वाराणसी में बनेगा यूपी का पहला खादी प्लाजा, क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम का निर्णय

वाराणसी : स्वदेशी की दिशा में खादी वस्त्र और ग्रामोद्योग की अवधारणा को बढ़ावा देने के लिए अनवरत प्रयास किए जा रहे हैं. खादी ग्रामोद्योग भी समय के साथ अपने उत्पादों में बदलाव लाते हुए लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है. पूर्वांचल में खादी की बढ़ती मांग को देखते हुए क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम ने खादी प्लाजा बनाने का निर्णय लिया है, जो उत्तर प्रदेश का पहला खादी प्लाजा होगा.
क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम वाराणसी के मंत्री श्रीप्रकाश पांडेय ने बताया कि प्रधानमंत्री के खादी खरीदने के आह्वान का सकारात्मक परिणाम सामने आया है. ताज होटल के सामने मिंट हाउस स्थित खादी भंडार की बिक्री में लगातार वृद्धि हो रही है, जो 2024-25 में 3.28 करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है. इस वृद्धि को देखते हुए इसे खादी प्लाजा में परिवर्तित करने का निर्णय लिया गया है, जिससे खादी वस्त्रों और ग्रामोद्योग की बिक्री में करोड़ों की वृद्धि हो सकती है.
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खादी प्लाजा का निर्माण खादी आश्रम के चार मंजिला भवन के 3600 वर्ग फीट क्षेत्र में किया जाएगा. मंत्री द्वारा इसका प्रस्ताव निदेशक खादी ग्रामोद्योग आयोग के मंडलीय कार्यालय को सौंपा गया है. निदेशक के आदेश पर सह निदेशक की टीम ने खादी भंडार का भौतिक सत्यापन किया, जिसे व्यवहारिक रूप से सही पाया गया. इसके बाद मंडलीय कार्यालय ने पूरी रिपोर्ट खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग मुंबई के निदेशक विपणन को भेज दी है. वहां से अनुमति मिलने के बाद निर्माण प्रक्रिया शुरू की जाएगी.
एक ही छत के नीचे खादी और ग्रामोद्योग के विभिन्न उत्पाद
खादी प्लाजा में एक ही छत के नीचे खादी और ग्रामोद्योग के विभिन्न उत्पाद उपलब्ध होंगे. इसमें पुरुषों, महिलाओं और युवाओं के लिए रेडीमेड और ड्रेस मेटेरियल की विस्तृत श्रृंखला होगी. प्लाजा में बंगाल का मटका सिल्क, कटिया सिल्क, गरद सिल्क, बालू चरी, जमदानी साड़ी, प्रिंटेड सिल्क, काटन, फाइन काटन, छत्तीसगढ़ का कोसा सिल्क, कटक साड़ी और कांथा स्टिच, आसाम की अंडी सिल्क, मूंगा, स्कार्फ, चादर, कश्मीर की साल और चादर, गुजरात का पोली काटन, महाराष्ट्र से राष्ट्रीय ध्वज, मैसूर से अगरबत्ती, परफ्यूम, चंदन माला और लकड़ी, आधुनिक हर्बल सौंदर्य प्रसाधन आदि उपलब्ध होंगे.
इस पहल से न केवल खादी के प्रति लोगों का आकर्षण बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय कारीगरों और उत्पादकों को भी आर्थिक लाभ होगा. खादी प्लाजा का निर्माण प्रधानमंत्री मोदी के आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. यह प्लाजा न केवल खादी के उत्पादों को बढ़ावा देगा, बल्कि स्थानीय संस्कृति और हस्तशिल्प को भी संरक्षित करेगा.



