बनारस विनाले में दुनिया को दिखेगी भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक राजधानी की विशेषता...

दिसंबर माह में होने वाले इस खास आयोजन के लिए बनने लगी रूपरेखा
कई दिनों तक चलने वाले वाले उत्सव के रंग सराबोर रहेगा पूरा शहर
वाराणसी: भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक राजधानी बनारस की हर खूबियां को दुनिया को सामने प्रस्तुत करने के लिए पहली बार सांस्कृतिक उत्सव बनारस विनाले का आयोजन किया जाएगा। इसमें दुनिया के सबसे प्राचीन जिंदा शहर की कला, संस्कृति, साहित्य, खान-पान समेत सभी विशेषताओं का प्रदर्शन किया जाएगा। यह किसी स्थान विशेष तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरा शहर इस उत्सव के रंग से सराबोर रहेगा। इसे अद्भुत, अद्वितीय और अविस्मरणीय बनाने का खाका खींचा जा रहा है.
इस आयोजन में सहभागिता करने वाले भारत कला भवन और बीएचयू का प्रतिनिधित्व कर रहे भारत कला भवन के निदेशक प्रो. श्रीरूप रायचौधुरी के अनुसार बनारस विनाले का आयोजन इतना भव्य होगा कि पूरी दुनिया इसे देखकर अचंभित रहेगी। इसे भव्य बनाने प्रदेश सरकार, स्थानीय प्रशासन, बीएचयू व निजी संस्थानों की पूरी सहभागिता रहेगी। इसकी तिथि अभी तय नहीं की गई है लेकिन दिसंबर में किया जाना तय किया जा रहा है.

विनाले इतालवी भाषा का एक शब्द है, जिसका सीधा अर्थ द्विवार्षिक होता है। कला और संस्कृति की दुनिया में, यह एक बड़े पैमाने पर आयोजित होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी होती है, जो हर दो साल में एक बार आयोजित की जाती है। इसकी शुरुआत सबसे पहले 1895 में इटली के वेनिस शहर में हुई थी, जिसे 'वेनिस विनाले' कहा जाता है। वेनिस विनाले को आज भी कला की दुनिया का 'ओलिंपिक' माना जाता है। इसी की सफलता को देखकर दुनिया के अन्य देशों ने अपने यहां विनाले की शुरुआत की। विनाले किसी बंद गैलरी तक सीमित नहीं होता। पूरे शहर के ऐतिहासिक भवनों, गोदामों, पार्कों और सार्वजनिक स्थलों को कला दीर्घाओं में बदल दिया जाता है . इसमें दुनिया भर के समकालीन कलाकार, क्यूरेटर, लेखक और विचारक को एक मंच पर लाने का प्रयास किया जाता है। हर विनाले की एक विशेष थीम होती है जो समकालीन वैश्विक मुद्दों जैसे जलवायु परिवर्तन, प्रवासन, युद्ध या तकनीक पर आधारित होती है। यहां केवल पेंटिंग्स ही नहीं, बल्कि विशाल मूर्तियां, डिजिटल आर्ट, लाइव परफारमेंस, साउंड इंस्टालेशन और शार्ट फिल्में भी प्रदर्शित की जाती हैं। विनाले के दौरान दुनिया भर से लाखों कला प्रेमी और पर्यटक उस शहर में आते हैं।

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इससे स्थानीय होटलों, परिवहन, रेस्तरां और हस्तशिल्प कलाकारों को बड़ा आर्थिक बढ़ावा मिलता है। भारत का सबसे प्रसिद्ध और एशिया का सबसे बड़ा विनाले केरल में आयोजित होने वाला कोच्चि-मुज़िरिस विनाले है। इसका आयोजन विशेष रूप से फोर्ट कोच्चि, मट्टानचेरी और विलिंगडन द्वीप के ऐतिहासिक स्थानों पर किया जाता है। सआ विनाले का आयोजन लद्दाख में किया जाता है। यह उच्च ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्र में आयोजित होने वाला एक विशिष्ट कला उत्सव है जो क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय कलाकारों को मंच प्रदान करता है। बंगाल विनाले का आयोजन शांतिनिकेतन और कोलकाता में किया जाता है। इस कला उत्सव में मुख्य रूप से दृश्य कला और समकालीन रचनाओं को प्रदर्शित किया जाता है। बनारस में विनाले पहली बार होगा इसलिए यह आयोजन बेहद खास हो जाता है। यहां ऐसा बहुत कुछ है जिसे इस उत्सव के माध्यम से दुनिया को दिखाया जा रहा है। विनाले में एक ओर संगीत का आयोजन होगा तो दूसरी तरफ चित्रकला का प्रदर्शन किया जाएगा। साहित्यकारों का जमावड़ा होगा जिसमें बनारस के साहित्यकारों व उनकी रचनाओं की चर्चा होगी। इन सबके बीच बनारसी पकवानों की खुशबू भी आएगी। कई दिनों तक चलने वाले उत्सव में भाग लेने के लिए देश ही नहीं दुनिया के कलाकर, साहित्यकार, कला प्रेमियों को आमंत्रित किया जाएगा। इसकी रूपरेखा कुछ इस तरह से तैयार की जा रही है कि इस उत्सव में पूरा बनारस शामिल हो जाए और दुनिया को अपनी विशेषता का एहसास कराए.



