होली और रमज़ान के बीच पारंपरिक बाजारों की रौनक फीकी
वाराणसी : होली और रमजान जैसे दो बड़े धार्मिक पर्व एक ही समय पर आते हैं, तो आमतौर पर बाजारों में रौनक बढ़ जाती है. खासकर मेवा (सूखे मेवे) की बिक्री में उछाल देखने को मिलता है. होली पर मिठाइयों और पकवानों के लिए काजू, बादाम और किशमिश की मांग बढ़ती है, वहीं रमज़ान में खजूर, बादाम और अन्य सूखे मेवों की खपत इफ्तार और सेहरी के कारण अधिक हो जाती है.
हालांकि इस बार स्थिति कुछ अलग नजर आ रही है. गोला दीनानाथ क्षेत्र के व्यापारीयों ने गाडीव डिजिटल की टीम से बातचीत में व्यापारियों ने बताया कि पारंपरिक बाजारों में उम्मीद के मुताबिक भीड़ नहीं दिख रही है. उनका कहना है कि लोग तेजी से ऑनलाइन खरीदारी की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे स्थानीय दुकानों की बिक्री प्रभावित हो रही है.

व्यापारियों के अनुसार त्योहारों के दौरान मेवा, मिठाइयों और अन्य खाद्य सामग्री की मांग तो बनी हुई है, लेकिन खरीदारी का तरीका बदल गया है. ग्राहक अब घर बैठे मोबाइल ऐप और वेबसाइट के जरिए सामान मंगवा रहे हैं. इस बदलती प्रवृत्ति के कारण बाजार में पहले जैसी चहल-पहल नहीं दिख रही, जिससे छोटे व्यापारियों में चिंता बढ़ गई है.
वहीं कुछ व्यापारियों का कहना है कि जो लोग आर्थिक रूप से सक्षम हैं, वही खुलकर खरीदारी कर रहे हैं. दूसरी ओर कई खरीदारों का मानना है कि महंगाई का असर भी खरीदारी पर साफ दिखाई दे रहा है. बढ़ती कीमतों के कारण लोग जरूरत के हिसाब से ही सामान खरीद रहे हैं.
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इस बार होली और रमज़ान का साथ आना मेवा बाजार के लिए उम्मीदें तो लेकर आया, लेकिन ऑनलाइन खरीदारी और महंगाई के चलते पारंपरिक बाजारों की रौनक फीकी पड़ती नजर आ रही है.



