वाराणसी को एक और ट्रामा सेन्टर की सौगात, हाईवे पर दुर्घटनाओं में घायलों को मिलेगी राहत

वाराणसी: जिस तरह सडकों का जाल फैल रहा है, उसी अनुपात में दुर्घटनाओं में भी वृद्धि हो रही है. जौनपुर राजमार्ग और रिंग रोड पर लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं और उनमें जान गंवाने वाले लोगों की बढ़ती संख्या को देखते हुए एक राहत भरी खबर यह है कि शासन द्वारा अब हरहुआ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के परिसर में अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त लेवल वन ट्रामा सेंटर की स्थापना की जाएगी। इस फैसले से हाईवे पर दुर्घटना का शिकार होने वाले घायलों को समय पर इलाज मिल सकेगा और कई कीमती जिंदगियां बचाई जा सकेंगी. जिला स्वास्थ्य समिति की हालिया बैठक में इस प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा हुई और सर्वसम्मति से इसे मंजूरी दे दी गई है. अब विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर शासन को भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
गोल्डन ऑवर की है अहमियत
सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति बेहद चिंताजनक है. पिछले पांच वर्षों में वाराणसी जौनपुर हाईवे और रिंग रोड पर कुल 2625 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं जिनमें 1379 लोगों की मौत हुई है. केवल वर्ष 2025 में ही रिंग रोड और उससे जुड़ी सड़कों पर 261 लोगों ने अपनी जान गंवाई. हादसों के बाद सबसे बड़ी समस्या समय पर इलाज की रही है. फिलहाल लेवल वन ट्रामा सेंटर की सुविधा केवल काशी हिंदू विश्वविद्यालय में उपलब्ध है. गंभीर रूप से घायल मरीजों को वहां तक पहुंचाने में ट्रैफिक जाम और दूरी के कारण अक्सर इलाज का अहम समय निकल जाता है जिसे चिकित्सकीय भाषा में गोल्डन ऑवर कहा जाता है.
हरहुआ में प्रस्तावित ट्रामा सेंटर की सबसे बड़ी खासियत इसकी रणनीतिक स्थिति है. यह केंद्र वाराणसी जौनपुर हाईवे रिंग रोड और आसपास के ग्रामीण इलाकों से सीधे जुड़ा हुआ है. दुर्घटना की सूचना मिलते ही एंबुलेंस के माध्यम से घायलों को कुछ ही मिनटों में यहां पहुंचाया जा सकेगा. ट्रामा सेंटर में इमरजेंसी ऑपरेशन थिएटर आधुनिक जांच सुविधाएं प्रशिक्षित डॉक्टर नर्सिंग स्टाफ और चौबीस घंटे सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी. जरूरत पड़ने पर मरीज को आगे के इलाज के लिए बीएचयू या अन्य बड़े अस्पतालों में रेफर करने की भी व्यवस्था रहेगी.
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आसपास के जिलों को भी राहत
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यह ट्रामा सेंटर केवल वाराणसी ही नहीं बल्कि आसपास के जिलों के लिए भी जीवन रक्षक साबित होगा. रिंग रोड के विस्तार के बाद वाहनों की रफ्तार बढ़ी है और दुर्घटनाओं की आशंका भी उसी अनुपात में बढ़ी है. ऐसे में हाईवे के पास ही उच्च स्तरीय इलाज की सुविधा उपलब्ध होना समय की सबसे बड़ी जरूरत थी. स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने भी इस निर्णय का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इसके शुरू होने से सड़क हादसों में होने वाली मौतों पर प्रभावी रोक लगेगी.



