मौनी अमावस्या कल, गंगा स्नान का है विशेष महत्व, काशी में लाखों श्रद्धालु लगाएंगे डुबकी

वाराणसी : माघ कृष्ण अमावस्या, जिसे मौनी अमावस्या के नाम से जाना जाता है. इस बार 18 जनवरी को गंगा स्नान का विशेष महत्व है. संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के अनुसार, स्नान का उत्तम समय 18 जनवरी को प्रातः 5.59 बजे से 11.55 बजे तक है. अमृत स्नान शाम 4.41 बजे से रात 9.23 बजे तक का समय विशेष लाभप्रद है. इस दौरान मकर राशि में सूर्य और चंद्रमा का योग उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में होगा.
विश्वविद्यालय के ज्योतिषाचार्य डा. मधुसूदन मिश्र ने बताया कि इस दिन गंगा या पवित्र नदियों में स्नान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है. उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे इस शुभ अवसर पर गंगा स्नान अवश्य करें और दान-पुण्य करें.
स्नान का महत्व
मौनी अमावस्या के दिन गंगा, यमुना, नर्मदा, सरयू अथवा किसी भी पवित्र नदी में स्नान करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है. प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर सूर्यदेव को अर्घ्य देने की परंपरा है.
स्नान के समय पितरों का स्मरण करते हुए उन्हें जल अर्पित करें. ऐसा करने से पितर प्रसन्न होते हैं, परिवार को आशीर्वाद देते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का संचार होता है. मान्यता है कि इस दिन तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है.
गंगा स्नान संभव न हो तो क्या करें
मौनी अमावस्या पर पवित्र नदियों में स्नान करके करोड़ों श्रद्धालु पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं. किंतु यदि किसी कारणवश आप गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करने में असमर्थ हैं, तो निराश होने की आवश्यकता नहीं है. घर पर स्नान के जल में कुछ बूंदें गंगाजल मिलाकर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें. इसे भी गंगा स्नान के समान पुण्यकारी माना गया है.
इसके अतिरिक्त, संध्या समय घर की दक्षिण दिशा में चौमुखी दीपक जलाएं. यह उपाय पितरों की कृपा प्राप्त करने और घर में शांति एवं खुशहाली लाने में सहायक माना जाता है.
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मौनी अमावस्या पर दान
स्नान के पश्चात मौनी अमावस्या पर दान करना बेहद पुण्यदायी माना गया है. शास्त्रों के अनुसार, इस दिन किया गया दान सौ यज्ञों के बराबर पुण्य फल देता है. मौनी अमावस्या के दिन अन्न, वस्त्र, कंबल तथा जरूरतमंदों की आवश्यक वस्तुओं का दान करना चाहिए. साथ ही गौसेवा, पशु-पक्षियों को चारा और दाना डालना भी विशेष पुण्य प्रदान करता है. ऐसा करने से पितरों की आत्मा तृप्त होती है और पितृदोष से मुक्ति मिलती है. मौनी अमावस्या पर श्रद्धा, नियम और भक्ति के साथ किए गए पुण्य कर्म न केवल पितरों को मोक्ष प्रदान करते हैं, बल्कि साधक के जीवन में भी शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक प्रकाश का संचार करते हैं.



