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वाराणसी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का 92 प्रतिशत काम पूरा, स्पोर्ट्स मैप पर मिलेगी मजबूत पहचान...

वाराणसी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का 92 प्रतिशत काम पूरा, स्पोर्ट्स मैप पर मिलेगी मजबूत पहचान...
Jul 05, 2026, 05:45 AM
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Posted By Shivangi Ojha

वाराणसी : प्रदेश में खेल अवसंरचना तेजी से विकसित हो रही है. इसी कड़ी में वाराणसी में निर्माणाधीन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में उभर रहा है. लगभग 400 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह अत्याधुनिक स्टेडियम प्रदेश में खेल विकास के नए युग की शुरुआत का प्रतीक बन चुका है. स्टेडियम का निर्माण कार्य 92 प्रतिशत पूरा हो चुका है और जल्द ही यह खिलाड़ियों व क्रिकेट प्रेमियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराएगा. यह परियोजना प्रदेश की बढ़ती खेल क्षमता का प्रमाण है. प्रदेश खेल क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा है. यह स्टेडियम न केवल पूर्वांचल के खिलाड़ियों के लिए नई संभावनाएं खोलेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल मानचित्र पर मजबूत पहचान भी दिलाएगा.


शिव थीम, क्रिकेट स्टेडियम की सबसे बड़ी विशेषता


इस अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम की सबसे बड़ी विशेषता इसकी अनूठी शिव थीम है, जो इसे देश के अन्य क्रिकेट स्टेडियमों से अलग पहचान देती है. स्टेडियम का मीडिया सेंटर/ नार्थ पवेलियन भगवान शिव के डमरू के आकार में तैयार किया जा रहा है. वहीं फ्लडलाइट्स त्रिशूल की आकृति में स्थापित की जा रही हैं. प्रवेश द्वार बेलपत्र थीम पर आधारित है, जबकि छत को अर्धचंद्राकार स्वरूप दिया जा रहा है. काशी की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को आधुनिक वास्तुकला के साथ जोड़ने का यह प्रयास स्टेडियम को एक अद्वितीय पहचान प्रदान करेगा.


क्रिकेट स्टेडियम में 30 हजार दर्शकों के बैठने की क्षमता


लगभग 30,000 दर्शकों की बैठने की क्षमता वाला यह स्टेडियम आधुनिक सुविधाओं और वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित किया जा रहा है. परिसर में एक अंतरराष्ट्रीय मानकों का मुख्य क्रिकेट मैदान और एक पूर्ण आकार का प्रैक्टिस ग्राउंड तैयार किया गया है. इससे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मैचों के आयोजन के साथ-साथ खिलाड़ियों के प्रशिक्षण और कौशल विकास के लिए भी उत्कृष्ट वातावरण उपलब्ध होगा. फिलहाल स्टेडियम का निर्माण कार्य अंतिम चरण में चल रहा है, सितंबर माह तक पूरा होने की संभावना है.


स्टेडियम में विश्वस्तरीय सुविधाओं का समावेश किया गया


स्टेडियम में खिलाड़ियों, मैच अधिकारियों, मीडिया प्रतिनिधियों, प्रसारण एजेंसियों और दर्शकों के लिए सभी आवश्यक विश्वस्तरीय सुविधाओं का समावेश किया गया है. इसमें अत्याधुनिक ड्रेसिंग रूम, आधुनिक पवेलियन, उन्नत मीडिया एवं ब्रॉडकास्ट सुविधाएं, 1500 गाड़ियों की क्षमता वाली पार्किंग, उच्च क्षमता वाली फ्लडलाइट व्यवस्था, आधुनिक सुरक्षा प्रणाली, उन्नत विद्युत एवं अग्नि सुरक्षा प्रबंधन और दर्शकों के लिए उच्चस्तरीय सुविधाएं शामिल हैं. इन व्यवस्थाओं के चलते यह स्टेडियम देश के प्रमुख क्रिकेट स्टेडियमों की श्रेणी में शामिल होने की पूरी क्षमता रखता है.


400 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा क्रिकेट स्टेडियम


इस महत्वाकांक्षी परियोजना की एक और बड़ी उपलब्धि यह है कि इसका निर्माण उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन द्वारा अपनी संचित निधियों से कराया जा रहा है. लगभग 400 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा है. यह स्टेडियम यूपीसीए की वित्तीय आत्मनिर्भरता, संस्थागत क्षमता और प्रदेश में क्रिकेट के समग्र विकास के प्रति उसकी गंभीर प्रतिबद्धता को दर्शाता है. यह परियोजना इस बात का उदाहरण है कि अगर खेल संस्थाएं दूरदर्शी सोच और संसाधनों के प्रभावी उपयोग के साथ कार्य करें, तो विश्वस्तरीय खेल अवसंरचना का निर्माण संभव है.


90 वर्षों की अवधि के लिए भूमि लीज पर उपलब्ध कराई गई


इस परियोजना को साकार करने में योगी सरकार का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है. मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने इस स्टेडियम परियोजना को हर स्तर पर मजबूत सहयोग प्रदान किया. राज्य सरकार द्वारा स्टेडियम निर्माण के लिए लगभग 90 वर्षों की अवधि के लिए भूमि लीज पर उपलब्ध कराई गई, जिससे परियोजना को मजबूत आधार मिला. यही नहीं, परियोजना से जुड़ी सभी प्रशासनिक अनुमतियां और आवश्यक स्वीकृतियां भी समयबद्ध ढंग से प्रदान की गईं, जिससे निर्माण कार्य बिना किसी बड़ी बाधा के तेज गति से आगे बढ़ सका है.


पूरे पूर्वांचल में क्रिकेट के भविष्य का केंद्र बिंदु बनेगा स्टेडियम


यह स्टेडियम केवल एक खेल परिसर नहीं होगा, बल्कि पूरे पूर्वांचल में क्रिकेट के भविष्य का केंद्रबिंदु बनेगा. वाराणसी सहित पूर्वांचल के लाखों युवाओं को अपने ही क्षेत्र में विश्वस्तरीय प्रशिक्षण, अभ्यास और प्रतियोगी माहौल उपलब्ध होगा. इससे क्षेत्र की उभरती प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने के बेहतर अवसर मिलेंगे.


इसके अतिरिक्त यह स्टेडियम अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय क्रिकेट प्रतियोगिताओं की मेजबानी कर वाराणसी को वैश्विक खेल मानचित्र पर नई पहचान देगा. खेल गतिविधियों में वृद्धि से खेल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय रोजगार, होटल उद्योग, परिवहन, व्यापार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी.


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92 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा


यूपीसीए के सीईओ अंकित चटर्जी ने बताया कि क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण कार्य 92 प्रतिशत पूरा हो चुका है. यह परियोजना उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश सरकार और वाराणसी प्रशासन के सफल समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण है. उन्होंने बताया कि आने वाले दशकों तक प्रदेश के खेल विकास, युवा सशक्तीकरण और क्रिकेट संस्कृति को नई दिशा देने वाली एक स्थायी धरोहर के रूप में स्थापित होगी.

नगर निगम ने 100 करोड़ की सरकारी संपत्ति मुक्त कराई, 38 साल पुराने विवाद का अंत
नगर निगम ने 100 करोड़ की सरकारी संपत्ति मुक्त कराई, 38 साल पुराने विवाद का अंत
वाराणसी : सरकारी संपत्तियों पर अवैध कब्जे के खिलाफ नगर निगम का अभियान जारी है. इस क्रम में सोमवार को बीएलडब्ल्यू रोड ( ककरमत्ता ) में करीब एक बीघा बेशकीमती सरकारी जमीन को निगम ने पूरी अतिक्रमण मुक्त करा लिया है. बाजार दर इस भूमि की कुल कीमत करीब 100 करोड़ रुपये आंकी जा रही है. दरअसल ​यह प्रकरण मौजा ककरमत्ता (परगना देहात अमानत) स्थित अराजी नंबर 411 का है, जिसके संबंध में रामनरायन पुत्र स्व. गज्जन द्वारा वर्ष 1988 में धारा 229(ख) के तहत उत्तर प्रदेश सरकार व अन्य को विपक्षी बनाते हुए भूमिधरी अधिकार का दावा योजित किया गया था.वादी पक्ष का कहना था कि उनके दादा पुनवासी वर्ष 1356 व 1359 फसली से उक्त भूमि पर काबिज चले आ रहे हैं, इसलिए उन्हें स्थायी भूमिधर दर्ज किया जाए. लंबे समय से चल रहे इस कानूनी विवाद में कई बार अपील और निगरानी याचिकाएं भी दाखिल की गईं. महापौर अशोक कुमार तिवारी के निर्देश पर निगम की ओर से इस प्रकरण की प्रभावी पैरवी की गई. मामले की विस्तृत सुनवाई करते हुए न्यायालय अतिरिक्त उपजिलाधिकारी सदर (प्रज्ञा सिंह) की पीठ ने वाद संख्या 1987/2025 में पत्रावली व राजस्व अभिलेखों का गहन अवलोकन किया.अदालत ने पाया कि फसली वर्ष 1356 व 1359 खसरे के कॉलम आठ में सिंघाडा तथा कॉलम 19 में 'पोखरी दर्ज है. उप्र जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम, 1950 की धारा 132 के अनुसार पोखरी व तालाब सार्वजनिक उपयोग की भूमि की श्रेणी में आते हैं. ​अदालत ने धारा 132 में वर्णित सार्वजनिक उपयोग की पोखरी भूमि पर किसी असामी को पांच वर्ष से अधिक अवधि के लिए पट्टे का अधिकार नहीं दिया जा सकता और न ही उसे संक्रमणीय भूमिधर घोषित किया जा सकता है. अदालत ने वादी के दावे को बलहीन मानते हुए खारिज कर दिया तथा अराजी संख्या 411 से समस्त खातों के नाम निरस्त कर राजस्व अभिलेखों में पुनः 'पोखरी' दर्ज करने का आदेश सुनाया.ALSO READ: वाराणसी में हवाई फायरिंग करने वाले को पब्लिक ने पुलिस को सौंपा, पिस्‍टल और कारतूस बरामद...तीन जेसीबी लगाकर खुदाई शुरून्यायिक आदेश का पालन कराते हुए महापौर के निर्देश पर निगम सहायक नगर आयुक्त अनिल यादव के नेतृत्व में राजस्व विभाग की टीम ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी. जिस तालाब को भू-माफिया द्वारा कूड़े से पाट दिया गया था, वहां निगम ने मौके पर ही तीन जेसीबी लगाकर तालाब खोदवाना शुरू करा दिया है, ताकि पोखरे को पुनः उसके वास्तविक अस्तित्व में लाया जा सके.कब्जामुक्त कराई गई इस जमीन पर स्थित पोखरे को उसके मूल स्वरूप में सौंदर्यीकरण कर आकर्षक ढंग से विकसित किया जाएगा. पोखरे के पुनरुद्धार से क्षेत्र का भू-गर्भ जलस्रोत का स्तर (ग्राउंड वॉटर लेवल) बेहतर होगा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा.
वाराणसी में हवाई फायरिंग करने वाले को पब्लिक ने पुलिस को सौंपा, पिस्‍टल और कारतूस बरामद...
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वाराणसी : शिवपुर थाना क्षेत्र के गिलट बाजार में रविवार देर रात हवाई फायरिंग कर दहशत फैलाने वाले एक युवक को पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से गिरफ्तार कर लिया. आरोपी के कब्जे से .32 बोर की अवैध देशी पिस्टल, चार जिंदा कारतूस, बिना नंबर प्लेट की स्प्लेंडर प्लस बाइक, दो मोबाइल फोन और एक पीली धातु की चेन बरामद हुई है. पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है.पुलिस के अनुसार देररात करीब 1:22 बजे शिवपुर पुलिस चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक अमित सिंह अपनी टीम के साथ क्षेत्र में गश्‍त कर रहे थे. इसी दौरान सूचना मिली कि गिलट बाजार-भोजूबीर मार्ग पर एक युवक पिस्टल से हवाई फायरिंग कर मोटरसाइकिल से फरार हो गया है. सूचना मिलते ही पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची. स्थानीय लोगों ने पुलिस को बताया कि फायरिंग करने वाला युवक पंचकोशी रोड की ओर भागा है. पुलिस ने पीछा किया तो पंचकोशी रोड स्थित सरकारी राशन की दुकान के पास लोगों ने आरोपी को घेर रखा था. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर युवक को गिरफ्त में ले लिया.पूछताछ में उसकी पहचान अंकित सोनी (24) निवासी ग्राम लखपेड़ा भवानीगंज, थाना संग्रामगढ़, जनपद प्रतापगढ़ के रूप में हुई. तलाशी के दौरान उसके पास से 32 बोर की एक अवैध पिस्टल, जिस पर 'मेड इन यूएसए' अंकित था, तथा चार जिंदा कारतूस बरामद हुए. इसके अलावा बिना नंबर प्लेट की स्प्लेंडर प्लस मोटरसाइकिल, दो मोबाइल फोन (वीवो और नोकिया), कपड़े तथा पीली धातु की एक चेन भी मिली. पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक चालान एप के माध्यम से बाइक की जांच की तो उसका मूल पंजीकरण नंबर यूपी-72-सीके-9133 मिला. इसके बाद मोटरसाइकिल को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 207 के तहत सीज कर दिया गया.ALSO READ:शारजाह से तस्‍करी कर वाराणसी एयरपोर्ट लाया गया सोना जब्‍त, हिरासत में भारतीय यात्री...थाना प्रभारी अजीत कुमार वर्मा ने बताया कि आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है. यह भी जांच की जा रही है कि आरोपी ने हवाई फायरिंग क्यों की और उसके पास अवैध हथियार कहां से आया. पुलिस उसके आपराधिक इतिहास और अन्य संभावित गतिविधियों की भी पड़ताल कर रही है.
शारजाह से तस्‍करी कर वाराणसी एयरपोर्ट लाया गया सोना जब्‍त, हिरासत में भारतीय यात्री...
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वाराणसी : राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) ने वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 491.290 ग्राम विदेशी मूल का सोना जब्त किया है. यह कार्रवाई 26 जुलाई 2026 को की गई, जब अधिकारियों को जानकारी मिली कि एक भारतीय यात्री शारजाह से तस्करी कर सोना भारत ला रहा है.डीआरआई के अधिकारियों ने सुनियोजित अभियान के तहत उस भारतीय नागरिक को रोका, जो शारजाह से वाराणसी पहुंचा था. यात्री की तलाशी और विमान की गहन जांच के दौरान, उसकी सीट के नीचे से पेस्ट/कम्पाउंड के रूप में छिपाकर रखा गया सोना बरामद किया गया. इस निकासी के दौरान कुल 491.290 ग्राम (शुद्ध) 24 कैरेट विदेशी मूल का सोना जब्त किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग ₹70 लाख है. इसके बाद, उक्त यात्री को सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के प्रावधानों के अंतर्गत गिरफ्तार कर लिया गया.डीआरआई ने इस मामले में सिंडिकेट से जुड़े अन्य सदस्यों की पहचान और उनकी संलिप्तता का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी रखी है. इससे पहले, 23 जुलाई 2026 को, डीआरआई ने कूच बिहार से नई दिल्ली जा रही एक महिला यात्री को गिरफ्तार किया था, जो बांग्लादेश से तस्करी कर विदेशी मूल का सोना ले जा रही थी. इस कार्रवाई में लगभग 4.98 किलोग्राम विदेशी मूल का सोना बरामद किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत ₹7.11 करोड़ थी.ALSO READ:मंडुआडीह में किराए के विवाद को लेकर निकली तलवार, हमले का लगा आरोप...डी.आर.आई द्वारा जनवरी 2026 से अब तक उत्तर प्रदेश में आठ विभिन्न मामलों में लगभग 13.267 किलोग्राम तस्करी का विदेशी मूल का सोना जब्त किया गया है, जिसकी अनुमानित कीमत 19 करोड़ है. इन मामलों में नौ व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है. डीआरआई की यह कार्रवाई तस्करी के खिलाफ उनकी सख्त नीति को दर्शाती है और यह संकेत देती है कि वे इस प्रकार के अपराधों को रोकने के लिए गंभीर हैं. अधिकारियों का कहना है कि वे तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने के लिए लगातार प्रयासरत हैं और इस दिशा में सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं.