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गेहूं की समय पर कटाई, गर्मी के असर से बचने का उपाय

गेहूं की समय पर कटाई, गर्मी के असर से बचने का उपाय
Mar 29, 2026, 12:09 PM
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Posted By Preeti Kumari

वाराणसी: मार्च और अप्रैल के दौरान बढ़ता तापमान पूर्वी सिंधु-गंगा के मैदानों में गेहूं के किसानों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बनता जा रहा है. अंतर्राष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान–दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (आइसार्क) के कृषि विशेषज्ञ किसानों को सलाह देते हैं कि वे फसल के पकाव पर नजर रखें और सही समय पर कटाई करें, ताकि दाना-भराव के समय अंतिम चरण की गर्मी (टर्मिनल हीट) के कारण दानों के सिकुड़ने और खेत में झड़ना से पैदावार में होने वाले नुकसान को कम किया जा सके.


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पूर्वी उत्तर प्रदेश में धान–गेहूं प्रणाली के तहत गेहूं की बुवाई सामान्यतः मध्य नवंबर से मध्य दिसंबर के बीच की जाती है और सामान्य परिस्थितियों में कटाई मार्च के अंत से मध्य-अप्रैल तक होती है. यदि बुवाई 1–20 नवंबर के बीच की जाती है, तो फसल का दाना भरने का चरण सामान्यत: मार्च के आखिर में, तेज गर्मी शुरू होने से पहले पूरा हो जाता है, जिससे सही समय पर कटाई और दाने की बेहतरा गुणवत्ता सुनिश्चित होती है. नवंबर के प्रारंभ में बोई गई कम या मध्यम अवधि (लगभग 120-130 दिन) वाली किस्में आमतौर पर मार्च के अंतिम सप्ताह से अप्रैल के पहले सप्ताह तक कटाई के लिए तैयार हो जाती हैं.


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जानें कब शुरू करें फसल की कटाई


किसानों को कटाई तब शुरू करनी चाहिए जब फसल कार्यिकी परिपक्वता (फिजियोलॉजिकल मैच्योरिटी) पर पहुंच जाए—अर्थात जब अधिकांश पत्तियां और बालियां सुनहरी पीली हो जाएं और दाने में नमी लगभग 18–20% रह जाए। कटाई सुबह (7:00– 11:00 बजे) या शाम (4:00–7:00 बजे) के समय करना बेहतर रहता है, जिससे दाने झड़ने और नमी में ह्रास को रोका जा सके. इसी अवधि (1–20 नवंबर) में बोई गई लंबी अवधि (लगभग 150 दिन में पकने वाली) और अधिक उत्पादन देने वाली किस्में सामान्यतः अप्रैल के पहले से तीसरे सप्ताह के बीच कटाई के लिए तैयार होती हैं. इस प्रकार की किस्मों में परिपक्वता का अंतर (लगभग 7–15 दिन) किसानों को कटाई चरणबद्ध तरीके से करने में मदद करता है, जिससे श्रम का दबाव कम होता है और कटाई के बाद की प्रक्रिया समय पर पूरी हो पाती है.


जलवायु परिस्थितियों में उपज


विशेषज्ञ, किसानों को सलाह देते हैं कि फसल पकने के बाद कटाई में देरी न करें, क्योंकि अप्रैल में बढ़ते तापमान और गर्म हवाएं दानों के सिकुड़ने और उपज में कमी का कारण बन सकती हैं. किसानों को यह भी सुझाव दिया जाता है कि संभव हो तो भविष्य में शून्य जुताई (ज़ीरो टिलेज) के तहत समय पर बुवाई की अवधि में जल्दी और लंबी अवधि वाली किस्मों का संयोजन करें, ताकि कटाई मार्च के अंत से मध्य अप्रैल तकं की जा सके. इससे श्रम प्रबंधन सुगम होगा और बदलती जलवायु परिस्थितियों में उपज एवं दाने की गुणवत्ता सुरक्षित रहेगी.


पौध प्रजनन अवस्था में फूल आने के बाद दाना भरने की अवधि शुरू होती है और यह शारीरिक परिपक्वता (फिजियोलॉजिकल मैच्योरिटी) तक चलती है, जब दाने में नमी लगभग 37% होती है. इसके बाद दाना नमी खोने लगता है. इस अवधि का सही समय मौसम, किस्म और बुवाई की तिथि पर निर्भर करता है. कटाई तब करनी चाहिए जब फसल पूर्णत:परिपक्व हो जाए. इस अवस्था में 18–20% नमी पर भी बिना उपज हानि के कटाई की जा सकती है. तना पीला होना चाहिए और दाना दाँत से दबाने पर आवाज के साथ टूटे या नाखून से दबाने पर न दबे. अतिपक्वता के कारण दाना झड़ने (शैटरिंग) के नुकसान से बचने के लिए समय पर कटाई जरूरी है. देर से बोई गई गेहूं की फसल कटाई के समय पूर्ण परिपक्व नहीं होती और अधिक तापमान के कारण जबरन पक जाती है.


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अधिक नमी (14% से ज्यादा) होने पर खरीद दर कम हो सकती है या अस्वीकृति भी हो सकती है. सुरक्षित भंडारण के लिए दाने की नमी 12–14% होनी चाहिए. बीज के लिए लंबे समय तक भंडारण किया जाता है, और अधिक नमी अंकुरण को कम कर सकती है तथा बीज की गुणवत्ता को प्रभावित करती है. इसलिए, बेहतर बीज जीवनक्षमता बनाए रखने और कीट-रोग के नुकसान को कम करने के लिए सुपर बैग या हर्मेटिक बैग का उपयोग करना चाहिए. हाथ से कटाई में पूलों (गठ्ठों) को 3–4 दिन सुखाकर मड़ाई की जाती है. मजदूरों की कमी से कटाई में देरी हो सकती है, जिससे दाना झड़ना और बालियों का नुकसान बढ़ता है.


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कंबाइन हार्वेस्टर से कटाई करने पर देरी से बचा जा सकता है और यह किफायती भी हो सकता है, लेकिन अधिक गति से चलाने पर सफाई और पृथक्करण में नुकसान हो सकता है. फसल गिरने (लॉजिंग) की स्थिति में मशीन के कटर बार कोे करीब चलाएं और गति कम रखें. यदि गेहूं की बुवाई जीरो टिलेज तकनीक से की गई है, तो फसल एक साथ उगती और एक साथ पकती है. ऐसी समान परिपक्वता वाली फसल की कटाई करते समय अच्छी गुणवत्ता बनाए रखन और नुकसान कम करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए.


फसल कटाई से पहले करें ये तैयारी


कंबाइन या रीपर का उपयोग करने वाले किसान मशीन की मरम्मत पहले ही करवा लें ताकि कटाई के समय कोई समस्या न हो.

कटाई के बाद अनाज को तुरंत सुखाना चाहिए ताकि नमी का स्तर कम हो जाए और अनाज सुरक्षित रहे, सुरक्षित भंडारण के लिए दानों में नमी की मात्रा 11-13% होनी चाहिए. हाथ द्वारा कटाई करने वाले किसान फसल को थ्रेसिंग के लिए उपयुक्त नमी तक सुखाकर ही थ्रेसिंग करें.

गेहूं के फसल-अवशेष न जलाएं, बल्कि जीरो टिलेज से मूंग की बुवाई करें. इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है जिसका लाभ आगामी फसलों में मिलेगा और पर्यावरण भी प्रदूषित नहीं होता.

अनाज भंडारण से पूर्व संग्रहण-साधन को अच्छी तरह से साफ और कीटाणुमुक्त कर लेना चाहिए.

बंगाल में 142 सीटों पर संपन्न हुआ मतदान, फिर टूटेगा वोटिंग का रिकॉर्ड
बंगाल में 142 सीटों पर संपन्न हुआ मतदान, फिर टूटेगा वोटिंग का रिकॉर्ड
Voting concludes in 142 seats in Bengal, voting records may be broken againबंगाल विधानसभा यानि (विस) चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण के तहत आज सात जिलों की 142 सीटों के लिए सुबह से हो रही वोटिंग शाम 5 बजे तक समाप्त हो गया है. इस मतदान के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे. बंगाल चुनाव में शाम पांच बजे तक हुए 142 सीटों पर 89.99% मतदान हुआ है, यहीं कारण है कि, दूसरे चरण में मतदान के सारे रिकॉर्ड टूटने की उम्मीद है.अधिकारी मनोज अग्रवाल ने डाला वोट दूसरे चरण के इस मतदान में पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने मतदान केंद्र पहुंचकर वोट डाला. कोलकाता के भवानीपुर से TMC उम्मीदवार और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, 'CRPF इस तरह लोगों को परेशान नहीं कर सकती, यहां राज्य पुलिस नहीं है, इन्हें सीमा की रक्षा करनी चाहिए, लेकिन इसकी जगह वे एक राजनीतिक दल की रक्षा कर रहे हैं. मैं 1984 से चुनाव लड़ रही हूं और इस बार इतना अत्याचार हो रहा है कि इन्होंने महिलाओं, बच्चों को मारा.राणाघाट, कल्याणी, आरमबाग़, घोघाट, कैनिंग, इन सभी जगहों पर इन्होंने एजेंट को बाहर कर दिया, इसलिए मैं ये पूछती हूं कि, क्या यही स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव है?'142 विधानसभा सीटों पर 78.68 प्रतिशत मतदानपश्चिम बंगाल में 142 विधानसभा सीटों पर मतदान के दूसरे चरण में दोपहर 3 बजे तक 78.68 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, चुनाव आयोग ने यह जानकारी साझा की है. वही, भाजपा उम्मीदवार सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया कि, चुनाव अधिकारियों ने निर्देश दिया है कि राज्य में जहां भी चार से अधिक लोग इकट्ठा होंगे, वहां केंद्रीय बल उन्हें हटाने के लिए कार्रवाई कर सकते हैं और जिन लोगों ने मतदान कर लिया है, उन्हें घर लौटने को कहा गया है. वहीं, उन्होंने टीएमसी पर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ लोग हंगामा कर रहे थे, लेकिन अब माहौल बदल रहा है और लोग जागरूक होकर मतदान कर रहे हैं.सुवेंदु अधिकारी ने कहीं ये बड़़ी बात भाजपा उम्मीदवार सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि जब वे भवानिपुर के एक मतदान केंद्र पर पहुंचे, तो कुछ लोगों ने 'जय बांग्ला' के नारे लगाए। उन्होंने दावा किया कि ये लोग बांग्लादेश मूल के मुस्लिम थे, जिनके नाम मतदाता सूची में नहीं थे, अधिकारी के अनुसार, उन्होंने करीब 15 मिनट तक उन्हें नारे लगाने दिया ताकि पूरा मामला कैमरे में रिकॉर्ड हो सके. उन्होंने यह भी दावा किया कि इस घटना के बाद करीब 10 हजार वोट उनके पक्ष में शिफ्ट हुए हैं, इससे पहले दिन में भवानिपुर के एक मतदान केंद्र पर उनके पहुंचने के दौरान नारेबाजी के कारण तनाव की स्थिति भी बन गई थी.Also Read: वाराणसी में कीनाराम अवतरण दिवस पर 55 जोड़ों का होगा सामूहिक विवाहजानें पहले चरण में कितनी हुई वोटिंगजानकारी के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में पहले चरण में 152 विधानसभा सीटों पर मतदान हुआ था, जिसमें 62.18% मतदान दर्ज किया गया था. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे और अंतिम चरण में दोपहर 1 बजे तक लगभग 61.11 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, इस बीच भाजपा नेता लॉकेट चटर्जी ने दावा किया कि कई जगहों पर करीब 85 प्रतिशत तक वोटिंग पूरी हो चुकी है और चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है, उन्होंने लोगों से अपने मताधिकार का उपयोग करने की अपील करते हुए कहा कि इस बार भाजपा सरकार बनाने जा रही है और बंगाल ममता बनर्जी के हाथों से फिसल रहा है.https://www.youtube.com/watch?v=dDM6bqR657U
वाराणसी में कीनाराम अवतरण दिवस पर 55 जोड़ों का होगा सामूहिक विवाह
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55 couples to have mass wedding on Kinaram Avtaran Diwas in Varanasiवाराणसी: अघोर परंपरा के प्रमुख केंद्र रविंद्रपुरी स्थित बाबा कीनाराम स्थल पर एक बार फिर सामाजिक सरोकार का बड़ा आयोजन होने जा रहा है. अघोराचार्य बाबा कीनाराम अघोर शोध एवं सेवा संस्थान की ओर से 1 मई को पीठाधीश्वर बाबा सिद्धार्थ गौतम राम के अवतरण दिवस के अवसर पर 55 जरूरतमंद नवयुवक-युवतियों का सामूहिक विवाह कराया जाएगा. यह आयोजन कीनाराम स्थल के की-कुण्ड परिसर में सम्पन्न होगा, जहां देश-विदेश से श्रद्धालु भी उपस्थित रहते हैं.सामूहिक विवाह कार्यक्रम सामाजिक समरसतासंस्थान द्वारा आयोजित यह सामूहिक विवाह कार्यक्रम सामाजिक समरसता और सेवा भाव का प्रतीक माना जाता है. संस्था लंबे समय से चिकित्सा, शिक्षा और समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए कार्य करती आ रही है, और इसी कड़ी में यह आयोजन जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी राहत लेकर आता है. प्रमुख व्यवस्थापक अरुण सिंह और कार्यक्रम संयोजिका रूबी सिंह ने पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि सभी जोड़ों का विवाह पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार पूरे विधि-विधान से कराया जाएगा. उन्होंने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत पूर्वाह्न 11 बजे से हल्दी की रस्म के साथ होगी, जो दोपहर 1 बजे तक चलेगी. इसके बाद रात्रि 8 बजे से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विवाह संस्कार प्रारंभ होंगे, जो मध्यरात्रि तक सम्पन्न होंगे. विवाह के उपरांत सभी नवविवाहित जोड़ों और उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण की भी व्यवस्था की गई है.Also Read: काशी विश्‍वनाथ मंदिर में मंगला आरती की तत्‍काल बुकिंग, वेबसाइट पर शो होगा विकल्‍पइस अवसर पर पीठाधीश्वर बाबा सिद्धार्थ गौतम राम का आशीर्वाद नवदंपतियों को प्राप्त होगा, जो उनके वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि के लिए विशेष महत्व रखता है. आयोजन को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं और परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया जा रहा है. संस्था के पदाधिकारियों और स्वयंसेवकों द्वारा व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि सभी अतिथियों और प्रतिभागियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो. यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि समाज में सहयोग, सेवा और एकजुटता का संदेश भी देगा.https://www.youtube.com/watch?v=dDM6bqR657U
काशी विश्‍वनाथ मंदिर में मंगला आरती की तत्‍काल बुकिंग, वेबसाइट पर शो होगा विकल्‍प
काशी विश्‍वनाथ मंदिर में मंगला आरती की तत्‍काल बुकिंग, वेबसाइट पर शो होगा विकल्‍प
Like the railways, the Kashi Vishwanath Temple will now offer instant booking for Mangala Aarti; the option will be displayed on the website.वाराणसी: रलेवे की तरह अब काशी विश्वनाथ मंदिर में मंगला आरती की भी तत्काल टिकट बुकिंग होगी. तत्काल में मंगला आरती के 100 टिकट मिलेंगे. हर दिन सुबह 11 बजे से अगले दिन की मंगला आरती के तत्काल टिकट की बुकिंग होगी. तत्काल टिकट बुकिंग की पूरी प्रक्रिया श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के आधिकारिक वेबसाइट पर अपडेट कर दी गई है. अब वेबसाइट खोलने पर रेलवे बुकिंग की तरह ही तत्काल बुकिंग का भी विकल्प दिखेगा. भक्तों को जनरल और तत्काल दोनों टिकटों के लिए 500 रुपये का ही भुगतान करना होगा.जनरल और तत्काल मंगला आरती में बुकिंगजनरल और तत्काल मंगला आरती में इंट्री और सीटिंग का फर्क होगा. मंगला आरती के जनरल टिकट अगले 30 दिनों तक के किए जा सकेंगे. वहीं तत्काल मंगला आरती के लिए बुकिंग अगले दिन के लिए सुबह 11 बजे से शुरू होगी.Also Read: पूर्वांचल समेत वाराणसी में बदला मौसम का मिजाज, भयंकर बारिश के साथ गिरे ओलेजनरल मंगला आरती वाले भक्तों को प्रवेश गेट नंबर एक (ढुंढिराज राज गणेश) से दिया जाएगा जबकि बैठने की व्यवस्था दक्षिण एलईडी की तरफ होगी. जबकि तत्काल बुकिंग वाले श्रद्धालुओं का प्रवेश गेट नंबर 4बी से होगा और बैठने की व्यवस्था उत्तर एलईडी की तरफ की जाती है. इस पहल से श्रद्धालुओं को सुविधा होगी और भीड से भी राहत मिलेगी.https://www.youtube.com/watch?v=dDM6bqR657U