौके पर महिला मरीजों के साथ मनाया गया यह पर्व इसी सेवा भावना का एक और उदाहरण रहा। जिन महिलाओं के लिए त्योहार का दिन अकेलेपन का एहसास लेकर आ सकता था, उनके बीच पहुंचकर अमन ने रिश्ते की कमी को कुछ पल के लिए ही सही, अपनापन देकर पूरा करने की कोशिश की।
राखी के साथ मिला भरोसे का रिश्ता
इस दौरान राखी केवल एक धागा नहीं रही, बल्कि उन महिलाओं और अमन के बीच बने भरोसे का प्रतीक बन गई। परिवार से दूर अस्पताल में रह रहीं महिलाओं के लिए किसी का भाई बनकर उनके पास पहुंचना भावनात्मक सहारा भी रहा। काशी में रक्षाबंधन के दिन हुई यह पहल बताती है कि रिश्ते केवल खून से नहीं, बल्कि सेवा, संवेदना और साथ निभाने की भावना से भी बनते हैं।



