समय पर सीपीआर मिले तो कार्डियक अरेस्ट मरीज की बच सकती है जान, शुरुआती मिनट बेहद अहम: डॉ. शिव शक्ति द्विवेदी...

वाराणसी: कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में समय पर दिया गया कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) मरीज की जान बचाने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। यह जानकारी देते हुए डॉ. शिव शक्ति द्विवेदी ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को अचानक कार्डियक अरेस्ट हो जाए तो शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे समय में सही तरीके से सीपीआर शुरू करने से मरीज के बचने की संभावना बढ़ जाती है।
उन्होंने बताया कि सामान्यतः एक स्वस्थ व्यक्ति की हृदय गति 60 से 100 धड़कन प्रति मिनट के बीच होती है। यदि किसी व्यक्ति की सांस और धड़कन बंद हो जाए तो तुरंत सहायता बुलाने के साथ-साथ सीपीआर शुरू करना चाहिए। लोगों में इसके प्रति जागरूकता का अभाव है, जबकि आज के समय में हर व्यक्ति को इसकी बुनियादी जानकारी होनी चाहिए।
डॉ. द्विवेदी ने कहा कि लोग अक्सर सीपीआर सीखने को महत्व नहीं देते, लेकिन यह एक ऐसा कौशल है जो आपात स्थिति में किसी की जान बचा सकता है। उन्होंने बताया कि स्वयं उनके परिवार में हार्ट अटैक की घटना के बाद उन्हें इसकी उपयोगिता का वास्तविक महत्व समझ में आया।
उन्होंने कहा कि हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में अंतर समझना भी जरूरी है। हार्ट अटैक तब होता है जब हृदय तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में रुकावट आ जाती है, जबकि कार्डियक अरेस्ट में हृदय अचानक प्रभावी रूप से धड़कना बंद कर देता है और व्यक्ति अचेत हो जाता है। ऐसी स्थिति में तत्काल सीपीआर देना अत्यंत आवश्यक होता है।
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डॉ. द्विवेदी ने सीपीआर की शुरुआती प्रक्रिया को याद रखने के लिए DRSABC सूत्र बताया। इसमें D (Danger) यानी पहले आसपास के खतरे की जांच करें, R (Response) यानी मरीज की प्रतिक्रिया देखें, S (Shout for Help) यानी सहायता के लिए जोर से आवाज लगाएं, A (Airway) यानी श्वास मार्ग खुला है या नहीं देखें, B (Breathing) यानी लगभग 10 सेकंड तक सांस की जांच करें और यदि सांस नहीं चल रही हो तो C (Compression) यानी सीने पर दबाव देकर सीपीआर शुरू करें।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे सीपीआर का प्रशिक्षण लें और इस जीवनरक्षक तकनीक की जानकारी अपने परिवार व समाज तक पहुंचाएं, ताकि आपातकालीन स्थिति में अधिक से अधिक लोगों की जान बचाई जा सके।



