आईएमएस-बीएचयू में लिक्विड बायोप्सी पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला शुरू, 50 प्रतिभागी ले रहे प्रशिक्षण

वाराणसी: 6 अक्टूबर। चिकित्सा विज्ञान संस्थान (आईएमएस), काशी हिंदू विश्वविद्यालय में कैंसर की आधुनिक जांच और शोध को लेकर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। डीएचआर-आईसीएमआर एडवांस्ड मॉलिक्यूलर ऑन्कोलॉजी डायग्नोस्टिक सर्विसेज (DIAMOnDS) सेंटर की ओर से “डिकोडिंग कैंसर थ्रू लिक्विड बायोप्सी: फ्रॉम सीएफ-डीएनए/सीएफ-आरएनए एक्सट्रैक्शन टू डीडीपीसीआर डेटा इंटरप्रिटेशन” विषय पर आयोजित कार्यशाला में करीब 50 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। इसका आयोजन स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (DHR) और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के सहयोग से किया जा रहा है।
कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि कैंसर अनुसंधान में तेजी से नई तकनीकें विकसित हो रही हैं। रक्त और लार जैसे शरीर के द्रवों के माध्यम से त्वरित और मिनिमली इनवेसिव जांच की तकनीकें तेजी से आगे बढ़ रही हैं। हालांकि निश्चित कैंसर निदान के लिए ठोस ऊतक की बायोप्सी अभी भी प्रमुख आधार है।
उन्होंने कहा कि आईएमएस-बीएचयू में आधुनिक आणविक तकनीकों का नैदानिक और अनुसंधान स्तर पर उपयोग किया जा रहा है। इससे शोध प्रकाशनों के साथ प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को भी बढ़ावा मिल रहा है। कुलपति ने प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और अंतर्विषयक सहयोग पर जोर देते हुए आईएमएस, विज्ञान संस्थान और कृषि विज्ञान संस्थान के शोधकर्ताओं के बीच सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
आईएमएस निदेशक प्रो. एसएन सांखवार ने बताया कि कार्यशाला में लगभग 50 प्रतिभागी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि वेट-लैब प्रशिक्षण, डेटा विश्लेषण और सामूहिक विकास पर केंद्रित यह कार्यशाला नए शोध और सहयोग की संभावनाओं को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण मंच है।
चिकित्सा संकाय के संकाय प्रमुख प्रो. संजय गुप्ता ने DIAMOnDS सेंटर के युवा वैज्ञानिकों और पीएचडी शोधार्थियों के शोध कार्यों की सराहना की। उन्होंने शोध और व्यावसायिक विकास के लिए आईएमएस-बीएचयू की ओर से निरंतर सहयोग का आश्वासन दिया।
सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. मनोज पांडेय ने स्वागत संबोधन में DIAMOnDS सेंटर के माध्यम से संस्थान में प्रिसिजन और ट्रांसलेशनल ऑन्कोलॉजी के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सर सुंदरलाल अस्पताल में हर वर्ष करीब 25 हजार नए कैंसर रोगी पहुंचते हैं।
कार्यक्रम में ट्रांसलेशनल ऑन्कोलॉजी के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ. रोही दीक्षित, डॉ. मोनिका राजपूत, डॉ. गौत्रिना और डॉ. रश्मि पटेल को सम्मानित किया गया। उनके शोध कार्यों में पेटेंट, आणविक निदान, गट-माइक्रोबायोटा आधारित कैंसर अनुसंधान और एआई आधारित कैंसर अनुसंधान शामिल हैं।
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दो दिवसीय कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को लिक्विड बायोप्सी तकनीक का हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण दिया जा रहा है। केस आधारित चर्चा और तकनीकी प्रदर्शन के जरिए प्रतिभागियों को सीएफ-डीएनए/सीएफ-आरएनए एक्सट्रैक्शन से लेकर डीडीपीसीआर डेटा की व्याख्या तक की सैद्धांतिक और व्यावहारिक जानकारी दी जा रही है। कार्यशाला का उद्देश्य कैंसर की आधुनिक आणविक जांच तकनीकों में शोधकर्ताओं और चिकित्सकों की दक्षता बढ़ाने के साथ नए अनुसंधान सहयोग को बढ़ावा देना है।



