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IIT-BHU में जल गुणवत्ता और नदी प्रदूषण प्रबंधन पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम कल से

IIT-BHU में जल गुणवत्ता और नदी प्रदूषण प्रबंधन पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम कल से
Aug 18, 2026, 12:10 PM
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Posted By Niharika dwivedi

वाराणसी : भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (बीएचयू), वाराणसी में जल गुणवत्ता की निगरानी, उभरते प्रदूषकों के आकलन तथा नदी प्रदूषण प्रबंधन को लेकर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है.19 से 21 अगस्त 2026 तक चलने वाले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में जल एवं अपशिष्ट जल की गुणवत्ता, माइक्रो एवं नैनो प्लास्टिक, नदी पारिस्थितिकी, प्रदूषण के स्रोतों की पहचान और आधुनिक तकनीकों के उपयोग जैसे विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा जानकारी दी जा रही है.


कार्यक्रम के पहले दिन 19 अगस्त को पंजीकरण और उद्घाटन सत्र के बाद जल एवं अपशिष्ट जल की गुणवत्ता की निगरानी के सिद्धांतों पर चर्चा होगी. इसमें सैंपलिंग एवं टेस्टिंग, डेटा की गुणवत्ता, प्रिसीजन, एक्यूरेसी और मानकों जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को समझाया जाएगा. इस सत्र में प्रो. एस.एन. उपाध्याय, पूर्व निदेशक, IIT-BHU विशेषज्ञ वक्ता होंगे. इसके बाद स्थानीय नदी तंत्र में प्रदूषकों की जटिल अंतःक्रियाओं पर प्रो. जितेंद्र पांडेय, वरिष्ठ प्रोफेसर, वनस्पति विज्ञान, इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, BHU व्याख्यान देंगे.


पहले दिन के अगले सत्र में गंगा जैसी नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र में बैक्टीरियोफेज की भूमिका पर प्रो. गोपाल नाथ, सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रोफेसर, माइक्रोबायोलॉजी, IMS-BHU जानकारी देंगे। दिन के अंतिम सत्र में प्रतिभागियों को सैंपलिंग, कैलिब्रेशन और संरक्षण की व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी. इसके साथ ही प्रयोगशाला में एक्सपोजर और QA/QC की प्रक्रिया समझाई जाएगी. यह व्यावहारिक सत्र वाराणसी के तुलसी घाट स्थित संकट मोचन फाउंडेशन में प्रस्तावित है.


20 अगस्त को प्रशिक्षण के दूसरे दिन उभरते प्रदूषकों पर विशेष चर्चा होगी. इसमें जलीय पारिस्थितिकी तंत्र में माइक्रो और नैनो प्लास्टिक तथा उभरते प्रदूषकों के विश्लेषण के लिए अपनाई जाने वाली आधुनिक विधियों पर विशेषज्ञ जानकारी देंगे. इसके बाद गंगा बेसिन में उभरते प्रदूषकों और उनके समाधान की दिशा पर चर्चा होगी.


दूसरे दिन के एक प्रमुख सत्र में माइक्रोप्लास्टिक, एंडोक्राइन डिसरप्टर्स, प्रदूषकों और मृदा स्वास्थ्य के बीच संबंध तथा पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता पर चर्चा होगी. इसके अलावा सिंचाई के लिए अपशिष्ट जल एवं रनऑफ के पुनः उपयोग तथा जलीय पारिस्थितिकी तंत्र में फार्मास्यूटिकल्स एवं पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स (PPCPs), एंडोक्राइन डिसरप्टिंग केमिकल्स (EDCs) जैसे प्रदूषकों पर भी विशेषज्ञ विचार रखेंगे. पारंपरिक एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ETP) से ऐसे प्रदूषकों के उपचार की सीमाओं पर भी चर्चा होगी.


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21 अगस्त को तीसरे दिन प्रशिक्षण का फोकस नदी प्रबंधन में तकनीक और समेकित दृष्टिकोण पर रहेगा। कार्यक्रम में इंटीग्रेटेड रिवर बेसिन मैनेजमेंट, IoT सेंसर और तकनीकी एकीकरण, नदी बेसिन प्रबंधन के लिए सैटेलाइट एवं GIS मैपिंग तथा बाढ़ मैदान और पारिस्थितिक पुनर्स्थापना जैसे विषय शामिल हैं.


तीसरे दिन जल गुणवत्ता के आकलन में आइसोटोपिक ट्रेसर्स, प्रदूषण के स्रोतों की पहचान और सतत जल प्रबंधन पर भी विशेषज्ञ व्याख्यान होगा. इसके बाद वैलेडिक्टरी समारोह एवं प्रमाणपत्र वितरण के साथ तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन होगा.


कार्यक्रम का उद्देश्य जल गुणवत्ता की वैज्ञानिक निगरानी से जुड़े शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और संबंधित क्षेत्र के प्रतिभागियों को आधुनिक तकनीकों एवं व्यावहारिक प्रक्रियाओं से परिचित कराना है। IIT-BHU में जल गुणवत्ता, नदी स्वास्थ्य और उभरते प्रदूषकों पर शोध की दीर्घ परंपरा रही है तथा संस्थान के विशेषज्ञ नदी स्वास्थ्य आकलन, उभरते प्रदूषकों और जल गुणवत्ता प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं.

33 पेड़ों की कटाई और 2.65 करोड़ के NGT जुर्माने को लेकर छात्रों ने EC को सौंपा ज्ञापन
33 पेड़ों की कटाई और 2.65 करोड़ के NGT जुर्माने को लेकर छात्रों ने EC को सौंपा ज्ञापन
वाराणसी : काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में ‘GenZ For BHU’ छात्र आंदोलन के तहत सोमवार को छात्र प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद (Executive Council) को ज्ञापन सौंपा। छात्रों ने 33 पेड़ों की कटाई, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की ओर से लगाए गए 2.65 करोड़ रुपये के जुर्माने और छात्रों के साथ कथित मारपीट को लेकर कार्रवाई की मांग की।छात्र प्रतिनिधिमंडल में सत्यम सिंह, रवि सिंह, अमन मौर्य, विवर्त सिंह समेत अन्य छात्र शामिल रहे। छात्रों ने ज्ञापन के माध्यम से पेड़ों की कटाई के मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।छात्रों की प्रमुख मांगों में U.P. Trees Protection Act और BNS की संबंधित धाराओं के तहत निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कराना शामिल है। छात्रों ने यह भी मांग की कि NGT द्वारा लगाए गए 2.65 करोड़ रुपये के जुर्माने की राशि छात्र फंड से नहीं वसूली जाए। उनका कहना है कि इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों से व्यक्तिगत स्तर पर वसूली की जानी चाहिए।इसके अलावा छात्रों ने कुलपति से मिलने गए छात्र-छात्राओं के साथ कथित मारपीट के मामले में सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। छात्र प्रतिनिधियों ने अपने खिलाफ गठित कमेटियों और जारी नोटिस को भी वापस लेने की मांग की है।ALSO READ : बीएचयू के छात्र दुर्गेश यादव का ‘सा रे गा मा पा 2026’ में हुआ चयनपरिसर में पेड़ों की जियो-टैगिंग की मांगछात्रों ने बीएचयू परिसर के सभी पेड़ों का ट्री सेंसस कराने, उनकी जियो-टैगिंग करने और पेड़ों की निगरानी के लिए ‘ट्री मॉनिटरिंग समिति’ गठित करने की मांग भी रखी।छात्रों का कहना है कि परिसर में पर्यावरण से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे आगे शांतिपूर्ण आंदोलन करेंगे।
बीएचयू के छात्र दुर्गेश यादव का ‘सा रे गा मा पा 2026’ में हुआ चयन
बीएचयू के छात्र दुर्गेश यादव का ‘सा रे गा मा पा 2026’ में हुआ चयन
वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के संगीत एवं मंच कला संकाय के गायन विभाग के छात्र दुर्गेश यादव का ज़ी टीवी के लोकप्रिय गायन रियलिटी शो ‘सा रे गा मा पा 2026’ के लिए चयन हुआ है। शो का प्रसारण 19 सितंबर 2026 से ज़ी टीवी पर शुरू हो चुका है।उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के महलीपुर गांव निवासी दुर्गेश यादव, श्री इंद्रजीत यादव और श्रीमती कौशिल्या देवी के पुत्र हैं। उन्होंने बीएचयू से वर्ष 2020-23 में बीपीए (गायन-उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत) और 2023-25 में एमपीए (गायन-उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत) की शिक्षा प्राप्त की है। वर्तमान में वह संगीत एवं मंच कला संकाय में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन इंटर्नशिप कर रहे हैं।दुर्गेश यादव ने पं. गिरजा शंकर त्रिपाठी के मार्गदर्शन में उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत का प्रशिक्षण प्राप्त किया है। शास्त्रीय संगीत की इसी पृष्ठभूमि के साथ उन्होंने गायन के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है।उनके ‘सा रे गा मा पा 2026’ में चयन पर संगीत एवं मंच कला संकाय की संकाय प्रमुख एवं गायन विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. संगीता पंडित, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन इंटर्नशिप के समन्वयक प्रो. राम शंकर, प्रो. ज्ञानेश चंद्र पांडेय सहित अन्य संकाय सदस्यों ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।ALSO READ : बेनियाबाग से हड़हा सराय तक चला अतिक्रमण विरोधी अभियान, दुकानदारों से नोकझोंकबीएचयू से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा प्राप्त कर राष्ट्रीय स्तर के लोकप्रिय गायन रियलिटी शो में चयन होने से विश्वविद्यालय के संगीत एवं मंच कला संकाय में भी उत्साह का माहौल है।
बेनियाबाग से हड़हा सराय तक चला अतिक्रमण विरोधी अभियान, दुकानदारों से नोकझोंक
बेनियाबाग से हड़हा सराय तक चला अतिक्रमण विरोधी अभियान, दुकानदारों से नोकझोंक
वाराणसी : बेनियाबाग चौराहे से हड़हा सराय मार्केट तक सोमवार को नगर निगम की प्रवर्तन टीम ने अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया. टीम ने सड़क पर दुकान लगाकर और अन्य तरीकों से किए गए अतिक्रमण को हटाते हुए मार्ग को कब्जामुक्त कराया. कार्रवाई के दौरान कुछ दुकानदारों की प्रवर्तन टीम से नोकझोंक भी हुई, लेकिन मौके पर मौजूद पुलिस बल के चलते स्थिति नियंत्रित रही.अभियान के दौरान सड़क पर दुकान लगाकर रखा गया सामान नगर निगम की टीम ने वाहनों में लादकर हटाया. सड़क किनारे गिट्टी, बालू और ईंट रखकर बिक्री किए जाने से यातायात प्रभावित हो रहा था. इसके अलावा सड़क पर अवैध रूप से ट्रांसपोर्ट गतिविधियां संचालित किए जाने की शिकायत भी सामने आई थी. नगर निगम की कार्रवाई की जानकारी मिलने पर मौके पर पहुंचे पार्षद इंद्रेश सिंह ने बताया कि बेनियाबाग क्षेत्र में सड़क जाम और अतिक्रमण की शिकायतों के बाद यह अभियान चलाया गया.ALSO READ : सीएम डैशबोर्ड की समीक्षा बैठक, बोले डीएम- किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाएउन्होंने कहा कि सड़क पर कब्जे के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही थी. अतिक्रमण हटने से यातायात सुगम होगा और स्थानीय लोगों को अपने घरों तकपहुंचने में भी सुविधा मिलेगी. पार्षद ने कहा कि हड़हा सराय मार्केट तक आवागमन सुचारु रहने से व्यापारिक गतिविधियों को भी सुविधा मिलेगी और ग्राहकों को बाजार तक पहुंचने में परेशानी नहीं होगी. नगर निगम की प्रवर्तन टीम ने सड़क पर दोबारा अतिक्रमण न करने की हिदायत भी दी.