BHU में मास्कलेस लेजर लिथोग्राफी पर दो दिवसीय कार्यशाला का समापन, प्रतिभागियों को मिले प्रमाणपत्र....

वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के सोफिस्टिकेटेड एनालिटिकल एंड टेक्निकल हेल्प इंस्टीट्यूट (SATHI-BHU) में मास्कलेस लेजर लिथोग्राफी पर आयोजित दो दिवसीय व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यशाला का बुधवार को समापन हुआ। एक और दो सितंबर को सेंट्रल डिस्कवरी सेंटर (CDC) स्थित SATHI-BHU की क्लीनरूम सुविधा में आयोजित कार्यशाला में देश के विभिन्न संस्थानों से आए प्रतिभागियों ने अत्याधुनिक लिथोग्राफी तकनीक और सेमीकंडक्टर डिवाइस फैब्रिकेशन की बारीकियां सीखीं।
समापन समारोह में बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए। उन्होंने SATHI-BHU में इस तरह की विशिष्ट और अत्याधुनिक सुविधा स्थापित होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी सुविधाएं नवीन तकनीकों और उपकरणों के विकास के लिए महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध कराती हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से कार्यशाला में प्राप्त तकनीकी ज्ञान को अपने शोध और थीसिस में उपयोग करने तथा भविष्य में SATHI-BHU की सुविधाओं का उपयोग सहयोगात्मक अनुसंधान के लिए करने का आह्वान किया।
कुलपति ने कहा कि अत्याधुनिक शोध सुविधाओं को विकसित करने में वित्तीय संसाधनों, समय और प्रशासनिक प्रयासों का बड़ा निवेश होता है। इन सुविधाओं का वास्तविक लाभ तब मिलेगा, जब इनके माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शोध प्रकाशन और पेटेंट योग्य तकनीकों का विकास हो।
कार्यशाला में प्रतिभागियों को मास्कलेस लेजर लिथोग्राफी, लिथोग्राफी पैटर्न, क्लीनरूम प्रोटोकॉल, रेजिस्ट कोटिंग, सॉफ्ट बेक और सब्सट्रेट तैयार करने की प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण दिया गया। प्रतिभागियों ने क्लीनरूम वातावरण में लिथोग्राफी सिस्टम पर प्रत्यक्ष अभ्यास किया और माइक्रो-पैटर्निंग तथा माइक्रो-इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़े व्यावहारिक कौशल विकसित किए।
कार्यशाला का शुभारंभ एक सितंबर को पंजीकरण एवं स्वागत सत्र के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र में IIT-BHU के इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अमृतांशु पांडेय और कार्यशाला की संयोजक प्रो. अंचल श्रीवास्तव मौजूद रहीं। प्रो. अंचल श्रीवास्तव ने लेजर आधारित लिथोग्राफी के मूल सिद्धांतों और इसके अनुप्रयोगों पर विशेषज्ञ व्याख्यान दिया। इसके बाद शोधार्थी साजल राय ने लेजर राइटर के संचालन और व्यावहारिक पहलुओं पर प्रशिक्षण दिया।
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दूसरे दिन डॉ. अंकित अरोड़ा, सहायक प्रोफेसर, इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग, IIT-BHU ने ‘Lithography for Advanced Electronic Devices’ विषय पर व्याख्यान दिया। इसमें उन्नत इलेक्ट्रॉनिक एवं सेमीकंडक्टर उपकरणों के निर्माण में लिथोग्राफी की भूमिका पर जानकारी दी गई।
समापन समारोह में सेंट्रल डिस्कवरी सेंटर के समन्वयक प्रो. ए.के. घोष, SATHI-BHU के समन्वयक प्रो. त्र्यंबक देव सिंह, उप-समन्वयक प्रो. बिरिंची कुमार शर्मा, प्रो. अमृतांशु पांडेय और प्रो. अंचल श्रीवास्तव समेत अन्य विशेषज्ञ मौजूद रहे। प्रतिभागियों ने कार्यशाला के अनुभव साझा किए और विशेषज्ञों के साथ संवादात्मक सत्र में क्लीनरूम, लिथोग्राफी तथा डिवाइस फैब्रिकेशन से जुड़े सवालों के जवाब भी प्राप्त किए।



