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13 माह का होगा साल 2026, ज्‍यादातर त्‍योहारों में दिखेगा बदलाव

13 माह का होगा साल 2026, ज्‍यादातर त्‍योहारों में दिखेगा बदलाव
Jan 01, 2026, 08:29 AM
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Posted By Monisha Rai

वाराणसी : नया साल पिछले से कुछ अलग ही होगा. हिंदी पंचांग के अनुसार 2026 अधिकमास वाला साल होगा. अधिकमास में आठ साल बाद दो ज्येष्ठ माह होंगे. जबकि पिछली बार अधिमास में दो सावन पड़े थे. इस तरह साल 2026 13 माह का होगा. इसमें पिछले साल की अपेक्षा ज्यादातर त्योहारों में बदलाव दिखेगा. इस साल शुरुआत के छह महीने में त्योहार पिछले साल से 10 दिन पहले पड़ेंगे और अगले छह महीने में त्योहार 16 से 19 दिन देर से पड़ेंगे. इसलिए इस बार होली 10 दिन पहले चार मार्च को पड़ेगी और दीपावली पिछले साल से 17 दिन देरी से यानी आठ नवंबर को मनाई जाएगी.


लीप इयर की तरह अधिक मास यानी पुरुषोत्तम मास


अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं. ज्योतिषीय गणना के अनुसार अधिकमास एक अतिरिक्त चंद्र माह होता है, जो हर तीन साल में सौर कैलेंडर में जोड़ा जाता है. जिस तरह अंग्रेजी कैलेंडर में लीप ईयर होता है, उसी तरह पंचांग में अधिकमास होता है. सौर वर्ष 365 दिन और चंद्र वर्ष 364 दिनों का होता है. ज्योतिष के आधार पर तीन वर्ष में चंद्र और सूर्य वर्ष के बीच आए इन्हीं 11 दिनों के अंतर को खत्म करने के लिए तीन साल में एक बार एक अधिकमास आता है.

श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय के अनुसार हिंदू त्योहार चंद्रमा की स्थिति व उसकी गति पर आधारित होते हैं. अधिकमास ज्येष्ठ मास 17 मई से 15 जून तक रहेगा. पूरे साल में होली, दिवाली, नवरात्र आदि त्योहारों में तिथियां घटने के साथ बढ़ेंगी. इस साल मांगलिक कार्य चार फरवरी से शुरू होंगे. विवाह के मुहूर्त भी चार से ही शुरू होंगे.


मकर संक्रांति में नहीं है कोई बदलाव


अधिकमास का प्रभाव 19 मार्च से शुरू होगा. मकर संक्रांति 14 जनवरी को है. जनवरी में तीन को माघी पूर्णिमा, छह को गणेश चतुर्थी, 18 को मौनी अमवस्या, 23 को वसंत पंचमी, फरवरी में एक को संत रविदास जयंती, तीन को सबे बरात, 15 को महाशिवरात्रि, 27 को रंगभरी एकादशी, 28 को मशाने की होली, मार्च में दो को होलिका दहन, चार को होली, 19 को चैत्र नवरात्र, 27 को रामनवमी, 31 को महावीर जयंती, अप्रैल गुड फ्राइडे, 20 को अक्षय तृतीया, 16 को बट सावित्री व्रत, 26 को गंगा दशहरा, 28 को बकरीद, जून में 26 को मुहर्रम, अगस्त में चार को चेहल्लुम, 17 को नागपंचमी, 26 को बरावफात, 28 को रक्षाबंधन, 31 को कजरी, सितंबर में दो को ललही छठ, चार को श्रीकृष्णजन्माष्टमी, 17 को हरितालिका तीज, 17 को लोलार्क छठ, 27 से पितृपक्ष, अक्तूबर में तीन को जिउतिया, 20 को विजयदशमी, 29 को करवाचौथ, नवंबर में छह को धनतेरस व नरकचतुर्दशी, आठ को दिवाली, नौ को गोवर्धन पूजा, 10 को भइयादूज पड़ेगा.


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नए साल के राजा गुरु और मंगल होंगे मंत्री


प्रो. नागेंद्र पांडेय ने बताया कि नए साल के राजा गुरु बृहस्पति और मंत्री मंगल होंगे. यह साल रौद्र नामक वर्ष के रूप में होगा, लेकिन, राजा के गुरु बृहस्पति के होने से उथल-पुथल के बीच समन्वय बना रहेगा. इस वर्ष का मिथुन, कर्क, कन्या व धनु राशि के लिए काफी फलदायी है. बाकी राशियों को थोड़ा कष्ट रहेगा. अधिकमास में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है. प्रो. नागेंद्र पांडेय ने बताया कि अधिकमास वाले माह में कोई मंगल कार्य नहीं होते हैं. इस मास में यज्ञ, जप व तीर्थों में स्नान के फल मिलते हैं. भगवान शिव का अभिषेक, रुद्राभिषेक व पूजन काफी फलदायी होता है.

परफेक्ट फिर भी फेल हो जाता IVF, आखिर क्यों?
परफेक्ट फिर भी फेल हो जाता IVF, आखिर क्यों?
Lifestyle: आज की लाइफस्टाइल के समय में IVF अपनी सुविधाओं को लेकर काफी पॉपुलर हो चुका है. IVF यानि (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) ये उन कपल्स के लिए उम्मीद की सबसे बड़ी किरण बनकर उफरा है, जो लंबे समय से माता-पिता बनने का सपना देखते तो हैं पर अफसोस की पूरा नहीं हो पाता है, लेकिन इन्हीं कपल्स के इन सपनों को पूरा करने के लिए अब IVF उनकी दुनिया में उजाला बनकर आया है. जिसने उन्हें इस बात का भरोसा दिलाया है कि उनके सपनों को ये किसी भी हाल में पूरा करेगा. अक्सर कुछ केस में डॉक्टर कहते हैं कि एग अच्छे हैं, स्पर्म ठीक हैं, एम्ब्रायो सुंदर है, बच्चेदानी भी तैयार है फिर भी जब रिपोर्ट नेगेटिव आती है, तो मन में सिर्फ एक ही सवाल गूंजता है जब सब कुछ परफेक्ट था, तो IVF फेल क्यों हो गया.आपको बता दें, IVF कोई मशीन की प्रक्रिया नहीं है. यह शरीर, हार्मोन, जेनेटिक्स और मानसिक स्थिति सबका मिला-जुला है. कई बार बाहर से सबकुछ ठीक दिखता तो है, लेकिन अंदर कहीं न कहीं कोई छोटी-सी दिक्कत छिपी होती है, जो प्रेगनेंसी को आगे बढ़ने से हर बार रोक देती है. ऐसे में सबकुछ परफेक्ट होने के बाद भी IVF क्यों फेल होना तो कपल्स की बसा-बसाया घर उजड़ने के सफर पर आ जाता है.जाने IVF फेल होने के लक्षण IVF में एम्ब्रायो ट्रांसफर के बाद के लगभग 14 दिन बहुत अहम होते हैं. इसे टू-वीक वेट कहा जाता है. इस दौरान महिलाएं प्रोजेस्टेरोन जैसी दवाइयां लेती हैं, जिनकी वजह से प्रेगनेंसी जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं, चाहे प्रेगनेंसी हो या न हो. लेकिन कुछ संकेत ऐसे होते हैं, जो IVF फेल होने की तरफ इशारा कर सकते हैं. जैसे अगर एम्ब्रायो ट्रांसफर के कुछ दिनों बाद आपको सामान्य पीरियड्स जैसा ब्लीडिंग शुरू हो जाए, तो इसका मतलब हो सकता है कि एम्ब्रायो बच्चेदानी की दीवार से चिपक नहीं पाया.घर पर टेस्ट कुछ भी दिखाए, लेकिन IVF में सबसे भरोसेमंद टेस्ट बीटा-HCG ब्लड टेस्ट होता है. अगर इसमें हार्मोन का लेवल नहीं बढ़ा, तो IVF साइकिल को फेल माना जाता है. अगर आपको पहले स्तनों में भारीपन, हल्का पेट दर्द या थकान महसूस हो रही थी और अचानक ये सब खत्म हो जाए, तो यह इस बात का संकेत हो सकता है कि प्रेगनेंसी हार्मोन बनना बंद हो गया. ऐसे में ध्यान रखें कि बिना डॉक्टर से पूछे दवाइयां बंद न करें, क्योंकि कुछ मामलों में ब्लीडिंग के बावजूद प्रेगनेंसी चल रही होती है.आखिर क्यों IVF होता है फेल एम्ब्रायो की – कई बार एम्ब्रायो देखने में बहुत सुंदर लगता है, लेकिन उसके अंदर जेनेटिक समस्या हो सकती है. ऐसे एम्ब्रायो या तो चिपकते नहीं हैं या जल्दी खराब हो जाते हैं. यह IVF फेल होने की सबसे आम वजह मानी जाती है.बच्चेदानी की परत- एंडोमेट्रियम यानी बच्चेदानी की अंदरूनी परत अगर बहुत पतली (7mm से कम), कमजोर या सही समय पर तैयार नहीं होती, तो एम्ब्रायो को पोषण नहीं मिल पाता और इम्प्लांटेशन फेल हो जाता है.प्रेगनेंसी की अंदरूनी समस्याएं- फाइब्रॉएड, पॉलीप्स, सिस्ट या पुरानी सर्जरी की वजह से बनी चिपकन (Adhesions) भी एम्ब्रायो के चिपकने में रुकावट बन सकती हैं.ब्लड फ्लो की कमी- अगर बच्चेदानी तक खून का बहाव सही नहीं है, तो एम्ब्रायो को जरूरी ऑक्सीजन और पोषण नहीं मिल पाता.इंफेक्शन या टीबी- गर्भाशय या ट्यूब्स में पुराना इंफेक्शन (जैसे टीबी) होने पर ट्यूब्स में गंदा तरल जमा हो जाता है, जो एम्ब्रायो के लिए जहरीला साबित हो सकता है.उम्र का बढ़ना - 35 साल के बाद अंडों की संख्या और क्वालिटी दोनों कम होने लगती हैं. इससे जेनेटिक खराबियों का खतरा बढ़ जाता है.लाइफस्टाइल और तनाव - मोटापा, धूम्रपान, खराब खान-पान और ज्यादा तनाव IVF की सफलता को काफी हद तक कम कर देते हैं.इम्यून सिस्टम की समस्या - कुछ महिलाओं में शरीर का इम्यून सिस्टम एम्ब्रायो को बाहरी चीज समझकर उस पर हमला कर देती है, जिससे इम्प्लांटेशन फेल हो जाता है.दवाइयों में लापरवाही - दवाइयां समय पर न लेना या डॉक्टर की सलाह को ठीक से फॉलो न करना भी IVF फेल होने की एक बड़ी वजह हो सकती है.Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित होती है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले आपको अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लेना काफी जरूर है.
काशी विद्यापीठ की हॉकी टीम ने अखिल भारतीय अन्तर्विश्वविद्यालय हॉकी प्रतियोगिता के लिए किया क्वालीफाई
काशी विद्यापीठ की हॉकी टीम ने अखिल भारतीय अन्तर्विश्वविद्यालय हॉकी प्रतियोगिता के लिए किया क्वालीफाई
वाराणसी : महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ की हॉकी टीम ने अखिल भारतीय अन्तर्विश्वविद्यालय हॉकी (पु.) प्रतियोगिता 2025-26 के लिए क्वालीफाई कर लिया. काशी विद्यापीठ की टीम ने सम्बलपुर विश्वविद्यालय, सम्बलपुर में आयोजित पूर्वी क्षेत्र अन्तर्विश्वविद्यालय हॉकी (पु.) प्रतियोगिता 2025-26 में शानदार प्रदर्शन करते हुए उक्त प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने हेतु अर्हता प्राप्त की. अखिल भारतीय अन्तर्विश्वविद्यालय हॉकी (पु.) प्रतियोगिता 22 से 28 जनवरी तक सम्बलपुर विश्वविद्यालय, सम्बलपुर में आयोजित है.हॉकी (पु.) टीम के मैनेजर प्रो. संजय कुमार सिंह एवं टीम कोच सतीश नारायण सिंह हैं.इस उपलब्धि पर कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी , क्रीड़ा परिषद उपाध्यक्ष प्रो. ब्रजेश कुमार सिंह, क्रीड़ा परिषद सचिव डॉ. उर्जस्विता सिंह, कुलानुशासक प्रो. के.के. सिंह, कुलसचिव डॉ. सुनीता पाण्डेय, परीक्षा नियंत्रक दीप्ति मिश्रा, डॉ. राधेश्याम राय, कु. बीना, डॉ. अमरेन्द्र कुमार सिंह, राम लाल, ओंकार नाथ, अरिवन्द कुमार, संतोष कुमार आदि लोगों ने हर्ष व्यक्त करते हुए हॉकी (पु.) टीम को बधाई एवं शुभकामनायें दी. बी.ए. के छात्रों का छात्रवृत्ति बायोमेट्रिक वेरीफिकेशन 18 जनवरी से महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ मुख्य परिसर के बी.ए. प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों का छात्रवृत्ति के संदर्भ में बायोमेट्रिक वेरीफिकेशन 18 जनवरी को होगा.वहीं, बी.ए. द्वितीय एवं तृतीय वर्ष का 19 जनवरी को आयोजित है. कुलसचिव डॉ. सुनीता पाण्डेय ने बताया कि पूर्वाह्न 09:30 से अपराह्न 01 बजे तक छात्राओं का एवं अपराह्न 01:30 से शाम 05 बजे तक छात्रों का बायोमेट्रिक वेरीफिकेशन मानविकी संकाय में होगा.ALSO READ : वाराणसी में आज बूथ पर मतदाता सूची पढ़ेंगे बीएलओ
मौनी अमावस्या कब है, जाने स्नान-दान का समय
मौनी अमावस्या कब है, जाने स्नान-दान का समय
Mauni Amavasya 2026: हिंदू धर्म में मौनी अमावस्या या माघ अमावस्या का काफी महत्व होता है. हिंदू धर्म की पवित्र तिथियों में ये अमावस्या एक खास पर्व माना जाता है. इस दिन स्नान, दान, तर्पण, व्रत, मौन, साधना करने का विशेष महत्व है. इस पावन दिन पर श्रद्धालु संगम तट या फिर पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी लगाते हैं और जरूरतमंदों में दान भी करने की परंपरा को निभाते हैं. पितृ तर्पण और मौन व्रत के लिए भी मौनी अमावस्या का दिन काफी श्रेष्ठ होता है.कब है मौनी अमावस्या बता दें, मौनी अमावस्या इस साल रविवार 18 जनवरी 2026 को पड़ रही है. हालांकि तिथि को लेकर भक्त काफी असमंजस में हैं कि मौनी अमावस्या 18 जनवरी को है या 19 जनवरी को है. तिथि में कंफ्यूजन होने के कारण स्नान-दान के शुभ मुहूर्त में भी दुविधा है. इसलिए, माघ अमावस्या तिथि की शुरुआत 18 जनवरी को देर रात 12 बजकर 3 मिनट से शुरू होगी और 19 जनवरी को देर रात 1 बजकर 21 तक रहेगी. 18 जनवरी उदयातिथि और पूरे दिन अमावस्या रहेगी. ऐसे में इसी तिथि पर मौनी अमावस्या मनाई जाएगी.मौनी अमावस्या पर स्नान-दान का समय कहा जाता है कि, मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर प्रयाग के संगम समेत पवित्र नदियों में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है. लोग तड़के सुबह से ही पवित्र नदियों के तट पर पहुंचकर स्नान करते हैं. मान्यता है कि, इस दिन किया गया स्नान पापों का नाश करता है और पुण्य में वृद्धि होती है. इसलिए इस दिन पवित्र नदी में स्नान और दान का काफी महत्व बढ़ जाता है. इस बार तो मौनी अमावस्या के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है. साथ ही इस दिन पूर्वाषाढ़ा और उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का शुभ संयोग भी रहेगा.इन तिथियों में स्नान के लिए सुबह ब्रह्म मुहूर्त को सबसे उत्तम माना जाता है. ब्रह्म मुहूर्त में स्नान के लिए सुबह 05.27 से 06.21 मिनट तक का समय रहेगा. वहीं दोपहर में स्नान के लिए दोपहर 12.10 से 12.53 मिनट तक का समय है. स्नान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें. इसके बाद पितरों को जल से तर्पण देकर आप अपनी क्षमतानुसार दान-दक्षिणा कर सकते हैं.Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि इन मान्यताओं की पुष्टि journalistcafenews किसी भी हाल में नहीं करता है. इसलिए किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.