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आईआईटी-बीएचयू में उभरते जल प्रदूषकों पर प्रशिक्षण, माइक्रोप्लास्टिक के खतरों पर विशेषज्ञों ने किया मंथन

आईआईटी-बीएचयू में उभरते जल प्रदूषकों पर प्रशिक्षण, माइक्रोप्लास्टिक के खतरों पर विशेषज्ञों ने किया मंथन
Aug 20, 2026, 09:18 AM
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Posted By Niharika dwivedi

वाराणसी: आईआईटी-बीएचयू और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के सहयोग से आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में गुरुवार को Emerging Contaminants यानी उभरते प्रदूषकों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से चर्चा की, कार्यक्रम में सीपीसीबी मुख्यालय दिल्ली के साथ आरडी चंडीगढ़, लखनऊ और कोलकाता से प्रोजेक्ट साइंटिस्ट एवं वैज्ञानिक स्तर के अधिकारी शामिल हुए.प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य जल में तेजी से बढ़ रहे नए प्रकार के प्रदूषकों, उनके प्रभाव और उपचार की मौजूदा चुनौतियों को समझना रहा.


विशेषज्ञों ने बताया कि वर्तमान समय में पानी में ऐसे कई नए प्रदूषक पाए जा रहे हैं, जिनके बारे में वैज्ञानिक जानकारी अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुई है। इन प्रदूषकों के कारण सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और अन्य जल उपचार संयंत्रों के सामने नई चुनौतियां पैदा हो रही हैं, सवाल यह भी है कि उपचार के बाद ये प्रदूषक पूरी तरह खत्म हो रहे हैं या जल और मिट्टी के माध्यम से खाद्य श्रृंखला में प्रवेश कर मानव एवं अन्य जीव-जंतुओं को प्रभावित कर रहे हैं.


प्रशिक्षण के दौरान माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण पर विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि माइक्रोप्लास्टिक का प्रभाव केवल पानी तक सीमित नहीं है। मिट्टी से पानी, पानी से पौधों और फिर पौधों के माध्यम से पशुओं एवं अन्य जीवों तक इसके पहुंचने की पूरी संभावना है, इस तरह यह पर्यावरण और खाद्य श्रृंखला में लंबे समय तक बने रहने वाला प्रदूषण बन सकता है.


विशेषज्ञों के अनुसार माइक्रोप्लास्टिक के संभावित प्रभावों में न्यूरोलॉजिकल और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल प्रभावों के साथ-साथ अन्य गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों को लेकर भी अध्ययन जारी हैं. इसके संभावित कार्सिनोजेनिक प्रभावों को लेकर भी वैज्ञानिक स्तर पर शोध किया जा रहा है, ऐसे में आम लोगों के बीच इसके प्रति जागरूकता बढ़ाना जरूरी है.


प्रशिक्षण में यह भी बताया गया कि माइक्रोप्लास्टिक के लिए अभी भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई हिस्सों में मानकीकृत परीक्षण प्रक्रिया और स्पष्ट क्रिटिकल लिमिट तय करने की चुनौती बनी हुई है, भारत में बीआईएस और सीपीसीबी सहित विभिन्न संस्थाएं इस दिशा में काम कर रही हैं, यूरोपीय संघ और अमेरिका की पर्यावरण संरक्षण एजेंसियां भी माइक्रोप्लास्टिक की पहचान, मात्रा निर्धारित करने और उसके सुरक्षित स्तर तय करने के लिए अध्ययन कर रही हैं.


कार्यक्रम के आगामी सत्रों में दूषित जल को उपचारित कर दोबारा कृषि सिंचाई में उपयोग करने, एंटीबायोटिक्स और बायोटेक्नोलॉजिकल उत्पादों के जल पर पड़ने वाले प्रभाव तथा जल में बैक्टीरियल एवं फीकल कंटामिनेशन की जांच के लिए एमपीएन (Most Probable Number) जैसी विधियों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा, वैज्ञानिकों और प्रतिभागियों को प्रयोगशाला में इन तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है.


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विशेषज्ञों ने कहा कि प्रदूषण से निपटना केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, इसके लिए सामूहिक भागीदारी जरूरी है. जिस तरह सिंगल यूज प्लास्टिक को लेकर जागरूकता और सरकारी हस्तक्षेप बढ़ाया गया है, उसी तरह माइक्रोप्लास्टिक और अन्य उभरते प्रदूषकों को लेकर भी आम लोगों को जागरूक करना आवश्यक है. विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण काम हुआ है, लेकिन बदलते प्रदूषकों और उनके प्रभाव को देखते हुए अभी और व्यापक शोध एवं जागरूकता की जरूरत है.

33 पेड़ों की कटाई और 2.65 करोड़ के NGT जुर्माने को लेकर छात्रों ने EC को सौंपा ज्ञापन
33 पेड़ों की कटाई और 2.65 करोड़ के NGT जुर्माने को लेकर छात्रों ने EC को सौंपा ज्ञापन
वाराणसी : काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में ‘GenZ For BHU’ छात्र आंदोलन के तहत सोमवार को छात्र प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद (Executive Council) को ज्ञापन सौंपा। छात्रों ने 33 पेड़ों की कटाई, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की ओर से लगाए गए 2.65 करोड़ रुपये के जुर्माने और छात्रों के साथ कथित मारपीट को लेकर कार्रवाई की मांग की।छात्र प्रतिनिधिमंडल में सत्यम सिंह, रवि सिंह, अमन मौर्य, विवर्त सिंह समेत अन्य छात्र शामिल रहे। छात्रों ने ज्ञापन के माध्यम से पेड़ों की कटाई के मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।छात्रों की प्रमुख मांगों में U.P. Trees Protection Act और BNS की संबंधित धाराओं के तहत निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कराना शामिल है। छात्रों ने यह भी मांग की कि NGT द्वारा लगाए गए 2.65 करोड़ रुपये के जुर्माने की राशि छात्र फंड से नहीं वसूली जाए। उनका कहना है कि इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों से व्यक्तिगत स्तर पर वसूली की जानी चाहिए।इसके अलावा छात्रों ने कुलपति से मिलने गए छात्र-छात्राओं के साथ कथित मारपीट के मामले में सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। छात्र प्रतिनिधियों ने अपने खिलाफ गठित कमेटियों और जारी नोटिस को भी वापस लेने की मांग की है।ALSO READ : बीएचयू के छात्र दुर्गेश यादव का ‘सा रे गा मा पा 2026’ में हुआ चयनपरिसर में पेड़ों की जियो-टैगिंग की मांगछात्रों ने बीएचयू परिसर के सभी पेड़ों का ट्री सेंसस कराने, उनकी जियो-टैगिंग करने और पेड़ों की निगरानी के लिए ‘ट्री मॉनिटरिंग समिति’ गठित करने की मांग भी रखी।छात्रों का कहना है कि परिसर में पर्यावरण से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे आगे शांतिपूर्ण आंदोलन करेंगे।
बीएचयू के छात्र दुर्गेश यादव का ‘सा रे गा मा पा 2026’ में हुआ चयन
बीएचयू के छात्र दुर्गेश यादव का ‘सा रे गा मा पा 2026’ में हुआ चयन
वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के संगीत एवं मंच कला संकाय के गायन विभाग के छात्र दुर्गेश यादव का ज़ी टीवी के लोकप्रिय गायन रियलिटी शो ‘सा रे गा मा पा 2026’ के लिए चयन हुआ है। शो का प्रसारण 19 सितंबर 2026 से ज़ी टीवी पर शुरू हो चुका है।उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के महलीपुर गांव निवासी दुर्गेश यादव, श्री इंद्रजीत यादव और श्रीमती कौशिल्या देवी के पुत्र हैं। उन्होंने बीएचयू से वर्ष 2020-23 में बीपीए (गायन-उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत) और 2023-25 में एमपीए (गायन-उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत) की शिक्षा प्राप्त की है। वर्तमान में वह संगीत एवं मंच कला संकाय में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन इंटर्नशिप कर रहे हैं।दुर्गेश यादव ने पं. गिरजा शंकर त्रिपाठी के मार्गदर्शन में उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत का प्रशिक्षण प्राप्त किया है। शास्त्रीय संगीत की इसी पृष्ठभूमि के साथ उन्होंने गायन के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है।उनके ‘सा रे गा मा पा 2026’ में चयन पर संगीत एवं मंच कला संकाय की संकाय प्रमुख एवं गायन विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. संगीता पंडित, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन इंटर्नशिप के समन्वयक प्रो. राम शंकर, प्रो. ज्ञानेश चंद्र पांडेय सहित अन्य संकाय सदस्यों ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।ALSO READ : बेनियाबाग से हड़हा सराय तक चला अतिक्रमण विरोधी अभियान, दुकानदारों से नोकझोंकबीएचयू से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा प्राप्त कर राष्ट्रीय स्तर के लोकप्रिय गायन रियलिटी शो में चयन होने से विश्वविद्यालय के संगीत एवं मंच कला संकाय में भी उत्साह का माहौल है।
बेनियाबाग से हड़हा सराय तक चला अतिक्रमण विरोधी अभियान, दुकानदारों से नोकझोंक
बेनियाबाग से हड़हा सराय तक चला अतिक्रमण विरोधी अभियान, दुकानदारों से नोकझोंक
वाराणसी : बेनियाबाग चौराहे से हड़हा सराय मार्केट तक सोमवार को नगर निगम की प्रवर्तन टीम ने अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया. टीम ने सड़क पर दुकान लगाकर और अन्य तरीकों से किए गए अतिक्रमण को हटाते हुए मार्ग को कब्जामुक्त कराया. कार्रवाई के दौरान कुछ दुकानदारों की प्रवर्तन टीम से नोकझोंक भी हुई, लेकिन मौके पर मौजूद पुलिस बल के चलते स्थिति नियंत्रित रही.अभियान के दौरान सड़क पर दुकान लगाकर रखा गया सामान नगर निगम की टीम ने वाहनों में लादकर हटाया. सड़क किनारे गिट्टी, बालू और ईंट रखकर बिक्री किए जाने से यातायात प्रभावित हो रहा था. इसके अलावा सड़क पर अवैध रूप से ट्रांसपोर्ट गतिविधियां संचालित किए जाने की शिकायत भी सामने आई थी. नगर निगम की कार्रवाई की जानकारी मिलने पर मौके पर पहुंचे पार्षद इंद्रेश सिंह ने बताया कि बेनियाबाग क्षेत्र में सड़क जाम और अतिक्रमण की शिकायतों के बाद यह अभियान चलाया गया.ALSO READ : सीएम डैशबोर्ड की समीक्षा बैठक, बोले डीएम- किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाएउन्होंने कहा कि सड़क पर कब्जे के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही थी. अतिक्रमण हटने से यातायात सुगम होगा और स्थानीय लोगों को अपने घरों तकपहुंचने में भी सुविधा मिलेगी. पार्षद ने कहा कि हड़हा सराय मार्केट तक आवागमन सुचारु रहने से व्यापारिक गतिविधियों को भी सुविधा मिलेगी और ग्राहकों को बाजार तक पहुंचने में परेशानी नहीं होगी. नगर निगम की प्रवर्तन टीम ने सड़क पर दोबारा अतिक्रमण न करने की हिदायत भी दी.