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अग्रेजों ने ऐसे छिना भारतीयों का हक, जाने कैसे मिला संविधान

अग्रेजों ने ऐसे छिना भारतीयों का हक, जाने कैसे मिला संविधान
Jan 26, 2026, 09:11 AM
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Posted By Preeti Kumari

भारत का गणतंत्र दिवस केवल एक राष्ट्रीय उत्सव नहीं, बल्कि देश की विदेश नीति, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों का आईना भी है. गणतंत्र दिवस के मनाने की असली वजह यह है कि 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ था, जिससे देश एक संप्रभु, लोकतांत्रिक और गणराज्य बनकर उभरा. ये वहीं दिन है जिस दिन भारत देश ने ब्रिटिश कानूनों की जगह अपने संविधान को अपनाया था, ये वो दिन है जब ब्रिटिश शासन की उन बेड़ियों से भारत वासियों को मुक्ति मिली थी, जिसने उनके अधिकारों को तो छिना ही साथ ही इन अंग्रेजो उनका जीवन-यापन तक करना दुश्वार कर दिया.




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ऐसे क्रूर्रता भरे अग्रेजों के शासन से आजादी मिलना भारतीयों के लिए एक नए जीवन जीने की किरण जैसी थी. जिससे वो हमेशा के लिए आजाद हो गये. इन्हीं जंजीरों से छुटकारा मिलने की वजह से 1930 के ऐतिहासिक दिन को चिन्हित करने के लिए चुना गया था. जिससे जनता को अपनी सरकार चुनने का अधिकार मिल सका. जो एक संवैधानिक स्वतंत्रता और राष्ट्रीय गौरव का उत्सव है. यह दिन नागरिकों के अधिकारों, कर्तव्यों और राष्ट्र की एकता के प्रति संविधान के सम्मान की याद दिलाता है.


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भारत आधिकारिक तौर पर बना गणतंत्र


26 जनवरी का दिन देशभर के लिए बड़ा ही खास दिन होता है. क्योंकि, यह वो दिन है जब भारत आधिकारिक तौर पर गणतंत्र बना और उसने खुद अपना संविधान चुना. जो हर भारतवासियों के लिए बड़े ही गर्व की बात है. यहीं कारण है कि भारत के इतिहास में इस दिन का बहुत बड़ा महत्व है क्योंकि यह औपनिवेशिक अतीत से एक लोकतांत्रिक, संप्रभु राष्ट्र में परिवर्तन का प्रतीक माना जाता है. ब्रिटिश सरकार की गुलामी से आजादी दिलाने वाली 26 जनवरी की ये तारीख हर भारतीयों के रघों में बसी है.


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इस आजादी ने भारत को अपना सम्मान, इज्जत, हक के साथ-साथ वो सभी अधिकार दिये जिसका भारत हकदार रहा है. सबसे खास भारत के लोकतंत्र की नींव संविधान है, जिससे भारत को एक बड़ी पहचान मिली है. यह दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान है, जिसे तैयार करने में 2 साल, 11 महीने और 18 दिन का समय लगा. इतने लंबे समये के बाद 26 नवंबर 1949 (उनचास) को यह बनकर तैयार हुआ. जो भारत की ताकत बनकर उभरा.


जाने ब्रिटिश शासन से मुक्ति का प्रतीक


भारत अपनी संप्रभुता और स्वतंत्रता की याद में 26 जनवरी के दिन को जश्न के रूप में मनाता है. स्वतंत्रता दिवस जो ब्रिटिश शासन से मुक्ति का प्रतीक माना गया है, इस आजादी के दिन भारत अपने संविधान के साथ एक संप्रभु राष्ट्र बना, जिसने 1935 के भारत सरकार अधिनियम का स्थान भी लिया. इसे सुनकर आपके मन में सवाल उठ रहे होंगे कि, जब हमारा संविधान 26 नवंबर को बनकर तैयार हो गया था, तो इसे लागू करने के लिए 26 जनवरी का इंतजार क्यों किया गया? तो बता दें, भारतीय संविधान बनने से 20 साल पहले यानी 1929 में इस कहानी की शुरूआत हुई.


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उस समय लाहौर में इंडियन नेशनल कांग्रेस का अधिवेशन हुआ था, जिसकी अध्यक्षता पंडित जवाहरलाल नेहरू ने किया था. ये वहीं अधिवेशन है जिसमें कांग्रेस ने पहली बार अंग्रेजों से डोमिनियन स्टेटस यानी अर्ध-स्वतंत्रता की मांग के बजाय 'पूर्ण स्वराज' का संकल्प लिया था. जिसके बाद से लाहौर अधिवेशन में यह फैसला लिया गया कि, 26 जनवरी 1930 को देशभर में 'स्वतंत्रता दिवस' के रूप में मनाया जाएगा. इसी की खुशी में उस दिन हर भारतीयों ने पहली बार भारत देश का तिरंगा फहराते हुए अंग्रेजों की गुलामी से आजाद होने की कसम खाई थी.


इतिहास के पन्नों में छाया 26 जनवरी


बता दें, जब 1947 (सैंतालीस) में भारत असल में आजाद हुआ, तो वह तारीख 15 अगस्त थी. इसलिए इस दिन को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है, लेकिन संविधान निर्माताओं, खासकर पंडित जवाहरलाल नेहरू और डॉ. बी.आर. अंबेडकर के मन में उस 26 जनवरी की तारीख के प्रति एक बड़ा सम्मान छिपा था, जिसके चलते वे नहीं चाहते थे कि 26 जनवरी जैसी ऐतिहासिक तारीख इतिहास के पन्नों से कहीं गायब हो जाए.


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इसलिए, इसे ध्यान में रखते हुए यह तय किया गया कि भले ही संविधान 26 नवंबर 1949(उनचास) को तैयार हो गया है, पर इसे आधिकारिक रूप से 26 जनवरी 1950 को ही लागू किया जाएगा, ताकि इस दिन को 'गणतंत्र दिवस' के रूप में इतिहास के पन्नों पर हमेशा-हमेशा के लिए अमर कर दिया जाए. तभी से हर 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है. "जय हिंद...जय भारत...जय जवान"

दो आईपीएस की विदाई, सीपी बोले- वाराणसी में सराहनीय रहा कार्यकाल
दो आईपीएस की विदाई, सीपी बोले- वाराणसी में सराहनीय रहा कार्यकाल
वाराणसी : आईपीएस प्रमोद कुमार और आईपीएस श्रुति का गैर जनपद ट्रांसफर होने के बाद मंगलवार को पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने कमिश्नरेट सभागार में भावभीनी विदाई दी. पुलिस आयुक्त ने कहा कि दोनों अधिकारियों का कार्यकाल वाराणसी में सराहनीय रहा, कानून-व्यवस्था और जनसुनवाई को बेहतर बनाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही. समारोह में एडिशनल सीपी, सभी डीसीपी, एडीसीपी समेत कमिश्नरेट के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. बुके और स्मृति चिन्ह देकर दोनों को नई तैनाती के लिए शुभकामनाएं दी गईं.वहीं, पुलिस आयुक्‍त मोहित अग्रवाल ने सोमवार की रात तीन डीसीपी के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया. आईपीएस ट्रांसफर सूची में हटाए गए प्रमोद कुमार को चार्ज से वरुणा जोन का चार्ज लेकर रिलीव कर दिया गया. कानपुर से ट्रांसफर होकर आए डीसीपी राजेश पाण्डेय को वरुणा जोन का नया डीसीपी बनाया गया है. राजेश पाण्डेय वाराणसी में एडीसीपी ट्रैफिक भी रह चुके हैं और वरुणा जोन से बखूबी परिचित हैं.ALSO READ:बरेका इंटर कॉलेज में हिन्दी वाक् प्रतियोगिता, वैभवी यादव ने हासिल किया प्रथम स्थान.पुलिस आयुक्‍त ने काशी जोन के डीसीपी गौरव बंसवाल के कार्यक्षेत्र में बढोत्तरी की है. काशी जोन के साथ उन्हें पुलिस लाइंस का नया डीसीपी बनाया है. पुलिस लाइंस का अतिरिक्त चार्ज पहले प्रमोद कुमार के पास था. वरुणा जोन में राजेश पाण्डेय को कई दुश्वारियों से जूझना होगा, कोर्ट और जिला मुख्यालय का क्षेत्र होने के साथ ही आए दिन होने वाले वीआईपी मूवमेंट में असल परीक्षा रहेगी. वह आज वरुणा जोन कार्यालय में चार्ज संभालेंगे.
बरेका इंटर कॉलेज में हिन्दी वाक् प्रतियोगिता, वैभवी यादव ने हासिल किया प्रथम स्थान.
बरेका इंटर कॉलेज में हिन्दी वाक् प्रतियोगिता, वैभवी यादव ने हासिल किया प्रथम स्थान.
वाराणसी: बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) में राजभाषा पखवाड़ा के तहत मंगलवार को बरेका इंटर कॉलेज में हिन्दी वाक् प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। महाप्रबंधक आशुतोष पंत के दिशा-निर्देशन में आयोजित प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों में हिन्दी भाषा के प्रति रुचि बढ़ाने और राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार को प्रोत्साहित करना रहा।कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के समन्वयक धर्मवीर सिंह, वरिष्ठ अनुवादक गुरुराजन और शिक्षक-शिक्षिकाओं ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। प्रतियोगिता में कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।प्रतियोगिता के लिए ‘अनेकता में एकता की संवाहक हिन्दी’ और ‘हिन्दी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति की आत्मा है’ विषय निर्धारित किए गए थे। विद्यार्थियों ने अपने वक्तव्यों में हिन्दी भाषा की सामर्थ्य, आत्मीयता, संस्कृति और संस्कारों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। इस दौरान तुलसीदास, कबीरदास, मुंशी प्रेमचंद और भारतेन्दु हरिश्चंद्र जैसी हिन्दी साहित्य की विभूतियों का भी स्मरण किया गया।विद्यालय के समन्वयक धर्मवीर सिंह ने हिन्दी के बढ़ते वैश्विक प्रभाव पर प्रकाश डाला। उन्होंने हाल ही में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन के संदर्भ में विभिन्न राष्ट्राध्यक्षों द्वारा हिन्दी गीतों के उल्लेख का जिक्र किया। शिक्षिका करुणा सिंह ने हिन्दी कविता प्रस्तुत की।प्रतियोगिता में भूगोल प्रवक्ता विकास कुमार पाण्डेय और हिन्दी शिक्षक उमैर अहमद अंसारी ने निर्णायक की भूमिका निभाई। उन्होंने विद्यार्थियों का मूल्यांकन प्रस्तुतीकरण, विषय-वस्तु और अभिव्यक्ति के आधार पर किया।ALSO READ: रामनगर चौक से किला रोड तक अतिक्रमण को लेकर पुलिस ने स्ट्रीट वेंडरों के साथ की बैठक..परिणाम में कक्षा 11-‘अ’ की छात्रा वैभवी यादव ने प्रथम, कक्षा 10-‘अ’ के छात्र अनमोल प्रजापति ने द्वितीय और कक्षा 9-‘ब’ के छात्र उत्कर्ष केशरी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।कार्यक्रम का संचालन हिन्दी शिक्षिकाएं शालिनी उपाध्याय और वंदना शुक्ला ने किया। आयोजन को सफल बनाने में राकेश चौधरी और करुणा सिंह का विशेष योगदान रहा।
रामनगर चौक से किला रोड तक अतिक्रमण को लेकर पुलिस ने स्ट्रीट वेंडरों के साथ की बैठक..
रामनगर चौक से किला रोड तक अतिक्रमण को लेकर पुलिस ने स्ट्रीट वेंडरों के साथ की बैठक..
वाराणसी। रामनगर में सड़क और पाथवे पर दुकानें व ठेले लगाने से होने वाली यातायात संबंधी परेशानियों को लेकर पुलिस ने मंगलवार को स्ट्रीट वेंडरों के साथ बैठक की। थाना रामनगर में प्रभारी निरीक्षक संजय कुमार मिश्रा ने रामनगर चौक चौराहा से किला रोड तक सब्जी, फल, चाट, चाउमीन, फास्ट फूड, चाय-नमकीन आदि के ठेले लगाने वाले दुकानदारों और पाथवे पर दुकान लगाने वाले स्ट्रीट वेंडरों को बुलाकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।बैठक के दौरान प्रभारी निरीक्षक ने वेंडरों से कहा कि सड़क पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण न किया जाए। ठेले और दुकान इस तरह लगाए जाएं, जिससे सड़क पर आवागमन प्रभावित न हो और पैदल चलने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना न करना पड़े।पुलिस ने वेंडरों को यातायात व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करने और निर्धारित स्थान पर ही दुकान लगाने की अपील की। साथ ही स्पष्ट किया कि सड़क और पाथवे पर इस तरह सामान न फैलाया जाए, जिससे आने-जाने वाले लोगों को परेशानी हो।पुलिस के अनुसार बैठक का उद्देश्य रामनगर चौक से किला रोड तक यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना और आम लोगों के आवागमन में किसी तरह की बाधा को रोकना है।ALSO READ: जलस्तर घटने के बाद मणिकर्णिका घाट पर की गई सफाई, गंगा की तलहटी से निकाले करीब 100 किलो कपड़े...