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सेवानिवृत बैंक कर्मिंयों की मांगों को लेकर बुलंद की आवाज, सेंट्रल बैंक पर धरना प्रदर्शन

सेवानिवृत बैंक कर्मिंयों की मांगों को लेकर बुलंद की आवाज, सेंट्रल बैंक पर धरना प्रदर्शन
Jan 09, 2026, 08:48 AM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी : सेवानिवृत बैंक कर्मियों की मांगो के समर्थन में देशव्यापी आयोजन के तहत आज लंका स्थित सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया गेट पर धरना प्रदर्शन किया गया. बता दें कि AIBRF द्वारा आंदोलन का दूसरा चरण प्रारंभ कर दिया गया है. इसी क्रम में AIBRF, उत्तर प्रदेश राज्य की सेंट्रल कमेटी ने पूरे प्रदेश में आंदोलनात्मक कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया है. निर्णय के क्रम में 21 दिसंबर को वाराणसी यूनिट की मीटिंग में तीन स्थलों पर धरना प्रदर्शन आयोजित करने का निर्णय लिया गया था. पहली बार 26 दिसंबर को इंडियन बैंक, नदेसर शाखा पर धरना प्रदर्शन किया गया था. इसके बाद आज शुक्रवार को सेंट्रल बैंक, रीजनल ऑफिस, लंका पर धरना दिया गया. तीसरा प्रदर्शन 16 जनवरी को बैंक ऑफ इंडिया, जोनल ऑफिस, महमूरगंज पर किया जाएगा.


प्रमुख माँगें:


1- RBI फ़ॉर्मूले के अनुसार पेंशन अपडेशन

2- वर्ष 2012 के बाद रिटायर होने वाले कर्मचारियों को स्पेशल अलाउंस पर रिटायरमेंट बेनिफिट्स

3-रिटायर कर्मचारियों के ग्रुप मेडिकल इंश्योरेंस पर ज़ीरो GST

4- रिटायर कर्मचारियों के लिए सुपर टॉप-अप मेडिकल इंश्योरेंस में IBA द्वारा L-1 प्रक्रिया का पालन

5- रिटायर कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान हेतु IBA में शीर्ष स्तरीय शिकायत निवारण प्रणाली की स्थापना

जब तक हमारी प्रमुख मांगे पूरी नहीं होती है सब तक हम लोग देश व्यापी इसी तरह हड़ताल करेंगे.


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नगर निगम और BHU के साझा संकल्प से सवंरेगी काशी, कई छात्र सीखेंगे शहर प्रबंधन के गुर
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​वाराणसी: शहर के सर्वांगीण विकास, पर्यावरणीय स्थिरता व नागरिक सुविधाओं को और बेहतर बनाने के लिए अब नगर निगम व बीएचयू संयुक्त रूप से कार्य करेगी. शहर के समग्र व नियोजित विकास पर दोनों संस्थाओं के बीच सहमति भी बन गई है. नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल तथा बीएचयू के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी के बीच हुई उच्च स्तरीय वार्ता में जल्द ही दोनों संस्थानों के बीच एक औपचारिक समझौता (एमओयू) पर हस्ताक्षर होने की भी सहमति बनी. ​इस साझेदारी का एक महत्वपूर्ण पहलू शैक्षणिक समन्वय भी है. अब प्रतिवर्ष विश्वविद्यालय के 50 छात्रों को नगर निगम में इंटर्नशिप का अवसर मिलेगा, जिससे वे शहरी नियोजन और सामाजिक उद्यमिता की बारीकियां सीख सकेंगे.जलभराव से मिलेगी मुक्तिइसके साथ ही बीएचयू के बाहरी क्षेत्रों जैसे मालवीय गेट सिंह द्वार से डाफी तक के सुंदरीकरण और कंदवा में जलभराव रोकने के लिए नई जल निकासी लाइन बिछाने का कार्य प्राथमिकता पर किया जाएगा. विश्वविद्यालय परिसर के भीतर भी स्वच्छता प्रबंधन और निराश्रित पशुओं के नियंत्रण के लिए नगर निगम अपनी सेवाएं प्रदान करेगा, जिससे हजारों छात्रों और कर्मचारियों को सीधा लाभ पहुंचेगा. निगम की ओर से डोमरी क्षेत्र में शहर के सबसे बड़े मियावाकी अर्बन फॉरेस्ट (शहरी वन) विकसित किया गया है.यह भी पढ़ें: फर्जी प्रमाणपत्रों के सहारे नौकरी हासिल करने का आरोप, महिला शिक्षिका पर FIR दर्जसमझौते के तहत बीएचयू के ख्यातिलब्ध वनस्पति वैज्ञानिक इन पौधों की देखरेख में सक्रिय सहयोग करेंगे. वैज्ञानिक दल समय-समय पर डोमरी का निरीक्षण करेगा और पौधों के समुचित विकास के लिए तकनीकी सुझाव व दिशा-निर्देश प्रदान करेगा. यह पहल न केवल काशी के बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने में मील का पत्थर साबित होगी, बल्कि शहरी वनीकरण के एक सफल मॉडल के रूप में पूरे देश के सामने मिसाल पेश करेगी.संपत्ति कर विवाद का हुआ स्थाई समाधानवार्ता के दौरान ​लंबे समय से नगर निगम और बीएचयू के बीच संपत्ति कर को लेकर चला आ रहा गतिरोध अब पूरी तरह समाप्त हो गया है. निगम ने विश्वविद्यालय को कुछ पुरानी देनदारियों में रियायत दे दी है, जिसके बदले बीएचयू शेष बकाया राशि को किस्तों में भुगतान करने पर सहमत हुआ है.
फर्जी प्रमाणपत्रों के सहारे नौकरी हासिल करने का आरोप, महिला शिक्षिका पर FIR दर्ज
फर्जी प्रमाणपत्रों के सहारे नौकरी हासिल करने का आरोप, महिला शिक्षिका पर FIR दर्ज
वाराणसी: फर्जी प्रमाण पत्रों के जरिए शिक्षक की नौकरी हासिल करने का मामला सामने आया है. वाराणसी के सिगरा थाना क्षेत्र में एक निजी स्कूल की महिला शिक्षिका के खिलाफ फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी हासिल करने के आरोप में केस दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है. आरोप है कि शिक्षिका ने दस्तावेजों में हेरफेर कर स्कूल में नियुक्ति प्राप्त की और बाद में विवाद बढ़ने पर अधिकारियों और कर्मचारियों को धमकाने व बदनाम करने का प्रयास भी किया.महिला शिक्षिका के दस्तावेज निकले फर्जीमिली जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता ने अदालत में दिए गए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया कि संबंधित महिला शिक्षिका ने अपनी नियुक्ति के समय कई शैक्षणिक प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए थे. बाद में जब संस्थान द्वारा दस्तावेजों की जांच की गई तो उनमें नाम, पिता के नाम और अन्य विवरणों में कई प्रकार की विसंगतियां सामने आईं. आरोप है कि हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, बी.एड. तथा अन्य प्रशिक्षण से जुड़े दस्तावेजों में अलग-अलग नाम और अभिभावक का नाम दर्ज पाया गया.यह भी पढ़ें: प्‍लाट खरीदने और निर्माण से पहले VDA से कर लें ये जानकारी, हर महीने 120 ले आउट स्‍वीकृतशिकायत में यह भी कहा गया है कि दस्तावेजों की जांच के बाद संस्थान ने शिक्षिका से स्पष्टीकरण मांगा, लेकिन स्पष्ट जवाब नहीं मिलने पर मामला गंभीर हो गया. आरोप है कि इसके बाद संबंधित महिला ने संस्थान के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सोशल मीडिया और वाट्एप के माध्यम से आपत्तिजनक टिप्पणियां प्रसारित कर उन्हें बदनाम करने और दबाव बनाने की कोशिश की.जांच में जुटी पुलिसबताया जा रहा है कि शिकायतकर्ता ने पहले इस मामले की सूचना स्थानीय पुलिस अधिकारियों को दी थी, लेकिन कार्रवाई न होने पर अदालत का सहारा लिया. अदालत के आदेश पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.पुलिस के अनुसार, प्रकरण में धोखाधड़ी, जालसाजी, कूटरचना और दस्तावेजों के दुरुपयोग से संबंधित धाराएं लगाई गई हैं. जांच अधिकारी को मामले की विस्तृत पड़ताल कर साक्ष्य एकत्र करने के निर्देश दिए गए हैं. पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान सभी दस्तावेजों की सत्यता की जांच की जाएगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
प्‍लाट खरीदने और निर्माण से पहले VDA से कर लें ये जानकारी, हर महीने 120 ले आउट स्‍वीकृत
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वाराणसी: जिले में प्‍लाट खरीदने और निर्माण से पहले विकास प्राधिकरण वाराणसी से ले आउट के बारे में जानकारी कर लें. ऐसा नहीं करने पर नुकसान उठाना पडा सकता है. वीडीए की ओर से हर महीने 120 ले आउट स्वीकृत किए जा रहे हैं. बीते चार माह में 480 ले आउट स्वीकृत किए गए हैं. वीडीए उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा ने कहा कि लेआउट एवं मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया को पूर्णतः पारदर्शी, सरल एवं समयबद्ध बनाया गया है ताकि आम जनमानस को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो.उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी प्लॉट के खरीदने, निर्माण से पूर्व यह अवश्य सुनिश्चित करें कि संबंधित लेआउट वीडीए से स्वीकृत है या नहीं ताकि उनका निवेश सुरक्षित रहे. उन्होंने कहा कि अधिनियम एवं प्राधिकरण की समस्त कार्रवाई का उद्देश्य केवल दंडात्मक नहीं बल्कि शहर का विकास और सुरक्षा है.यह भी पढ़ें: खत्म होने के सफर पर ईरान और अमेरिका की जंग, राष्ट्रपति पेजेशकियन ने रखी ये शर्तें...हो सकती है कठोर कार्रवाई बताया कि उत्तर प्रदेश नगर नियोजन और विकास अधिनियम, 1973 की धारा 14/15 के तहत मानचित्र स्वीकृति के बिना निर्माण किए जाने की स्थिति में वीडीए सीलिंग, ध्वस्तीकरण जैसी कठोर कार्रवाई कर सकता है. ऑनलाइन माध्यम से न्यू बिल्डिंग मानचित्र की स्वीकृति 15 दिवस के भीतर प्रदान की जा रही है. साथ ही जिन नागरिकों की ओर से पूर्व में बिना अनुमति के निर्माण किया गया है वे भी शमन प्रक्रिया से भवनों को वैध करा सकते हैं.बेहतर संचालन के निर्देशनगर आयुक्त हिमांशु नागपाल द्वारा भेलूपुर क्षेत्र के भवनियां पोखरी स्थित MRF (मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी) सेंटर एवं वेस्ट टू एनर्जी प्लांट एरिया का स्थलीय निरीक्षण किया गया. निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त द्वारा एमआरएफ सेंटर के वर्तमान स्थल को अपर्याप्त बताते हुए इसके विस्तार एवं बेहतर संचालन के दृष्टिगत इसे वर्तमान स्थान से स्थानांतरित कर शंकुल धारा स्थित ट्रांसफर स्टेशन के समीप उपलब्ध उपयुक्त रिक्त भूमि पर नया सेंटर स्थापित किए जाने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए गए.इसी क्रम में नगर आयुक्त ने वेस्ट टू एनर्जी प्लांट को पूर्ण क्षमता के साथ संचालित करने पर विशेष जोर देते हुए डोर-टू-डोर कचरा संकलन व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए, ताकि पर्याप्त मात्रा में वेस्ट की आपूर्ति सुनिश्चित हो सके और प्लांट का संचालन सुचारु रूप से किया जा सके.