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वाराणसी में गंगा पार सैलानियों संग वसूली, विरोध करने पर ऊंट और घोड़े वालों ने नाविकों को पीटा

वाराणसी में गंगा पार सैलानियों संग वसूली, विरोध करने पर ऊंट और घोड़े वालों ने नाविकों को पीटा
Feb 14, 2026, 08:44 AM
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Posted By Diksha Mishra

वाराणसी : दशाश्‍वमेध घाट के ठीक सामने गंगा पार रेती पर शनिवार की दोपहर मारपीट और उपद्रव होने से अफरा तफरी मची रही. आरोप है कि ऊंट और घोड़े वालों ने पहले तो सैलानियों से वसूली की, फिर उन्हें लाने वाले नाविकों के विरोध करने पर नाविकों पर घोड़े और ऊंट वालों ने कंटीले तार, डंडे और लाठियों से हमला कर दिया जिससे वहां भगदड की स्थिति बन गई. इस घटना में एक व्यक्ति की हालत गंभीर बताई जा रही है, जबकि चार अन्य लोग भी घायल हुए हैं. घायलों को कबीर चौरा अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां दो लोगों को इमरजेंसी में आनन-फानन में भर्ती किया गया.


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घटना के बाद, माझी समाज के अध्यक्ष प्रमोद माझी गंगा उस पार रेती पर पहुंचे और पुलिस कार्रवाई की मांग करते हुए रामनगर थाने में तहरीर देने पहुंचे. उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं समाज के लिए चिंता का विषय हैं और प्रशासन को इस पर सख्त कदम उठाने चाहिए. प्रमोद माझी ने कहा कि पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि ऐसी घटनाएं भविष्य में न हों. इस दौरान मांझी समाज की ओर से धरना देने की सूचना है.


घटना के बाद, पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और घायलों को स्‍थानीय लोगों के सहयोग से अस्पताल पहुंचाने में मदद की. पुलिस ने कहा कि वे मामले की जांच कर रहे हैं और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. स्थानीय प्रशासन ने भी इस घटना को गंभीरता से लिया है और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का आश्वासन दिया है. बतादें कि गंगा पार सुरक्षा के नाम पर कोई व्‍यवस्‍था नहीं है जबकि बडी संख्‍या में पर्यटक उस पार रेती पर मौज करने जाते हैं.

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स्थानीय लोगों ने भी इस घटना पर चिंता जताई है और कहा है कि यदि ऐसी घटनाएं जारी रहीं, तो इससे पर्यटन उद्योग को बड़ा नुकसान होगा. उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि वे इस दिशा में प्रशासन पहल करे. नाव‍िकों ने क‍हा क‍ि वाराणसी की सांस्कृतिक धरोहर और पर्यटन स्थल की सुरक्षा के लिए यह आवश्यक है कि प्रशासन इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए. स्थानीय निवासियों और व्यवसायियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए.

विश्‍व मजदूर दिवस पर पीएम आदर्श गांव में बुलंद की आवाज, मजदूरी  बढ़ाने की उठाई मांग
विश्‍व मजदूर दिवस पर पीएम आदर्श गांव में बुलंद की आवाज, मजदूरी बढ़ाने की उठाई मांग
On World Labour Day, voices were raised in the PM's Adarsh ​​Village, demanding a wage increase.वाराणसी: विश्व मजदूर दिवस के अवसर पर शुक्रवार को प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम नागेपुर में बुनकरों और दिहाड़ी मजदूरों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार आवाज बुलंद की. सैकड़ों की संख्या में जुटे मजदूरों ने बुनकरी उद्योग को बचाने, रोजगार की स्थिरता सुनिश्चित करने और मजदूरी बढ़ाने की मांग को लेकर गांव में रैली निकाली और प्रदर्शन किया. रैली के बाद अम्बेडकर पार्क में एक सभा का आयोजन किया गया, जहां बुनकरों और मजदूरों ने अपनी समस्याओं को खुलकर रखा. वक्ताओं ने कहा कि बढ़ती महंगाई और घटते रोजगार के कारण बुनकर समुदाय और दिहाड़ी मजदूरों की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है. पारंपरिक बुनकरी उद्योग संकट के दौर से गुजर रहा है, जिससे हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित हो रही है.कनेक्शन से जुड़ी समस्याएं उठाईंसभा में मौजूद बिजली विभाग के अधिशासी अभियंता अभिषेक कुमार और उपखण्ड अधिकारी मुकेश यादव के समक्ष ग्रामीणों और बुनकरों ने बिजली आपूर्ति, बिलिंग और कनेक्शन से जुड़ी समस्याएं भी उठाईं. अधिकारियों ने समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया. इस अवसर पर सर्व सेवा संघ उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ गांधीवादी समाजसेवी रामधीरज भाई ने कहा कि बुनकरों और मजदूरों के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए. उन्होंने सरकार से मांग की कि बुनकरी उद्योग को संरक्षण देने के लिए ठोस नीतियां बनाई जाएं और मजदूरों को उचित पारिश्रमिक दिया जाए.Also Read: मनीष हत्‍याकांड के विरोध में वकीलों ने किया चक्‍काजाम, धरना देकर की आवाज बुलंदभारतीय सामुदायिक कार्यकर्ता मंच (आईकन) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद मूर्ति ने कहा कि मजदूरों की एकजुटता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है. वहीं, आल इंडिया बुनकर फोरम के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुहम्मद अकरम ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा. कार्यक्रम में बुनकर प्रकोष्ठ सलाहकार उत्तर प्रदेश शैलेश, संतोष बीडीसी सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता और ग्रामीण मौजूद रहे. सभा के अंत में मजदूरों ने एकजुट होकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की और सरकार से शीघ्र कार्रवाई की अपील की.https://www.youtube.com/watch?v=yk_vEG6WMTk
मनीष हत्‍याकांड के विरोध में वकीलों ने किया चक्‍काजाम, धरना देकर की आवाज बुलंद
मनीष हत्‍याकांड के विरोध में वकीलों ने किया चक्‍काजाम, धरना देकर की आवाज बुलंद
Lawyers staged a sit-in protest against the Manish murder case and raised their voices.वाराणसी: फूलपुर थाना क्षेत्र के युवा उद्यमी मनीष सिंह की पीट-पीटकर निर्मम हत्या के विरोध में अब अधिवक्ता सडक पर उतर गए. वकीलों ने घमहापुर गांव पहुंचकर पुलिस की लचर कार्रवाई पर विरोध जताया, आक्रोश जताते हुए अधिकवक्ताओं ने चक्काजाम किया. पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते हुए धरना भी दिया. धरना-प्रदर्शन के चलते सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई और आवागमन प्रभावित हुआ. अधिवक्ताओं और परिजनों द्वारा दो 2:10 बजे धरना प्रारंभ किया गया. उनके द्वारा मांग की गई की मौके पर वरिष्ठ अधिकारी जब तक नहीं आएंगे धरना प्रदर्शन समाप्त नहीं होगा.परिजनों ने पुलिस पर लगाया गंभीर आरोप शुक्रवार दोपहर सेंट्रल बार एसोसिएशन, वाराणसी के अध्यक्ष प्रेम प्रकाश सिंह गौतम के साथ दर्जनों अधिवक्ता पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे. इस दौरान परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरी घटना की जानकारी अधिवक्ताओं को दी. इसके बाद अधिवक्ताओं और परिजनों ने बसनी-कुआर मार्ग पर जाम लगाकर धरना शुरू कर दिया. हालांकि एसीपी पिंडरा द्वारा 48 घंटे का समय मांगा गया. एसीपी ने कहा कि 48 घंटे के अंदर परिणाम आप लोगों के सामने होगा. उसके बाद नाराज अधिवक्ता और परिजन धरना प्रदर्शन समाप्त किए. करीब 20 मिनट तक बसनी-कुआर मार्ग जाम रहा. एसीपी पिंडरा ने सीपी से वार्ता करके बताया कि 2 दिन के अंदर सभी की गिरफ्तारी हो जाएगी और सीपी आज सायं 5 बजे पीड़ित परिवार को मिलने के लिए बुलाया है. इसके बाद वकलों ने धरना समाप्त किया और आवागमन चालू हुआ.उद्योग व्यापार मंडल ने जताया आक्रोशइस बीच उद्योग व्यापार मंडल उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष शिव कुमार गुप्ता के नेतृत्व में पदाधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल गांव पहुंचा. सभी ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर गहरी संवेदना व्यक्त की तथा हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया. प्रदेश अध्यक्ष शिव कुमार गुप्ता ने कहा कि इस दुखद घटना की व्यापार मंडल कड़ी निंदा करता है और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगा.Also Read: काशी विश्‍वनाथ मंदिर में एप आधारित दर्शन व्‍यवस्‍था का विरोध, कांग्रेस और सपा ने लगाया यह आरोप
काशी विश्‍वनाथ मंदिर में एप आधारित दर्शन व्‍यवस्‍था का विरोध, कांग्रेस और सपा ने लगाया यह आरोप
काशी विश्‍वनाथ मंदिर में एप आधारित दर्शन व्‍यवस्‍था का विरोध, कांग्रेस और सपा ने लगाया यह आरोप
Opposition to app-based darshan system at Kashi Vishwanath Temple, Congress and SP allege thisवाराणसी: काशी विश्वनाथ मंदिर में प्रस्तावित एप आधारित दर्शन व्यवस्था को लागू किया जा रहा है. इसको लेकर राजनीतिक विरोध तेज हो गया है. प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के हालिया दौरे के बाद लागू की जा रही नई डिजिटल प्रणाली के खिलाफ कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने प्रशासन पर आस्था से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया है. इस बीच सियासी घमासान की आशंकाओर विरोध को देखते हुए शुक्रवार को मंदिर परिसर के बाहर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया. हालांकि पुलिस बल की तैनाती को शुक्रवार की नमाज से जोडा जा रहा है.बाबा दरबार को “व्यापारिक और कॉरपोरेट मॉडल” में बदलने की कोशिशकांग्रेस महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने मंदिर प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बाबा विश्वनाथ के दरबार को “व्यापारिक और कॉरपोरेट मॉडल” में बदलने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्वभूषण और एसडीएम शंभूशरण को तत्काल हटाने की मांग की. राघवेंद्र चौबे ने कहा कि काशी की पहचान उसकी आध्यात्मिक परंपरा, सरल दर्शन व्यवस्था और लोक आस्था से रही है, लेकिन वर्तमान प्रशासन श्रद्धालुओं को मोबाइल ऐप और डिजिटल प्रक्रियाओं के दायरे में बांधने का प्रयास कर रहा है. उनका आरोप था कि मंदिर को “प्रयोगशाला” बनाकर सनातन परंपराओं के साथ प्रयोग किए जा रहे हैं.उन्होंने कहा कि सदियों से बाबा विश्वनाथ के दर्शन श्रद्धा और विश्वास के आधार पर होते आए हैं, लेकिन अब व्यवस्था को तकनीकी नियंत्रण और बाजारीकरण की ओर ले जाया जा रहा है. कांग्रेस के अनुसार, एप आधारित व्यवस्था से ग्रामीण श्रद्धालु, बुजुर्ग, महिलाएं, मजदूर और तकनीकी संसाधनों से दूर लोग सबसे अधिक प्रभावित होंगे. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मंदिर प्रशासन स्थानीय नागरिकों और आम श्रद्धालुओं की सुविधा की बजाय वीआईपी संस्कृति और नियंत्रण आधारित व्यवस्था को बढ़ावा दे रहा है. पार्टी ने काशीवासियों के लिए निर्धारित दर्शन द्वारों की समय सीमा बढ़ाने और सरल दर्शन व्यवस्था बहाल करने की मांग की.Also Read: शादी समारोह में जा रहे युवक की सड़क हादसे मे दर्दनाक मौत, दो घायलपार्टी ने चेतावनी दी कि यदि एप आधारित व्यवस्था वापस नहीं ली गई तो कांग्रेस, संत समाज और स्थानीय लोग व्यापक जनआंदोलन शुरू करेंगे. राघवेंद्र चौबे ने कहा कि “काशी की आत्मा को प्रशासनिक अहंकार और मोबाइल एप के जरिए नियंत्रित नहीं किया जा सकता.” वहीं समाजवादी पार्टी ने भी इस व्यवस्था का विरोध करते हुए इसे श्रद्धालुओं की आस्था पर अनावश्यक बंधन बताया है. पार्टी नेताओं का कहना है कि धर्म और परंपरा को तकनीकी ढांचे में सीमित करने का प्रयास उचित नहीं है. फिलहाल मंदिर प्रशासन की ओर से इस विवाद पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.https://www.youtube.com/watch?v=yk_vEG6WMTk