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Unity Day: भारत की एकता और अखंडता की आधारशिला को नमन

Unity Day: भारत की एकता और अखंडता की आधारशिला को नमन
Oct 30, 2025, 10:45 AM
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Posted By Anurag Sachan


हर साल 31 अक्टूबर को भारत राष्ट्रीय एकता दिवस (Rashtriya Ekta Diwas) मनाता है ताकि सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती का सम्मान किया जा सके एक ऐसे नेता जिनकी दूरदृष्टि और दृढ़ निश्चय ने एक एकीकृत भारत की नींव रखी. “भारत के लौह पुरुष" के रूप में प्रसिद्ध पटेल के नेतृत्व में स्वतंत्रता के बाद 560 से अधिक रियासतों का एकीकरण हुआ, जिसने आज के इस अखंड,संप्रभु राष्ट्र को जन्म दिया. एकता दिवस केवल उनकी विरासत को श्रद्धांजलि नहीं है— it भारत की विविधता में एकताकी स्थायी प्रतिबद्धता की पुनपुष्टि है.


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लौह पुरुष और भारत का एकीकरण


जब 1947 में भारत स्वतंत्र हुआ, तब देश को 560 से अधिक रियासतों का एक जटिल ताना बाना विरासत में मिला-प्रत्येक रियासत की अपनी स्वायत्तता और अलग-अलग निष्ठाएँ थीं. सरदार पटेल ने इन रियासतों को भारतीय संघ में सम्मिलित करने की चुनौती स्वीकार की एक ऐसा कार्य जिसके लिए अद्वितीय

कूटनीति, साहस और दृढ़ निश्चय की आवश्यकता थी. उनकी स्थिर दृष्टि और दृढ़ संकल्पने उन्हें "लौह पुरुष" का खिताब दिलाया.


राजनयिक समझदारी और व्यवहारिकता के संयोजन से पटेल ने लगभग सभी रियासतों का विलय कराया, जिनमें हैदराबाद,जूनागढ़ और जम्मू-कश्मीर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र भी शामिल थे. इससे भारत की क्षेत्रीय अखंडता सुनिश्चित हुई.


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पटेल ने एक बार कहा था-


"एकता के बिना मनुष्यबल कोई शक्ति नहीं है, जब तक वह उचित रूप से समन्वित और संगठित न हो

जाए; तब वह एक आध्यात्मिक शक्ति बन जाता है. उनके लिए राष्ट्र की सच्ची शक्ति केवल सीमाओं में नहीं, बल्कि उसके लोगों की एकता में निहित थी.


राष्ट्रीय एकता दिवस की शुरुआत...


2014 में भारत सरकार ने सरदार पटेल की जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की. इसका उद्देश्य देशवासियों में एकता की भावना को पुनर्जीवित करना और पटेल की "एक भारत, श्रेष्ठ

भारत की दृष्टि को सम्मानित करना था.


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इस दिन देशभर में रन फॉर यूनिटी, सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदर्शनी और शपथ समारोह आयोजित किए जाते हैं शैक्षणिक संस्थानों से लेकर सेना और समुदायों तक.


मुख्य समारोह गुजरात के एकता नगर स्थित स्टैच्यूऑफ यूनिटी (182 मीटर ऊँचा पटेल का भव्य प्रतिमा)

पर आयोजित होता है, जो भारत की शक्ति, साहस और सामूहिक संकल्प का प्रतीक है.


एक दृष्टि जो समय से परे है...


सरदार पटेल की राजनीतिक बुद्धिमत्ता और दूरदृष्टि आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी स्वतंत्रता के

समय थी.उनका सामाजिक समरसता और समावेशिता में विश्वास आज के विभाजित विश्व में भी प्रेरणा देता है.


उन्होंने कहा था-


“धर्म के मार्ग पर चलो सत्य और न्याय के मार्ग पर क्योंकि वही सभी के लिए सही मार्ग है.

ये शब्द हमें याद दिलाते हैं कि भारत के सामाजिक ताने बाने में न्याय, परस्पर सम्मान और शांति बनाए रखना हमारी साझा जिम्मेदारी है.


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एकता दिवस उस भारत के विचार को पुनर्स्थापित करता है जो अपनी विविधता के कारण फलता फूलता

है, न कि उसके बावजूद . यह दिन हर नागरिक को राष्ट्रीय एकता के प्रति समर्पण की याद दिलाता है--

भारत की सांस्कृतिक विविधता को संजोने और भाषा,क्षेत्र, और धर्म के बीच बंधन मजबूत करने का

आह्वान करता है.


आधुनिक भारत में एकता दिवस...


आज जब भारत क्षेत्रीय असमानताओं, सामाजिक विभाजनों और वैचारिक मतभेदों जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है, तब एकता दिवस का संदेश और भी महत्वपूर्ण हो जाता है.यह केवल एक औपचारिक उत्सव नहीं है- राष्ट्रीय एकता और सामूहिक प्रगति की भावना को पुनर्जीवित करता है.


कॉलेजों में एकता पर वाद-विवाद और निबंध प्रतियोगिताएँ होती हैं, सरकारी संस्थान परेड और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करते हैं, और नागरिक राष्ट्र की अखंडता बनाए रखने की शपथ लेते हैं.


हर वर्ष स्टैच्यूऑफ यूनिटी पर आयोजित समारोह देशभक्ति और गर्व की भावना को फिर से जगाता है.

यह संदेश देता है कि भारत चाहे जितना विशाल और विविध हो, उसका दिल और आत्मा एक है.

पटेल के शब्द आज भी प्रेरणादायक हैं-



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"मेरी केवल एक इच्छा है कि भारत एक अच्छा उत्पादक बने और देश में कोई भूखा न रहे, किसी की

आँखों में आँसू न हों.


उनका दयालु राष्ट्रवाद सेवा और एकता पर आधारित नेतृत्व का सर्वोत्तम उदाहरण है.


एकता की अमर विरासत...


राष्ट्रीय एकता दिवस केवल स्मरण का दिन नहीं है- यह उस शक्ति की याद दिलाता है जो एकता से आती

है.

यह भारत के संविधान, धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र, और उस कालातीत विचार का प्रतिबिंब है कि एकताही

राष्ट्र की सबसे बड़ी संपत्ति है.


एक विभाजित होती दुनिया में पटेल का उदाहरण हमें अनुशासन, एकजुटता, और सामूहिक नियति में

विश्वास का संदेश देता है.


हर वर्ष 31 अक्टूबर को जब भारत एकता दिवस मनाता है, तब यह हमें याद दिलाता है कि पटेल की

कल्पित एकता कोई स्थिर आदर्श नहीं, बल्कि एक जीवंत शक्ति है.


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उनके ये शब्द आज भी गूंजते हैं-


"कार्य ही पूजा है,श्रम ही ईश्वर है,और जो व्यक्ति सही भावना से कार्य करता है, वह सदैव शांत और

प्रसन्न रहता है.


ये वचन हर पीढ़ी को राष्ट्र की प्रगति और एकता में योगदान देने का आह्वान करते हैं.


सरदार वल्लभभाई पटेल की विरासत इतिहास से परे है -वह भारत की आत्मा में जीवित है.


हर वर्ष एकता दिवस यह सुनिश्चित करता है कि यह भावना कभी मंद न पड़े, भारत सदैव एक रहे, और

पटेल का स्वप्नित सामंजस्य सदैव हमारा मार्गदर्शक बना रहे.

वाराणसी: ग्राम चौपाल में डीएम ने सुनी ग्रामीणों की समस्याएं, एसआईआर पर दी जानकारी
वाराणसी: ग्राम चौपाल में डीएम ने सुनी ग्रामीणों की समस्याएं, एसआईआर पर दी जानकारी
वाराणसी : जिलाधिकारी सत्येन्द्र कुमार की अध्यक्षता में विकास खंड आराजी लाइन के अंतर्गत ग्राम पंचायत नागेपुर में ग्राम चौपाल–गांव की समस्या गांव में समाधान कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीणों को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ते हुए उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान करना रहा.ग्राम चौपाल के दौरान जिलाधिकारी ने ग्रामीणों से सीधे संवाद कर केंद्र एवंप्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी ली और उनके क्रियान्वयन की समीक्षा की.उन्होंने एक-एक कर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और मौके पर मौजूद संबंधित विभागों के अधिकारियों को शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए.ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें सरकारी योजनाओं की जानकारी मिल रही है और वे उनका लाभ भी प्राप्त कर रहे हैं। इस पर जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कोई भी पात्र व्यक्ति योजनाओं से वंचित न रहे, यह सुनिश्चित किया जाए.जिलाधिकारी ने आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत अधिक से अधिक पात्र लोगों का आयुष्मान कार्ड बनवाने पर जोर दिया और बताया कि इसके माध्यम से पांच लाख रुपये तक का निःशुल्क इलाज संभव है.उन्होंने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, किसान सम्मान निधि, तथा वृद्धा, विधवा और दिव्यांग पेंशन से जुड़ी समस्याओं का शीघ्र समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही महिला सशक्तिकरण योजनाओं के माध्यम से स्वरोजगार को बढ़ावा देने की बात कही.एसआईआर कार्यों को लेकर किया गया संवादचौपाल के बाद जिलाधिकारी ने एसआईआर (Special Intensive Revision) कार्यों को लेकर ग्रामीणों से संवाद किया। उन्होंने एएसडी/अनकलेक्टेबल/अनमैप्ड मतदाताओं, फार्म-6, 6ए, 7 एवं 8 (घोषणा-पत्र सहित) की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि निर्वाचन आयोग द्वारा एसआईआर कार्यों की समय-सीमा एक माह बढ़ा दी गई है.जिलाधिकारी ने लोगों से अपीलजिलाधिकारी ने लोगों से अपील की कि वे निर्धारित तिथियों के भीतर मतदाता सूची का अवलोकन कर अपने नाम का सत्यापन अवश्य करें तथा आवश्यकता होने पर दावा/आपत्ति दर्ज कराएं। उन्होंने बताया कि 18 वर्ष पूर्ण कर चुके नागरिक फार्म-6 भरकर बीएलओ के पास जमा कर सकते हैं या https://voters.eci.gov.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.ALSO READ : काशी में संविधान संवाद सम्मेलन: कांग्रेस सांसदों ने लोकतंत्र और काशी की अस्मिता की रक्षा का लिया संकल्पइस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी प्रखर कुमार सिंह, डीसी मनरेगा पवन कुमार सिंह, अन्य जनपद स्तरीय अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे.
काशी में संविधान संवाद सम्मेलन: कांग्रेस सांसदों ने लोकतंत्र और काशी की अस्मिता की रक्षा का लिया संकल्प
काशी में संविधान संवाद सम्मेलन: कांग्रेस सांसदों ने लोकतंत्र और काशी की अस्मिता की रक्षा का लिया संकल्प
वाराणसी : कांग्रेस ने रविवार को वाराणसी के शास्त्रीघाट पर ‘संविधान संवाद सम्मेलन’ का आयोजन किया. इस सम्मेलन में प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के कई नेता और सांसद शामिल हुए, सम्मेलन का उद्देश्य लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता, नागरिक अधिकारों की रक्षा, धर्मनिरपेक्षता और संघीय ढांचे की सुरक्षा करना था. इसके साथ ही सम्मेलन में काशी की अस्मिता और सांस्कृतिक-धार्मिक पहचान पर उठाए जा रहे खतरे पर भी चर्चा हुई.कांग्रेस नेताओं ने इस अवसर पर कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यों से लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक अधिकारों को खतरा उत्पन्न हुआ है. उन्होंने जनता से लोकतंत्र की रक्षा और एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया.सम्मेलन में उठाए गए प्रमुख मुद्दे:• मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास के नाम पर रानी अहिल्याबाई की मूर्ति तोड़ने का विरोध• प्रयागराज में संत अविमुक्तेश्वरानंद के साथ दुर्व्यवहार• काशी की आस्था और सांस्कृतिक धरोहर की सुरक्षा• धार्मिक असहिष्णुता और सामाजिक न्याय के मुद्देकांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि यह रैली केवल राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि काशीवासियों की अपनी आवाज़ सरकार तक पहुँचाने का माध्यम है.उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने क्षेत्र से हटाना चाहते हैं, तो धूप में बैठकर संघर्ष करना होगा.पवन खेड़ा और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने इस अवसर पर जोर दिया कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए जनता को एकजुट होना होगा. उन्होंने यह भी कहा कि काशी की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान की सुरक्षा पार्टी की प्राथमिकताओं में शामिल है.ALSO READ : BHU और ICPS का एआई-साइबर सुरक्षा कोर्स, फीस 5000 रुपये, मिलेंगे दो क्रेडिट अंकइस सम्मेलन में प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के कई नेता और सांसद शामिल हुए.जिनमें किशोरी लाल शर्मा, पवन खेड़ा, तनुज पुनिया, राकेश राठौर, इमरान मसूद, कुंवर उज्जवल रमण सिंह, सुप्रिया श्रीनेत आदि प्रमुख रहे.कांग्रेस का यह प्रयास है कि जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझा जाए और उनके समाधान के लिए कदम उठाए जाएँ.
BHU और ICPS का एआई-साइबर सुरक्षा कोर्स, फीस 5000 रुपये, मिलेंगे दो क्रेडिट अंक
BHU और ICPS का एआई-साइबर सुरक्षा कोर्स, फीस 5000 रुपये, मिलेंगे दो क्रेडिट अंक
वाराणसी : काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) ने इंस्टीट्यूट ऑफ कॉन्स्टिट्यूशनल एंड पार्लियामेंट्री स्टडीज (ICPS) के साथ मिलकर एआई और साइबर सुरक्षा पर शॉर्ट टर्म क्रेडिट बेस्ड सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया है. इस कोर्स के तहत छात्रों को दो क्रेडिट अंक भी मिलेंगे.कोर्स की मुख्य बातें:• अवधि: 23 फरवरी से 27 फरवरी, 5 दिन• कुल कक्षा समय: 30 घंटे• स्थान: नई दिल्ली स्थित संसद भवन की लाइब्रेरी (ऑफलाइन)• ऑफलाइन फीस: 5000 रुपये (छात्र/रिसर्च स्कॉलर), 7000 रुपये (प्रोफेशनल)• ऑनलाइन फीस: 4000 रुपये (छात्र/रिसर्च स्कॉलर), 8000 रुपये (प्रोफेशनल)• अंतिम आवेदन तिथि: 16 फरवरी 2026इस कोर्स में पूर्व न्यायाधीश, वरिष्ठ अधिवक्ता, एकेडमिशियन और सरकार के वरिष्ठ अधिकारी पढ़ाएंगे.छात्रों को एआई और साइबर सुरक्षा के कानूनी, नैतिक और संवैधानिक पहलुओं के व्यावहारिक ज्ञान के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नीतिगत और गवर्नेंस से जुड़ी चुनौतियों से निपटने का प्रशिक्षण मिलेगा.कैसे करें आवेदन:छात्र और पेशेवर ICPS की वेबसाइट पर जाकर QR कोड स्कैन करके आवेदन कर सकते हैं. फॉर्म भरने और फीस जमा करने के बाद पंजीकरण पूरा होगा.ALSO READ : वाराणसी में कोडीन युक्त न्यू फेंसाडिल कफ सीरप की तस्करी, पुलिस ने 5 वांछित अभियुक्तों को गिरफ्तार कियाइस कोर्स की शुरुआत BHU और ICPS के बीच हुए समझौते के तहत की गई है. यह पहल छात्रों और रिसर्च स्कॉलर्स के लिए कानून व्यवस्था में एआई और तकनीक के इस्तेमाल को समझने का अनूठा अवसर साबित होगी.